अंतिम दिनों के मसीह के कथन- संकलन

विषय-वस्तु

क्या आप जानते हैं? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है

पुराना युग बीत चुका है, और नया युग आ गया है। वर्ष दर वर्ष, और दिनोंदिन परमेश्वर ने बहुत काम किया है। वह इस संसार में आया और फिर लौट गया। ऐसा चक्र अनेक पीढ़ियों तक लगातार चलता रहा। आज भी परमेश्वर को जो काम करना है वह उसी प्रकार काम करता है वह काम जिसे उसे अभी पूरा करना है, उसने आज तक विश्राम नहीं किया है। सृष्टि के समय से लेकर आज तक परमेश्वर ने बहुत से काम किये हैं, परंतु क्या आप जानते हैं कि परमेश्वर आज जो काम करता है वह पहले से अधिक बड़ा है, और उसका स्वरूप भी बड़ा है? यही कारण है कि मैं कहता हूं कि परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है। परमेश्वर के सभी काम, चाहे मनुष्यों के लिये हों, या परमेश्वर के लिये, सभी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि उसके काम के प्रत्येक अंग का संबंध मनुष्य से होता है।

चूंकि परमेश्वर का कार्य न तो देखा जा सकता है, और न महसूस किया जा सकता है, और संसार तो बिल्कुल ही नहीं देख पाता, इसलिये वह बहुत महान कैसे माना जा सकता है? कौन सी बातें हैं जिन्हें बहुत महान कहा जा सकता है? निश्चय ही, इससे कोई इंकार नहीं कर सकता कि परमेश्वर के सभी कामों को महान कहा जा सकता है, परंतु मैं ऐसा क्यों कहता हूं कि परमेश्वर आज जो करता है, वह काम ऐसा ही है? जब मैं कहता हूं कि परमेश्वर ने एक बहुत महान काम किया है, तो निश्चय इसमें बहुत से ऐसे रहस्य शामिल हैं जिन्हें मनुष्य को समझना अभी बाकी है। आइये, हम उन पर अब चर्चा करें।

यीशु एक चरनी में ऐसे समय में जन्मा, जिसे उसका अस्तित्व स्वीकार्य नहीं था, परंतु संसार तब भी उसके मार्ग में अवरोधक नहीं बन सका और वह परमेश्वर की छत्रछाया में मनुष्यों के बीच तैंतीस वर्ष तक रहा। उन वर्षों में उसने संसार की कड़वाहट और पृथ्वी पर दुर्दशा की अनुभूति की। उसने सारी मानवजाति को छुटकारा दिलाने के लिये सूली पर चढ़ने की बहुत भारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उसने उन सभी पापियों को, जो शैतान के कब्ज़े में थे, छुटकारा दिलाया, और आखिरकार उसकी पुनर्जीवित देह अपनी समाधि की अवस्था में लौट गई। अब परमेश्वर का नया काम आरंभ हुआ है और यह एक नये युग का आरंभ भी है। परमेश्वर ने उन छुटकारा पाये हुए लोगों को अपनी शरण में लिया है, और उद्धार का नया काम आरंभ किया है। इस समय उद्धार का कार्य पिछले समय में किये कामों से अधिक व्यापक है। यह इंसानों में कार्य कर रहे पवित्र आत्मा से इस प्रकार नहीं होगा कि उन्हें बदलने के लिये उनके हाल पर छोड़ दिया जाए और न ही मनुष्यों के बीच यीशु की देह के प्रकट होने से होगा, और न ही यह कार्य किसी और तरीके से होगा। बल्कि यह कार्य देहधारी परमेश्वर स्वयं करेगा, और वही इसे संचालित करेगा। यह लोगों को नए कार्य का नेतृत्व देने के लिये किया जाएगा। क्या यह बहुत बड़ी बात नहीं है? परमेश्वर यह काम आंशिक रूप में मनुष्य या भविष्यवाणियों के आधार पर नहीं बल्कि परमेश्वर स्वयं करता है। कुछ लोग कह सकते कि यह कोई बहुत महान काम नहीं है, और यह मनुष्यों को भाव-विभोर नहीं कर सकता। परंतु मैं फिर भी आप से कहूंगा कि परमेश्वर का काम केवल इतना ही नहीं है, बल्कि इससे भी व्यापक और महान है।

