724 नवीनतम प्रकाश को स्वीकारना परमेश्वर की आज्ञा मानने की कुंजी है

1

अगर नहीं स्वीकार सकते नयी रोशनी,

नहीं समझ सकते आज का ईश-कार्य,

खोजते नहीं उसे, या करते शक उसपे,

करते उसकी आलोचना या जाँचते उसे,

तो ईश्वर की आज्ञा मानने का मन नहीं तुम्हारा।

जब आज और अभी की रोशनी प्रकट हो,

तब भी अगर चाहो तुम कल की रोशनी को,

करो विरोध ईश्वर के नए कार्य का, तो तुम बेतुके इंसान हो।

तुम वो हो जो जानबूझकर ईश्वर का विरोध करे।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को स्वीकारना,

और उसे समझ पाना।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को समझना

और उसे अमल में लाना।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को अमल में लाना।

यही है सच्ची आज्ञाकारिता।

2

जो ईश्वर की प्यास रखने की इच्छा नहीं करते,

वे ईश्वर की आज्ञा मानने में समर्थ नहीं।

वे बस कर सकते ईश-विरोध, वे बस कर सकते ईश-विरोध,

क्योंकि अपनी स्थिति से खुश हैं वो।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को स्वीकारना,

और उसे समझ पाना।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को समझना

और उसे अमल में लाना।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को अमल में लाना।

यही है सच्ची आज्ञाकारिता।

3

जिनमें नहीं ईश्वर के प्रति ज़रा भी आज्ञाकारिता,

जो बस मुँह से उसका नाम स्वीकारें,

होती थोड़ी समझ ईश्वर की मनोहरता की, पर

पवित्रात्मा के काम के संग नहीं चल पाते,

उसके वर्तमान वचनों की आज्ञा नहीं मानते,

न मानते उसके वर्तमान कार्य को,

वे बस रहते ईश्वर के अनुग्रह के बीच,

वे उसके द्वारा पूर्ण और हासिल नहीं किए जाएंगे।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को स्वीकारना,

और उसे समझ पाना।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को समझना

और उसे अमल में लाना।

ईश-आज्ञा मानने की कुंजी है नयी रोशनी को अमल में लाना।

यही है सच्ची आज्ञाकारिता।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर का आज्ञापालन करना चाहिए' से रूपांतरित

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