126 जो करते हैं प्यार परमेश्वर से रहते हैं वे रोशनी में

1

परमेश्वर का न्याय करता साफ़ इंसान को,

और बचाता है भ्रष्टता से हमें।

हम परमेश्वर के वचनों का आनंद लेते,

खुश हो स्तुति करते, हम रोशनी में जीते।

नाचो दिल से!

ऊँचे स्वर में गाओ!

परमेश्वर के पीछे चलो!

और मुड़ के न देखो!

हमें होना चाहिए समर्पित और सच्चा,

परमेश्वर की इच्छा की करनी चाहिए परवाह।

परमेश्वर का राज्य है उसे प्रेम करने वालों का।

रोशनी में रहते हैं उसे प्रेम करने वाले, हाँ।

रोशनी में रहते हैं उसे प्रेम करने वाले, हाँ।

2

परमेश्वर को प्रेम करके, हम हर्षित हैं।

परमेश्वर को प्रेम करके, हम खुश हैं।

करके उसके दिल की सेवा,

उसकी इच्छा को पूरा,

होंगे हम धन्य।

सत्य का अभ्यास कर,

मुक्त हैं हम आत्मा में।

परमेश्वर के लिए बढ़ता जाता है,

प्यार हमारा दिल में।

हमें होना चाहिए समर्पित और सच्चा,

परमेश्वर की इच्छा की करनी चाहिए परवाह।

परमेश्वर का राज्य है उसे प्रेम करने वालों का।

रोशनी में रहते हैं उसे प्रेम करने वाले, हाँ।

रोशनी में रहते हैं उसे प्रेम करने वाले, हाँ।

परमेश्वर को प्रेम करके, हम हर्षित हैं।

परमेश्वर को प्रेम करके, हम खुश हैं।

जीवन की राह में,

आयें कितनी भी मुश्किलें,

लेकिन पीछे हम नहीं हटेंगे।

चलते हैं हम कठिन राह पे,

अंत तक काम करते हैं निष्ठा से।

परमेश्वर से प्रेम है हमें, वो आशीष देते हैं।

हम सदा रोशनी में रहते हैं!

हमें होना चाहिए समर्पित और सच्चा,

परमेश्वर की इच्छा की करनी चाहिए परवाह।

परमेश्वर का राज्य है उसे प्रेम करने वालों का।

रोशनी में रहते हैं उसे प्रेम करने वाले, हाँ।

रोशनी में रहते हैं उसे प्रेम करने वाले, हाँ।

रोशनी में रहते हैं उसे प्रेम करने वाले, हाँ।

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