4. परमेश्वर के प्रकटन और कार्य पर अत्यावश्यक वचन

122. स्तुति सिय्योन तक आ गई है और परमेश्वर का निवास स्थान-प्रकट हो गया है। सभी लोगों द्वारा प्रशंसित, महिमामंडित पवित्र नाम फैल रहा है। आह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! ब्रह्मांड का मुखिया, अंत के दिनों का मसीह—वह जगमगाता सूर्य है, जो पूरे ब्रह्मांड में प्रताप और वैभव में ऊँचे पर्वत सिय्योन पर उदित हुआ है ...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हम हर्षोल्लास में तुझे पुकारते हैं; हम नाचते और गाते हैं। तू वास्तव में हमारा उद्धारकर्ता, ब्रह्मांड का महान सम्राट है! तूने विजेताओं का एक समूह बनाया है और परमेश्वर की प्रबंधन-योजना पूरी की है। सभी लोग इस पर्वत की ओर बढ़ेंगे। सभी लोग सिंहासन के सामने घुटने टेकेंगे! तू एकमेव सच्चा परमेश्वर है और तू ही महिमा और सम्मान के योग्य है। समस्त महिमा, स्तुति और अधिकार सिंहासन का हो! जीवन का झरना सिंहासन से प्रवाहित होता है, जो बड़ी संख्या में परमेश्वर के लोगों को सींचता और पोषित करता है। जीवन प्रतिदिन बदलता है; नई रोशनी और नए प्रकटन हमारा अनुसरण करते हैं, जो लगातार परमेश्वर के बारे में अंतर्दृष्टियाँ देते हैं। अनुभवों के बीच हम परमेश्वर के बारे में पूर्ण निश्चितता पर पहुँचते हैं। उसके वचन लगातार प्रकट किए जाते हैं, उनके भीतर प्रकट किए जाते हैं, जो सही हैं। हम सचमुच बहुत धन्य हैं! परमेश्वर से रोज़ाना आमने-सामने मिल रहे हैं, सभी बातों में परमेश्वर के साथ संवाद कर रहे हैं, और हर बात में परमेश्वर को संप्रभुता दे रहे हैं। हम सावधानीपूर्वक परमेश्वर के वचन पर विचार करते हैं, हमारे हृदय परमेश्वर में शांति पाते हैं, और इस प्रकार हम परमेश्वर के सामने आते हैं, जहाँ हमें उसका प्रकाश मिलता है। रोज़ाना अपने जीवन, कार्यों, वचनों, विचारों और धारणाओं में हम परमेश्वर के वचन के भीतर जीते हैं, और हम हमेशा पहचान करने में सक्षम होते हैं। परमेश्वर का वचन सुई में धागा पिरोता है; अप्रत्याशित ढंग से हमारे भीतर छिपी हुई चीज़ें एक-एक करके प्रकाश में आती हैं। परमेश्वर के साथ संगति देर सहन नहीं करती; हमारे विचार और धारणाएँ परमेश्वर द्वारा उघाड़कर रख दी जाती हैं। हर पल हम मसीह के आसन के सामने जी रहे हैं, जहाँ हम न्याय से गुज़रते हैं। हमारे शरीर के भीतर हर जगह पर शैतान का कब्ज़ा है। आज, परमेश्वर की संप्रभुता पुन: प्राप्त करने के लिए, उसके मंदिर को स्वच्छ करना होगा। पूरी तरह से परमेश्वर के अधीन होने के लिए हमें जीवन-मरण के संघर्ष में संलग्न होना होगा। केवल हमारी पुरानी अस्मिता को सलीब पर चढ़ाए जाने के बाद ही मसीह का पुनरुत्थित जीवन संप्रभुता में शासन कर सकता है।

अब पवित्र आत्मा हमारे उद्धार की लड़ाई लड़ने के लिए हमारे हर कोने में धावा बोलता है! जब तक हम अपने आपको नकारने और परमेश्वर के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, तब तक परमेश्वर निश्चित रूप से हमें हर समय भीतर से रोशन और शुद्ध करेगा, और उसे नए सिरे से प्राप्त करेगा, जिस पर शैतान ने कब्ज़ा कर रखा है, ताकि हम परमेश्वर द्वारा शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण किए जा सकें। समय बरबाद मत करो—और हर क्षण परमेश्वर के वचन के भीतर रहो। संतों के साथ बढ़ो, राज्य में लाए जाओ, और परमेश्वर के साथ महिमा में प्रवेश करो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 1' से

123. फ़िलाडेल्फ़िया की कलीसिया ने अपना आकार ले लिया है, और यह पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह और दया के कारण हुआ है। परमेश्वर के लिए प्रेम अनेक संतों में जगता है जो बिना डगमगाए अपने आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं। वे अपने इस विश्वास पर दृढ़ रहते हैं कि एकमात्र सच्चे परमेश्वर ने देहधारण किया है, कि वह ब्रह्मांड का मुखिया है जो सभी चीज़ों को नियंत्रित करता है : इसकी पुष्टि पवित्र आत्मा द्वारा की जा चुकी है और यह पर्वतों की तरह अचल है! यह कभी नहीं बदल सकता!

ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आज तुमने हमारी आध्यात्मिक आँखें खोल दी हैं, जिससे अंधे देख रहे हैं, लंगड़े चल रहे हैं, और कुष्ठरोगी चंगे हो रहे हैं। यह तुम ही हो जिसने स्वर्ग की ओर की खिड़की खोल दी है और इसके द्वारा हमें आध्यात्मिक दुनिया के रहस्यों को समझने दिया है। तुम्हारे पवित्र शब्द हमारे भीतर जज़्ब हो गए हैं, और शैतान द्वारा दूषित हमारी मानवता से हम बचा लिए गए हैं। यह तुम्हारा अपरिमेय महान काम है और तुम्हारी महान अपरिमेय दया है। हम तुम्हारे गवाह हैं!

तुम लंबे समय से विनम्रता और ख़ामोशी में छिपे रहे हो। तुम मृत्यु से पुनरुत्थित हुए हो और सूली पर चढ़ने की पीड़ा सहने का, मानव जीवन के सुखों और दुखों का, और साथ-साथ उत्पीड़न और विपत्ति का अनुभव किया है; तुमने मानव संसार के दर्द का अनुभव और स्वाद लिया है, और तुम्हें युग द्वारा त्यागा गया है। देहधारी परमेश्वर स्वयं परमेश्वर है। तुमने हमें परमेश्वर की इच्छा की खातिर मैले के ढेर से बचाया है, हमें अपने दाहिने हाथ से उठाया है और मुक्त रूप से अपना अनुग्रह हमें दिया है। कोई प्रयास बाकी न रखते हुए, तुमने अपना जीवन हममें गढ़ा है; अपने रक्त, पसीने, और आँसूओं से जो कीमत तुमने चुकाई है, वह संतों में ठोस रूप में उपस्थित है। हम तुम्हारे श्रमसाध्य प्रयासों के परिणाम[क] हैं; हम वह कीमत हैं जो तुमने चुकाई है।

ओह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तुम्हारी प्रेमपूर्ण दया और कृपा, तुम्हारी धार्मिकता और महिमा, तुम्हारी पवित्रता और नम्रता के कारण ही सभी लोग तुम्हारे सामने झुकेंगे और अनंत काल तक तुम्हारी आराधना करेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 2' से उद्धृत

124. जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर—राज्य के राजा—की गवाही दी गई है, तब से पूरे ब्रह्मांड में परमेश्वर के प्रबंधन का दायरा पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। परमेश्वर के प्रकटन की गवाही न केवल चीन में दी गई है, बल्कि सभी राष्ट्रों और सभी स्थानों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की गवाही दी गई है। वे सभी इस पवित्र नाम को पुकार रहे हैं, किसी भी तरह से परमेश्वर के साथ सहभागिता करने का प्रयास कर रहे हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की इच्छा को समझ रहे हैं और कलीसिया में मिल कर सेवा कर रहे हैं। पवित्र आत्मा इसी अद्भुत तरीके से काम करता है।

विभिन्न राष्ट्रों की भाषाएँ एक दूसरे से अलग हैं लेकिन आत्मा एक ही है। यह आत्मा संसार भर की कलीसियाओं को जोड़ता है और बिना किसी भेदभाव के, परमेश्वर के साथ एक है, और इसमें कोई शक नहीं है। पवित्र आत्मा अब उन्हें पुकारता है और उसकी वाणी उन्हें जगाती है। यह परमेश्वर की दया की वाणी है। वे सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पवित्र नाम को पुकार रहे हैं! वे स्तुति भी करते हैं और गाते भी हैं। पवित्र आत्मा के कार्य में कभी भी कोई चूक नहीं हो सकती: और सही मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए ये लोग किसी भी हद तक जाते हैं, वे पीछे नहीं हटते हैं—चमत्कारों पर चमत्कार होते रहते हैं। लोगों के लिए इसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है और इसका अनुमान लगाना उन्हें असंभव लगता है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर सारे ब्रह्मांड में जीवन का राजा है! वह महिमामय सिंहासन पर बैठता है और दुनिया का न्याय करता है, सभी पर वर्चस्व रखता है, और सभी राष्ट्रों पर शासन करता है; सभी लोग उसके सामने घुटने टेकते हैं, उससे प्रार्थना करते हैं, उसके करीब आते हैं और उसके साथ संवाद करते हैं। चाहे तुमने परमेश्वर में कितने भी लम्बे समय से विश्वास रखा हो, चाहे तुम्हारा रुतबा कितना भी ऊंचा हो या तुम्हारी वरिष्ठता कितनी भी अधिक हो, यदि तुम अपने दिल में परमेश्वर का विरोध करते हो तो तुम्हारा न्याय किया जाना चाहिए और तुम्हें परमेश्वर के सामने दंडवत होकर दर्द भरा अनुनय-विनय करना चाहिए; यह वास्तव में तुम्हारा अपने कर्मों के फल को भुगतना है। यह विलाप का स्वर अग्नि और गंध की झील में पीड़ा सहने का स्वर है, और यह परमेश्वर की लोहे की छड़ी से प्रताड़ित होने का क्रंदन है; यह मसीह के आसन के सामने किया गया न्याय है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 8' से उद्धृत

