2. परमेश्वर के देह बनने क महत्व

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

यह देह इंसान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि वह इंसान है और उससे भी बढ़कर वह परमेश्वर है, क्योंकि वह उस कार्य को कर सकता है जिसे हाड़-माँस का कोई सामान्य इंसान नहीं कर सकता, क्योंकि वह भ्रष्ट इंसान को बचा सकता है, जो पृथ्वी पर उसके साथ मिलकर रहता है। हालाँकि वह इंसान जैसा ही है, फिर भी देहधारी परमेश्वर किसी भी मूल्यवान व्यक्ति की तुलना में मनुष्यजाति के लिए अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह उस कार्य को कर सकता है जो परमेश्वर के आत्मा के द्वारा नहीं किया जा सकता, वह स्वयं परमेश्वर की गवाही देने के लिए परमेश्वर के आत्मा की तुलना में अधिक सक्षम है, और मनुष्यजाति को पूरी तरह से प्राप्त करने के लिए परमेश्वर के आत्मा की तुलना में अधिक समर्थ है। परिणामस्वरूप, यद्यपि यह देह सामान्य और साधारण है, लेकिन मनुष्यजाति के प्रति उसका योगदान और मनुष्यजाति के अस्तित्व के प्रति उसके मायने उसे अत्यंत बहुमूल्य बना देते हैं। इस देह का वास्तविक मूल्य और मायने किसी भी इंसान के लिए विशाल हैं। यद्यपि यह देह सीधे तौर पर शैतान को नष्ट नहीं कर सकता, फिर भी वह मनुष्यजाति को जीतने और शैतान को हराने के लिए अपने कार्य का उपयोग कर सकता है, शैतान को पूरी तरह से अपने प्रभुत्व में ला सकता है। चूँकि परमेश्वर देहधारी है, वह शैतान को हरा कर इंसान को बचा सकता है। वह सीधे तौर पर शैतान को नष्ट नहीं करता, बल्कि जिस मनुष्यजाति को शैतान ने भ्रष्ट किया है, उसे जीतने का कार्य करने के लिए वह देह बनता है। इस तरह से, वह अपने प्राणियों के बीच बेहतर ढंग से गवाही दे सकता है, और वह भ्रष्ट हुए इंसान को बेहतर ढंग से बचा सकता है। परमेश्वर के आत्मा के द्वारा शैतान के प्रत्यक्ष विनाश की तुलना में देहधारी परमेश्वर के द्वारा शैतान की पराजय अधिक बड़ी गवाही देती है और ज़्यादा प्रेरक है। देहधारी परमेश्वर सृजनकर्ता को जानने में मनुष्य की बेहतर ढंग से सहायता कर सकता है, और अपने प्राणियों के बीच स्वयं की बेहतर ढंग से गवाही दे सकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है' से उद्धृत

देह में उसके कार्य के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वह उन लोगों के लिए सटीक वचन, उपदेश और मनुष्यजाति के लिए अपनी विशिष्ट इच्छा को उन लोगों के लिए छोड़ सकता है जो उसका अनुसरण करते हैं, ताकि बाद में उसके अनुयायी देह में किए गए उसके समस्त कार्य और संपूर्ण मनुष्यजाति के लिए उसकी इच्छा को अत्यधिक सटीकता से, ठोस तरीके से उन लोगों तक पहुँचा सकें जो इस मार्ग को स्वीकार करते हैं। मनुष्यों के बीच केवल देहधारी परमेश्वर का कार्य ही सही अर्थों में परमेश्वर के मनुष्य के साथ रहने और उसके साथ जीने के सच को पूरा करता है। केवल यही कार्य परमेश्वर के चेहरे को देखने, परमेश्वर के कार्य की गवाही देने, और परमेश्वर के व्यक्तिगत वचन को सुनने की मनुष्य की इच्छा को पूरा करता है। देहधारी परमेश्वर उस युग का अंत करता है जब सिर्फ यहोवा की पीठ ही मनुष्यजाति को दिखाई देती थी, और साथ ही वह अज्ञात परमेश्वर में मनुष्यजाति के विश्वास करने के युग को भी समाप्त करता है। विशेष रूप से, अंतिम देहधारी परमेश्वर का कार्य संपूर्ण मनुष्यजाति को एक ऐसे युग में लाता है जो अधिक वास्तविक, अधिक व्यावहारिक, और