294 तुम्हीं बचा सकते हो मुझे केवल

1

छिपकर दीन बनकर, साथ देते हो तुम्हीं मुश्किलों में इंसान का,

तुम इंसान को बचाने के लिए वचन कहते हो,

बहुत चाहते हो तुम इंसान को, अपने देह और रक्त की तरह,

हे परमेश्वर, हे परमेश्वर।

तुम लायक हो उनके प्रेम के, हे परमेश्वर।

तुम्हारा न्याय और ताड़ना इंसान के उद्धार के लिए है।

और तुम कर देते हो जीवन की बरसात उन पर।

सचमुच सुंदर है हृदय तुम्हारा, हे परमेश्वर, हे परमेश्वर, हे परमेश्वर।

धार्मिक हो, पात्र हो बहुत तुम, मानव के गुणगान के।

2

तुम्हारे वचन निकाल लेते हैं, मुश्किल राहों से मुझे,

और मधुरता का आनंद लेती हूँ मैं।

इंसान कमज़ोर है, जानते हो तुम अच्छी तरह,

तुम उन्हें अपने वचनों का पोषण देते हो।

इंसान कैसे भूल सकता है कभी तुम्हें। हे परमेश्वर।

लोगों के साथ रहते हो, लोगों के बीच रहकर ख़ुद राह दिखाते हो उन्हें,

देते हो उन्हें ऐसा कुछ, जो उनका सहारा बने।

यातना सहकर पहले, आदर्श मिसाल बनते हो।

तुम निष्ठावान और प्यारे हो।

जीत लेते हैं मुझे वचन तुम्हारे, न्याय तुम्हारा करता है शुद्ध मुझे।

तुम्हीं बचा सकते हो मुझे केवल।

काटते-छांटते हो मुझे, निपटते हो मुझसे,

इम्तहान लेते हो, शुद्ध करते हो मुझे।

तुम्हीं पूर्ण कर सकते हो मुझे केवल।

बेशकीमती प्रेम तुम्हारा, बेहद सुंदर।

लोगों में छोड़े हैं तुमने, अपने सच्चे एहसास।

भरोसा करके तुम पर अगर मैं तुमसे प्रेम न कर पायी या तुम्हारी प्रशंसा न पाऊँ,

तो पश्चाताप करूँगी मैं जीवन भर।

तो क्या कहलाऊंगी इंसान अगर तुमसे प्रेम न कर पायी?

तुम लायक हो उनके प्रेम के, हे परमेश्वर।

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