62 परमेश्वर के सामने खुद को शांत करना

I

मैं परमेश्वर के सामने खुद को शांत करता हूँ। 

प्रार्थना करता हूँ और अपने दिल की बात कहता हूँ। 

मैं सहजता और ईमानदारी से मनकी बात कहता हूँ, 

दिल से बोलता हूँ। 

मैं अपनी मुश्किलों और कमियों को परमेश्वर को सौंप देता हूँ 

और उसकी ओर देखता हूँ। 

परमेश्वर मुझे प्रबुद्ध और प्रकाशित करे 

ताकि मैं उसकी इच्छा को समझ सकूँ। 

ईमानदार खोज से मैं 

पवित्र आत्मा की रोशनी को हासिल करता हूँ। 

सत्य को समझकर,

मैं विवेक हासिल करता हूँ और अभ्यास का मार्ग पाता हूँ। 

परमेश्वर के मार्गदर्शन से मैं रोशनी में रहता हूँ, 

मेरा दिल आनंद और मधुरता से भरा है। 

मैं परमेश्वर के सामने खुद को शांत करता हूँ। 

II

परमेश्वर के सामने शांत रहकर, 

मैं उसके वचनों पर मंथन करता हूँ। 

मैं अपनी गहरी भ्रष्टता को देखता हूँ, 

किस तरह मैंने अपनी इंसानियत गँवा दी है। 

परमेश्वर के वचनों के प्रकटन और न्याय से 

मैं आत्म-मंथन करता हूँ। 

मेरे शब्दों में मंशा छिपी रहती है, 

मैं बहुत झूठ बोलता हूँ। 

मैं अपने कर्तव्य में, 

सत्य के सिद्धांतों का पालन नहीं करता,

मैं अपने कामों में नियमों से चिपका रहता हूँ। 

मेरे अंदर भाई-बहनों के प्रति प्रेम नहीं है, 

मैं अहंकारी और स्वार्थी हूँ। 

मुझे अभी भी परमेश्वर के और अधिक 

न्याय, परीक्षणों और शुद्धिकरण को स्वीकारने की ज़रूरत है। 

मैं परमेश्वर के सामने खुद को शांत करता हूँ। 

III

परमेश्वर के सामने शांत रहकर 

और सत्य की खोज करके, 

मैं धीरे-धीरे जीवन में आगे बढ़ता हूँ। 

परमेश्वर के सामने शांत रहकर 

और आत्म-मंथन करके, 

मैं सच्चा प्रायश्चित करता हूँ। 

मैं अक्सर परमेश्वर के सामने शांत रहता हूँ 

और सचमुच उससे संवाद करता हूँ। 

इससे मैं परमेश्वर का भय मान पाता हूँ बुराई से दूर रह पाता हूँ, 

और उसके समक्ष रह पाता हूँ। 

मैं हर चीज़ में 

परमेश्वर की जाँच को स्वीकारता हूँ। 

मैं रोशनी में रहता हूँ। 

मैं अंदर से शुद्ध हो रहा हूँ, 

मैं सच्चा जीवन जीता हूँ। 

मैं परमेश्वर के सामने खुद को शांत करता हूँ। 

IV

अक्सर परमेश्वर के वचनों पर विचार करके, 

मैं अच्छा फल पाता हूँ। 

पवित्र आत्मा ने मुझे प्रबुद्ध किया है 

ताकि मैं और भी अधिक सत्यों को समझ लूँ। 

अपने कर्तव्य निभाते हुए, 

मैं सुकून और आनंद में रहता हूँ। 

परमेश्वर के वचनों को अमल में लाकर, 

मैं उसका प्रेम और आशीष पाता हूँ। 

ईमानदार खोज से मैं 

पवित्र आत्मा की रोशनी को हासिल करता हूँ। 

सत्य को समझकर, 

मैं विवेक हासिल करता हूँ 

और अभ्यास का मार्ग पाता हूँ।

परमेश्वर के मार्गदर्शन से मैं रोशनी में रहता हूँ, 

मेरा दिल आनंद और मधुरता से भरा है। 

मैं परमेश्वर के सामने खुद को शांत करताहूँ। 

मेरा दिल आनंद और मधुरता से भरा रहता है। 

परमेश्वर के सामने खुद को शांत करताहूँ, शांत करता हूँ। 

परमेश्वर के सामने खुद को शांत करता हूँ। 

परमेश्वर के सामने खुद को शांत करता हूँ।

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