726 सृजित जीव को होना चाहिये परमेश्वर की दया पर

1

कुछ भी चाहे परमेश्वर तुम से, तुम दे दो अपना सर्वस्व उसे।

कुछ भी चाहे परमेश्वर तुम से, तुम दे दो अपना सर्वस्व उसे।

अंत तक दिखाओ उसके प्रति निष्ठा अपनी।

अगर देखो सिंहासन पर हर्षित मुस्कान उसकी,

तो भले ही उसी दिन छोड़ दो जगत पीछे,

बंद करते वक्त अपनी आँखें सदा के लिये,

हँस सकते हो तुम आनंद से, आनंद से।

ओ सृजित जीव, क्या कर सकते हो तुम परमेश्वर के लिये?

ओ सृजित जीव, क्या कर सकते हो तुम परमेश्वर के लिये, परमेश्वर के लिये?

छोड़ दो ख़ुद को दया पर उसकी, दया पर उसकी।

जब तक प्रसन्न है, संतुष्ट है परमेश्वर, करने दो उसे उसके मन की।

अंदर से कैसे शिकायत कर सके कोई?

2

जब तक हो धरती पर तुम, निभाओ आख़िरी फ़र्ज़ अपना पूरी शक्ति से,

परमेश्वर की ख़ातिर, और करो संतुष्ट उसे।

पतरस की तरह, जिसने चाहा परमेश्वर को प्राणांत तक,

चढ़ा दिया गया सूली पर परमेश्वर की ख़ातिर।

जो कुछ करते हो तुम उससे, करो संतुष्ट परमेश्वर को।

ओ सृजित जीव, क्या कर सकते हो तुम परमेश्वर के लिये?

ओ सृजित जीव, क्या कर सकते हो तुम परमेश्वर के लिये,

परमेश्वर के लिये, परमेश्वर के लिये, परमेश्वर के लिये?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या' के 'अध्याय 41' से रूपांतरित

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