125. सर्वशक्तिमान परमेश्वर! उसका गौरवशाली शरीर खुले रूप से प्रकट होता है, पवित्र आध्यात्मिक शरीर उदय होता है और वह स्वयं पूर्ण परमेश्वर है! दुनिया और देह दोनों बदल गए हैं और पहाड़ी पर उसका रूप-परिवर्तन परमेश्वर का व्‍यक्तित्‍व है। वह अपने सिर पर सुनहरा मुकुट पहने हुए है, उसके वस्त्र पूर्ण रूप से श्वेत हैं, छाती पर सोने की पटुका बाँधे हुए है और दुनिया की सभी चीज़ें उसकी चरण-पीठ हैं। उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं, उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है। राज्य का मार्ग असीम उज्ज्वल है और उसकी महिमा उदित हो रही और चमक रही है; पर्वत आनंदित हैं और जल हास्‍य मग्‍न हैं, सूर्य, चंद्रमा और तारे सभी अपनी क्रमबद्ध व्यवस्था में घूमते हैं, और अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर का स्वागत करते हैं, जिनकी विजयी वापसी उनके छह हज़ार वर्ष की प्रबंधन योजना को पूरा करती है। ख़ुशी से सब कूदते और नाचते हैं! जय हो! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने गौरवशाली सिंहासन पर बैठा है! गाओ! सर्वशक्तिमान का विजयी ध्वज राजसी, भव्‍य सिय्योन की ऊंचाई पर लहराता है! सभी राष्ट्र उत्साहित हैं, सभी लोग गा रहे हैं, सिय्योन पर्वत प्रसन्‍नता से हँस रहा है, परमेश्वर की महिमा का उदय हुआ है! मैंने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी परमेश्वर का चेहरा देखूंगा, लेकिन आज मैंने इसे देखा है। हर दिन उसके साथ आमने-सामने, मैं अपना दिल खोलकर रखता हूं। खाने पीने का सभी कुछ, वह प्रचुरता से प्रदान करता है। जीवन, वचन, कार्य, सोच, विचार—उसका महिमामय प्रकाश इन सभी को उज्जवल करता है। वह रास्ते के हर कदम पर अगुवाई करता है, और यदि कोई दिल विद्रोह करता है तो उसका न्याय तुरंत होगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 15' से उद्धृत

126. सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अनन्‍तकाल का पिता, शांति का राजकुमार, हमारा परमेश्वर राजा है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने चरण जैतून के पर्वत पर रखता है। यह कितना खूबसूरत है! सुनो! हम पहरूए पुकार रहे हैं; एक साथ जयजयकार कर रहे हैं, क्योंकि परमेश्वर सिय्योन में लौट आया है। हम अपनी आँखों से यरूशलेम को खंडहर होता देख रहे हैं। उमंग में सामने आओ और साथ में गाओ, क्योंकि परमेश्वर ने हमें शान्ति दी है और यरूशलेम को छुड़ा लिया है। परमेश्वर ने सारी जातियों के सामने अपनी पवित्र भुजा प्रकट की है, परमेश्वर का वास्तविक स्‍वरूप प्रकट हुआ है! पृथ्वी के दूर-दूर देशों के सब लोग हमारे परमेश्‍वर का किया हुआ उद्धार देख लेंगे।

ओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तेरे सिंहासन से सात आत्माओं को सभी कलीसियाओं में भेजा गया है ताकि तेरे सभी रहस्यों को उजागर किया जा सके। अपनी महिमा की राजगद्दी पर बैठकर, तूने अपने राज्य का संचालन किया है और इसे न्‍याय और धर्म के द्वारा मजबूत और स्थिर किया है, तूने सभी जातियों को अपने सामने दबा दिया है। ओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! तूने राजाओं के कमरबंद को ढीला कर दिया है, अपने सामने फाटकों को ऐसा खोल दिया है कि वे फाटक बन्‍द न किए जाएँ। क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है और तेरा तेज़ उदित हुआ है, और अपनी कान्ति चम का रहा है। पृथ्‍वी पर तो अन्धियारा और राज्‍य–राज्‍य के लोगों पर घोर अन्‍धकार छाया हुआ है। हे परमेश्वर! परन्तु तू हम पर प्रकट हुआ है, तूने अपना प्रकाश हम पर चमकाया है और तेरी महिमा हम पर प्रगट होगी; जाति-जाति तेरे पास प्रकाश के लिये और राजा तेरे आरोहण के प्रताप की ओर आएँगे। तू अपनी आँखें उठाकर चारों ओर देखता है: वे सब-के-सब इकट्ठे होकर तेरे पास आ रहे हैं, तेरे पुत्र दूर से आ रहे हैं और तेरी पुत्रियाँ हाथों-हाथ पहुँचाई जा रही हैं। हे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर, तेरा महान प्रेम हमें थाम लेता है; यह तू ही है, जो हमें तेरे राज्य को जाते मार्ग पर आगे बढ़ाता है और ये तेरे पवित्र वचन ही हैं जो हमें भेदते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 25' से उद्धृत

127. सर्वशक्तिमान सच्चा परमेश्वर, सिंहासन पर विराजमान राजा, सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने, पूरे ब्रह्मांड पर शासन करता है, और स्वर्ग के नीचे सब-कुछ परमेश्वर की महिमा से चमकता है। ब्रह्मांड में और पृथ्वी के अंतिम छोर तक सभी जीवित प्राणी देखेंगे। सच्चे परमेश्वर के चेहरे के प्रकाश में पर्वतों, नदियों, झीलों, मैदानी इलाकों, महासागरों और सभी जीवित प्राणियों ने अपने पर्दे खोल दिए हैं, और वे पुनर्जीवित हो गए हैं, मानो किसी सपने से जाग उठे हों, मानो वे मिट्टी को चीरकर फूट निकलने वाले अंकुर हों!

आह! वह एकमात्र सच्चा परमेश्वर दुनिया के सामने प्रकट होता है। कौन प्रतिरोध के साथ उसके पास आने का दुस्साहस कर सकता है? सभी भय से काँपते हैं। सभी पूरी तरह से आश्वस्त हैं, और सभी बारंबार क्षमा-याचना करते हैं। सभी लोग उसके सामने घुटने टेक देते हैं, और सभी लोग उसकी पूजा करते हैं! महाद्वीप और महासागर, पहाड़, नदियाँ—सभी चीज़ें उसकी निरंतर प्रशंसा करती हैं! वसंत ऋतु अपनी गर्म हवाओं के साथ आती है, जिससे वसंत की सुहावनी बारिश होती है। समस्त लोगों की तरह, नदियों की धाराएँ कृतज्ञता और आत्मग्लानि के आँसू बहाती हुई शोक और हर्ष के साथ बहती हैं। नदियाँ, झीलें, लहरें और हिलोरें, सभी गा रही हैं, सच्चे परमेश्वर के पवित्र नाम की प्रशंसा करते हुए! प्रशंसा की ध्वनि इतनी स्पष्ट सुनाई देती हैं! पुरानी चीज़ें, जिन्हें कभी शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया था—उनमें से प्रत्येक को नवीनीकृत किया जाएगा, परिवर्तित किया जाएगा, और वे पूर्णत: एक नए राज्य में प्रवेश करेंगी ...

यह पवित्र तुरही है, और इसने बजना शुरू कर दिया है! ध्यान से सुनो। वह इतनी मधुर आवाज़ सिंहासन की आवाज़ है, जो सभी देशों और लोगों के लिए घोषणा कर रही है कि समय आ गया है, निर्णायक अंत आ गया है। मेरी प्रबंधन योजना पूरी हो गई है। मेरा राज्य पृथ्वी पर खुलकर प्रकट हो गया है। धरती के राज्य मेरे, यानी परमेश्वर के राज्य बन गए हैं। सिंहासन से मेरी सात तुरहियाँ बजती हैं, और ऐसी चमत्कारी चीज़ें घटित होंगी! धरती के कोने-कोने से लोग हिमस्खलन और वज्रपात की प्रचंडता के साथ हर दिशा से एक-साथ लपककर आएँगे। ...

मैं अपने लोगों को ख़ुशी से देखता हूँ, जो मेरी आवाज़ सुनते हैं, हर देश और भूमि से आकर इकट्ठे होते हैं। सभी लोग सच्चे परमेश्वर को हमेशा अपनी ज़ुबान पर रखकर उसकी प्रशंसा करते हैं और खुशी से लगातार उछलते-कूदते हैं! वे दुनिया को गवाही देते हैं, और सच्चे परमेश्वर के लिए उनकी गवाही की आवाज़ कई समुद्रों के गरजने जैसी है। सभी लोग मेरे राज्य में आकर भीड़ लगाएँगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 36' से उद्धृत

128. लोग मेरी जय-जयकार करते हैं, लोग मेरी स्तुति करते हैं; सभी अपने मुख से एकमात्र सच्चे ईश्वर का नाम लेते हैं, सभी लोगों की दृष्टि मेरे कर्मों को देखने के लिए उठती है। राज्य लोगों के जगत में अवतरित होता है, मेरा व्यक्तित्व समृद्ध और प्रचुर है। इस पर कौन खुश न होगा? कौन है जो इसके लिए आनंदित हो, नृत्य न करेगा? ओह, सिय्योन! मेरा जश्न मनाने के लिए अपनी विजयी-पताका उठाओ! जीत का अपना विजय-गीत गाओ और मेरा पवित्र नाम फैलाओ! पृथ्वी की समस्त वस्तुओ! मुझे अर्पण होने के लिए स्वयं को शुद्ध करो! आसमान के तारो! अब अपने स्थानों पर लौट जाओ और नभ-मंडल में मेरा प्रबल सामर्थ्य दिखाओ! मैं पृथ्वी के लोगों की उन आवाज़ों को सुन रहा हूं, जो अपने गायन में मेरे लिए असीम प्रेम और श्रद्धा प्रकट कर रही हैं! इस दिन, जबकि हर चीज़ फिर से जीवित होती है, मैं पृथ्वी पर आता हूं। इस पल, फूल खिलते हैं, पक्षी एक सुर में गाते हैं, हर चीज़ पूरे उल्लास से धड़कती है! राज्य के अभिनंदन की ध्वनि में, शैतान का राज्य ध्वस्त हो गया है, राज्य-गान के प्रतिध्वनित होते समूह-गान में नष्ट हो गया है। और ये अब फिर कभी सिर नहीं उठाएगा!