अधिक सुंदर है। वह केवल व्यवस्था और सिद्धान्त के युग का ही अंत नहीं करता; बल्कि अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह मनुष्यजाति पर ऐसे परमेश्वर को प्रकट करता है जो वास्तविक और सामान्य है, जो धार्मिक और पवित्र है, जो प्रबंधन योजना के कार्य का खुलासा करता है और मनुष्यजाति के रहस्यों और मंज़िल को प्रदर्शित करता है, जिसने मनुष्यजाति का सृजन किया और प्रबंधन कार्य को अंजाम तक पहुँचाता है, और जिसने हज़ारों वर्षों तक खुद को छिपा कर रखा है। वह अस्पष्टता के युग का पूर्णतः अंत करता है, वह उस युग का समापन करता है जिसमें संपूर्ण मनुष्यजाति परमेश्वर का चेहरा खोजना तो चाहती थी मगर खोज नहीं पायी, वह उस युग का अंत करता है जिसमें संपूर्ण मनुष्यजाति शैतान की सेवा करती थी, और एक पूर्णतया नए युग में संपूर्ण मनुष्यजाति की अगुवाई करता है। यह सब परमेश्वर के आत्मा के बजाए देह में प्रकट परमेश्वर के कार्य का परिणाम है। जब परमेश्वर अपने देह में कार्य करता है, तो जो लोग उसका अनुसरण करते हैं, वे उन चीज़ों को खोजते और टटोलते नहीं हैं जो विद्यमान और अविद्यमान दोनों प्रतीत होती हैं, और वे अस्पष्ट परमेश्वर की इच्छा का अंदाज़ा लगाना बंद कर देते हैं। जब परमेश्वर देह में अपने कार्य को फैलाता है, तो जो लोग उसका अनुसरण करते हैं वे उसके द्वारा देह में किए गए कार्य को सभी धर्मों और पंथों में आगे बढ़ाएँगे, और वे उसके सभी वचनों को संपूर्ण मनुष्यजाति के कानों तक पहुँचाएँगे। उसके सुसमाचार को प्राप्त करने वाले जो सुनेंगे, वे उसके कार्य के तथ्य होंगे, ऐसी चीज़ें होंगी जो मनुष्य के द्वारा व्यक्तिगत रूप से देखी और सुनी गई होंगी, और तथ्य होंगे, अफ़वाह नहीं। ये तथ्य ऐसे प्रमाण हैं जिनसे वह कार्य को फैलाता है, और वे ऐसे साधन भी हैं जिन्हें वह कार्य को फैलाने में उपयोग करता है। बिना तथ्यों के उसका सुसमाचार सभी देशों और सभी स्थानों तक नहीं फैलेगा; बिना तथ्यों के केवल मनुष्यों की कल्पनाओं के सहारे, वह कभी भी संपूर्ण ब्रह्माण्ड पर विजय नहीं पा सकेगा। पवित्रात्मा मनुष्य के लिए अस्पृश्य और अदृश्य है, और पवित्रात्मा का कार्य मनुष्य के लिए परमेश्वर के कार्य के किसी और प्रमाण या तथ्यों को छोड़ने में असमर्थ है। मनुष्य परमेश्वर के असली चेहरे को कभी नहीं देख पाएगा, वह हमेशा ऐसे अस्पष्ट परमेश्वर में विश्वास करेगा जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। मनुष्य कभी भी परमेश्वर के मुख को नहीं देखेगा, न ही मनुष्य परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रूप से बोले गए वचनों को कभी सुन पाएगा। आखिर, मनुष्य की कल्पनाएँ खोखली होती हैं, वे परमेश्वर के असली चेहरे का स्थान कभी नहीं ले सकतीं; मनुष्य परमेश्वर के अंतर्निहित स्वभाव, और स्वयं परमेश्वर के कार्य का अभिनय नहीं कर सकता। स्वर्ग के अदृश्य परमेश्वर और उसके कार्य को केवल देहधारी परमेश्वर द्वारा ही पृथ्वी पर लाया जा सकता है जो मनुष्यों के बीच व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य करता है। परमेश्वर के लिए मनुष्य के सामने प्रकट होने का यही सबसे आदर्श तरीका है, जिसमें मनुष्य परमेश्वर को देखता है और परमेश्वर के असली चेहरे को जानने लगता है। इसे कोई गैर-देहधारी परमेश्वर संपन्न नहीं कर सकता।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है' से उद्धृत

