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वचन से होता है परमेश्वर का अधिकतर काम

I

कुछ वक्त के अनुभव के बाद, परमेश्वर के काम को,

उसके हर चरण को, तुम जान लो अगर,

क्या हासिल करता है वचन उसका,

क्यों अधूरा काम है इतना अभी, तुम जान लो अगर;

हो साफ नज़र, हो ज्ञान पूरा इन चीज़ों का अगर,

बढ़ा सकते हो कदम अपने, बेफ़िक्री से,

आराम से, होकर निडर।

किस तरह होता है पूरा काम परमेश्वर का अधिकतर,

वचन से होता है पूरा काम परमेश्वर का अधिकतर।

वचन से शुद्ध करता है वो इंसान को,

वचन से बदलता है वो धारणा इंसान की।

II

यातना, शुद्धिकरण, प्रबोधन सभी अनुभूत हैं जो,

होते हैं हासिल सभी उसके वचन से।

और भीतर चल रहे व्यवहार सारे,

होते हैं हासिल सभी उसके वचन से।

क्यों भला इंसान परमेश्वर का अनुसरण करे?

क्योंकि वो अपने वचन को व्यक्त करता है।

उसके वचन भरे हैं राज़ से,

उसके वचन छूते हैं दिल के तार, इंसान के।

भेद सब इंसान के भीतर छिपे जो,

परमेश्वर का वचन वो भेद सारे खोलता है।

कल जो गुज़रा और जो कल आएगा,

इंसान दोनों देख सकता है।

किस तरह होता है पूरा काम परमेश्वर का अधिकतर,

वचन से होता है पूरा काम परमेश्वर का अधिकतर।

वचन से शुद्ध करता है वो इंसान को,

वचन से बदलता है वो धारणा इंसान की।

III

परमेश्वर के वचन की वजह से,

दर्द और तकलीफ सहता है इंसान।

परमेश्वर के वचन से,

इंसान होता पूर्ण है, और करता है शुरु अपना अनुसरण।

चाहिये इंसान को वो, स्वीकार ले उसके वचन।

चाहिये इंसान को वो, स्वीकार ले उसके वचन।

पूर्ण बन जाए या इंसाँ शुद्ध हो जाए,

अहम फिर भी हैं वचन परमेश्वर के।

ये दृष्टि है, काम है परमेश्वर का,

इंसान को ये जान लेना चाहिये।

किस तरह होता है पूरा काम परमेश्वर का अधिकतर,

वचन से होता है पूरा काम परमेश्वर का अधिकतर।

वचन से शुद्ध करता है वो इंसान को,

वचन से बदलता है वो धारणा इंसान की।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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