252 परमेश्वर के प्रकटन की तलाश के लिए राष्ट्रीयता और जातीयता की धारणाएं तोड़ डालो

और इसलिए मैं कहता हूँ, कि तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन की तलाश करने के लिए अपनी राष्ट्रीयता और जातीयता की धारणाओं को तोड़ देना चाहिए।

1 इस बात की परवाह किए बिना कि तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश हो या किसी अन्य देश के हो, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और एक सृजित प्राणी के दृष्टिकोण से परमेश्वर के कार्य को देखना चाहिए। इस तरह, तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को सीमाओं में नहीं बाँधोगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि आजकल, बहुत से लोगों की धारणा है कि यह असंभव है कि परमेश्वर किसी विशेष राष्ट्र में या कुछ निश्चित लोगों के बीच दिखाई देगा। परमेश्वर के कार्य का कितना गहन महत्व है, और परमेश्वर का प्रकटन कितना महत्वपूर्ण है! मनुष्य की धारणाएँ और सोच संभवतः उन्हें कैसे माप सकती हैं?

2 परमेश्वर संपूर्ण मानव जाति का परमेश्वर है। वह स्वयं को किसी भी राष्ट्र या लोगों की निजी संपत्ति नहीं मानता है, बल्कि जैसी उसने योजना बनायी है उसके अनुसार वह, किसी भी रूप, राष्ट्र या लोगों द्वारा विवश हुए बिना, कार्य को करता जाता है। शायद तुमने इस रूप की कभी कल्पना भी न की हो, या शायद इस रूप के प्रति तुम्हारा दृष्टिकोण इनकार करने वाला हो, या शायद वह देश जहाँ परमेश्वर स्वयं को प्रकट करता है और जिन लोगों के बीच वह स्वयं को प्रकट करता है, वे सब ऐसे हों जिनके साथ सभी के द्वारा भेदभाव किया जाता हो और वे सब ऐसे हों जो पृथ्वी पर सर्वाधिक पिछड़े हुए हों। फिर भी परमेश्वर के पास अपनी बुद्धि है। अपनी महान सामर्थ्य के साथ, और अपने सत्य और स्वभाव के माध्यम से, उसने वास्तव में ऐसे लोगों के समूह को प्राप्त कर लिया है जो उसके साथ एक मन वाले हैं, ऐसे लोगों का समूह जिसे वह पूर्ण बनाने की कामना करता है—उसके द्वारा विजित समूह, जो सभी प्रकार के परीक्षणों, क्लेशों और उत्पीड़न को सहन करके, अंत तक उसका अनुसरण कर सकता है।

और इसलिए मैं कहता हूँ, कि तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन की तलाश करने के लिए अपनी राष्ट्रीयता और जातीयता की धारणाओं को तोड़ देना चाहिए। केवल इस प्रकार से ही तुम अपनी धारणाओं से विवश नहीं होगे; केवल इस प्रकार से ही तुम परमेश्वर के प्रकटन का स्वागत करने के योग्य होगे। अन्यथा, तुम शाश्वत अंधकार में रहोगे, और कभी भी परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त नहीं करोगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है" से रूपांतरित

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