इस बार, परमेश्वर कार्य करने आध्यात्मिक देह में नहीं, बल्कि एकदम साधारण देह में आया है। इसके अलावा, यह न केवल परमेश्वर के दूसरी बार देहधारण का देह है, बल्कि यह वही देह है जिसमें वह लौटकर आया है। यह बिलकुल साधारण देह है। इस देह में तुम ऐसा कुछ नहीं देख सकते जो इसे दूसरों से अलग करता हो, परंतु तुम उससे वह सत्य ग्रहण कर सकते हो जिसके विषय में पहले कभी नहीं सुना गया। यह तुच्छ देह, परमेश्वर के सभी सत्य के वचनों का मूर्त रूप है, जो अंत के दिनों में परमेश्वर के काम की ज़िम्मेदारी लेता है, और मनुष्यों के समझने के लिये परमेश्वर के संपूर्ण स्वभाव को अभिव्यक्त करता है। क्या तुम स्वर्ग के परमेश्वर को देखने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते हो? क्या तुम स्वर्ग के परमेश्वर को समझने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते हो? क्या तुम मनुष्यजाति के गंतव्य को जानने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते हो? वह तुम्हें वो सभी अकल्पनीय रहस्य बतायेगा—वो रहस्य जो कभी कोई इंसान नहीं बता सका, और तुम्हें वो सत्य भी बतायेगा जिन्हें तुम नहीं समझते। वह राज्य में तुम्हारे लिये द्वार है, और नये युग में तुम्हारा मार्गदर्शक है। ऐसी साधारण देह अनेक अथाह रहस्यों को समेटे हुये है। उसके कार्य तुम्हारे लिए गूढ़ हो सकते हैं, परंतु उसके कार्य का संपूर्ण लक्ष्य, तुम्हें इतना बताने के लिये पर्याप्त है कि वह कोई साधारण देह नहीं है, जैसा लोग मानते हैं। क्योंकि वह परमेश्वर की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही साथ अंत के दिनों में मानवजाति के प्रति परमेश्वर की परवाह को भी दर्शाता है। यद्यपि तुम उसके द्वारा बोले गये उन वचनों को नहीं सुन सकते, जो आकाश और पृथ्वी को कंपाते-से लगते हैं, या उसकी ज्वाला-सी धधकती आंखों को नहीं देख सकते, और यद्यपि तुम उसके लौह दण्ड के अनुशासन का अनुभव नहीं कर सकते, तुम उसके वचनों से सुन सकते हो कि परमेश्वर क्रोधित है, और जान सकते हो कि परमेश्वर मानवजाति पर दया दिखा रहा है; तुम परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव और उसकी बुद्धि को समझ सकते हो, और इसके अलावा, समस्त मानवजाति के लिये परमेश्वर की चिंता और परवाह को समझ सकते हो। अंत के दिनों में परमेश्वर के काम का उद्देश्य स्वर्ग के परमेश्वर को मनुष्यों के बीच पृथ्वी पर रहते हुए दिखाना है और मनुष्यों को इस योग्य बनाना है कि वे परमेश्वर को जानें, उसकी आज्ञा मानें, आदर करें, और परमेश्वर से प्रेम करें। यही कारण है कि वह दूसरी बार देह में लौटकर आया है। यद्यपि आज मनुष्य देखता है कि परमेश्वर मनुष्यों के ही समान है, उसकी एक नाक और दो आँखें हैं और वह एक साधारण परमेश्वर है, अंत में परमेश्वर तुम लोगों को दिखाएगा कि अगर यह मनुष्य नहीं होता तो स्वर्ग और पृथ्वी एक अभूतपूर्व बदलाव से होकर गुज़रते; अगर यह मनुष्य नहीं होता तो, स्वर्ग मद्धिम हो जाता, पृथ्वी पर उथल-पुथल हो जाती, समस्त मानवजाति अकाल और महामारियों के बीच जीती। परमेश्वर तुम लोगों को दर्शायेगा कि यदि अंत के दिनों में देहधारी परमेश्वर तुम लोगों को बचाने के लिए नहीं आया होता तो परमेश्वर ने समस्त मानवजाति को बहुत पहले ही नर्क में नष्ट कर दिया होता; यदि यह देह नहीं होता तो तुम लोग सदैव ही कट्टर पापी होते, और तुम हमेशा के लिए लाश बन जाते। तुम सबको यह जानना चाहिये कि यदि यह देह नहीं होता तो समस्त