275 परमेश्वर सभी देशों और लोगों का भाग्य नियंत्रित करता है

किसी देश का उत्थान और पतन इस बात पर आधारित होता है कि क्या इसके शासक परमेश्वर की आराधना करते हैं, और क्या वे अपने लोगों को परमेश्वर के निकट लाने और आराधना करने में उनकी अगुआई करते हैं।

1 शायद तुम्हारा देश वर्तमान में समृद्ध हो रहा हो, किंतु यदि तुम लोगों को परमेश्वर से भटकने देते हो, तो तुम्हारा देश स्वयं को उत्तरोत्तर परमेश्वर की आशीषों से वंचित होता हुआ पाएगा। तुम्हारे देश की सभ्यता उत्तरोत्तर पैरों के नीचे कुचल दी जाएगी, और ज़्यादा समय नहीं लगेगा कि लोग परमेश्वर के विरुद्ध उठकर स्वर्ग को कोसने लगेंगे। और इसलिए, मनुष्य की जानकारी के बगैर, देश के भाग्य का विनाश कर दिया जाएगा। परमेश्वर शक्तिशाली देशों को उन देशों से निपटने के लिए अधिक ऊपर उठाएगा जिन्हें परमेश्वर द्वारा श्राप दिया गया है, यहाँ तक कि पृथ्वी से उनका अस्तित्व भी मिटा सकता है।

2 यद्यपि धर्मी ताक़तें इस दुनिया में मौजूद हैं, किन्तु वह शासन जिसमें मनुष्य के हृदय में परमेश्वर का कोई स्थान नहीं हो, नाज़ुक होता है। परमेश्वर के आशीष के बिना, राजनीतिक क्षेत्र अव्यवस्था में पड़ जाएँगे और हमले के लिए असुरक्षित हो जाएँगे। मानवजाति के लिए, परमेश्वर के आशीष के बिना होना धूप के न होने के समान है। इस बात की परवाह किए बिना कि शासक अपने लोगों के लिए कितने अधिक परिश्रम से योगदान करते हैं, इस बात पर ध्यान दिए बिना कि मानवजाति कितने धर्मी सम्मेलन आयोजित करती है, इनमें से कोई भी चीज़ों की कायापलट नहीं करेगा या मानवजाति के भाग्य को नहीं बदलेगा।

3 मनुष्य का मानना है कि ऐसा देश जिसमें लोगों को खिलाया जाता है और पहनने के कपड़े दिए जाते हैं, जिसमें वे एक साथ शान्ति से रहते हैं, एक अच्छा देश है, और एक अच्छे नेतृत्व वाला देश है। किन्तु परमेश्वर ऐसा नहीं सोचता है। उसका मानना है कि वह देश जिसमें कोई भी व्यक्ति उसकी आराधना नहीं करता है एक ऐसा देश है जिसे वह जड़ से मिटा देगा। मनुष्य के सोचने का तरीका परमेश्वर के सोचने के तरीकों से पूरी तरह भिन्न है। तो, यदि किसी देश का मुखिया परमेश्वर की आराधना नहीं करता है, तो उस देश का भाग्य बहुत ही दुःखदायक होगा, और उस देश का कोई गंतव्य नहीं होगा।

4 परमेश्वर मनुष्य की राजनीति में भाग नहीं लेता है, फिर भी देश या राष्ट्र का भाग्य परमेश्वर के द्वारा नियंत्रित होता है। परमेश्वर इस संसार को और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को नियंत्रित करता है। मनुष्य का भाग्य और परमेश्वर की योजना बहुत ही घनिष्ठता से जुड़ी हुई हैं, और कोई भी मनुष्य, देश या राष्ट्र परमेश्वर की सम्प्रभुता से मुक्त नहीं है। यदि मनुष्य अपने भाग्य को जानना चाहता है, तो उसे अवश्य परमेश्वर के सामने आना चाहिए। परमेश्वर उन लोगों को समृद्ध करेगा जो उसका अनुसरण करते और उसकी आराधना करते हैं, वह उनका पतन और विनाश करेगा जो उसका विरोध करते हैं और उसे अस्वीकार करते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" से रूपांतरित

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