37 ब्रह्माण्ड में परमेश्वर के कार्य की लय

I

धरती के लोग ईश्वर को स्वीकार करेंगे,

फरिश्तों की तरह आज्ञाकारी,

न कोई इच्छा होगी विद्रोह की,

यह है ईश्वर का कार्य जहान भर में।


II

सदियों से ईश्वर है लोगों के साथ, हर कोई इससे अनभिज्ञ रहा,

कोई भी ईश्वर को न जान सका,

अब ईश्वर का वचन बताए सब को वो है यहीं।

वो बुलाता है मानव को अपने समक्ष,

जिससे सब को प्राप्त ईश्वर से कुछ हो सके।

फिर भी मानव है दूरी बनाये हुए,

अचरज नहीं कि कोई ईश्वर को जानता नहीं।


III

जब परमेश्वर के क़दम ब्रह्माण्ड में पड़ेंगे,

मनुष्य गहराई से चिंतन करेगा।

वे सब आयेंगे परमेश्वर के पास,

और झुक के, घुटनों के बल करेंगे ईश्वर की आराधना।

यही दिन परमेश्वर की महिमा का है, उसकी वापसी और प्रस्थान का है।

यही दिन परमेश्वर की महिमा का है, उसकी वापसी और प्रस्थान का है!


IV

परमेश्वर ने लोगों के बीच अपने काम

और अंतिम योजना की शुरुआत की है।

जो कोई भी इस पे करे न ग़ौर, कठोर सज़ा उनको भुगतनी होगी।

ऐसा नहीं है कि ईश्वर का दिल है कठोर,

बल्कि यह उसकी योजना का एक क़दम है,

जिसके अनुसार ही सबको चलना चाहिए,

यह है सत्य जो कोई भी न बदल सके।

धरती के लोग ईश्वर को स्वीकार करेंगे,

फरिश्तों की तरह आज्ञाकारी,

न कोई इच्छा होगी विद्रोह की,

यह है ईश्वर का कार्य जहान भर में।


V

जब औपचारिक रूप से ईश्वर कार्य करता है शुरू,

सभी लोग ईश्वर के पीछे चलते हैं।

संसार व्यस्त होता है परमेश्वर के साथ,

होती उल्लासित धरा, लोग प्रेरित होते हैं।

घबरा जाता है बड़ा लाल अजगर भी,

करे ईश्वर के कार्य विरुद्ध इच्छा के अपनी,

अपनी इच्छा से चलने में वो असमर्थ,

परमेश्वर के नियंत्रण में ही वो चले।


VI

ईश्वर की सब योजनाओं का अजगर ही विषमता है,

वही ईश्वर का शत्रु और सेवक भी है।

पूरा करने को अंतिम चरण कार्य का,

ईश्वर देहधारण करता है उसके घराने में,

जिससे अजगर ईश्वर की उचित सेवा करे,

उस पर विजय पाके परमेश्वर की योजना का अंत हो।

स्वर्गदूत भी युद्ध में होते हैं परमेश्वर के साथ,

जीतने को दिल ईश्वर का अंतिम चरण में,

जीतने को दिल ईश्वर का अंतिम चरण में।

यही दिन परमेश्वर की महिमा का है, उसकी वापसी और प्रस्थान का है।

यही दिन परमेश्वर की महिमा का है, उसकी वापसी और प्रस्थान का है!


"वचन देह में प्रकट होता है" से

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