30 सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद और यशगान

1

लाए गए हैं हम परमेश्वर के सामने, खाते-पीते हैं हम वचन उनका।

करते हैं प्रबुद्ध हमें पवित्र आत्मा,

समझते हैं सत्य हम जो बोलते हैं परमेश्वर।

कर दिए हैं हमने दर-किनार, धर्म की रस्में और बंधन सारे।

नियमों से बंधनरहित, आज़ाद हैं दिल हमारे।

और परमेश्वर के प्रकाश में रहकर,

जितना हो सके ख़ुश हैं हम, जितना हो सके ख़ुश हैं हम।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद और यशगान,

जो व्यक्त करते हैं सत्य सारी इंसानियत के लिये।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद और यशगान,

मार्ग है पास हमारे ख़ुद को बदलने के लिये,

ख़त्म होती है अज्ञात आस्था हमारी।

करें हम यशगान, यशगान।

2

करें अनुसरण परमेश्वर का करीब से हम,

करें तालीम राज्य की स्वीकार हम।

न्याय परमेश्वर का है तलवार की तरह,

करता है उजागर ख़्याल हमारे।

अज्ञानता, ख़ुदग़र्ज़ी, और झूठ छुप नहीं पाते।

तभी सिर्फ़ देखता हूँ सत्य अपना,

शर्मिंदा हो झुकता परमेश्वर के सामने, परमेश्वर के सामने।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद और यशगान,

जो व्यक्त करते हैं सत्य सारी इंसानियत के लिये।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद और यशगान,

परमेश्वर से रूबरू हैं हम,

उसकी ख़ुशी में आनंद मनाते हैं हम।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद और यशगान,

पवित्र हो तुम, हो धार्मिक तुम,

मेरी ख़्वाहिश है, सत्य पर अमल करूँ,

लेने फिर से जन्म, देह को त्याग दूँ,

दिल को तुम्हारे सुकून दूँ।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद और यशगान,

न्याय ने तुम्हारे सचमुच बचा लिया मुझको।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद और यशगान,

बदल गया है स्वभाव मेरा।

तुम्हारे कारण मैं धन्य हुई, मैं धन्य हुई।

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