271 मैं फिर से जीवित हो जाऊँगा

I

परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को जानकर,

परमेश्वर के लिए मेरा प्रेम जड़ें बना लेता है।

मैं आशीष पाऊँ या मुश्किलों का सामना करूँ,

यह सब परमेश्वर द्वारा पूर्वनिर्धारित है।

न्याय, ताड़ना और परीक्षण

मेरे प्रेम को शुद्ध करते हैं।

मानवीय असफलताएँ आम हैं

वे चिंता का कारण नहीं होतीं।

हालाँकि उसके कठोर वचन कटार की तरह चुभते हैं,

परमेश्वर का हृदय सदैव दयालु होता है।

कैसे मैं करूँ उस कड़वी दवा से इन्कार

जो मेरे जीवन के लिए हितकारी है?

परमेश्वर की ताड़ना और उसके न्याय से,

मैंने परमेश्वर के सच्चे प्रेम को महसूस किया है।

मानवजाति को बचाने का उसका कार्य इतना वास्तविक है कि,

मेरा दिल परमेश्वर की स्तुति करता है।

मेरा दिल परमेश्वर की स्तुति करता है।


II

घमंडी, धोखेबाज़ इंसान

ठोकर खाने और गिरने को नियत हैं।

हालाँकि मैं परमेश्वर की सेवा करता हूँ,

फिर भी मैं उसका विरोध करता हूँ।

मुझे उसकी ताड़ना को सहन करना चाहिए।

हालाँकि न्याय से मुझे बड़ी पीड़ा हो सकती है,

ये वो है जिसकी मेरे जीवन को ज़रुरत है।

मैं निश्चित रूप से जानता हूँ कि परमेश्वर धर्मिता है,

इसलिए मेरा हृदय स्तुति करता है।

परमेश्वर के न्याय और उसकी ताड़ना को पाना

उसके द्वारा मुझे दिया गया एक सम्मान है।

यदि मैं उससे शिकायत करता या लड़ता,

तो मैं उसके प्रेम के लिए अयोग्य होता।

भ्रष्ट मानवजाति के पास कोई सत्य नहीं है,

वह शैतान के स्वभाव से भरी है।

आज मेरे पास जीवन है,

ठीक समय पर मिले परमेश्वर के उद्धार के कारण,

परमेश्वर के उद्धार के कारण।


III

पतरस का उत्साह आधार है इसका

कि मानवजाति को कैसे व्यवहार करना चाहिए।

यह कितनी प्रगाढ़ बात है कि मनुष्य परमेश्वर से प्रेम कर सकता है,

मैं उसे पूर्णता से प्रेम करने का प्रयास करूँगा।

आशीषों की चाह में, परमेश्वर से सौदेबाज़ी कर,

अंततः मनुष्य ठोकर खाएगा।

सत्य को समझ कर और शुद्ध होकर,

मेरे दिल में शांति है।

परमेश्वर में विश्वास करो, परमेश्वर से प्रेम करो,

परमेश्वर की आज्ञा मानो,

यही मनुष्य का सच्चा कर्तव्य है।

ताड़ना और न्याय के कष्टों से गुज़रना

परमेश्वर के प्रति मेरे प्रेम को मजबूत करता है।

चाहे परमेश्वर मेरे साथ कैसे भी निपटे,

मैं फिर भी उसकी धर्मिता की स्तुति करता हूँ।

परमेश्वर को जान सकने का मैं ख्वाब देखता हूँ।

इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं मांगता हूँ,

इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं मांगता हूँ।


IV

न्याय से गुज़रकर और परमेश्वर के प्रेम को चखकर,

मैं फिर से जीवित हो जाऊँगा।

मेरे पास हिम्मत नहीं परमेश्वर को देखने की,

लेकिन मैं अपने लिए फिर से संघर्ष करूँगा।

मैंने परमेश्वर की इच्छा को समझ लिया है,

उसका प्रेम मुझे आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करता है।

परीक्षण और कठिनाइयाँ कितनी भी बड़ी हों,

मैं एक मजबूत गवाही दूंगा।

आशीष या कष्ट कोई मायने नहीं रखते,

परमेश्वर की महिमा ही सब कुछ है।

पतरस की तरह, मैं परमेश्वर को सर्वोच्च प्रेम दूँगा।

और जब मैं मरूँगा, मैं शान्ति में आराम करूँगा।

मैं बिना किसी विकल्प के परमेश्वर के कार्य का पालन करूंगा।

परमेश्वर को संतुष्ट करना ही कुंजी है।

परमेश्वर से प्रेम करना और उसकी इच्छा पूरी करना

मनुष्य का सर्वोच्च सम्मान है, मनुष्य का सर्वोच्च सम्मान है।

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