200 ज्योति है परमेश्वर का वचन

1

जगा दिया मुझे पूरब की बिजली ने,

देखा परमेश्वर का वचन देह में प्रकट होते मैंने।

न्याय और ताड़ना के वचन,

जीतते और बचाते हैं मुझे।

टुकड़े-टुकड़े कर दिये मेरे, नाकामियों, इम्तहानों, यातनाओं ने।

उजागर हुई भ्रष्टता मेरी

अहंकारी था मैं, सिर झुका लिया मैंने।

मलिनता में, अपनी नालायकी देखी मैंने।

अपनी हैसियत और पुराने कर्ज़ों के संग,

नीच और भ्रष्ट, क्या हो सकता था

परमेश्वर की सेवा के लायक मैं?

आस्था की सही राह पर ला खड़ा किया मुझे,

रुकावटों, नाकामियों ने।

सदमे, शुद्धिकरण और मुसीबतें

बन गईं ज़ंजीर मेरे उद्धार की।

बाँध दिया इन्होंने परमेश्वर के प्रेम से मुझे,

जानता हूँ धार्मिक स्वभाव परमेश्वर का, कितनी बड़ी आशीष है।

शुद्ध करते और बचाते हैं परमेश्वर के वचन मुझे,

ताकि जी सकूँ असली ज़िंदगी मैं।

परमेश्वर को जानकर, देकर गवाही उसकी,

प्रेम करूँगा, सेवा करूँगा सदा परमेश्वर की मैं।

2

देहधारी परमेश्वर, उद्धारक फिर आया है।

न्याय, दुखों, परीक्षणों के ज़रिये,

आ गया हूँ रूबरू परमेश्वर के मैं।

उद्धार का आनंद ले लिया मैंने,

जान गया हूँ व्यवहारिक परमेश्वर को मैं।

ज़िंदा नरक के अंधेरों में सीख गया हूँ,

किससे नफ़रत, किससे मोहब्बत करूँ मैं।

परमेश्वर के वचनों से प्रबुद्ध, समझ गया हूँ ज़िंदगी के राज़ मैं।

भ्रष्ट इंसान की देह शैतान का देहधारण है।

शुद्ध करते और बचाते हैं परमेश्वर के वचन मुझे,

ताकि जी सकूँ असली ज़िंदगी मैं।

परमेश्वर को जानकर, देकर गवाही उसकी,

प्रेम करूँगा, सेवा करूँगा सदा परमेश्वर की मैं।

3

परमेश्वर का अपूर्व उत्कर्ष है ये,

प्रेम कर सकता हूँ, गवाही दे सकता हूँ मैं उसकी।

उसके प्रेम का प्रतिदान दूँ, सिर्फ़ यही ख़्वाहिश करता हूँ मैं।

उसके न्याय और ताड़ना के मायने हैं,

ये परमेश्वर के प्रेम को प्रकट करते हैं।

श्रद्धा से परमेश्वर को मानूँ, प्रेम करूँ, ये फ़र्ज़ है मेरा।

उसका वफ़ादार रहूँ, गवाही दूँ, ये फ़र्ज़ है मेरा।

उसकी इच्छा और महिमा की ख़ातिर, ख़ुद को अर्पित करता हूँ मैं।

शुद्ध करते और बचाते हैं परमेश्वर के वचन मुझे,

ताकि जी सकूँ असली ज़िंदगी मैं।

परमेश्वर को जानकर, देकर गवाही उसकी,

प्रेम करूँगा, सेवा करूँगा सदा परमेश्वर की मैं।

शुद्ध करते और बचाते हैं परमेश्वर के वचन मुझे,

ताकि जी सकूँ असली ज़िंदगी मैं।

परमेश्वर को जानकर, देकर गवाही उसकी,

प्रेम करूँगा, सेवा करूँगा सदा परमेश्वर की मैं।

पिछला: 199 जैसे ही मैं कोहरे में जागी

अगला: 201 सत्य का अनुसरण करना बहुत सार्थक है

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें