259 मनुष्य को बचाने के लिए परमेश्वर के नेक इरादे को कोई भी नहीं समझता

1

ईश्वर ने बनाया संसार और इसमें बसाया मानव को,

दिया ईश्वर ने जीवन एक जीवित प्राणी को।

फिर मानव को मिले परिजन, वह अकेला न रहा,

ईश्वर के विधान में रहने को तय किया गया।

यह जीवन-श्वास ईश्वर ने दी सम्भालती है हर जीवित प्राणी को

हमेशा युवावस्था की ओर बढ़ने में।

इस प्रक्रिया के दौरान, वे मानते हैं कि

यह उनके माता-पिता के प्रेम और देखभाल का शुक्र है।

कोई भी मानव दिन-रात जिसकी ईश्वर करता है देखभाल,

उसकी आराधना की पहल नहीं करता।

मानव जो आशा से परे लगता है

उस पर ईश्वर कार्य करता है जैसा उसने सोचा।

और वह आशा करता है एक दिन, जागेगा मानव स्वप्न से,

जीवन के मूल्य और उद्देश्य को देखेगा,

समझेगा परमेश्वर सब कुछ किस क़ीमत पर देता है,

कितनी बेसब्री से मानव के लौटने की राह देखे वह।

हाँ, बेसब्री से मानव के लौटने की राह देखे वह।

2

कोई नहीं मानता मानव का जीना-बढ़ना ईश्वर की देखरेख में होता है।

वे सोचते हैं कि मानव का बढ़ना है जीवन-प्रवृत्ति से।

वे नहीं जानते किसने दिया जीवन या कहाँ से यह आता है,

कैसे जीवन-प्रवृत्ति बनाती है चमत्कारों को।

ओह, वे सोचते हैं कि भोजन से ही जीवन चलता है,

कि मनुष्य जीता है क्योंकि वह दृढ़ रहता है,

कि मान्यताओं से मानव ज़िंदा है।

वे देख नहीं पाते ईश्वरीय प्रावधानों को।

फिर वे गवां देते हैं ईश्वर प्रदत्त जीवन को।

कोई भी मानव दिन-रात जिसकी ईश्वर करता है देखभाल,

उसकी आराधना की पहल नहीं करता।

मानव जो आशा से परे लगता है

उस पर ईश्वर कार्य करता है जैसा उसने सोचा।

और वह आशा करता है एक दिन, जागेगा मानव स्वप्न से,

जीवन के मूल्य और उद्देश्य को देखेगा,

समझेगा परमेश्वर सब कुछ किस क़ीमत पर देता है,

कितनी बेसब्री से मानव के लौटने की राह देखे वह।

हाँ, बेसब्री से मानव के लौटने की राह देखे वह।

3

कोई भी मानव दिन-रात जिसकी ईश्वर करता है देखभाल,

उसकी आराधना की पहल नहीं करता।

मानव जो आशा से परे लगता है

उस पर ईश्वर कार्य करता है जैसा उसने सोचा।

और वह आशा करता है एक दिन, जागेगा मानव स्वप्न से,

जीवन के मूल्य और उद्देश्य को देखेगा,

समझेगा परमेश्वर सब कुछ किस क़ीमत पर देता है,

कितनी बेसब्री से मानव के लौटने की राह देखे वह।

हाँ, बेसब्री से मानव के लौटने की राह देखे वह।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है' से रूपांतरित

पिछला: 258 ईश्वर की जीवन-शक्ति का मूर्त रूप

अगला: 260 इंसान के जीवन के लिए, परमेश्वर सारे कष्ट झेलता है

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें