644 एक विषमता के रूप में सेवा करना जीवन भर का आशीष है

1 ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम लोग उसी क्षेत्र में रहते हो जिसमें परमेश्वर रहता है, क्योंकि तुम लोग इस गंदे देश में उसके साथ रहते हो, इसलिए ऐसा है कि तुम लोग उसकी विषमताएँ बन गए हो और ऐसा अविश्वसनीय उद्धार प्राप्त कर लिया है। यदि वह देह नहीं बना होता, तो कौन तुम पर दया करता,और कौन तुम अधम लोगों की देखभाल करता? किसे तुम लोगों के बारे में परवाह होती? यदि देहधारी परमेश्वर तुम लोगों के बीच कार्य नहीं कर रहे होते, तो तुम किस बिंदु पर इस उद्धार को प्राप्त कर पाते जिसे पहले किसी ने भी कभी नहीं पाया था? यदि मैं तुम लोगों की देखभाल करने और तुम लोगों के पापों का न्याय करने के लिए देह नहीं बनता, तो क्या तुम लोग बहुत पहले ही अधोलोक में नहीं गिर गए होते?

2 यदि मैं तुम लोगों के बीच अपने आप विनीत करने के लिए देह नहीं बनता, तो तुम लोगों के पास परमेश्वर के धर्मी स्वभाव के लिए एक विषमता होने का क्या अधिकार होता? क्या तुम लोग इसलिए विषमताओं के रूप में कार्य नहीं कर रहे हो क्योंकि मैं तुम लोगों के बीच देह बन गया हूँ ताकि तुम लोग ऐसा महान उद्धार प्राप्त कर सको? और क्या यह पूरी तरह से इसलिए नहीं है क्योंकि मैं देह बन गया? यदि यह तुम लोगों बीच में रह रहा देहधारी परमेश्वर नहीं होता, तो क्या तुम यह पता लगा पाने में समर्थ होते कि तुम लोग, पृथ्वी पर एक नरक में रह रहे हो जो सुअर या किसी कुत्ते से भी बदतर है? क्या वह न्याय और ताड़ना जो तुम लोगों ने प्राप्त की है इसलिए नहीं है क्योंकि तुम देह में मेरे कार्य के लिए विषमताएँ हो?

3 विषमताएँ होने का कार्य तुम लोगों के लिए बहुत उपयुक्त है क्योंकि तुम लोगों ने इस कारण से परमेश्वर के न्याय का उद्धार प्राप्त किया है। क्या तुम लोगों को महसूस नहीं होता है कि एक योग्य विषमता के रूप में कार्य करने में सक्षम होना तुम लोगों के जीवन का आशीष है? तुम लोगों ने जो कुछ भी किया है वह विषमताएँ होने का कार्य है, किन्तु तुम लोगों ने उस उद्धार को प्राप्त किया है जो तुम लोगों के पास कभी नहीं था या जिसके बारे में तुम लोगों ने पहले नहीं सोचा था। एक विषमता होना अब तुम लोगों का कर्तव्य है, और वे शाश्वत आशीष जिनका तुम लोग भविष्य में आनंद लोगे, वे वह पुरस्कार होंगे जिसके लायक तुम लोग हो। जिस उद्धार को तुम लोग प्राप्त करते हो वह क्षणिक अंतर्दृष्टि या आज का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा आशीष, जीवन की एक शाश्वत निरंतरता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "विजय के कार्य का दूसरा कदम किस प्रकार से फल देता है" से रूपांतरित

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