497 असल कीमत चाहिये सत्य के अमल के लिये

1

जब आएं मुश्किलें तो प्रार्थना करो तुम:

"हे परमेश्वर! मैं तुझे संतुष्ट करना चाहता हूँ,

रुकावटें चाहे कितनी बड़ी हों,

सहकर तकलीफ़ें, दिल को तेरे प्रसन्न करना चाहता हूँ,

अपना जीवन देकर भी, तुझे संतुष्ट करना चाहता हूँ।"

जब करोगे प्रार्थना इस संकल्प से तुम,

तो अपनी गवाही में मज़बूती से खड़े रहोगे तुम।

जब भी सत्य अमल में लाया जाता है,

हर शुद्धिकरण में, हर बार जब उनका इम्तहान होता है,

हर बार जब उन पर ईश्वर का कार्य होता है,

तो अतिशय पीड़ा सहन करते हैं लोग।

ये इम्तहान है, एक जंग है अंतर्मन में,

ये असल कीमत है जो चुकाते हैं लोग, जो चुकाते हैं लोग।

2

अगर तुम कुछ कहना चाहते हो, मगर सही नहीं लगता अंतर्मन में,

गर लाभ नहीं है तुम्हारे भाई-बहनों को इससे,

गर आहत होते हैं वो, कहते नहीं हो कुछ भी तुम,

पसंद करते हो सहना, संघर्ष करते हो अंतर्मन में,

क्योंकि वचन ये संतुष्ट कर नहीं सकते परमेश्वर को।

3

चलता रहता है युद्ध अंतर्मन में,

मगर इच्छुक हो तुम सहन करते रहने के, त्यागने के जो प्रिय है तुम्हें,

सहते हो मुश्किलें संतुष्ट करने परमेश्वर को,

कष्ट सहते हो मगर, झुकते नहीं आगे देह-सुख के,

संतुष्ट करते हो दिल परमेश्वर का,

तो मिलेगी दिलासा तुम्हें भी।

यही है चुकाना कीमत वो, जो चाहता है परमेश्वर, परमेश्वर।

जब भी सत्य अमल में लाया जाता है,

हर शुद्धिकरण में, हर बार जब उनका इम्तहान होता है,

हर बार जब उन पर ईश्वर का कार्य होता है,

तो अतिशय पीड़ा सहन करते हैं लोग।

ये इम्तहान है, एक जंग है अंतर्मन में,

ये असल कीमत है जो चुकाते हैं लोग, जो चुकाते हैं लोग।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल परमेश्वर से प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है' से रूपांतरित

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