1012 विश्वासी और अविश्वासी तो संगत हो ही नहीं सकते

1 प्रत्येक की एक अनूकूल नियति है। ये नियतियाँ प्रत्येक व्यक्ति के सार के अनुसार निर्धारित होती हैं और दूसरों से इनका कोई संबंध नहीं है। एक विश्वास करने वाले पति और विश्वास न करने वाली पत्नी के बीच कोई संबंध नहीं है, और विश्वास करने वाले बच्चों और विश्वास न करने वाले माता-पिता के बीच कोई संबंध नहीं है। ये दोनों असंगत प्रकार हैं। विश्राम में प्रवेश से पहले, उसके रक्त-संबंधी थे, किन्तु एक बार विश्राम में प्रवेश कर लेने पर, कहने के लिए उसके कोई रक्त-संबंधी नहीं होंगे। जो अपना कर्तव्य करते हैं और जो नहीं करते हैं वे शत्रु हैं; जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं और जो घृणा करते हैं वे एक दूसरे के विरोध में हैं। जो विश्राम में प्रवेश करते हैं और जो नष्ट किए जा चुके हैं वे दो अलग-अलग असंगत प्रकार के प्राणी है।

2 अपने कर्तव्यों को करने वाले प्राणी जीवित बच पाने में समर्थ होंगे, और अपने कर्तव्यों को पूरा नहीं करने वाले प्राणी नष्ट हो जाएँगे; इसके अलावा, यह सब अनंत काल के लिए होगा। आजकल लोगों में एक दूसरे के बीच रक्त-संबंध हैं, उनके बीच खून का रिश्ता है, किंतु बाद में यह सब ध्वस्त हो जाएगा। विश्वासी और अविश्वासी सुसंगत नहीं हैं बल्कि वे एक दूसरे के विरोधी है। वे जो विश्राम में हैं विश्वास करते हैं कि कोई परमेश्वर है और उसके प्रति आज्ञाकारी होते हैं। वे जो परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी नहीं हैं, वे सब नष्ट कर दिये गए होंगे। पृथ्वी पर परिवारों का अब और अस्तित्व नहीं होगा; माता-पिता या संतानें या पतियों और पत्नियों के बीच के संबंध कैसे हो सकते हैं? विश्वास और अविश्वास की अत्यंत असंगतता से ये रक्त-संबंध टूट चुके होंगे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" से रूपांतरित

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