इस बार, परमेश्वर कार्य करने आत्मिक देह में नहीं, बल्कि एक एकदम साधारण देह में आया है। यह न केवल परमेश्वर के दूसरी बार देहधारण की देह है, बल्कि यह वही देह है जिसमें वह लौटकर आया है। यह बिलकुल साधारण देह है। इस देह में दूसरों से अलग कुछ भी नहीं है, परंतु आप उससे वह सत्य ग्रहण कर सकते हैं जिसके विषय में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा। यह तुच्छ देह, परमेश्वर के सभी सत्य-वचन का मूर्त रूप है, जो अंत के दिनों में परमेश्वर का काम करती है, और मनुष्यों के जानने के लिये यही परमेश्वर के संपूर्ण स्वभाव की अभिव्यक्ति है। क्या आपने परमेश्वर को स्वर्ग में देखने की प्रबल अभिलाषा नहीं की? क्या आपमें स्वर्ग में परमेश्वर को समझने की प्रबल अभिलाषा नहीं की? क्या आपने मनुष्यजाति गंतव्य को जानने या समझने की प्रबल अभिलाषा नहीं की? वह आपको वो सभी अकल्पनीय रहस्य बतायेगा, जो कभी कोई इंसान नहीं बता सकता, और आपको वो सत्य भी बतायेगा जिन्हें आप नहीं समझते। वह परमेश्वर के राज्य में आपके लिये द्वार है, नये युग में आपका मार्गदर्शक है, ऐसा साधारण देहधारी असीम, अथाह रहस्यों को समेटे हुये है। संभव है कि उसके कार्यों को आप समझ न पायें, परंतु उसके सभी कामों का लक्ष्य, आपको इतना बताने के लिये पर्याप्त है कि वह कोई साधारण देह नहीं है, जैसा लोग मानते हैं। क्योंकि वह परमेश्वर की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही साथ अंत के दिनों में मानवजाति के प्रति परमेश्वर की परवाह को भी दर्शाता है। यद्यपि आप उसके द्वारा बोले गये उन शब्दों को नहीं सुन सकते, जो आकाश और पृथ्वी को कंपाते से लगते हैं, या उसकी ज्वाला सी धधकती आंखों को नहीं देख सकते, और यद्यपि आप उसके लौह दण्ड के अनुशासन का अनुभव नहीं कर सकते, आप उसके शब्दों में परमेश्वर के क्रोध को सुन सकते हैं, और उस दया को जान सकते हैं जो वह समस्त मानवजाति पर दिखाता है; आप परमेश्वर के धार्मिकतायुक्त स्वभाव और उसकी बुद्धि को समझ सकते हैं, और इसके अलावा, समस्त मानवजाति के लिये परमेश्वर की चिंता और परवाह को समझ सकते हैं। अंत के दिनों में परमेश्वर के काम का उद्देश्य स्वर्ग के परमेश्वर को मनुष्यों के बीच पृथ्वी पर रहते हुये दिखाना है, और मनुष्यों को इस योग्य बनाना है कि वे परमेश्वर की आज्ञा मानें, आदर करें, और परमेश्वर से प्रेम करना जानें। यही कारण है कि वह देह में लौटकर आया है। यद्यपि आज मनुष्य देखता है कि परमेश्वर मनुष्यों के समान है, उसकी एक नाक और दो आंखें हैं और वह साधारण परमेश्वर है, अंत में परमेश्वर उन्हें दिखाएगाकि मनुष्य के अस्तित्व के बिना, स्वर्ग और पृथ्वी एक अभूतपूर्व बदलाव से होकर गुज़रेंगे; मनुष्य के अस्तित्व के बिना, स्वर्ग मद्धिम हो जायेगा, पृथ्वी पर संकट छा जायेगा, समस्त मानवजाति अकाल और महामारियों का शिकार बन जाएगी, परमेश्वर आपको दर्शायेगा कि अंतिम दिनों में देहधारी परमेश्वर के उद्धार के बिना परमेश्वर ने समस्त मानवजाति को बहुत पहले ही नर्क में नष्ट कर दिया होता; इस देह के अस्तित्व के बिना आप सदैव ही पापियों और अपराधियों में प्रमुख और शव समान होते। आपको यह जानना चाहिये कि बिना इस देह के अस्तित्व के समस्त मानवजाति को एक अवश्यंभावी संकट का सामना करना होगा, और अंत के दिनों में मानवजाति के लिये परमेश्वर के कठोर दण्ड से बच पाना कठिन होगा। इस साधारण शरीर के जन्म के बिना आप सबकी दशा ऐसी होगी जिसमें न जीवन होगा और न मौत आयेगी, आप चाहे उसकी कितनी भी खोज करें; इस शरीर के अस्तित्व के बिना, आप आज इस सत्य को नहीं पा सकोगे और न परमेश्वर के सिंहासन के पास आ पाओगे। बल्कि आप परमेश्वर से दण्ड पाओगे क्योंकि आपने जघन्य पाप किये हैं। क्या आप जानते हैं? यदि परमेश्वर का वापस देह में लौटना न हो, तो किसी को भी उद्धार का अवसर नहीं मिलेगा; और यदि उसे देह में वापस आना न हो, तो उसने बहुत पहले पुराने युग को समाप्त कर दिया होता। इस प्रकार से सोचिये, क्या आप परमेश्वर के दूसरी बार देहधारण नकार सकते हैं? आप जबकि इस साधारण मनुष्य से बहुत अधिक बड़ा लाभ प्राप्त कर सकते हैं, तब आप उसे स्वीकार करने के लिये तैयार क्यों नहीं हैं?