मानवजाति को एक अवश्यंभावी संकट का सामना करना होता, और अंत के दिनों में मानवजाति के लिये परमेश्वर के कठोर दण्ड से बच पाना कठिन होता। यदि इस साधारण शरीर का जन्म नहीं होता तो तुम सबकी दशा ऐसी होती जिसमें तुम लोग जीने में सक्षम न होते हुए जीवन की भीख माँगते और मृत्यु के लिए प्रार्थना करते लेकिन मर न पाते; यदि यह देह नहीं होता तो तुम लोग सत्य को नहीं पा सकते थे और न ही आज परमेश्वर के सिंहासन के पास आ पाते, बल्कि तुम लोग परमेश्वर से दण्ड पाते क्योंकि तुमने जघन्य पाप किये हैं। क्या तुम सब जानते हो, यदि परमेश्वर का वापस देह में लौटा न होता, तो किसी को भी उद्धार का अवसर नहीं मिलता; और यदि इस देह का आगमन न होता, तो परमेश्वर ने बहुत पहले पुराने युग को समाप्त कर दिया होता? अब जबकि यह स्पष्ट है, क्या तुम लोग अभी भी परमेश्वर के दूसरी बार के देहधारण को नकार सकते हो? जब तुम लोग इस साधारण मनुष्य से इतने सारे लाभ प्राप्त कर सकते हो, तो तुम लोग उसे प्रसन्नतापर्वूक स्वीकार क्यों नहीं करते हो?

परमेश्वर का कार्य ऐसा है जिसे तुम समझ नहीं सकते। यदि तुम न तो पूरी तरह से समझ सकते हो कि तुम्हारा निर्णय सही है या नहीं, और न ही तुम जान सकते हो कि परमेश्वर का कार्य सफल होगा या नहीं, तब तुम अपनी किस्मत क्यों नहीं आज़माते और क्यों नहीं यह देखते हो कि यह साधारण मनुष्य तुम्हारे बड़े काम का है या नहीं और परमेश्वर ने वास्तव में बहुत महान काम किया है या नहीं? हालांकि मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि नूह के दिनों में लोग इस हद तक खाते और पीते थे, विवाहों में लगे रहते थे, कि यह सब देखना परमेश्वर के लिए असहनीय हो गया था, इसलिए उसने समस्त मानवजाति के विनाश के लिये एक बहुत बड़ी बाढ़ भेजी और बस नूह के परिवार के आठ सदस्यों, और सभी प्रकार के पशु-पक्षियों को बचाया। हालाँकि अंत के दिनों में जिन्हें परमेश्वर ने जीवित बचाकर रखा, ये वे लोग हैं जो अंत तक परमेश्वर के स्वामिभक्त रहे हैं। यद्यपि दोनों ही काल बहुत अधिक भ्रष्टाचार के युग थे जो परमेश्वर के लिये असहनीय था, और दोनों ही युगों में मानवजाति का इतना पतन हो चुका था कि उन्होंने यह नकार दिया कि परमेश्वर उनका प्रभु है, फिर भी परमेश्वर ने सिर्फ नूह के समय के सभी लोगों को नष्ट किया। दोनों युगों में मानवजाति ने परमेश्वर को बहुत दुखी किया, फिर भी परमेश्वर ने अंत के दिनों में मनुष्यों के प्रति संयम बरता है। ऐसा क्यों है? क्या तुम सबने कभी इस बात पर विचार नहीं किया? यदि तुम लोग सचमुच नहीं जानते, तो मैं तुम्हें बताता हूँ। अंत के दिनों में मनुष्यों के प्रति परमेश्वर का धीरज धरने का कारण यह नहीं है कि वे नूह के दिनों की तुलना में कमतर भ्रष्ट हैं या उन्होंने परमेश्वर के सामने पश्चाताप किया है और यह कारण तो बिलकुल नहीं है कि परमेश्वर तकनीकी विकास के अत्यंत उन्नत होने के कारण अंत के दिनों में मनुष्यों का सर्वनाश नहीं कर सकता। बल्कि कारण यह है कि अंत के दिनों में परमेश्वर को मनुष्यों के एक समूह में कार्य करना है, और यह कार्य परमेश्वर अपने देहधारण में स्वयं करना चाहता है। साथ ही परमेश्वर इस समूह के एक भाग को अपने उद्धार का पात्र, और अपनी प्रबंधन योजना का परिणाम बनाना चाहता है, और इन लोगों को अगले युग में प्रवेश कराना चाहता है। इसलिए चाहे कुछ भी हो जाए, परमेश्वर ने जो कीमत चुकाई है वह पूरी तरह से अंत के दिनों में उसके