58 इंसान की पापी प्रकृति को बदलने के लिए क्या किया जा सकता है?

1

पाप-बलि से क्षमा हो सकते हैं इंसान के पाप,

लेकिन वो पाप करता ही रहे, अपनी प्रकृति न बदल पाये,

ताकि वो पापमय न रहे।

क्रूस पर चढ़ने के ईश-कार्य ने इंसान को दी क्षमा,

लेकिन वो शैतानी भ्रष्टता संग ही जीता रहा।

इंसान को उसके शैतानी स्वभाव से पूरी तरह बचाया जाना चाहिए,

ताकि उसकी पापी प्रकृति मिटाई जा सके,

जिससे वो फिर वापस न आए, और इंसान का स्वभाव बदल सके।

इंसान को समझना होगा मार्ग जीवन का, उसके विकास

और अपने स्वभाव के बदलाव का।

उसे इस रास्ते के अनुसार ही काम करना चाहिए,

ताकि धीरे-धीरे ये बदलाव हो।

फिर वो जगमगाती रोशनी में जिएगा,

उसके काम ईश-इच्छा के अनुरूप होंगे,

और वो शैतान द्वारा भ्रष्ट किए गए स्वभाव को अपने उतार फेंकेगा।

शैतान के प्रभाव से मुक्ति पाएगा, पाप से पूरी तरह बाहर आएगा।

तभी इंसान को पूरी तरह बचाया जायेगा, बचाया जायेगा।

2

ईश-काम के इस चरण में ईश्वर वचन द्वारा

इंसान के स्वभाव की भ्रष्टता उजागर करे,

ताकि वो अपने सभी कामों में सही रास्ते पर चल पाये।

इस चरण में ज़्यादा अर्थ है छुटकारे के काम से।

यह ज्यादा फलदायी भी है—क्योंकि अब ये वचन का काम है।

वचन इंसान के जीवन की पूर्ति करे, उसका स्वभाव नया करे।

ये काम अधिक सम्पूर्ण है।

इस तरह अंत के दिनों में यह देहधारण

ईश्वर के देहधारण के अर्थ को पूरा करे,

इंसान के उद्धार की ईश-योजना पूरी करे।

इंसान को समझना होगा मार्ग जीवन का, उसके विकास

और अपने स्वभाव के बदलाव का।

उसे इस रास्ते के अनुसार ही काम करना चाहिए,

ताकि धीरे-धीरे ये बदलाव हो।

फिर वो जगमगाती रोशनी में जिएगा,

उसके काम ईश-इच्छा के अनुरूप होंगे,

और वो शैतान द्वारा भ्रष्ट किए गए स्वभाव को अपने उतार फेंकेगा।

शैतान के प्रभाव से मुक्ति पाएगा, पाप से पूरी तरह बाहर आएगा।

तभी इंसान को पूरी तरह बचाया जायेगा, बचाया जायेगा।

पूरी तरह बचाया जायेगा, बचाया जायेगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारण का रहस्य (4)' से रूपांतरित

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