29 सर्वशक्तिमान परमेश्वर किताब खोलता है

1

हाथों में अपने, सात सितारे लिए हुए है परमेश्वर।

सात आत्माओं को करता वहन, सात आँखों वाला है परमेश्वर,

सात मुहरों को तोड़ता, किताब खोलता है परमेश्वर।

सात महामारियों का प्रबंध करता, सात कटोरों को पकड़े है परमेश्वर।

बनाए हैं जो उसने प्राणी बहुतेरे

और जो उसने पूरी की हैं सारी चीज़ें

उसका सिंहासन वे ऊँचा करते, उसकी महिमा और स्तुति गाते।

सच्चे और महिमामय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

तू ही है सब कुछ! तुझसे ही होता सब कुछ पूरा।

सच्चे और महिमामय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

तूने हासिल किया सब कुछ। तुझसे ही पूरा होता सब कुछ।

उज्जवल है, मुक्त है, बलवान और आज़ाद है सब कुछ।

उज्जवल है, मुक्त है, बलवान और आज़ाद है सब कुछ।

सच्चे और महिमामय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

कुछ नहीं छिपा है; तुझे राज़ सारे मालूम हैं।

2

सात गर्जनों को खोलता; सात तुरहियाँ बजायीं कब की उसने।

भरा-पूरा, सजीव, अनंत से अनंत तक।

सभी गाते तेरा दिल से गुणगान।

हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तूने किया न्याय अपने विरोधियों का।

तू अपना क्रोध दिखाता, तू अपना प्रताप दिखाता।

तूने दिखा दी अपनी महिमा, इसकी नहीं कोई तुलना,

महिमा तेरी बनी रहेगी सदा सर्वदा।

सच्चे और महिमामय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

सभी जग जायें, ज़ोर-शोर से गीत गायें,

पूरी शक्ति से स्तुति करें तेरी, ओ महिमामय सच्चे परमेश्वर।

तू है पूर्ण सत्य, तू है सर्वशक्तिमान।

उज्जवल है, मुक्त है, बलवान और आज़ाद है सब कुछ।

उज्जवल है, मुक्त है, बलवान और आज़ाद है सब कुछ।

सच्चे और महिमामय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

कुछ नहीं छिपा है; तुझे राज़ सारे मालूम हैं।

सच्चे और महिमामय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

कुछ नहीं छिपा है; तुझे राज़ सारे मालूम हैं।

3

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, सर्वथा सत्य परमेश्वर, हासिल करता सब कुछ।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, सर्वथा सत्य परमेश्वर, हासिल करता सब कुछ।

उज्जवल है, मुक्त है, बलवान और आज़ाद है सब कुछ।

उज्जवल है, मुक्त है, बलवान और आज़ाद है सब कुछ।

सच्चे और महिमामय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

कुछ नहीं छिपा है; तुझे राज़ सारे मालूम हैं।

सच्चे और महिमामय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

कुछ नहीं छिपा है; तुझे राज़ सारे मालूम हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 34' से रूपांतरित

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