19 विजेता है राज्य का सम्राट

I

चमकती है पूरब से रोशनी जब बोलना आरंभ करता है परमेश्वर,

प्रकाशित है अब पूरा आकाश,

बदलने लगते हैं रूप, सितारे सारे।

छाँटा, निर्मल किया जाता है सारे इंसानों को।

चमकती पूर्वी बिजली की आभा में,

उजागर होता है इंसान अपने असली रंग में।

चौंधिया जाती हैं, चकित रह जाती हैं भ्रम से आँखें।

छुपा नहीं पाता इंसान अपनी बदसूरती को।

बड़े लाल अजगर के घर में

नई शुरुआत की है परमेश्वर ने,

काम भी नया आरंभ किया है

उसने अपनी कायनात में।

जल्द ही ख़त्म हो जायेगा धरती पर वजूद राज्यों का,

बन जायेंगे वे राज्य परमेश्वर के,

क्योंकि जीत हासिल की है उसने,

विजयी होकर लौटा है परमेश्वर।

II

हैरान हर इंसान, देख रहा, इंतज़ार कर रहा है।

अब, परमेश्वर की रोशनी के आने से,

पैदा हुए जिस दिन, उसकी खुशियाँ मनाते वो,

और साथ ही उस दिन को कोसते भी वो।

असंगत जज़्बात को ज़ाहिर करना है मुश्किल।

आत्म-निंदा बनता दरिया आँसुओं का,

खो गये हैं पलभर में, नहीं कोई निशाँ उनका,

बह गये प्रचंड धारा में।

बड़े लाल अजगर के घर में

नई शुरुआत की है परमेश्वर ने,

काम भी नया आरंभ किया है

उसने अपनी कायनात में।

जल्द ही ख़त्म हो जायेगा धरती पर वजूद राज्यों का,

बन जायेंगे वे राज्य परमेश्वर के,

क्योंकि जीत हासिल की है उसने,

विजयी होकर लौटा है परमेश्वर।

III

आ रहा है तेज़ी से दिन फिर परमेश्वर का,

जगा रहा है फिर से इंसान को,

दे रहा एक मकाम इंसान को,

कर सके फिर एक नई शुरुआत जहाँ से वो।

तरंगित होता दिल परमेश्वर का, टकराती लहरें चट्टानों से,

उसके दिल की लय के साथ,

उछलते पहाड़, ख़ुशी से नाचते जल-स्रोत।

बयाँ कर नहीं सकता परमेश्वर अपने जज़्बात।

बड़े लाल अजगर के घर में

नई शुरुआत की है परमेश्वर ने,

काम भी नया आरंभ किया है

उसने अपनी कायनात में।

जल्द ही ख़त्म हो जायेगा धरती पर वजूद राज्यों का,

बन जायेंगे वे राज्य परमेश्वर के,

क्योंकि जीत हासिल की है उसने,

विजयी होकर लौटा है परमेश्वर।

चाहता है परमेश्वर हर बुरी और दूषित चीज़

जलकर राख हो जाये उसकी निगाहों के तले,

स्वच्छंद बेटे सभी गायब हो जायें,

और फिर अस्तित्व में न रहें।

बड़े लाल अजगर के घर में

नई शुरुआत की है परमेश्वर ने,

काम भी नया आरंभ किया है

उसने अपनी कायनात में।

जल्द ही ख़त्म हो जायेगा धरती पर वजूद राज्यों का,

बन जायेंगे वे राज्य परमेश्वर के,

क्योंकि जीत हासिल की है उसने,

विजयी होकर लौटा है परमेश्वर।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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