125 परमेश्वर पूरी तरह महिमान्वित किया गया है

1 यीशु पृथ्वी पर साढ़े तेंतीस साल तक रहा था, वह सलीब पर चढ़ने का कार्य करने के लिए आया था, और सलीब पर चढ़ने के माध्यम से परमेश्वर ने अपनी महिमा का एक भाग प्राप्त किया। जब परमेश्वर देह में आया, तो वह विनम्र और छिपा रहने में समर्थ था और ज़बरदस्त पीड़ा सहन कर सकता था। यद्यपि वह स्वयं परमेश्वर था, फिर भी उसने हर अपमान और हर दुर्वचन सहन किया और छुटकारे का कार्य पूरा करने के लिए सलीब पर चढ़ाए जाने का भयानक दर्द सहा। कार्य के इस चरण का समापन हो जाने के बाद, यद्यपि लोगों ने देखा कि परमेश्वर ने महान महिमा प्राप्त कर ली है, फिर भी यह उसकी महिमा की संपूर्णता नहीं थी; यह उसकी महिमा का केवल एक भाग था, जिसे उसने यीशु से प्राप्त किया था। यद्यपि यीशु हर कठिनाई सहने, विनम्र और छिपे रहने, परमेश्वर के लिए सलीब पर चढ़ाए जाने में समर्थ था, फिर भी परमेश्वर ने अपनी महिमा का केवल एक भाग ही प्राप्त किया, और उसकी महिमा इस्राएल में प्राप्त हुई थी। परमेश्वर के पास अभी भी महिमा का एक अन्य भाग है : पृथ्वी पर व्यावहारिक रूप से कार्य करने के लिए आना और लोगों के एक समूह को पूर्ण बनाना।

2 जब वह दिन आता है, जब लोग परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए जाते हैं, और वे उसके सामने आत्मसमर्पण करने में समर्थ होते हैं, और वे पूरी तरह से परमेश्वर का आज्ञापालन कर सकते हैं, और अपने भविष्य की संभावनाओं और भाग्य को परमेश्वर के हाथों में छोड़ सकते हैं, तब परमेश्वर की महिमा का दूसरा भाग पूरी तरह से प्राप्त कर लिया गया होगा। कहने का अर्थ है कि जब व्यावहारिक परमेश्वर के कार्य को सर्वथा पूरा कर लिया जाएगा, तो चीन की मुख्य भूमि में उसका कार्य समाप्त हो जाएगा। दूसरे शब्दों में, जब परमेश्वर द्वारा पूर्व-नियत किए और चुने गए लोग पूर्ण बना दिए जाएँगे, तो परमेश्वर की महिमा होगी। परमेश्वर ने कहा कि वह अपनी महिमा के दूसरे भाग को पूर्व दिशा में ले आया है, किंतु यह आँखों के लिए अदृश्य है। परमेश्वर अपने कार्य को पूर्व दिशा में ले आया है : वह पहले ही पूर्व दिशा में आ चुका है और यह परमेश्वर की महिमा है। आज यद्यपि उसका कार्य अभी पूरा किया जाना बाकी है, लेकिन चूँकि परमेश्वर ने कार्य करने का निर्णय लिया है, इसलिए वह निश्चित रूप से पूरा होगा। परमेश्वर ने निर्णय लिया है कि वह इस कार्य को चीन में पूरा करेगा, और उसने तुम लोगों को पूर्ण करने का संकल्प किया है। इस प्रकार वह तुम लोगों को कोई बचाव का रास्ता नहीं देता—उसने पहले ही तुम्हारे हृदय जीत लिए हैं और भले ही तुम चाहो या न चाहो, तुम्हें आगे बढ़ना है, और जब तुम परमेश्वर द्वारा प्राप्त कर लिए जाते हो, तो परमेश्वर की महिमा होती है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “सहस्राब्दि राज्य आ चुका है” के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता से रूपांतरित

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