परमेश्वर का कार्य ऐसा है जिसे आप समझ नहीं कर सकते। जब आप यह भी नहीं जान सकते कि क्या आपका निर्णय सही है, और न ही यह जान सकते हैं कि परमेश्वर का कार्य सफल होगा या नहीं, तब आप प्रयास क्यों नहीं करते, और देखते कि यह साधारण मनुष्य आपके बड़े काम का है या नहीं और परमेश्वर ने बहुत महान काम किया है या नहीं। हालांकि मैं आपको बताना चाहता हूं कि नूह के दिनों में लोग खाते और पीते थे, विवाह या शादियां करते, और यहां तक कि उनके काम परमेश्वर की दृष्टि में इतने असहनीय हो गये थे कि उसने समस्त मानवजाति के विनाश के लिये प्रलय भेजी और नूह के परिवार के आठ प्राणियों, और सभी प्रकार के पक्षियों और पशुओं को बचाया| अंत के दिनों में जिन्हें परमेश्वर ने जीवित बचाकर रखा, ये वे लोग थे जो परमेश्वर के स्वामिभक्त थे और अंत तक साथ रहे। यद्यपि दोनो ही काल बहुत अधिक भ्रष्टाचार के कारण परमेश्वर के लिये असहनीय थे, और दोनों ही युगों में मानवजाति का इतना पतन हो चुका था उन्होंने परमेश्वर को प्रभु के रूप में नकार दिया। नूह के समय में सभी लोग परमेश्वर के द्वारा नष्ट कर दिये गये थे। दोनों युगों में मानवजाति ने परमेश्वर को बहुत दुखी किया, परंतु अंत के दिनों से लेकर आज तक परमेश्वर ने मनुष्यों के प्रति संयम बरता है। ऐसा क्यों है? क्या आपने कभी इस बात पर विचार नहीं किया? यदि आप सचमुच नहीं जानते, तो मैं आपको बताता हूं। अंत के दिनों में मनुष्यों के साथ परमेश्वर का धीरज धरने का कारण यह नहीं है कि वे नूह के दिनों की तुलना में कमतर भ्रष्ट हैं या उन्होंने परमेश्वर के सामने पश्चताप किया है और न ही कारण यह है कि परमेश्वर तकनीकी विकास के कारण अंत के दिनों में मनुष्यों का सर्वनाश नहीं कर सकता। कारण यह है कि अंत के दिनों में परमेश्वर मनुष्यों के एक समूह में कार्य करने वाला है, और यह कार्य देहधारी परमेश्वर स्वयं करेगा। साथ ही परमेश्वर इस समूह के एक भाग को अपने उद्धार का पात्र बनायेगा, अपनी प्रबंधन योजना का फल, और ऐसे लोगों को अपने साथ वह अगले युग में प्रवेश करायेगा। चाहे कुछ भी हो जाए, परमेश्वर ने इसकी जो कीमत चुकाई है, वह सारी अंत के दिनों में अपने देहधारण की तैयारियों के के लिये है। आज जो कुछ आपके पास है वह इसी देह के कारण है। क्योंकि परमेश्वर इस देह में है इसीलिएआप जीवित हैं यह उत्तम भविष्य या भाग्य जो आपने पाया है, वह इस साधारण मनुष्य के कारण है| न केवल इतना, परंतु अंत में समस्त जातियाँ इस साधारण मनुष्य की उपासना करेंगी साथ ही साथ धन्यवाद देंगी और इस मामूली से व्यक्ति की आज्ञा का पालन करेंगी। क्योंकि इसी ने समस्त मानवजाति का उद्धार करने के लिये सत्य, जीवन और मार्ग दिया है, परमेश्वर और मनुष्यों के बीच के संघर्ष को शांत किया है, परमेश्वर और मनुष्यों को निकट ले आया है, और उनके बीच विचारों का संचार किया है। इसी ने परमेश्वर को महान महिमा प्रदान की है, क्या ऐसा साधारण व्यक्ति आपके विश्वास और श्रद्धा के योग्य नहीं है? क्या यह साधारण देह, मसीह कहलाने के उपयुक्त नहीं है? क्या ऐसा साधारण मनुष्य मनुष्यों के बीच परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं हो सकता? क्या ऐसा व्यक्ति जो मानवजाति संकट मेंसहायता करता है, वह आपके प्रेम और अवलंबन के योग्य नहीं हो सकता? यदि आप उसके मुख से निकले सत्य को नकारें, और आपके बीच में उसके अस्तित्व को अप्रिय जानें, तब आपकीनियति क्या होगी?