पृथ्वी पर कौन है जो सिर उठाने और विरोध करने का साहस करे? जब मैं पृथ्वी पर आता हूं तो ज्वलन, क्रोध, और तमाम विपदाएं लाता हूं। पृथ्वी के सारे राज्य अब मेरे राज्य हैं! ऊपर आकाश में बादल गोते लगाते और तरंगित होते हैं; आकाश के नीचे झीलें और नदियाँ हिलोरे मारती हैं और जिससे मधुर संगीत निकलता है। अपनी मांद में विश्राम करते जीव-जंतु बाहर निकलते हैं और जो लोग उनींदी अवस्था में थे, उन्हें भी मैं जगा देता हूं। हर कोई जिसकी प्रतीक्षा में था, वो दिन आखिर आ गया! वे मुझे सर्वाधिक सुंदर गीत भेंट करते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'राज्य गान' से उद्धृत

129. जैसे ही मैं बोलने के लिए विश्व की तरफ अपने चेहरे को घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ को सुनती है, और उसके बाद उन सभी कार्यों को देखती है जिसे मैंने समूचे ब्रह्माण्ड में गढ़ा है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध जाते हैं, अर्थात्, जो मनुष्य के कार्यों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन नीचे गिर जाएँगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को लूँगा और उन्हें फिर से नया कर दूँगा, और मेरे कारण सूर्य और चन्द्रमा को नया बना दिया जायेगा—आकाश अब और वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; पृथ्वी पर बेशुमार चीज़ों को फिर से नया बना दिया जाएगा। मेरे वचनों के माध्यम से सभी पूर्ण हो जाएँगे। विश्व के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से विभक्त कर दिया जाएगा और मेरे राज्य के द्वारा बदल दिया जाएगा, जिसकी वजह से पृथ्वी के राष्ट्र हमेशा हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राज्य बन जाएँगे जो मेरी आराधना करते हों; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा, और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। विश्व के भीतर मनुष्यों में, वे सभी जो शैतान से संबंध रखते हैं उनका सर्वनाश कर दिया जाएगा; वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें जलती हुई आग के द्वारा नीचा दिखाया जायेगा—अर्थात उनको छोड़कर जो अभी इस धारा के अन्तर्गत हैं, बाकियों को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो, भिन्न-भिन्न अंशों में, धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीत लिए जा कर मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। समस्त मानवता अपने-अपने स्वभाव का अनुसरण करेगी, और जो कुछ उसने किया है उससे भिन्न-भिन्न ताड़नाएँ प्राप्त करेगी। वे जो मेरे विरूद्ध खड़े हुए हैं सभी नष्ट हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कार्यों में मुझे शामिल नहीं किया है, वे अपने आपको दोषमुक्त करने के ढंग के कारण, पृथ्वी पर मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के अधीन निरन्तर बने रहेंगे। मैं अपने महान कार्य की समाप्ति की घोषणा करने के लिए पृथ्वी पर अपनी ध्वनि आगे करते हुए अपने आपको असंख्य लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, ताकि समस्त मानवजाति अपनी आँखों से देखे।

जैसे-जैसे मेरी आवाज़ उत्सुकता में गहरी होती है, मैं विश्व की दशा का भी अवलोकन कर रहा हूँ। मेरे वचनों के माध्यम से, सृष्टि की असंख्य चीज़ों को नया बनाया जाता है। स्वर्ग बदलता है, और पृथ्वी भी बदलती है। मानवता अपने मूल रूप में उजागर होती है और, धीरे-धीरे, प्रत्येक अपने स्वभाव के अनुसार उजागर होता है, और मनुष्य अकस्मात् ही अपने-अपने परिवारों के आँचल में जाने के लिए अपना रास्ता ढूँढ़ लेता है। इस पर, मुझे बहुत अधिक प्रसन्‍नता होगी। मैं बाधाओं से मुक्त हूँ, अकस्मात् ही मेरा महान कार्य सम्पूर्ण हो जाता है, अकस्मात् ही सृष्टि की सभी असंख्य चीज़ें रूपान्तरित हो जाती हैं। जब मैंने संसार को बनाया था, तब मैंने सभी चीज़ों को उसके स्वभाव के अनुसार तराशा था, और सभी चीज़ों को आकार के साथ उनकी किस्म के अनुसार एक साथ इकट्ठा किया था। ज्यों ही मेरी प्रबन्धन योजना का अंत नज़दीक आएगा, मैं सृष्टि की भूतपूर्व की दशा पुनर्स्थापित कर दूँगा, मैं प्रत्येक चीज़ को गहराई से बदलते हुए, हर चीज को उसी प्रकार पुनः स्थापित कर दूँगा जैसी वह मूल रूप से थी, ताकि हर चीज़ मेरी योजना के आँचल में वापस लौट जाए। समय आ चुका है! मेरी योजना की अंतिम अवस्था लगभग पूरी होने ही वाली है। आह, पुराना अपवित्र संसार! तुम निश्चित रूप से मेरे वचनों के अधीन आ जाओगे! मेरी योजना के द्वारा तुम निश्चित रूप से मिटा दिए जाओगे! आह, सृष्टि की असंख्य चीज़ो! तुम सभी को मेरे वचनों के भीतर नया जीवन मिलेगा, तुम्हारे पास तुम्हारा सार्वभौम प्रभु होगा! आह, शुद्ध और निष्कलंक नये संसार! तुम निश्चय ही मेरी महिमा के भीतर पुनः जीवित हो जाओगे! आह, सिय्योन पर्वत! अब और मौन मत रह। मैं विजयोल्लास में लौटा हूँ! सृष्टि के बीच से, मैं सारी पृथ्वी का सूक्ष्म परीक्षण करता हूँ। पृथ्वी पर मानवजाति ने एक नए जीवन की शुरूआत की है, और एक नई आशा को जीत लिया है। आह, मेरे लोगो! तुम लोग मेरे प्रकाश के भीतर जीवन में वापस कैसे नहीं आ सकते हो? तुम लोग मेरे मार्गदर्शन के अधीन आनन्द से उछल कैसे नहीं सकते हो? भूमियाँ उल्लास में चिल्ला रही हैं, जल कर्कश ध्वनि के साथ आनन्द से ठहाका मारकर हँस रहे हैं! आह, पुनर्जीवित इस्राएल! मेरे द्वारा पूर्वनियति के कारण तुम क्यों गर्व महसूस नहीं कर सकते हो? कौन रोया है? किसने विलाप किया है? पुराना इस्राएल समाप्त हो गया है, और आज का इस्राएल संसार में उदय हुआ है, सीधा खड़ा हुआ है और ऊँचा उठता जा रहा है, और समस्त मानवता के हृदय में उठ गया है। आज का इस्राएल मेरे लोगों के माध्यम से अस्तित्व के स्रोत को निश्चित रूप से प्राप्त करेगा! आह, घृणित मिस्र! निश्चित रूप से तू अब तो मेरे विरूद्ध खड़ा नहीं होता है? तू कैसे मेरी दया का लाभ उठा सकता है और मेरी ताड़ना से बचने की कोशिश कर सकता है? तू मेरी ताड़ना के भीतर कैसे अस्तित्व में बना नहीं रह सकता है? वे सभी जिनसे मैं प्रेम करता हूँ वे निश्चय ही अनन्त काल तक जीवित रहेंगे, और वे सभी जो मेरे विरूद्ध खड़े होते हैं उन्हें निश्चय ही मेरे द्वारा अनन्त काल तक ताड़ना दी जाएगी। क्योंकि मैं एक ईर्ष्यालु परमेश्वर हूँ, मैं उन सब के कारण जो मनुष्यों ने किया है उन्हें हल्के में नहीं छोडूँगा। मैं पूरी पृथ्वी पर निगरानी रखूँगा, और, संसार की पूर्व दिशा में धार्मिकता, प्रताप, कोप और ताड़ना के साथ प्रकट हो जाऊँगा, और मैं मानवता के असंख्य मेज़बानों पर स्वयं को प्रकट करूँगा!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 26' से उद्धृत

130. मैंने अपनी महिमा इज़राइल को दी और फिर उसे हटा लिया, इसके बाद मैं इज़राइलियों के साथ-साथ पूरी इंसानियत को पूरब में ले आया। मैं उन सभी को प्रकाश में लेकर आया हूँ ताकि वे इसके साथ फिर से मिल जाएं और इससे जुड़े रह सकें, और उन्हें इसकी खोज न करनी पड़े। जो प्रकाश की खोज कर रहे हैं उन्हें मैं फिर से प्रकाश देखने दूंगा और उस महिमा को देखने दूंगा जो मेरे पास इज़राइल में थी; मैं उन्हें यह देखने दूंगा कि मैं बहुत पहले एक सफ़ेद बादल पर सवार होकर मनुष्यों के बीच आ चुका हूँ, मैं उन्हें असंख्य सफ़ेद बादल और प्रचुर मात्रा में फलों के समूह देखने दूंगा। यही नहीं, मैं उन्हें इज़राइल के यहोवा परमेश्वर को देखने दूंगा। मैं उन्हें यहूदियों के स्वामी, बहुप्रतीक्षित मसीहा को देखने दूंगा, और अपने पूर्ण प्रकटन को देखने दूंगा जिसे हर युग के राजाओं द्वारा सताया गया है। मैं संपूर्ण ब्रह्मांड पर कार्य करूंगा और मैं महान कार्य पूरा करूंगा, जो अंत के दिनों में लोगों के सामने मेरी पूरी महिमा और मेरे सारे कार्यों को प्रकट कर देगा। मैं अपना भव्य मुखमंडल संपूर्ण रूप में उन लोगों को दिखाऊंगा, जिन्होंने कई वर्षों से मेरी प्रतीक्षा की है, जो मुझे सफ़ेद बादल पर सवार होकर आते हुए देखने के लिए लालायित रहे हैं। मैं अपना यह रूप इज़राइल को दिखाऊंगा जिसने मेरे एक बार फिर प्रकट होने की लालसा की है। मैं उन सभी लोगों को अपना यह रूप दिखाउंगा जो मुझे कष्ट पहुंचाते हैं, ताकि सभी लोग यह जान सकें कि मैंने बहुत पहले ही अपनी महिमा को हटा लिया है और इसे पूरब में ले आया हूँ, जिस कारण यह अब यहूदिया में नहीं रही। क्योंकि अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे' से उद्धृत

