779 इंसान शायद समझ ले उसे, उम्मीद है परमेश्वर को

1

मानवजाति से परमेश्वर के पहले संपर्क से लेकर,

करता आ रहा है वो प्रकट निरंतर, बिना रुके

अपने सार को, वो क्या है और उसके पास है क्या।

चाहे अनेक युगों के लोग देख और समझ पाएं या नहीं,

पर अपने स्वभाव और सार को दिखाने के लिए

परमेश्वर बोलता और करता है काम।

परमेश्वर नहीं छिपाता, नहीं रखता उसे गुप्त, पूरी तरह करता है प्रकट,

अपना सार और स्वभाव, अपना अस्तित्व और स्वरूप,

करता है उसे प्रकट मानवजाति के साथ अपने काम और मेलजोल में।

2

परमेश्वर को है उम्मीद कि इंसान समझेगा उसे

जानेगा उसके सार और स्वभाव को,

वो चाहता नहीं कि ये बन कर रह जाए अनंतकाल तक एक रहस्य।

वो चाहता नहीं कि बन कर रह जाए वो एक अनसुलझी पहेली की तरह।

परमेश्वर नहीं छिपाता, नहीं रखता उसे गुप्त, पूरी तरह करता है प्रकट।

3

जब मानवजाति जान जाएगी परमेश्वर को, परमेश्वर को,

केवल तब ही उन्हें होगा पता आगे की राह का, आगे की राह का,

होंगे वो लायक परमेश्वर की अगुवाई के, अगुवाई के।

वे रहेंगे उसके प्रभुत्व के अधीन, वे जिएंगे उसकी रोशनी और आशीष में।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II' से रूपांतरित

पिछला: 778 मनुष्य को एक सार्थक जीवन जीने की कोशिश करनी चाहिए

अगला: 780 परमेश्वर उन्हें पाना चाहता है जिन्हें उसका सच्चा ज्ञान है

परमेश्वर की ओर से एक आशीर्वाद—पाप से बचने और बिना आंसू और दर्द के एक सुंदर जीवन जीने का मौका पाने के लिए प्रभु की वापसी का स्वागत करना। क्या आप अपने परिवार के साथ यह आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें