प्रश्न 1: मैंने बीस साल से भी ज़्यादा तक बाइबल का अध्ययन किया है। मैं यकीन से कह सकती हूँ कि बाइबल के बाहर परमेश्वर के कोई वचन नहीं हैं। परमेश्वर के सारे वचन बाइबल में हैं। बाइबल से भटकनेवाली कोई भी चीज़ धर्म के विरुद्ध है और भ्रम फैलानेवाली है!

उत्तर: "बाइबल के बाहर परमेश्वर के कोई वचन नहीं हैं, बाइबल से भटकने वाली कोई भी चीज़ धर्म के विरुद्ध है," बाइबल को समझनेवाले सभी लोग उस प्रक्रिया को जानते हैं जिससे बाइबल तैयार हुई। उस वक्त संपादकों में मतभेद और कुछ चीज़ें छोड़ दिये जाने के कारण नबियों द्वारा बताये गए परमेश्वर के कुछ वचन पुराने नियम में दर्ज नहीं हो पाये थे। यह खुले तौर पर सबकी मानी हुई बात है। तो फिर आप कैसे कह सकती हैं कि परमेश्वर के कार्य और उनके वचन बाइबल से बाहर नहीं हैं? क्या नबियों की छूटी हुई भविष्यवाणियाँ परमेश्वर के वचन नहीं हैं? नये नियम में भी, प्रभु यीशु ने उन दर्ज किये गये वचनों से ज़्यादा बोला था। यूहन्ना में कहा गया है: "और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे संसार में भी न समातीं" (यूहन्ना 21:25)। यह इस बात की पुष्टि करता है कि प्रभु यीशु के कार्य और वचन भी नये नियम में पूरी तरह से दर्ज नहीं किये गए थे। इसलिए, "बाइबल से बाहर परमेश्वर के कोई कार्य या वचन नहीं हैं" कहना तथ्यों के मुताबिक नहीं है। हमें यह भी मालूम होना चाहिए कि, पुराना नियम हो या नया नियम, उन्हें परमेश्वर के अपने एक चरण का कार्य पूरा कर लेने के बाद मनुष्य ने दर्ज और तैयार किया था। शुरू में, बाइबल में सिर्फ पुराना नियम था। प्रभु यीशु का सारा कार्य और वचन पुराने नियम के बाहर का था। अगर हम इस बात पर चलें कि बाइबल से बाहर की हर चीज़ धर्म के विरुद्ध है, तो क्या हमने प्रभु यीशु के कार्य और वचन की निंदा नहीं की है। भाइयो और बहनो, इन तथ्यों से हम देख सकते हैं कि यह कहना कि "बाइबल से बाहर परमेश्वर के कोई कार्य या वचन नहीं हैं, और बाइबल से बाहर की हर चीज़ धर्म के विरुद्ध है" गलत है!

सत्य के इस पहलू के बारे में, आइए, देखें कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन क्या कहते हैं। "यीशु के समय में, यीशु ने अपने में पवित्र आत्मा के कार्य के अनुसार यहूदियों और उन सब की अगुवाई की थी जिन्होंने उस समय उसका अनुसरण किया था। उसने जो कुछ किया उस में उसने बाइबल को आधार के रूप में नहीं लिया, बल्कि वह अपने कार्य के अनुसार बोला; बाइबल क्या कहती है उसने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, और न ही उसने अपने अनुयायियों की अगुवाई करने के लिए बाइबल में किसी मार्ग को ढूँढ़ा था। ठीक उस समय से ही जब उसने कार्य करना आरम्भ किया, उसने पश्चाताप—एक शब्द जिसके बारे में पुराने विधान की भविष्यवाणियों में बिलकुल भी उल्लेख नहीं किया गया था—के मार्ग को फैलाया। न केवल उसने बाइबल के अनुसार कार्य नहीं किया, बल्कि उसने एक नए मार्ग की अगुवाई भी की, और नया कार्य किया। जब उसने उपदेश दिए तब उसने कभी भी बाइबल को संदर्भित नहीं किया। व्यवस्था के युग के दौरान, बीमारों को चंगा करने और दुष्टात्माओं को निकालने के उसके चमत्कारों को करने के योग्य कोई कभी नहीं हो पाया था। उनका कार्य, उनकी शिक्षाएँ, उनका अधिकार—व्यवस्था के युग के दौरान किसी ने भी इसे नहीं किया था। यीशु ने मात्र अपना नया काम किया, और भले ही बहुत से लोगों ने बाइबल का उपयोग करते हुए उसकी निन्दा की—और यहाँ तक कि उसे सलीब पर चढ़ाने के लिए पुराने विधान का उपयोग किया—फिर भी उसका कार्य पुराने विधान से बढ़कर था; यदि ऐसा न होता, तो लोग उसे सलीब पर क्यों चढ़ाते? क्या यह इसलिए नहीं था क्योंकि पुराने विधान में उसकी शिक्षाओं, और बीमारों को चंगा करने और दुष्टात्माओं को निकालने की उसकी योग्यता के बारे में कुछ नहीं कहा गया था? …लोगों को, ऐसा प्रतीत हुआ मानो उसके कार्य का कोई आधार नहीं था, और उस में बहुत कुछ ऐसा था जो पुराने विधान के अभिलेखों से असंगत था। क्या यह मूर्खता नहीं है? क्या परमेश्वर के कार्य में सिद्धांतों को लागू किए जाने की आवश्यकता है? और क्या इसे भविष्यवक्ताओं के पूर्वकथनों के अनुसार अवश्य होना चाहिए? आख़िरकार, कौन बड़ा हैः परमेश्वर या बाइबल? परमेश्वर का कार्य बाइबल के अनुसार क्यों होना चहिए? क्या ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर को बाइबल से आगे बढ़ने का कोई अधिकार नहीं है? क्या परमेश्वर बाइबल से दूर नहीं जा सकता है और अन्य काम नहीं कर सकता है? यीशु और उनके शिष्यों ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया? यदि उसे सब्त का पालन करना होता और पुराने विधान की आज्ञाओं के अनुसार अभ्यास करना होता, तो आने के बाद यीशु ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया, बल्कि इसके बजाए उसने पाँव धोए, सिर को ढका, रोटी तोड़ी और दाखरस पीया? क्या यह सब पुराने विधान की आज्ञाओं से अनुपस्थित नहीं हैं? यदि यीशु पुराने विधान का सम्मान करता, तो उसने इन सिद्धांतो का अनादर क्यों किया? तुम्हें जानना चाहिए कि पहले कौन आया था, परमेश्वर या बाइबल! सब्त का प्रभु होते हुए, क्या वह बाइबल का भी प्रभु नहीं हो सकता है?" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (1)")। अब तक हमें लग रहा था, कि बाइबल से भटकनेवाली कोई भी चीज़ धर्म के विरुद्ध है। आज सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद हम समझ पाये हैं कि परमेश्वर का कार्य, बाइबल या बाइबल के संदर्भों की बुनियाद पर कभी नहीं था, और यही नहीं, वे अगुवाई करने के लिए बाइबल में से कोई रास्ता भी नहीं खोजते। इसके बजाय वे लोगों को एक नया मार्ग दिखाते हैं और नया कार्य करते हैं। भाइयो और बहनो, परमेश्वर सभी चीज़ों के शासक हैं। वे सिर्फ विश्राम के दिन के प्रभु नहीं, उससे भी बढ़कर बाइबल के भी प्रभु हैं। परमेश्वर के पास अपना खुद का कार्य करने और मानवजाति की ज़रूरतों के अनुसार नया कार्य करने का अधिकार है इसलिए, यह बात टिक नहीं सकती कि "बाइबल से बाहर प्रभु के कोई कार्य या वचन नहीं हैं, और बाइबल से भटकनेवाली हर चीज़ धर्म के विरुद्ध है"।