131. मैं पूरे ब्रह्मांड में अपना कार्य कर रहा हूँ, और पूरब से असंख्य गर्जनायें गूँज रही हैं, जो सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरी वाणी है जिसने वर्तमान में सभी मनुष्यों की अगुवाई की है। मैं अपनी वाणी से सभी मनुष्यों को जीत लूंगा, उन्हें इस धारा में बहाऊंगा और अपने सामने समर्पण करवाऊंगा, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा को वापस लेकर इसे नये सिरे से पूरब में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा को देखने के लिए लालायित नहीं है? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतज़ार नहीं कर रहा है? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी सुंदरता को देखने के लिए तरस नहीं रहा है? कौन प्रकाश में नहीं आना चाहता? कौन कनान की समृद्धि को नहीं देखना चाहता? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन महान सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आराधना नहीं करता है? मेरी वाणी पूरी पृथ्वी पर फ़ैल जाएगी; अपने चुने हुए लोगों के समक्ष, मैं चाहता हूँ कि मैं उनसे अधिक वचन बोलूँ। मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए और पूरी मानवजाति के लिए अपने वचन बोलता हूँ, उन शक्तिशाली गर्जनाओं की तरह जो पर्वतों और नदियों को हिला देते हैं। इस प्रकार मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य के लिए खज़ाना बन जाते हैं, और सभी मनुष्य मेरे वचनों का आनंद लेते हैं। बिजली पूरब से चमकते हुए सीधे पश्चिम की ओर जाती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य उन्हें छोड़ नहीं पाता है और साथ ही उसकी थाह भी नहीं ले सकता है, लेकिन उनका अधिक से अधिक आनंद उठाता है। एक नवजात शिशु की तरह, सभी मनुष्य खुश और आनंद से भरे हैं और मेरे आने की खुशी मना रहे हैं। अपने वचनों के माध्यम से, मैं सभी मनुष्यों को अपने समक्ष लाऊंगा। उसके बाद, मैं औपचारिक तौर पर मनुष्य जाति में प्रवेश करूंगा ताकि वे मेरी आराधना कर सकें। मुझसे निकलने वाली महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों से, मैं ऐसा इंतजाम करूंगा कि सभी मनुष्य मेरे समक्ष आएंगे और देखेंगे कि बिजली पूरब से चमक रही है और मैं भी पूरब में "जैतून के पर्वत" पर उतर चुका हूँ। वे यह देखेंगे कि मैं बहुत पहले से पृथ्वी पर मौजूद हूँ, यहूदियों के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि पूरब की बिजली के रूप में। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं लोगों के बीच से जा चुका हूँ, और फिर महिमा के साथ लोगों के बीच प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना अनगिनत साल पहले की गई थी, और मैं वह शिशु हूँ जिसे अनगिनत साल पहले इज़राइलियों ने त्याग दिया था। इसके अलावा, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सब लोग मेरे सिंहासन के सामने आएं और मेरे भव्य मुखमंडल को देखें, मेरी वाणी सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरी संपूर्ण इच्छा है; यही मेरी योजना का अंतिम पल और उसका चरम बिंदु है, यही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य है। सभी राष्ट्र मेरी आराधना करें, हर ज़बान मुझे स्वीकार करें, हर इंसान मुझमें अपनी आस्था दिखाए और हर इंसान मुझ पर भरोसा करे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे' से उद्धृत

132. कई हज़ार सालों से, मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता के आगमन को देखने में सक्षम होने की लालसा की है। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता यीशु को देखने की इच्छा की है जब वह एक सफेद बादल पर सवार होकर स्वयं उन लोगों के बीच उतरता है जिन्होंने हज़ारों सालों से उसकी अभिलाषा की है और उसके लिए लालायित रहे हैं। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता की वापसी और लोगों के साथ उसके फिर से जुड़ने की लालसा की है, अर्थात्, उद्धारकर्त्ता यीशु के उन लोगों के पास वापस आने की लालसा की है जिनसे वह हज़ारों सालों से अलग रहा है। और मनुष्य आशा करता है कि वह एक बार फिर से छुटकारे के उस कार्य को करेगा जो उसने यहूदियों के बीच किया था, वह मनुष्य के प्रति करूणामय और प्रेममय होगा, मनुष्य के पापों को क्षमा करेगा, वह मनुष्य के पापों को वहन करेगा, और यहाँ तक कि वह मनुष्य के सभी अपराधों को वहन करेगा और मनुष्य को उसके पापों से मुक्त करेगा। वे उद्धारकर्त्ता यीशु के पहले के समान होने की लालसा करते हैं—ऐसा उद्धारकर्त्ता जो प्यारा, सौम्य और आदरणीय हो, जो मनुष्य के प्रति कभी भी कोप से भरा हुआ न हो, और जो कभी भी मनुष्य को धिक्कारता न हो। यह उद्धारकर्त्ता मनुष्य के सारे पापों को क्षमा करता है और उन्हें वहन करता है, और यहाँ तक कि एक बार फिर से मनुष्य के लिए सलीब पर अपनी जान देता है। जब से यीशु गया है, वे चेले जो उसका अनुसरण करते थे, और वे सभी संत जिन्हें उसके नाम के कारण बचाया गया था, सभी बेसब्री से उसकी अभिलाषा और इन्तज़ार कर रहे हैं। वे सभी जो अनुग्रह के युग के दौरान यीशु मसीह के अनुग्रह के द्वारा बचाए गए थे, वे अंत के दिनों के दौरान उस आनन्ददायक दिन की लालसा कर रहे हैं, जब उद्धारकर्त्ता यीशु सफेद बादल पर आता है और मनुष्य के बीच में प्रकट होता है। निस्संदेह, यह उन सभी लोगों की सामूहिक इच्छा भी है जो आज उद्धारकर्त्ता यीशु के नाम को स्वीकार करते हैं। विश्व भर में, वे सभी जो उद्धारकर्त्ता यीशु के उद्धार को जानते हैं वे सभी यीशु मसीह की अचानक वापसी के लिए बहुत ज़्यादा लालायित रहे हैं, ताकि पृथ्वी पर यीशु के वचन पूरे हों: "मैं जैसे गया था वैसे ही मैं वापस आऊँगा।" मनुष्य विश्वास करता है कि सलीब पर चढ़ने और पुनरूत्थान के बाद, यीशु सफेद बादल पर स्वर्ग में वापस चला गया, और उसने सर्वोच्च महान परमेश्वर के दाएँ हाथ पर अपना स्थान ग्रहण किया। मनुष्य कल्पना करता है कि उसी प्रकार, यीशु फिर से सफेद बादल पर सवार होकर (यह बादल उस बादल की ओर संकेत करता है जिस पर यीशु तब सवार हुआ था जब वह स्वर्ग में वापस गया था), उन लोगों के बीच वापस आएगा जिन्होंने हज़ारों सालों से उसके लिए बहुत अधिक लालसा रखी है, और यह कि वह यहूदियों का स्वरूप और उनके कपड़े धारण करेगा। मनुष्य के सामने प्रकट होने के बाद, वह उन्हें भोजन प्रदान करेगा, और उनके लिए जीवन के जल की बौछार करवाएगा, और मनुष्य के बीच में रहेगा, वह अनुग्रह और प्रेम से भरपूर, जीवन्त और वास्तविक होगा, इत्यादि। फिर भी उद्धारकर्त्ता यीशु ने ऐसा नहीं किया; उसने मनुष्य की कल्पना के विपरीत किया। वह उन लोगों के बीच में नहीं आया जिन्होंने उसकी वापसी की लालसा की थी, और वह सफेद बादल पर सवार होकर सभी मनुष्यों के सामने प्रकट नहीं हुआ। वह तो पहले से ही आ चुका है, किन्तु मनुष्य उससे अनभिज्ञ ही है, और उसके आगमन से अनजान बना हुआ है। मनुष्य केवल निरुद्देश्यता से उसका इन्तज़ार कर रहा है, इस बात से अनभिज्ञ कि वह तो पहले ही "सफेद बादल" (वह बादल जो उसका आत्मा, उसके वचन, उसका सम्पूर्ण स्वभाव और उसका स्वरूप है) पर उतर चुका है, और वह अब उन विजेताओं के समूह के बीच में है जिसे वह अंत के दिनों के दौरान बनाएगा। मनुष्य इसे नहीं जानता हैः यद्यपि पवित्र उद्धारकर्त्ता यीशु मनुष्य के प्रति स्नेह और प्रेम से भरपूर है, फिर भी वह अशुद्ध और अपवित्र आत्माओं से भरे "मन्दिरों" में कैसे कार्य कर सकता है? यद्यपि मनुष्य उसके आगमन का इन्तज़ार करता आ रहा है, फिर भी वह उनके सामने कैसे प्रकट हो सकता है जो अधर्मी का मांस खाते हैं, अधर्मी का रक्त पीते हैं, एवं अधर्मी के वस्त्र पहनते हैं, जो उस पर विश्वास तो करते हैं परन्तु उसे जानते नहीं हैं, और लगातार उससे जबरदस्ती माँगते रहते हैं? मनुष्य केवल यही जानता है कि उद्धारकर्त्ता यीशु प्रेम और करुणा से परिपूर्ण है, और वह एक पाप बलि है जो छुटकारे से भरपूर है। परन्तु मनुष्य को पता नहीं है कि वह स्वयं परमेश्वर भी है, जो धार्मिकता, प्रताप, कोप, और न्याय से लबालब भरा हुआ है, और अधिकार और गौरव से संपन्न है। और इस प्रकार यद्यपि मनुष्य छुटकारा दिलाने वाले की वापसी के लिए लालायित रहता है और अभिलाषा करता है, और यहाँ तक कि मनुष्य की प्रार्थनाओं से स्वर्ग भी द्रवित हो जाता है, फिर भी उद्धारकर्त्ता यीशु उन लोगों के सामने प्रकट नहीं होता है जो उस पर विश्वास तो करते हैं किन्तु उसे जानते नहीं हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" से उद्धृत

133. परमेश्वर मौन है, और हमारे सामने कभी प्रकट नहीं हुआ, फिर भी उसका काम कभी नहीं रुका है। वह पूरी पृथ्वी पर निगाह रखता है, हर चीज़ पर नियंत्रण रखता है, और मनुष्य के सभी वचनों और कर्मों को देखता है। उसका प्रबंधन नपे-तुले चरणों में, उसकी योजना के अनुसार होता है। यह चुपचाप, नाटकीय प्रभाव के बिना आगे बढ़ता है, मगर उसके चरण मनुष्यों के निकट बढ़ते ही रहते हैं, और उसका न्याय का आसन बिजली की रफ्तार से ब्रह्माण्ड में तैनात होता है, और उसके तुरंत बाद हमारे बीच उसके सिंहासन का अवरोहण होता है। वह कैसा आलीशान दृश्य है, कितनी भव्य और गंभीर झाँकी! कपोत के समान, गरजते हुए सिंह के समान, पवित्र आत्मा हम सब के बीच में पहुँचता है। वह बुद्धिमान है, वह धार्मिकता है, वह और प्रताप है, वह अधिकार से युक्त और प्रेम एवं करुणा से भरा हुआ, चुपचाप हमारे बीच में पहुँचता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना' से उद्धृत

134. परमेश्वर का प्रकटन व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य करने के लिए उसके पृथ्वी पर आगमन का संकेत करता है। अपनी स्वयं की पहचान और स्वभाव के साथ, और उस तरीके से जो उसके लिए जन्मजात है, वह एक युग का आरंभ करने और एक युग को समाप्त करने के कार्य का संचालन करने के लिए मनुष्यजाति में अवरोहण करता है। इस तरह का प्रकटन किसी समारोह का रूप नहीं है। यह कोई संकेत, कोई तस्वीर, कोई चमत्कार या किसी प्रकार का भव्य दर्शन नहीं है, और यह किसी प्रकार की धार्मिक प्रक्रिया तो बिल्कुल नहीं है। यह एक असली और वास्तविक तथ्य है जिसे किसी के द्वारा भी छुआ और देखा जा सकता है। इस तरह का प्रकटन बेमन से किसी कार्य को करने के लिये, या अल्पकालिक उपक्रम के लिए नहीं है; बल्कि, यह उसकी प्रबंधन योजना में कार्य के एक चरण के वास्ते है। परमेश्वर का प्रकटन हमेशा सार्थक होता है और हमेशा उसकी प्रबंधन योजना से कुछ संबंध रखता है। यहाँ जिसे "प्रकटन" कहा गया है, वह उस प्रकार के "प्रकटन" से पूरी तरह से भिन्न है जिसमें परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन, अगुआई करता है और उसे प्रबुद्ध करता है। हर बार जब परमेश्वर स्वयं को प्रकट करता है तो वह अपने महान कार्य के एक चरण को कार्यान्वित करता है। यह कार्य किसी भी अन्य युग के कार्य से भिन्न होता है। यह मनुष्य के लिए अकल्पनीय है, और इसका मनुष्य द्वारा कभी भी अनुभव नहीं किया गया है। यह वह कार्य है जो एक नये युग का आरम्भ करता है और पुराने युग का समापन करता है, और यह मनुष्यजाति के उद्धार के कार्य का एक नया और बेहतर रूप है; इसके अलावा, यह वह कार्य है जो मनुष्यजाति को नए युग में लाता है। यही वह है जिसका संकेत परमेश्वर का प्रकटन करता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है' से उद्धृत

135. एक बार जब तुम लोग समझ जाते हो कि परमेश्वर के प्रकटन का क्या अर्थ है, तो तुम्हें परमेश्वर के पदचिह्नों को कैसे खोजना चाहिए? इस प्रश्न को समझाना कठिन नहीं है: जहाँ कहीं भी परमेश्वर का प्रकटन होता है, वहाँ तुम्हें उसके पदचिह्न मिलेंगे। इस तरह की व्याख्या सीधी-सादी लगती है, किन्तु इसे कार्यान्वित करना इतना आसान नहीं है, क्योंकि बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि परमेश्वर स्वयं को कहाँ प्रकट करता है, इस बात को तो बहुत कम जानते हैं कि वह स्वयं को कहाँ प्रकट करने का इच्छुक है, या उसे स्वयं को कहाँ प्रकट होना चाहिए। कुछ लोग आवेगपूर्ण रूप से यह मान लेते हैं कि जहाँ भी पवित्र आत्मा कार्य पर है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। नहीं तो वे मानते हैं कि जहाँ भी आध्यात्मिक हस्तियाँ होती हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। नहीं तो वे मानते हैं कि जहाँ कहीं भी विख्यात लोग होते हैं, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है। फिलहाल, आओ हम इस बात को एक ओर कर दें कि ऐसी मान्यताएँ सही हैं या ग़लत। इस तरह के प्रश्न को समझाने के लिए, हमारे पास पहले एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए: हम परमेश्वर के पद चिह्नों की खोज कर रहे हैं। हम आध्यात्मिक हस्तियों की तलाश नहीं कर रहे हैं, हम विख्यात हस्तियों की खोज तो बिल्कुल नहीं कर रहे है; हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं। चूँकि हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं, इसलिए यह हमें परमेश्वर की इच्छा, परमेश्वर के वचनों, उसके कथनों को तलाशने के योग्य बनाता है—क्योंकि जहाँ कहीं भी परमेश्वर के द्वारा बोले गए नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है और जहाँ कहीं भी परमेश्वर के पदचिह्न हैं, वहाँ परमेश्वर के कर्म हैं। जहाँ कहीं भी परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य, मार्ग और जीवन विद्यमान होता है। परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश में, तुम लोगों ने उन वचनों की उपेक्षा कर दी है कि "परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है।" और इसलिए, बहुत से लोग, सत्य को प्राप्त करके भी यह नहीं मानते हैं कि उन्हें परमेश्वर के पदचिह्न मिल गए हैं, और वे परमेश्वर के प्रकटन को तो और भी कम स्वीकार करते हैं। कितनी गंभीर ग़लती है! परमेश्वर के प्रकटन का मनुष्य की धारणाओं के साथ समन्वय नहीं किया जा सकता है, परमेश्वर मनुष्य के आदेश पर तो बिल्कुल प्रकट नहीं हो सकता। परमेश्वर जब अपना कार्य करता है, तो वह अपनी पसंद और अपनी योजनाएँ बनाता है; इसके अलावा, उसके अपने उद्देश्य और अपने तरीके हैं। वह जो भी कार्य करता है, उसे उसके बारे में मनुष्य से चर्चा करने या उसकी सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है, वह अपने कार्य के बारे में किसी भी व्यक्ति को सूचित तो बिल्कुल नहीं करता। परमेश्वर के इस स्वभाव को हर व्यक्ति को पहचानना चाहिए। यदि तुम लोग परमेश्वर के प्रकटन को देखने, परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करने की इच्छा रखते हो, तो तुम लोगों को सबसे पहले अपनी धारणाओं को त्याग देना चाहिए। तुम लोगों को यह माँग करनी ही नहीं चाहिए कि परमेश्वर ऐसा या वैसा करे, तुम्हें उसे अपनी सीमाओं और अपनी अवधारणाओं तक सीमित नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, तुम्हें पूछना चाहिए कि तुम लोगों को परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश कैसे करनी है, तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन को कैसे स्वीकार करना है, और तुम्हें परमेश्वर के नए कार्य के प्रति कैसे समर्पण करना है; मनुष्य को ऐसा ही करना चाहिए। चूँकि मनुष्य सत्य नहीं है, और सत्य को धारण नहीं करता है, इसलिए उसे खोजना, स्वीकार करना, और आज्ञापालन करना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है' से उद्धृत

136. सच्चे मार्ग की खोज करने में सबसे बुनियादी सिद्धांत क्या है? तुम्हें देखना होगा कि इस मार्ग में पवित्र आत्मा का कार्य है या नहीं, ये वचन सत्य की अभिव्यक्ति हैं या नहीं, किसके लिए गवाही देनी है, और यह तुम्हारे लिए क्या ला सकता है। सच्चे मार्ग और झूठे मार्ग के बीच अंतर करने के लिए बुनियादी ज्ञान के कई पहलू आवश्यक हैं, जिनमें सबसे मूलभूत है यह बताना कि इसमें पवित्र आत्मा का कार्य मौजूद है या नहीं। क्योंकि परमेश्वर पर लोगों के विश्वास का सार परमेश्वर के आत्मा पर विश्वास है, और यहाँ तक कि देहधारी परमेश्वर पर उनका विश्वास इसलिए है, क्योंकि यह देह परमेश्वर के आत्मा का मूर्त रूप है, जिसका अर्थ यह है कि ऐसा विश्वास अभी भी पवित्र आत्मा पर विश्वास है। आत्मा और देह के मध्य अंतर हैं, परंतु चूँकि यह देह पवित्रात्मा से आता है और वचन देह बनता है, इसलिए मनुष्य जिसमें विश्वास करता है, वह अभी भी परमेश्वर का अंतर्निहित सार है। अत:, यह पहचानने के लिए कि यह सच्चा मार्ग है या नहीं, सर्वोपरि तुम्हें यह देखना चाहिए कि इसमें पवित्र आत्मा का कार्य है या नहीं, जिसके बाद तुम्हें यह देखना चाहिए कि इस मार्ग में सत्य है या नहीं। सत्य सामान्य मानवता का जीवन-स्वभाव है, अर्थात्, वह जो मनुष्य से तब अपेक्षित था, जब परमेश्वर ने आरंभ में उसका सृजन किया था, यानी, अपनी समग्रता में सामान्य मानवता (मानवीय भावना, अंतर्दृष्टि, बुद्धि और मनुष्य होने के बुनियादी ज्ञान सहित) है। अर्थात्, तुम्हें यह देखने की आवश्यकता है कि यह मार्ग लोगों को एक सामान्य मानवता के जीवन में ले जा सकता है या नहीं, बोला गया सत्य सामान्य मानवता की आवश्यकता के अनुसार अपेक्षित है या नहीं, यह सत्य व्यावहारिक और वास्तविक है या नहीं, और यह सबसे सबसे सामयिक है या नहीं। यदि इसमें सत्य है, तो यह लोगों को सामान्य और वास्तविक अनुभवों में ले जाने में सक्षम है; इसके अलावा, लोग हमेशा से अधिक सामान्य बन जाते हैं, उनका मानवीय बोध हमेशा से अधिक पूरा बन जाता है, उनका दैहिक और आध्यात्मिक जीवन हमेशा से अधिक व्यवस्थित हो जाता है, और उनकी भावनाएँ हमेशा से और अधिक सामान्य हो जाती हैं। यह दूसरा सिद्धांत है। एक अन्य सिद्धांत है, जो यह है कि लोगों के पास परमेश्वर का बढ़ता हुआ ज्ञान है या नहीं, और इस प्रकार के कार्य और सत्य का अनुभव करना उनमें परमेश्वर के लिए प्रेम को प्रेरित कर सकता है या नहीं और उन्हें परमेश्वर के हमेशा से अधिक निकट ला सकता है या नहीं। इसमें यह मापा जा सकता है कि यह सही मार्ग है अथवा नहीं। सबसे बुनियादी बात यह है कि क्या यह मार्ग अलौकिक के बजाय यर्थाथवादी है, और यह मनुष्य के जीवन के लिए पोषण प्रदान करने में सक्षम है या नहीं। यदि यह इन सिद्धांतों के अनुरूप है, तो निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यह मार्ग सच्चा मार्ग है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं, केवल वे ही परमेश्वर को संतुष्ट कर सकते हैं' से उद्धृत

137. आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है। हो सकता है, तुम इन वचनों को स्वीकार न कर पाओ और वे तुम्हें अजीब लगें, पर मैं तुम्हें सलाह दूँगा कि तुम अपनी स्वाभाविकता प्रकट मत करो, क्योंकि केवल वे ही सत्य को पा सकते हैं, जो परमेश्वर के समक्ष धार्मिकता के लिए सच्ची भूख-प्यास रखते हैं, और केवल वे ही परमेश्वर द्वारा प्रबुद्ध किए जा सकते हैं और उसका मार्गदर्शन पा सकते हैं, जो वास्तव में धर्मनिष्ठ हैं। परिणाम संयम और शांति के साथ सत्य की खोज करने से मिलते हैं, झगड़े और विवाद से नहीं। जब मैं यह कहता हूँ कि "आज परमेश्वर ने नया कार्य किया है," तो मैं परमेश्वर के देह में लौटने की बात कर रहा हूँ। शायद ये वचन तुम्हें व्याकुल न करते हों; शायद तुम इनसे घृणा करते हो; या शायद ये तुम्हारे लिए बड़े रुचिकर हों। चाहे जो भी मामला हो, मुझे आशा है कि वे सब, जो परमेश्वर के प्रकट होने के लिए वास्तव में लालायित हैं, इस तथ्य का सामना कर सकते हैं और इसके बारे में झटपट निष्कर्षों पर पहुँचने के बजाय इसकी सावधानीपूर्वक जाँच कर सकते हैं; बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसा ही करना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" की 'प्रस्तावना' से उद्धृत

138. मुझे उम्मीद है कि परमेश्वर के प्रकट होने के आकांक्षी सभी भाई-बहन इतिहास की त्रासदी को नहीं दोहराएँगे। तुम्हें आधुनिक काल के फरीसी नहीं बनना चाहिए और परमेश्वर को फिर से सलीब पर नहीं चढ़ाना चाहिए। तुम्हें सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए कि परमेश्वर के वापस लौटने का स्वागत कैसे किया जाए, और इस बारे में स्पष्ट मन रखना चाहिए कि ऐसा व्यक्ति कैसे बना जाए, जो सत्य के प्रति समर्पित होता है। यह हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है, जो यीशु के बादल पर सवार होकर लौटने का इंतजार कर रहा है। हमें अपनी आध्यात्मिक आँखों को मलकर उन्हें साफ़ करना चाहिए और अतिरंजित कल्पना के शब्दों के दलदल में नहीं फँसना चाहिए। हमें परमेश्वर के व्यवहारिक कार्य के बारे में सोचना चाहिए, और परमेश्वर के व्यावहारिक पक्ष पर दृष्टि डालनी चाहिए। खुद को दिवास्वप्नों में बहने या खोने मत दो, सदैव उस दिन के लिए लालायित रहो, जब प्रभु यीशु बादल पर सवार होकर अचानक तुम लोगों के बीच उतरेगा और तुम्हें, जिन्होंने कि उसे कभी जाना या देखा नहीं है, और जो नहीं जानते कि उसकी इच्छा कैसे पूरी करें, ले जाएगा। अधिक व्यावहारिक मामलों पर विचार करना बेहतर है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" की 'प्रस्तावना' से उद्धृत

139. परमेश्वर उनकी खोज कर रहा है, जो उसके प्रकट होने की लालसा करते हैं। वह उनकी खोज करता है, जो उसके वचनों को सुनने में सक्षम हैं, जो उसके आदेश को नहीं भूले और अपना तन-मन उसे समर्पित करते हैं। वह उनकी खोज करता है, जो उसके सामने बच्चों के समान आज्ञाकारी हैं, और उसका विरोध नहीं करते। यदि तुम किसी भी ताकत या बल से अबाधित होकर ईश्वर के प्रति समर्पित होते हो, तो परमेश्वर तुम्हारे ऊपर अनुग्रह की दृष्टि डालेगा और तुम्हें अपने आशीष प्रदान करेगा। यदि तुम उच्च पद वाले, सम्मानजनक प्रतिष्ठा वाले, प्रचुर ज्ञान से संपन्न, विपुल संपत्तियों के मालिक हो, और तुम्हें बहुत लोगों का समर्थन प्राप्त है, तो भी ये चीज़ें तुम्हें परमेश्वर के आह्वान और आदेश को स्वीकार करने, और जो कुछ परमेश्वर तुमसे कहता है, उसे करने के लिए उसके सम्मुख आने से नहीं रोकतीं, तो फिर तुम जो कुछ भी करोगे, वह पृथ्वी पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगा और मनुष्य का सर्वाधिक धर्मी उपक्रम होगा। यदि तुम अपनी हैसियत और लक्ष्यों की खातिर परमेश्वर के आह्वान को अस्वीकार करोगे, तो जो कुछ भी तुम करोगे, वह परमेश्वर द्वारा श्रापित और यहाँ तक कि तिरस्कृत भी किया जाएगा। शायद तुम कोई अध्यक्ष, कोई वैज्ञानिक, कोई पादरी या कोई एल्डर हो, किंतु इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा पद कितना उच्च है, यदि तुम अपने ज्ञान और अपने उपक्रमों की योग्यता पर भरोसा रखते हो, तो तुम हमेशा असफल रहोगे, और हमेशा परमेश्वर के आशीषों से वंचित रहोगे, क्योंकि परमेश्वर ऐसा कुछ भी स्वीकार नहीं करता जो तुम करते हो, और वह नहीं मानता कि तुम्हारे उपक्रम धर्मी हैं, या यह स्वीकार नहीं करता कि तुम मानवजाति के भले के लिए कार्य कर रहे हो। वह कहेगा कि जो कुछ भी तुम करते हो, वह मानवजाति को परमेश्वर की सुरक्षा और आशीषों से वंचित करने के लिए करते हो। वह कहेगा कि तुम मानवजाति को अंधकार की ओर, मृत्यु की ओर, और एक ऐसे अंतहीन अस्तित्व के आरंभ की ओर ले जा रहे हो, जिसमें मनुष्य ने परमेश्वर और उसके आशीष खो दिए हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है' से उद्धृत

140. इस बात की परवाह किए बिना कि तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश हो या किसी अन्य देश के हो, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और एक सृजित प्राणी के दृष्टिकोण से परमेश्वर के कार्य को देखना चाहिए। इस तरह, तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को सीमाओं में नहीं बाँधोगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि आजकल, बहुत से लोगों की धारणा है कि यह असंभव है कि परमेश्वर किसी विशेष राष्ट्र में या कुछ निश्चित लोगों के बीच दिखाई देगा। परमेश्वर के कार्य का कितना गहन महत्व है, और परमेश्वर का प्रकटन कितना महत्वपूर्ण है! मनुष्य की धारणाएँ और सोच संभवतः उन्हें कैसे माप सकती हैं? और इसलिए मैं कहता हूँ, कि तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन की तलाश करने के लिए अपनी राष्ट्रीयता और जातीयता की धारणाओं को तोड़ देना चाहिए। केवल इस प्रकार से ही तुम अपनी धारणाओं से विवश नहीं होगे; केवल इस प्रकार से ही तुम परमेश्वर के प्रकटन का स्वागत करने के योग्य होगे। अन्यथा, तुम शाश्वत अंधकार में रहोगे, और कभी भी परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त नहीं करोगे।

परमेश्वर संपूर्ण मानव जाति का परमेश्वर है। वह स्वयं को किसी भी राष्ट्र या लोगों की निजी संपत्ति नहीं मानता है, बल्कि जैसी उसने योजना बनायी है उसके अनुसार वह, किसी भी रूप, राष्ट्र या लोगों द्वारा विवश हुए बिना, कार्य को करता जाता है। शायद तुमने इस रूप की कभी कल्पना भी न की हो, या शायद इस रूप के प्रति तुम्हारा दृष्टिकोण इनकार करने वाला हो, या शायद वह देश जहाँ परमेश्वर स्वयं को प्रकट करता है और जिन लोगों के बीच वह स्वयं को प्रकट करता है, वे सब ऐसे हों जिनके साथ सभी के द्वारा भेदभाव किया जाता हो और वे सब ऐसे हों जो पृथ्वी पर सर्वाधिक पिछड़े हुए हों। फिर भी परमेश्वर के पास अपनी बुद्धि है। अपनी महान सामर्थ्य के साथ, और अपने सत्य और स्वभाव के माध्यम से, उसने वास्तव में ऐसे लोगों के समूह को प्राप्त कर लिया है जो उसके साथ एक मन वाले हैं, ऐसे लोगों का समूह जिसे वह पूर्ण बनाने की कामना करता है—उसके द्वारा विजित समूह, जो सभी प्रकार के परीक्षणों, क्लेशों और उत्पीड़न को सहन करके, अंत तक उसका अनुसरण कर सकता है। किसी भी रूप या राष्ट्र की विवशताओं से मुक्त, परमेश्वर के प्रकटन का लक्ष्य, उसे अपने द्वारा बनाई गई योजना के अनुसार कार्य को पूरा करने में सक्षम बनाना है। यह वैसा ही है जैसे जब परमेश्वर यहूदिया में देह बना, तब उसका लक्ष्य समस्त मानव जाति को छुड़ाने के लिये सलीब पर चढ़ने के कार्य को पूरा करना था। फिर भी यहूदियों का मानना था कि परमेश्वर के लिए ऐसा करना असंभव है, और उन्हें यह असंभव लगता था कि परमेश्वर देह बन सकता है और प्रभु यीशु के रूप को ग्रहण कर सकता है। उनका "असंभव" वह आधार बन गया जिस पर उन्होंने परमेश्वर की निंदा और उसका विरोध किया, और अंततः इस्राएल को विनाश की ओर ले गया। आज, कई लोगों ने उसी तरह की ग़लती की है। वे अपनी समस्त शक्ति के साथ परमेश्वर के आसन्न प्रकटन की घोषणा करते हैं, मगर साथ ही उसके प्रकटन की निंदा भी करते हैं; उनका "असंभव" परमेश्वर के प्रकटन को एक बार और उनकी कल्पना की सीमा के भीतर सीमित कर देता है। और इसलिए मैंने कई लोगों को परमेश्वर के वचनों के आने के बाद जँगली और कर्कश हँसी का ठहाका लगाते देखा है। लेकिन क्या यह हँसी यहूदियों की निंदा और ईशनिंदा से किसी तरह से भिन्न है? सच्चाई की उपस्थिति तुम लोगों को श्रद्धावान नहीं बनाती, सच्चाई के लिए तरसने की तुम लोगों की प्रवृत्ति तो और भी कम है। तुम बस इतना ही करते हो कि लापरवाही से छानबीन करते हो और बेपरवाह जिंदादिली के साथ प्रतीक्षा करते हो। इस तरह से छानबीन और प्रतीक्षा करने से तुम्हें क्या फायदा हो सकता है? क्या ऐसा हो सकता है कि तुम परमेश्वर का व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करोगे? यदि तुम परमेश्वर के कथनों को नहीं समझ सकते, तो तुम किस तरह से परमेश्वर के प्रकटन को देखने के योग्य हो? जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य व्यक्त होता है, और वहाँ परमेश्वर की वाणी होगी। केवल वे लोग ही परमेश्वर की वाणी को सुन पाएँगे जो सत्य को स्वीकार कर सकते हैं, और केवल इस तरह के लोग ही परमेश्वर के प्रकटन को देखने के योग्य हैं। अपनी धारणाओं को एक ओर रख दो! शांत हो जाओ और इन शब्दों को सावधानीपूर्वक पढ़ो। यदि तुम सच्चाई के लिए तरसते हो, तो परमेश्वर तुम्हें प्रबुद्ध करेगा और तुम उसकी इच्छा और उसके वचनों को समझोगे। "असंभव" के बारे में तुम लोग अपनी राय को अलग रखो! लोग जितना अधिक मानते हैं कि कुछ असंभव है, उतना ही अधिक होने की संभावना होती है, क्योंकि परमेश्वर की बुद्धि स्वर्ग से ऊँची उड़ान भरती है, परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से ऊँचे हैं, और परमेश्वर का कार्य मनुष्य की सोच और धारणा की सीमाओं से परे जाता है। जितना अधिक कुछ असंभव होता है, उतना ही अधिक उसमें सच्चाई होती है जिसे खोजा जा सकता है; कोई चीज़ मनुष्य की धारणा और कल्पना से जितनी अधिक परे रहती है, उसमें परमेश्वर की इच्छा उतनी ही अधिक होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भले ही वह स्वयं को कहीं भी प्रकट क्यों न करता हो, परमेश्वर तब भी परमेश्वर है, और उसके प्रकटन के स्थान या तरीके की वजह से उसका सार कभी नहीं बदलेगा। परमेश्वर के पदचिह्न चाहे कहीं भी हों उसका स्वभाव वैसा ही बना रहता है, और चाहे परमेश्वर के पदचिह्न कहीं भी क्यों न हों, वह समस्त मनुष्यजाति का परमेश्वर है, ठीक वैसे ही जैसे कि प्रभु यीशु न केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है, बल्कि वह एशिया, यूरोप और अमेरिका के सभी लोगों का, और इससे भी अधिक समस्त ब्रह्मांड का एकमात्र परमेश्वर है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है' से उद्धृत

141. फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया, क्या तुम लोग उसका कारण जानना चाहते हो? क्या तुम फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे ज्यादा और क्या, उन्होंने केवल इस बात पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, मगर जीवन के इस सत्य की खोज नहीं की। इसलिए, वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं, क्यों उन्हें जीवन के मार्ग के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है, और वे नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है? तुम लोग कैसे कहते हो कि ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर के आशीष प्राप्त करेंगे? वे मसीहा को कैसे देख सकते हैं? वे यीशु का विरोध करते थे क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा को नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु के द्धारा कहे गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे, और क्योंकि उन्होंने मसीहा को नहीं समझा था। क्योंकि उन्होंने मसीहा को कभी नहीं देखा था, और कभी भी मसीहा के साथ नहीं रहे थे, उन्होंने मसीहा के नाम के साथ व्यर्थ ही चिपके रहने की ग़लती की, जबकि किसी भी संभव ढंग से मसीहा के सार का विरोध करते रहे। ये फरीसी सार रूप से हठधर्मी एवं अभिमानी थे और सत्य का पालन नहीं करते थे। परमेश्वर में उनके विश्वास का सिद्धांत है: इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा उपदेश कितना गहरा है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा अधिकार कितना ऊँचा है, तुम मसीह नहीं हो जब तक तुम्हें मसीहा नहीं कहा जाता। क्या ये दृष्टिकोण हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण नहीं हैं? मैं तुम लोगों से पुनः पूछता हूँ: मान लेते हैं कि तुम लोगों में यीशु के बारे में थोड़ी सी भी समझ नहीं है, तो क्या तुम लोगों के लिए उन गलतियों को करना अत्यंत आसान नहीं है जो बिल्कुल आरंभ के फरीसियों ने की थी? क्या तुम सत्य के मार्ग को जानने के योग्य हो? क्या तुम सचमुच में यह विश्वास दिला सकते हो कि तुम मसीह का विरोध नहीं करोगे? क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने के योग्य हो? यदि तुम नहीं जानते हो कि क्या तुम ईसा का विरोध करोगे, तो मेरा कहना है कि तुम पहले से ही मौत के कगार पर जी रहे हो। जो लोग मसीहा को नहीं जानते थे, वे सभी यीशु का विरोध करने में, यीशु को अस्वीकार करने में, उन्हें बदनाम करने में सक्षम थे। जो लोग यीशु को नहीं समझते हैं, वे सब उसे अस्वीकार करने एवं उसे बुरा भला कहने में सक्षम हैं। इसके अलावा, वे यीशु के लौटने को शैतान के द्वारा दिए जाने वाले धोखे के समान देखने में सक्षम हैं और अधिकांश लोग देह में लौटे यीशु की निंदा करेंगे। क्या इन सबसे तुम लोगों को डर नहीं लगता है? जिसका तुम लोग सामना करते हो, वह पवित्र आत्मा के विरोध में तिरस्कार होगा, कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचनों का विनाश होगा और यीशु के द्वारा व्यक्त किए गए समस्त वचनों को ठुकराना होगा। यदि तुम लोग इतने संभ्रमित हो तो यीशु से क्या प्राप्त कर सकते हो? यदि तुम लोग हठधर्मिता से अपनी गलतियों को मानने से इनकार करते हो, तो श्वेत बादल पर यीशु के देह में लौटने पर तुम लोग यीशु के कार्य को कैसे समझ सकते हो? यह मैं तुम लोगों को बताता हूँ: जो लोग सत्य को स्वीकार नहीं करते हैं, मगर अंधों की तरह यीशु के श्वेत बादलों पर आगमन का इंतज़ार करते हैं, निश्चित रूप से पवित्र आत्मा के विरोध में उनका तिरस्कार करेंगे, और ये वे वर्ग हैं जो नष्ट कर दिए जायेंगे। तुम लोग सिर्फ़ यीशु के अनुग्रह की कामना करते हो, और सिर्फ़ स्वर्ग के सुखद राज्य का आनंद लेना चाहता हो, मगर जब यीशु देह में लौटा, तो तुमने यीशु के द्वारा कहे गए वचनों का कभी भी पालन नहीं किया, और यीशु के द्वारा व्यक्त किये गए सत्य को कभी भी ग्रहण नहीं किया। यीशु के एक श्वेत बादल पर वापस आने के तथ्य के बदले में तुम लोग क्या थामे रखना चाहोगे? क्या वही ईमानदारी जिसमें तुम लोग बार-बार पाप करते रहते हो, और फिर बार-बार उनकी स्वीकारोक्ति करते हो? एक श्वेत बादल पर वापस आने वाले यीशु के लिए तुम बलिदान में क्या अर्पण करोगे? क्या कार्य के वे वर्ष, जिनकी तुम लोग स्वयं सराहना करते हो? लौट कर आये यीशु को तुम लोगों पर विश्वास कराने के लिए तुम लोग किस चीज को थाम कर रखोगे? क्या वह तुम्‍हारा अभिमानी स्वभाव है, जो किसी भी सत्य का पालन नहीं करता है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा' से उद्धृत

142. मैं तुम लोगों बता दूँ, कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से उस श्रेणी के होंगे जो विनाश को झेलेगी। वे जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकार करने में अक्षम हैं, वे निश्चित रूप से नरक के वंशज, महान फ़रिश्ते के वंशज हैं, उस श्रेणी के हैं जो अनंत विनाश के अधीन की जाएगी। कई लोग मैं क्या कहता हूँ इसकी परवाह नहीं करते हैं, किंतु मैं ऐसे हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ जो यीशु का अनुसरण करते हैं, कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते हुए अपनी आँखों से देखो, तो यह धार्मिकता के सूर्य का सार्वजनिक प्रकटन होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा, मगर तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते हुए देखोगे, यही वह समय भी होगा जब तुम दण्ड दिए जाने के लिए नीचे नरक में चले जाओगे। वह परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति का समय होगा, और यह तब होगा जब परमेश्वर सज्जन को पुरस्कार और दुष्ट को दण्ड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय मनुष्य के संकेतों को देखने से पहले ही समाप्त हो चुका होगा, जब वहाँ सिर्फ़ सत्य की अभिव्यक्ति ही होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं तथा संकेतों की खोज नहीं करते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए जाते हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ़ वे ही जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि "ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता है एक झूठा मसीह है" अनंत दण्ड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ़ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेतों को प्रदर्शित करता है, परन्तु उस यीशु को स्वीकार नहीं करते हैं जो गंभीर न्याय की घोषणा करता है और जीवन में सच्चे मार्ग को बताता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटें तो वह उसके साथ व्यवहार करें। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अभिमानी हैं। ऐसे अधम लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा' से उद्धृत

