772 जितना अधिक तुम परमेश्वर को संतुष्ट करोगे, तुम उतने ही अधिक धन्य होगे

1 जितना अधिक तुम परमेश्वर को संतुष्ट करते हो, उतनी अधिक परमेश्वर तुम्हें आशीष देता है, और परमेश्वर के लिए तुम्हारे प्रेम का सामर्थ्य भी उतना ही अधिक होगा; और इसके साथ-साथ तुममें विश्वास और दृढ़-निश्चय होगा, और तुम महसूस करोगे कि प्रेमी परमेश्वर के साथ बिताए जाने वाले जीवन से बढ़कर कीमती और महत्वपूर्ण औरकुछ नहीं है। यह कहा जा सकता है कि अगर मनुष्य परमेश्वर से प्रेम करता है तो वो शोक से रहित होगा। यद्यपि ऐसे समय होते हैं जब तुम्हारा शरीर निर्बल होता है, और कई वास्तविक परेशानियाँ तुम पर धावा बोलती हैं, इन समयों के दौरान तुम सचमुच परमेश्वर पर निर्भर रहोगे, और अपनी आत्मा में तुम राहत प्राप्त करोगे, और तुम निश्चितता का अनुभव करोगे, और तुम्हारे पास कुछ होगा जिस पर तुम निर्भर होगे। इस रीति से, तुमकई वातावरणों पर विजय प्राप्त कर पाओगे, और इसलिए तुम कष्टों को सहने के कारण परमेश्वर के बारे में शिकायत नहीं करोगे; तुम गीत गाना, नाचना, और प्रार्थना करना चाहोगे, तुम एकत्रित होना और संगति रखना, परमेश्वर के बारे में विचार करना चाहोगे, और तुम महसूस करोगे कितुम्हारे चारों ओर के सब लोग, विषय और बातें जो परमेश्वर के द्वारा निर्धारित की गई हैं वे सब उपयुक्त हैं।

2 जितना अधिक तुम परमेश्वर को संतुष्ट करते हो, उतनी अधिक परमेश्वर तुम्हें आशीष देता है, और परमेश्वर के लिए तुम्हारे प्रेम का सामर्थ्य भी उतना ही अधिक होगा; और इसके साथ-साथ तुममें विश्वास और दृढ़-निश्चय होगा, और तुम महसूस करोगे कि प्रेमी परमेश्वर के साथ बिताए जाने वाले जीवन से बढ़कर कीमती और महत्वपूर्ण औरकुछ नहीं है। यदि तुम परमेश्वर से प्रेम नहीं करते हो, तो जिन बातों की ओर भीतुम देखते हो वे सब तुम्हारे लिए दुखदाई होंगी, कुछ भी तुम्हारी दृष्टि में सुहावना नहीं होगा; अपनी आत्मा में तुम आजाद नहीं बल्कि कुचले जाओगे, तुम्हारा हृदय सदैव परमेश्वर के बारे में शिकायत करेगा, और तुम सदैव महसूस करोगे कितुम बहुत अधिक यातना सहते हो, और कि यह बहुत अनुचित है। यदि तुम प्रसन्नता के लिए प्रयास नहीं करते, बल्कि परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए और शैतान के द्वारा दोषी न ठहराए जाने के लिए प्रयास करते हो, तो ऐसे प्रयास तुम्हें परमेश्वर से प्रेम करने काबड़ा सामर्थ्य देंगे। मनुष्य वह सब पूरा कर सकता है जो परमेश्वर के द्वारा कहा गया है, और वह सब जो वह करता है वह परमेश्वर को संतुष्ट करने के योग्य है—वास्तविकता से सम्पन्न होने का अर्थ यही है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "केवल पीड़ादायक परीक्षाओं का अनुभव करने के द्वारा ही तुम परमेश्वर की मनोहरता को जान सकते हो" से रूपांतरित

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