95 "वचन देह में प्रकट होता है" के असल मायने

I

राज्य के युग में,

वचन बोलता है देहधारी परमेश्वर,

उन सभी को जीतने जो आस्था रखते हैं उसमें।

ये "वचन का देह में प्रकट होना" है;

अंत के दिनों में आया है परमेश्वर ये कार्य करने,

"वचन के देह में प्रकट होने" के

असल मायने को सम्पन्न करने।

वह केवल वचन बोलता है,

तथ्यों का आगमन शायद ही कभी होता है।

"वचन के देह में प्रकट होने" का यही सार है,

और जब बोलता है देहधारी परमेश्वर अपने वचन,

तो यही होता है वचन का देह में प्रकटन,

और वचन का देह में आगमन।

आरंभ में था वचन,

परमेश्वर के साथ था वचन।

आरंभ में था वचन,

और वचन था परमेश्वर।

और देह बन गया वचन,

इसी को अंत के दिनों में परमेश्वर पूरा करेगा।


II

वचन के देह में प्रकट होने को,

परमेश्वर अंत के दिनों में साकार करेगा।

ये आख़िरी अध्याय है उसी की योजना का।

इसलिये, उसे धरती पर आना है,

अपने सभी वचनों को,

देह में रहकर अभिव्यक्त करना है।

जो आज किया है,

जो कल किया जाएगा,

जिन्हें बचाया या नहीं बचाया गया है,

अंतिम परिणाम इंसान का,

ये सब परमेश्वर द्वारा पूरा किया जाएगा,

ये सब उसके वचनों के ज़रिये स्पष्ट कर दिया गया है,

इसलिये ‘वचन देह में प्रकट होता’ है

के मायने को पूरा किया जाएगा।

आरंभ में था वचन,

परमेश्वर के साथ था वचन।

आरंभ में था वचन,

और वचन था परमेश्वर।

और देह बन गया वचन,

इसी को अंत के दिनों में परमेश्वर पूरा करेगा।


III

पूर्व में दिये गये आदेश और विधान,

कौन तबाह होगा,

कौन प्रवेश करेगा विश्राम में,

अपनी प्रजा और पुत्रों को वो कैसे वर्गों में बाँटेगा,

जो पूर्वनियत हैं और जो नहीं है,

उन्हें कहाँ रखेगा,

क्या होगा इस्राएल और मिस्र का,

ऐसे वचन हैं जिन्हें पूरा करना होगा।

आरंभ में था वचन,

परमेश्वर के साथ था वचन।

आरंभ में था वचन,

और वचन था परमेश्वर।

और देह बन गया वचन,

इसी को अंत के दिनों में परमेश्वर पूरा करेगा।


IV

अपने कार्य की गति को बढ़ाता है परमेश्वर।

अपने वचनों से दिखाता है वो इंसान को

क्या करना है हर एक युग में,

देहधारी परमेश्वर की सेवकाई,

अंत के दिनों में।

ये सब है वचन देह में प्रकट हो रहा है

के मायने को पूरा करने के लिये, के लिये।


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