बाइबल परमेश्वर के, पहले के दो चरणों के कार्य का दस्तावेज़ है। पुराना नियम, व्यवस्था के युग में इसराइल में यहोवा परमेश्वर के कार्य का दस्तावेज़ है, यानी, हम व्यवस्था के युग में परमेश्वर के जिस कार्य की अक्सर बात किया करते हैं। नया नियम, अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु के कार्य का दस्तावेज है, यानी, हम अनुग्रह के युग में परमेश्वर के जिस कार्य की अक्सर बात किया करते हैं। व्यवस्था के युग में परमेश्वर का कार्य बाइबल की बुनियाद पर नहीं टिका था, और अनुग्रह के युग में परमेश्वर का कार्य भी बाइबल की बुनियाद पर नहीं टिका था। परमेश्वर का कोई भी कार्य बाइबल की बुनियाद पर नहीं किया गया था। बाइबल का उपयोग इंसान द्वारा इंसान के काम, उसके उपदेशों और उसकी सेवा को मापने के लिए ठीक है, लेकिन हमें इस आधार पर मापना चाहिए कि पवित्र आत्मा से कुछ प्रबुद्धता मिली है या नहीं। अगर हम हमेशा परमेश्वर के कार्य को मापने के लिए ही बाइबल का इस्तेमाल करेंगे, तो फिर हम ऐसे लोग बन जाएंगे जो परमेश्वर के कार्य का विरोध करते हैं। बिल्कुल फरीसियों की तरह, जिन्होंने प्रभु यीशु का विरोध किया था। वे जिद पकड़ कर धर्मग्रंथों से चिपके हुए थे और उन्होंने धर्मग्रंथों के पैमाने पर ही प्रभु यीशु के कार्य को मापा था। जब उन्होंने देखा कि प्रभु यीशु के कार्य और वचन पुराने नियम से ज़्यादा थे, तो उन्होंने पागलपन की हद तक उनकी निंदा की और उनका तिरस्कार किया। इन्हीं लोगों ने परमेश्वर के कार्य का विरोध किया था और परमेश्वर द्वारा निंदित किये गए थे। क्या हम अभी भी ऐसे तथ्य को नकारेंगे?

"बाइबल के बारे में रहस्य का खुलासा" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

पिछला: प्रश्न 9: अगर हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार कर लें तो क्या गारंटी है कि हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा जाएंगे?

अगला: प्रश्न 2: बाइबल के सत्य पहले ही पूर्ण हैं। परमेश्वर में हमारी आस्था के लिए हमारे पास बाइबल का होना काफी है।हमें और कोई नये वचन नहीं चाहिए!

दुनिया आपदा से घिर गई है। यह हमें क्या चेतावनी देती है? आपदाओं के बीच हम परमेश्वर द्वारा कैसे सुरक्षित किये जा सकते हैं? इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारे साथ हमारी ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ें।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

संबंधित सामग्री

2. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य महान श्वेत सिंहासन का न्याय है, जिसकी प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भविष्यवाणी की गई है

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:"क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" (1 पतरस 4:17)।"फिर मैं ने एक बड़ा...

2. बाइबल के धर्म-शास्त्रीय ज्ञान पर भरोसा करते हुए यदि कोई परमेश्वर पर विश्वास करता है तो इसका क्या अंजाम होगा?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:"ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है। और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि...

1. प्रभु यीशु ने फरीसियों को क्यों शाप दिया था? फरीसियों का सार क्या था?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:"तुम भी अपनी परम्पराओं के कारण क्यों परमेश्‍वर की आज्ञा टालते हो? क्योंकि परमेश्‍वर ने कहा है, 'अपने पिता और अपनी...

1. विभिन्न युगों में परमेश्वर को अलग-अलग नामों से क्यों बुलाया जाता है? परमेश्वर के नामों के महत्व क्या हैं?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:क्या यीशु का नाम—"परमेश्वर हमारे साथ"—परमेश्वर के स्वभाव को उसकी समग्रता से व्यक्त कर सकता है? क्या यह पूरी तरह...

वचन देह में प्रकट होता है अंत के दिनों के मसीह के कथन (संकलन) अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर उपदेश और वार्तालाप अंत के दिनों के मसीह के लिए गवाहियाँ परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें