841 परमेश्वर द्वारा पूर्ण किये जाने का मार्ग

1

तुम जितना ईश-वचन समझोगे

जितना उन्हें अभ्यास में लाओगे,

उतनी ही जल्द पूर्णता के पथ पर

चलना शुरू कर सकोगे।

प्रार्थना से तुम पूर्ण किए जा सकते हो।

ईश-वचनों को खाने-पीने से,

समझकर उन्हें जीने से भी तुम पूर्ण किए जाओगे।


ईश-वचनों के अनुभव से,

तुम्हें जानना चाहिए तुममें क्या कमी है,

और अपने घातक दोष और

दूसरी कमजोरियाँ देखनी चाहिए;

तुम्हें ईश्वर की खोज और प्रार्थना करनी चाहिए।

ऐसे धीरे-धीरे, तुम पूर्ण किए जाओगे।


पूर्णता का पथ है प्रार्थना करना

ईश-वचनों को खाना पीना,

उनका अर्थ समझना, उनका अनुभव करना,

जानना अपनी कमियों को,

ईश-कार्य को समर्पित होना,

ईश्वर के प्रति अपने प्रेम के द्वारा,

ईश्वर के बोझ की परवाह करना

अपना देह-सुख त्यागना अक्सर करना सहभागिता,

जो समृद्ध कर सके तुम्हारे अनुभव।


2

चाहे जीवन हो सामुदायिक, या हो निजी,

सभा बड़ी हो या छोटी,

अनुभव हासिल करने में वे तुम्हारी मदद कर सकें,

ईश्वर की मौजूदगी में दिल को

शांत होकर उसके पास लौटना सिखा सकें।

ये सब है हिस्सा पूर्ण बनाए जाने की प्रक्रिया का।


ईश-वचनों का अनुभव कर स्वाद लो

ताकि तुम उन्हें जी सको,

और ईश्वर के प्रति बड़ी आस्था,

और अधिक प्रेम पा सको।

फिर धीरे-धीरे तुम पा सकोगे

छुटकारा अपने शैतानी स्वभाव से;

अपने गलत इरादे त्यागकर,

सामान्य इंसान की तरह जी सकोगे।


जितना अधिक ईश्वर के लिए प्रेम होगा,

उतना ही पूर्ण किए जाओगे तुम,

शैतान की भ्रष्टता के काबू में उतना ही कम रहोगे।

असली अनुभव से,

धीरे-धीरे पूर्णता के पथ पर कदम रखोगे।

अगर पूर्ण बनाए जाना चाहो,

तो ध्यान रखो ईश्वर की इच्छा का

और जियो उसके वचनों को।


—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, पूर्णता प्राप्त करने के लिए परमेश्वर की इच्छा को ध्यान में रखो से रूपांतरित

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