888 इंसान के लिए ईश्वर के प्यार की कोई सीमा नहीं

1

ईश-कार्य का अनुभव करने पर, दुख से गुज़रना होगा।

ईश्वर के अच्छे इरादे हैं उसमें।

तुम देखो कि ईश्वर ने किया जो भी है वो लोगों को बचाने को,

और पूरी तरह उसका प्यार है।

चाहे तुम लोग देखो सब उस बुद्धि के नज़रिये से जो है ईश्वर के कार्य में,

ईश्वर के कार्य के चरणों और तरीकों के नज़रिये से,

या कार्य की अवधि के नज़रिये से,

या उसकी सटीक व्यवस्था और योजनाओं के नज़रिए से, सब में उसका प्यार है।

ईश्वर के लोगों से व्यवहार में लापरवाही नहीं,

उसकी योजनाएं हैं सटीक; उत्तरोत्तर उनको लेता है।

कब, कहाँ, उसका लहजा, उसके बोलने का जो तरीका है,

जो प्रयास वो करता है, ये सब उसका प्यार दिखाता है।

इंसान के लिए ईश्वर के प्यार की कोई सीमा नहीं।

2

लोग अपने बच्चों से प्यार करते हैं, उन्होंने बहुत प्रयास किये हैं,

ताकि बच्चे सही राह पे चल सकें।

जब बच्चों की कमज़ोरियों का पता चलता है,

चिंता करते हैं यदि वो बोलें नरमी से, तो उनके बच्चे ना सुनेंगे, ना बदलेंगे।

वो चिंता करते हैं यदि बोले वो सख्ती से,

तो बच्चों के आत्म-सम्मान को चोट पहुंचेगी।

इससे उनको चिंता होती है कि बच्चे ये सब सह नहीं पाएंगे।

ये सब किया जाता है प्यार से; इसमें बहुत प्रयास लगता है।

ईश्वर के लोगों से व्यवहार में लापरवाही नहीं,

उसकी योजनाएं हैं सटीक; उत्तरोत्तर उनको लेता है।

कब, कहाँ, उसका लहजा, उसके बोलने का जो तरीका है,

जो प्रयास वो करता है, ये सब उसका प्यार दिखाता है।

इंसान के लिए ईश्वर के प्यार की कोई सीमा नहीं।

3

तुम सब खुद भी बेटे-बेटी हो, किया होगा अनुभव तुमने माँ-बाप का प्यार।

प्यार सिर्फ नम्रता नहीं, सिर्फ ध्यान रखना ही नहीं;

और भी ज़्यादा, इसमें है ताड़ना।

सब कुछ जो ईश्वर इंसान के लिए करता है वो इंसान के प्रेमवश करता है

और प्यार की पूर्व शर्त के तहत,

इसी वजह से वो पूरी कोशिश करता है

इस भ्रष्ट इंसान का करने उद्धार, उद्धार, उद्धार!

ईश्वर के लोगों से व्यवहार में लापरवाही नहीं,

उसकी योजनाएं हैं सटीक; उत्तरोत्तर उनको लेता है।

कब, कहाँ, उसका लहजा, उसके बोलने का जो तरीका है,

जो प्रयास वो करता है, ये सब उसका प्यार दिखाता है।

इंसान के लिए ईश्वर के प्यार की कोई सीमा नहीं।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'क्या तुम मनुष्यजाति के प्रति परमेश्वर का प्रेम जानते हो?' से रूपांतरित

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