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परमेश्वर ने मनुष्यों के उद्धार के लिए सभी कीमत चुकाई है

I

सभी चीज़ों में,

मनुष्य का उद्धार परमेश्वर का सबसे बड़ा काम है।

वह करता है हर कार्य मानव जाति के लिए,

न सिर्फ शब्दों और विचारो के साथ,

एक उद्देश्य, योजना और इच्छा के साथ।

परमेश्वर और मनुष्य दोनों के लिए

महत्वपूर्ण है मानवजाति के उद्धार का यह कार्य।

परमेश्वर कितना व्यस्त है और कितने प्रयास करता है।

वह करता है अपने काम का प्रबंध और शासन सभी लोगों और चीज़ो पर।

इतनी बड़ी कीमत पर जो पहले कभी नहीं देखी।

अपने कार्यों में धीरे धीरे मनुष्य को करता है उजागर

परमेश्वर का स्वरुप है क्या,

और परमेश्वर है क्या परमेश्वर की बुद्धि, उसका सामर्थ्य,

उसका स्वभाव और मूल्य जिसका भुगतान उसने किया।

भले ही कार्य हो कितना कठिन भले ही बाधाएं हों अपार,

भले ही मनुष्य हो कितना ही अवज्ञाकारी या कमज़ोर,

परमेश्वर को कुछ भी रोक नहीं सकता, कुछ भी नहीं कठिन,

कुछ भी नहीं कठिन।

II

कितना करीब है परमेश्वर और कितनी आत्मीयता है,

उनके साथ जिन्हें उसने प्रबंध और बचाव के लिए चुना है।

सिवाय उनके न और किसी के साथ

परमेश्वर की इतनी आत्मीयता रही है।

उसके हृदय में, वे सब से महत्वपूर्ण हैं,

और वो सब से बढ़कर उन्हें मूल्य देता है।

कितना ही परमेश्वर को चोट पहुँचाया हो,

या उसकी अनाज्ञाकारिता की हो।

भले ही परमेश्वर ने बड़ी कीमत चुकाई हो फिर भी,

बिना किसी अफ़सोस या शिकायत के,

बिना थके करता है परमेश्वर अपना कार्य, यह जानकर,

एक दिन द्रवित होंगे लोग उसके वचन सुनकर।

मनुष्य एक ना एक दिन उस की बुलाहट के प्रति हो जाएँगे जागरूक

यह पहचानेंगे कि वह सृष्टि का प्रभु है,

और आएंगे उसके पक्ष में वापस।

भले ही कार्य हो कितना कठिन भले ही बाधाएं हों अपार,

भले ही मनुष्य हो कितना ही अवज्ञाकारी या कमज़ोर,

परमेश्वर को कुछ भी रोक नहीं सकता, कुछ भी नहीं कठिन,

कुछ भी नहीं कठिन।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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