देहधारी देह द्वारा किये जाने वाले कार्य की तैयारी में है। जिस तथ्य तक तुम लोग आज पहुँचे हो यह इसी देह के कारण है। क्योंकि परमेश्वर इस देह में जीता है इसीलिए तुम सबके पास जीवित रहने का मौका है। यह सभी उत्तम भाग्य जो तुम सबने पाया है, वह इस साधारण मनुष्य के कारण है। न केवल इतना, बल्कि अंत में समस्त जातियाँ इस साधारण मनुष्य की उपासना करेंगी साथ ही साथ उसे धन्यवाद देंगी और इस मामूली व्यक्ति की आज्ञा का पालन करेंगी, क्योंकि उसके द्वारा लाये गए सत्य, जीवन और मार्ग ने समस्त मानवजाति को बचाया है, परमेश्वर और मनुष्यों के बीच के संघर्ष को शांत किया है, परमेश्वर और मनुष्यों के बीच की दूरी कम की है, और परमेश्वर और मनुष्यों के के बीच के विचारों के संपर्क का रास्ता खोला है। इसी ने परमेश्वर को और अधिक महान महिमा प्रदान की है। क्या ऐसा साधारण व्यक्ति तुम्हारे विश्वास और श्रद्धा के योग्य नहीं है? क्या यह साधारण देह, मसीह कहलाने के योग्य नहीं है? क्या ऐसा साधारण मनुष्य, मनुष्यों के बीच परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं हो सकता? क्या ऐसा व्यक्ति जिसने मानवजाति को आपदा से बचाया है, वह तुम लोगों के प्रेम और अवलंबन के योग्य नहीं हो सकता? यदि तुम लोग उसके मुख से निकले सत्य को नकारते हो, और तुम लोग अपने बीच में उसके अस्तित्व का तिरस्कार करते हो, तो तुम लोगों का अंत में क्या होगा?

अंत के दिनों में परमेश्वर के सभी काम इस साधारण मनुष्य के द्वारा किये जाते हैं। वह तुम्हें सब कुछ प्रदान करेगा और वह तुमसे जुड़ी हर बात तय कर सकेगा। क्या ऐसा व्यक्ति वैसा हो सकता है जैसा तुम लोग सोचते हो : एक ऐसा व्यक्ति जो इतना अधिक साधारण है कि वह उल्लेख करने योग्य भी नहीं है? क्या उसका सत्य तुम लोगों को पूर्ण रूप से आश्वस्त करने योग्य नहीं है? क्या उसके कार्य की गवाही तुम लोगों को पूर्ण रूप से आश्वस्त करने योग्य नहीं है? या फिर वह मार्ग जिस पर वह तुम्हारी अगुवाई करता है, इस योग्य नहीं है कि तुम लोग उसका अनुसरण करो? सबकुछ कहने करने के बाद वह कौन-सी बात है जिसके कारण तुम लोग उससे घृणा करते हो और उसे अपने आप से दूर रखते हो और उससे बचकर रहते हो? यही व्यक्ति सत्य की अभिव्यक्ति करता है, यह वही व्यक्ति है जो सत्य प्रदान करता है, और यह वही व्यक्ति है जो तम लोगों को अनुसरण करने का मार्ग प्रदान करता है। क्या अब भी तुम लोगों को इन सत्यों के भीतर परमेश्वर के कार्य के संकेत नहीं मिल पा रहे? यीशु के कार्य के बिना मानवजाति सूली से उतर नहीं सकती थी, परन्तु बिना आज के देहधारण के वे लोग कभी परमेश्वर की सराहना नहीं पा सकते या नये युग में प्रवेश नहीं कर सकते जो सूली से उतर गए हैं। इस साधारण मनुष्य के आगमन के बिना, तुम लोगों को कभी भी यह अवसर नहीं मिलता या तुम लोग कभी भी इस योग्य नहीं हो सकते थे कि परमेश्वर के सच्चे मुखमंडल का दर्शन कर सको, क्योंकि तुम लोग ऐसी वस्तु हो जिसे बहुत पहले ही नष्ट कर दिया जाना चाहिए था। परमेश्वर के द्वितीय देहधारण के आगमन के कारण, परमेश्वर ने तुम लोगों को क्षमा कर दिया है और तुम लोगों पर दया दिखाई है। खैर, मैं अंत में इन वचनों के साथ तुम लोगों से विदा लेना चाहता हूँ : यह साधारण मनुष्य जो देहधारी परमेश्वर है, तुम लोगों के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। यही वह सबसे बड़ा काम है जिसे परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच पहले ही कर दिया है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है' से उद्धृत

मसीह द्वारा बोले गए सत्य पर भरोसा किए बिना जो लोग जीवन प्राप्त करना चाहते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे बेतुके लोग हैं, और जो मसीह द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते हैं, वे कोरी कल्पना में खोए हैं। और इसलिए मैं कहता हूँ कि वे लोग जो अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार नहीं करते हैं सदा के लिए परमेश्वर की घृणा के भागी होंगे। मसीह अंत के दिनों के दौरान राज्य में जाने के लिए मनुष्य का प्रवेशद्वार है, और ऐसा कोई नहीं जो उससे कन्नी काटकर जा सके। मसीह के माध्यम के अलावा किसी को भी परमेश्वर द्वारा पूर्ण नहीं बनाया जा सकता। तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, और इसलिए तुम्हें उसके वचनों को स्वीकार करना और उसके मार्ग का पालन करना चाहिए। सत्य को प्राप्त करने में या जीवन का पोषण स्वीकार करने में असमर्थ रहते हुए तुम केवल आशीष प्राप्त करने के बारे में नहीं सोच सकते हो। मसीह अंत के दिनों में आता है ताकि वह उसमें सच्चा विश्वास करने वाले सभी लोगों को जीवन प्रदान कर सके। उसका कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है, और उसका कार्य वह मार्ग है जिसे उन सभी लोगों को अपनाना चाहिए जो नए युग में प्रवेश करेंगे। यदि तुम उसे पहचानने में असमर्थ हो, और इसकी बजाय उसकी भर्त्सना, निंदा, या यहाँ तक कि उसे उत्पीड़ित करते हो, तो तुम्हें अनंतकाल तक जलाया जाना तय है और तुम परमेश्वर के राज्य में कभी प्रवेश नहीं करोगे। क्योंकि यह मसीह स्वयं पवित्र आत्मा की अभिव्यक्ति है, और परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वह जिसे परमेश्वर ने पृथ्वी पर करने के लिए अपना कार्य सौंपा है। और इसलिए मैं कहता हूँ कि यदि तुम वह सब स्वीकार नहीं करते हो जो अंत के दिनों के मसीह के द्वारा किया जाता है, तो तुम पवित्र आत्मा की निंदा करते हो। पवित्र आत्मा की निंदा करने वालों को जो प्रतिशोध सहना होगा वह सभी के लिए स्वत: स्पष्ट है। मैं तुम्हें यह भी बताता हूँ कि यदि तुम अंत के दिनों के मसीह का प्रतिरोध करोगे, यदि तुम अंत के दिनों के मसीह को ठुकराओगे, तो तुम्हारी ओर से परिणाम भुगतने वाला कोई अन्य नहीं होगा। इतना ही नहीं, इस दिन के बाद तुम्हें परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त करने का दूसरा अवसर नहीं मिलेगा; यदि तुम अपने प्रायश्चित का प्रयास भी करते हो, तब भी तुम दोबारा कभी परमेश्वर का चेहरा नहीं देखोगे। क्योंकि तुम जिसका प्रतिरोध करते हो वह मनुष्य नहीं है, तुम जिसे ठुकरा रहे हो वह कोई अदना प्राणी नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम जानते हो कि इसके क्या परिणाम होंगे? तुमन कोई छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि एक जघन्य अपराध किया होगा। और इसलिए मैं सभी को सलाह देता हूँ कि सत्य के सामने अपने जहरीले दाँत मत दिखाओ, या छिछोरी आलोचना मत करो, क्योंकि केवल सत्य ही तुम्हें जीवन दिला सकता है, और सत्य के अलावा कुछ भी तुम्हें पुनः जन्म लेने नहीं दे सकता, और न ही तुम्हें दोबारा परमेश्वर का चेहरा देखने दे सकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है' से उद्धृत

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