785 परमेश्वर को जानने के लिए उसके वचनों को जानना ही चाहिए

1 परमेश्वर के वचन को पढ़कर और समझकर, परमेश्वर के वचन का अभ्यास और अनुभव करके ही परमेश्वर को जानना चाहिए। परमेश्वर का वचन वास्तव में परमेश्वर के स्वभाव की एक अभिव्यक्ति है। आप परमेश्वर के वचन से मानवजाति के लिए परमेश्वर के प्रेम और उनके उद्धार के साथ-साथ यह भी देख सकते हैं कि वे किस तरह से उन्हें बचाते हैं...। क्योंकि परमेश्वर का वचन, स्वयं परमेश्वर के द्वारा व्यक्त किया जाता है, उसे लिखने के लिए किसी मनुष्य का उपयोग नहीं किया जाता है। यह व्यक्तिगत रूप से परमेश्वर के द्वारा व्यक्त जाता है। यह स्वयं परमेश्वर है जो अपने स्वयं के वचनों और अपने भीतर की आवाज़ को व्यक्त कर रहा है। ऐसा क्यों कहा जाता है कि वे दिल से महसूस किए जाने वाले वचन हैं? क्योंकि वे बहुत गहराई से निकलते हैं, और परमेश्वर के स्वभाव, उनकी इच्छा, उनके विचारों, मानवजाति के लिए उनके प्रेम, उनके द्वारा मानवजाति के उद्धार, तथा मानवजाति से उनकी अपेक्षाओं को व्यक्त कर रहे हैं।

2 परमेश्वर के वचनों में कठोर वचन, शांत एवं कोमल वचन, कुछ विचारशील वचन हैं, और कुछ प्रकाशित करने वाले वचन भी हैं जो इंसान की इच्‍छाओं के अनुरूप नहीं हैं। यदि आप केवल प्रकाशित करने वाले वचनों को देखेंगे, तो आप महसूस करेंगे कि परमेश्वर काफी कठोर है। यदि आप केवल शांत एवं कोमल वचन को देखेंगे, तो आप महसूस करेंगे कि परमेश्वर के पास ज़्यादा अधिकार नहीं है। इसलिए इस विषय में आपको सन्दर्भ से बाहर होकर नहीं समझना चाहिए, आपको इसे हर एक कोण से देखना चाहिए। कभी-कभी परमेश्वर शांत एवं करुणामयी दृष्टिकोण से बोलता है, और लोग मानवजाति के लिए परमेश्वर के प्रेम को देखते हैं; कभी-कभी वह कठोर दृष्टिकोण से बोलता है, और लोग परमेश्वर के अपमान न सहन करने वाले स्वभाव को देखते हैं। मनुष्य बुरी तरह से गंदा है और परमेश्वर के मुख को देखने के योग्य नहीं है, और परमेश्वर के सामने आने के योग्य नहीं है। लोगों का परमेश्वर के सामने आना अब पूरी तरह परमेश्वर के अनुग्रह से ही संभव है।

3 जिस तरह परमेश्वर कार्य करता है और उसके कार्य के अर्थ से परमेश्वर की बुद्धि को देखा जा सकता है। भले ही लोग परमेश्वर के सीधे सम्पर्क में न आएँ, तब भी वे परमेश्वर के वचनों में इन चीज़ों को देखने में सक्षम होंगे। जब परमेश्वर की सच्ची समझ वाला कोई व्यक्ति मसीह के सम्पर्क में आता है, तो परमेश्वर के बारे में उसकी मौजूदा समझ उनके साथ मेल खा सकती है, किन्तु जब केवल सैद्धान्तिक समझ वाला कोई व्यक्ति परमेश्वर के सम्पर्क में आता है, तो वह इस संबंध को नहीं देख सकता है। देहधारण का सत्य सबसे गहरा एवं गम्भीर रहस्य है, जिसकी गहराई को नापना कठिन है। उन वचनों का सार निकालिए जिन्हें परमेश्वर देहधारण के रहस्य के विषय में कहते हैं, विभिन्न कोणों से उन्हें देखिए, फिर अपने बीच इन चीज़ों की चर्चा कीजिए। आप साथ मिलकर प्रार्थना कर सकते हैं, इन चीज़ों पर बहुत अधिक विचार और चर्चा कर सकते हैं। कदाचित् तब पवित्र आत्मा आपको प्रबुद्ध करे और आपको इसकी समझ दे। ऐसा इसलिए है क्योंकि मनुष्य के पास परमेश्वर के सम्पर्क में आने का कोई अवसर नहीं है, मनुष्य को एक बार में अपने मार्ग का थोड़ा सा एहसास करने, तथा परमेश्वर की सच्ची समझ हासिल करने के लिए इस तरीके से अनुभव करने पर भरोसा रखना चाहिए।

— "मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "देहधारी परमेश्वर को कैसे जानें" से रूपांतरित

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