अंत के दिनों में परमेश्वर के सभी काम इस साधारण मनुष्य के द्वारा किये जाते हैं। आपको जो कुछ भी मिलेगा इसी के माध्यम से मिलेगा और वह आपके लिये सब कुछ तय कर सकता है। क्या ऐसा व्यक्ति हो सकता है जैसा आप सोचते हैं: एक ऐसा व्यक्ति जो इतना अधिक सादा है कि वह उल्लेख करने योग्य भी नहीं है? क्या उसका सत्य आपको पूर्ण रूप से आश्वस्त करने योग्य नहीं है? क्या उसके कार्य की गवाही आपको पूर्ण रूप से आश्वस्त करने योग्य नहीं है? या फिर वह मार्ग जिस पर वह आपकी अगुवाई करता है, इस योग्य नहीं है कि आप अनुसरण करें? वह कौन सी बात है कि आप उसके प्रति अरुचि का अनुभव करते हैं, और उसे अपने आप से दूर रखते हैं और उससे बचकर रहते हैं? वही सत्य की अभिव्यक्ति करता है, वही सत्य की आपूर्ति करता है, वही आपकी यात्रा के लिये मार्ग बनाता है। क्या अब भी आपकोइन सच्चाइयों के भीतर परमेश्वर के कार्य के संकेत नहीं पा रहे? यीशु के कार्य के बिना मानवजाति दुखों से पार नहीं पा सकती थी, बिना देहधारण के आज वे कभी परमेश्वर की सराहना नहीं पा सकते या नये युग में प्रवेश नहीं कर सकते। इस साधारण मनुष्य के आगमन के बिना, आपको कभी भी यह अवसर नहीं मिलता या आप कभी भी इस योग्य नहीं हो सकते कि परमेश्वर के सच्चे मुख का दर्शन कर सको। क्योंकि आप जैसों को तो बहुत पहले ही नष्ट कर दिया जाना चाहिए था, परंतु परमेश्वर ने दूसरी बार परमेश्वर के देहधारण के कारण आपको क्षमा किया है और आप पर दया दिखाई है। खैर, मैं अंत में इन शब्दों के साथ आपसे विदा लेना चाहता हूं: यह साधारण-सा मनुष्य जो देहधारी परमेश्वर है, आपके लिये बहुत महत्वपूर्ण है। यही वह सबसे बड़ा काम है, जिसे परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच पहले से ही कर दिया है।