143. यीशु का लौटना उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, परन्तु उनके लिए जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं, यह निंदा का एक संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के विरोध में तिरस्कार नहीं करना चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का पालन करता हो और सत्य की खोज करने के लिए लालायित हो; सिर्फ़ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे। मैं तुम लोगों को परमेश्वर में विश्वास के रास्ते पर सावधानी से चलने की सलाह देता हूँ। निष्कर्ष पर न पहुँचो; इससे ज्यादा और क्या, परमेश्वर में अपने विश्वास में लापरवाह और विचारहीन न बनो। तुम लोगों को जानना चाहिए कि कम से कम, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं उन्हें विनम्र और श्रद्धावान होना चाहिए। जिन्होंने सत्य को सुन लिया है और फिर भी इस पर अपनी नाक-भौं सिकोड़ते हैं, वे मूर्ख और अज्ञानी हैं। जिन्होंने सत्य को सुन लिया है और फिर भी लापरवाही के साथ निष्कर्षों तक पहुँचते हैं या उसकी निंदा करते हैं, ऐसे लोग अभिमान से घिरे हुए हैं। जो कोई भी यीशु पर विश्वास करता है वह दूसरों को श्राप देने या दूसरों की निंदा करने के योग्य नहीं है। तुम सब लोगों को एक ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो तर्कसंगत हो और सत्य को स्वीकार करता हो। शायद, सत्य के मार्ग को सुन कर और जीवन के वचन को पढ़ कर, तुम विश्वास करते हो कि इन 10,000 वचनों में से सिर्फ़ एक ही वचन है जो तुम्हारे दृढ़ विश्वास के अनुसार और बाइबल के समान है, और फिर तुम्हें उसमें इन वचनों में से 10,000वें वचन की खोज करते रहना चाहिए। मैं अब भी तुम्हें सुझाव देता हूँ कि विनम्र बनो, अति-आत्मविश्वासी न बनो, और अपने आप को बहुत ऊँचा न उठाओ। परमेश्वर के लिए अपने हृदय में इतना थोड़ा सा आदर रखकर, तुम बड़े प्रकाश को प्राप्त करोगे। यदि तुम इन वचनों की सावधानी से जाँच करो और इन पर बार-बार मनन करो, तब तुम समझोगे कि वे सत्य हैं या नहीं, वे जीवन हैं या नहीं। शायद, केवल कुछ वाक्यों को पढ़ कर, कुछ लोग इन वचनों की बिना देखे ही यह कहते हुए निंदा करेंगे, "यह पवित्र आत्मा की थोड़ी प्रबुद्धता से अधिक कुछ नहीं है," अथवा "यह एक झूठा मसीह है जो लोगों को धोखा देने के लिए आया है।" जो लोग ऐसी बातें कहते हैं वे अज्ञानता से अंधे हो गए हैं! तुम परमेश्वर के कार्य और बुद्धि को बहुत कम समझते हो और मैं तुम्हें पुनः आरंभ से शुरू करने की सलाह देता हूँ! अंत के दिनों में झूठे मसीहों के प्रकट होने की वजह से परमेश्वर द्वारा व्यक्त किये गए वचनों की तुम लोगों को निंदा अवश्य नहीं करनी चाहिए, और क्योंकि तुम लोग धोखे से डरते हो, इसलिए तुम लोगों को ऐसा अवश्य नहीं बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के विरोध में तिरस्कार करे। क्या यह एक बड़ी दयनीय स्थिति नहीं होगी? यदि, बहुत जाँच के बाद, अब भी तुम्हें लगता है कि ये वचन सत्य नहीं हैं, मार्ग नहीं हैं, और परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं हैं, तो फिर अंततः तुम दण्डित किए जाओगे, और आशीषों के बिना होगे। यदि तुम ऐसे सत्य को जो साफ़-साफ़ और स्पष्ट रूप से कहा गया है स्वीकार नहीं कर सकते हो, तो क्या तुम परमेश्वर के उद्धार के अयोग्य नहीं हो? क्या तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौटने के लिए पर्याप्त सौभाग्यशाली नहीं है? इस बारे में विचार करो! उतावले और अविवेकी न बनो, और परमेश्वर में विश्वास को एक खेल की तरह न समझो। अपनी मंजिल के लिए, अपनी संभावनाओं के लिए, अपने जीवन के लिए विचार करो और अपने स्वयं के साथ ऊपरी तौर से दिलचस्पी न लो। क्या तुम इन वचनों को स्वीकार कर सकते हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा' से उद्धृत

144. कई लोगों में परमेश्वर के दूसरे देहधारण के बारे में बुरी भावना है, क्योंकि लोगों को यह बात मानने में कठिनाई होती है कि परमेश्वर न्याय का कार्य करने के लिए देह धारण करेगा। फिर भी, मुझे तुम्हें यह अवश्य बताना होगा कि प्रायः परमेश्वर का कार्य मनुष्य की अपेक्षाओं से बहुत आगे तक जाता है, और मनुष्य के मन के लिए इसे स्वीकार करना कठिन होता है। क्योंकि लोग पृथ्वी पर मात्र कीड़े-मकौड़े हैं, जबकि परमेश्वर सर्वोच्च है जो ब्रह्मांड में समाया हुआ है; मनुष्य का मन गंदे पानी से भरे हुए एक गड्डे के सदृश है, जो केवल कीड़े-मकोड़ों को ही उत्पन्न करता है, जबकि परमेश्वर के विचारों द्वारा निर्देशित कार्य का प्रत्येक चरण परमेश्वर की बुद्धि का परिणाम है। लोग हमेशा परमेश्वर के साथ संघर्ष करने की कोशिश करते हैं, जिसके बारे में मैं कहता हूँ कि यह स्वत: स्पष्ट है कि अंत में कौन हारेगा। मैं तुम सबको समझा रहा हूँ कि अपने आपको स्वर्ण से अधिक मूल्यवान मत समझो। जब दूसरे लोग परमेश्वर का न्याय स्वीकार कर सकते हैं, तो तुम क्यों नहीं? तुम दूसरों से कितने ऊँचे हो? अगर दूसरे लोग सत्य के आगे सिर झुका सकते हैं, तो तुम भी ऐसा क्यों नहीं कर सकते? परमेश्वर के कार्य का वेग अबाध है। वह सिर्फ़ तुम्हारे द्वारा दिए गए "सहयोग" के कारण न्याय के कार्य को फिर से नहीं दोहराएगा, और तुम इतने अच्छे अवसर के हाथ से निकल जाने पर पछतावे से भर जाओगे। अगर तुम्हें मेरे वचनों पर विश्वास नहीं है, तो फिर आकाश में स्थित उस महान श्वेत सिंहासन द्वारा खुद पर "न्याय पारित किए जाने" की प्रतीक्षा करो! तुम्हें अवश्य पता होना चाहिए कि सभी इजराइलियों ने यीशु को ठुकराया और अस्वीकार किया था, और फिर भी यीशु द्वारा मानवजाति के छुटकारे का तथ्य फिर भी पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी के के छोरों तक फैल गया। क्या यह परमेश्वर द्वारा बहुत पहले बनाई गई वास्तविकता नहीं है? अगर तुम अभी भी यीशु द्वारा स्वयं को स्वर्ग में ले जाए जाने का इंतज़ार कर रहे हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम एक निर्जीव काष्ठ के बेकार टुकड़े हो।[ख] यीशु तुम जैसे किसी भी झूठे विश्वासी को स्वीकार नहीं करेगा, जो सत्य के प्रति निष्ठाहीन है और केवल आशीष चाहता है। इसके विपरीत, वह तुम्हें हज़ारों वर्षों तक जलने देने के लिए आग की झील में फेंकने में कोई दया नहीं दिखाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है' से उद्धृत

145. जो मसीह के द्वारा कहे गए सत्य पर भरोसा किए बिना जीवन प्राप्त करने की अभिलाषा करते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे हास्यास्पद लोग हैं और जो मसीह के द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते हैं, वे कल्पना में ही खोए हुए हैं। इसलिए मैं यह कहता हूँ कि वे लोग जो अंत के दिनों के मसीह को स्वीकार नहीं करते हैं वे हमेशा के लिए परमेश्वर के द्वारा घृणित समझे जाएंगे। अंत के दिनों में मसीह मनुष्यों के लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने का प्रवेशद्वार है, उससे होकर गए बिना कोई प्रवेश नहीं कर सकता। मसीह के माध्यम बिना कोई भी परमेश्वर के द्वारा पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता। परमेश्वर में तुम्हारा विश्वास है, और इसलिए तुम्हें उसके वचनों को स्वीकार करना ही चाहिए और उसके मार्ग का पालन करना चाहिए। सत्य को प्राप्त करने में या जीवन के प्रावधान को स्वीकार करने में असमर्थ रहते हुए तुम सिर्फ़ अनुग्रह प्राप्त करने के बारे में नहीं सोच सकते हो। मसीह अंत के दिनों में आता है ताकि वे सभी जो सच्चाई से उस पर विश्वास करते हैं, उन्हें जीवन प्रदान किया जाए। उसका कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है और यही वह मार्ग है जिसे नए युग में प्रवेश करने वालों को अपनाना चाहिए। यदि तुम उसे पहचानने में असमर्थ हो, और उसकी भर्त्सना करते हो, निंदा करते हो और यहाँ तक कि उसे उत्पीड़ित करते हो, तो तुम अनंत समय तक जलाए जाते रहने के लिए निर्धारित हो और तुम कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाओगे। क्योंकि यह मसीह ही स्वयं पवित्र आत्मा और परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, जिसे परमेश्वर ने पृथ्वी पर अपना कार्य सौंपा है। इसलिए मैं कहता हूँ कि अंत के दिनों के मसीह के द्वारा जो भी कार्य किया गया है यदि उसे तुम स्वीकार नहीं करते हो तो तुम पवित्र आत्मा की निंदा करते हो। जो प्रतिकार पवित्र आत्मा की निंदा करने वालों को सहना होगा वह सभी के लिए स्वत:-स्पष्ट है। मैं यह भी कहता हूँ कि यदि तुम अंत के दिनों के मसीह का विरोध करोगे और उसे ठुकराओगे, तो ऐसा कोई भी नहीं है जो तुम्हारे लिए इसका नतीजा भुगत लेगा। इसके अलावा, आज के बाद से फिर कभी तुम्हें परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलेगा; यदि तुम खुद की गलती पर प्रायश्चित करने की कोशिश भी करते हो, तो भी तुम कभी परमेश्वर का चेहरा नहीं देख पाओगे। क्योंकि तुम जिसका विरोध करते हो वह मनुष्य नहीं है, जिसको ठुकरा रहे हो वह क्षुद्र प्राणी नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम इसके परिणामों के बारे में जानते हो? तुमने कोई छोटी-मोटी गलती नहीं बल्कि एक बहुत ही जघन्य अपराध किया होगा। इसलिए मैं प्रत्येक को सलाह देता हूँ कि सत्य के सामने अपने ज़हरीले दाँत मत दिखाओ, या लापरवाही से आलोचना मत करो, क्योंकि केवल सत्य ही तुमको जीवन दिला सकता है और सत्य के अलावा कुछ भी तुम्हें नया जन्म पाने या फिर से परमेश्वर का चेहरा देखने की अनुमति नहीं दे सकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है' से उद्धृत

फुटनोट:

क. मूल पाठ में, "के परिणाम" यह वाक्यांश नहीं है।

ख. निर्जीव काष्ठ का टुकड़ा : एक चीनी मुहावरा, जिसका अर्थ है—"सहायता से परे"।

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