252 मैं परमेश्वर को अपना सच्चा हृदय अर्पित करता हूँ

1

आशीष प्राप्‍त करने और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के लिए, मैं परमेश्वर के घर में बस गया।

हालांकि मैं अपना कर्तव्य निभा रहा था, लेकिन इसमें मेरे सौदेबाज़ी करने वाले रवैये की मिलावट थी।

केवल परमेश्वर के वचनों के न्याय और प्रकाशन से ही मैंने अपनी भ्रष्टता की सच्चाई को स्पष्ट रूप से देखा।

मैं स्वार्थी और धोखेबाज़ हूँ, मैंने बहुत पहले ही अपना ज़मीर और विवेक गँवा दिया।

परमेश्वर मुझे बिना थके अपने वचनों से निर्देश देता है, और उम्मीद करता है कि मेरा भ्रष्ट स्वभाव जल्दी बदले।

परमेश्वर इंतज़ार करता है, परमेश्वर उम्मीद करता है, जैसे एक माँ अपने बेटे के लौटने का इंतज़ार करती है।

परमेश्वर के अनुग्रह को याद करते हुए, मेरा दिल पश्चाताप से भर गया, मुझे सचमुच परमेश्वर के साथ इतना विद्रोही और धोखेबाज़ नहीं होना चाहिए।

मुझे अपनी गहरी भ्रष्टता से बहुत घृणा है; सत्य का अनुसरण न करके, मैंने परमेश्वर के दिल को गहरा आघात पहुँचाया है।

मैं पूर्ण होने के बहुत से मौके गँवा चुका हूँ; कितना सारा अच्छा समय बीत चुका है।

मैं लगातार विद्रोह करके परमेश्वर को आहत कैसे कर सकता हूँ? मैं सत्य का अनुसरण करके इंसान की तरह जीने को तैयार हूँ।


2

मैं परमेश्वर के वचनों का अभ्यास करने के लिए मेहनत करता हूँ ताकि मैं सत्य हासिल कर सकूँ।

जब मेरी भ्रष्टता उजागर की जाती है, तब मैं परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना को स्वीकार करता हूँ।

हालांकि दुख और पीड़ाएँ हैं, लेकिन राह दिखाने के लिए परमेश्वर के वचन मेरे साथ हैं।

मैंने परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता का कुछ ज्ञान पा लिया है, मेरे दिल में उसके प्रति श्रद्धा पैदा हो गई है।

मैं सुख पाने के लिए लालच करने के कारण खुद से घृणा करता हूँ, और परमेश्वर की इच्छाओं पर विचार करने और सत्य का अभ्यास करने का निश्चय करता हूँ।

अतीत पर विचार करते हुए, परमेश्वर के अनुग्रह को याद करके, मैं देखता हूँ कि केवल परमेश्वर ही प्रेम है।

मैं केवल निरंतर काट-छाँट, व्यवहार, परीक्षण और शुद्धिकरण की वजह से ही बदला हूँ जो सारा समय मेरे साथ रहे हैं।

मैंने परमेश्वर के असीम अनुग्रह का प्रतिदान नहीं दिया है, मैं अपराधबोध से ग्रस्त हूँ और परमेश्वर का चेहरा देखने के योग्य नहीं हूँ।

परमेश्वर के अनुग्रह को प्राप्त करते हुए, मैं दिल से आभारी हूँ। मैं अपने बचे हुए दिनों को और अधिक संजोकर रखूँगा।

अब मैं केवल परमेश्वर के लिए जीना चाहता हूँ, एक ऐसा ईमानदार व्यक्ति बनना चाहता हूँ जो परमेश्वर का गौरवगान करे और उसकी गवाही दे।

मैं अपना सच्चा दिल परमेश्वर को अर्पित करता हूँ, मैं परमेश्वर के प्रेम के प्रतिदान के लिए अपना कर्तव्य पूरा करूंगा।

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