847 सत्य की खोज ही पूर्ण बनाए जाने का एकमात्र अवसर है

1

अगर इंसान को शुद्ध न किया जाए, तो वो गंदगी का ढेर है;

अगर ईश्वर उसकी रक्षा, देखभाल न करे, तो वो अभी भी शैतान का बंदी है;

अगर उसका न्याय और ताड़ना न हो,

तो वो शैतान के दुष्ट प्रभाव के दमन से किसी भी तरह बच न पाएगा।

तुम कितना जानते हो आज के ताड़ना और न्याय के बारे में?

जो पतरस जानता था तुम कितना जानते उस बारे में?

अगर तुम अब न जान पाए, क्या जान पाओगे भविष्य में?

अगर गंभीर नहीं इंसान जीवन के विषय में,

अनुसरण न करे सत्य में प्रवेश का,

अगर प्रयास न करे अपने स्वभाव को बदलने का,

ईश-कार्य के ज्ञान की खोज तो बिल्कुल न करे,

अगर अपनी ईश-आस्था में ये सब न करे,

तो इंसान को पूर्ण नहीं बनाया जा सकता।

2

तुम जैसा आलसी, कायर इंसान ताड़ना और न्याय को समझ न सके।

अगर तुम देह-शांति के पीछे भागोगे, देह-सुख के पीछे भागोगे,

तो तुम शुद्ध न हो पाओगे, शैतान की ओर लौट जाओगे,

क्योंकि तुम शैतान और देह में ही जी रहे हो।

अगर गंभीर नहीं इंसान जीवन के विषय में,

अनुसरण न करे सत्य में प्रवेश का,

अगर प्रयास न करे अपने स्वभाव को बदलने का,

ईश-कार्य के ज्ञान की खोज तो बिल्कुल न करे,

अगर अपनी ईश-आस्था में ये सब न करे,

तो इंसान को पूर्ण नहीं बनाया जा सकता।

3

अभी बहुत-से लोग जीवन का अनुसरण नहीं करते,

यानी शुद्ध होने की या गहरे जीवन अनुभव में

प्रवेश करने की परवाह नहीं करते।

जीवन या ईश-ज्ञान के अनुसरण के बिना,

या स्वभाव में बदलाव का काम किए बिना,

वे शैतान से बचकर पूर्ण नहीं बनाए जा सकते।

वे अपने ईश-ज्ञान और स्वभाव में बदलाव लाने को लेकर

ज़रा भी गंभीर नहीं लगते, उनकी तरह जो केवल धर्म में आस्था रखते हैं,

महज़ रस्मों का अनुसरण करते हैं और नियमित सेवाओं में शामिल होते हैं।

क्या ये समय की बर्बादी नहीं?

अगर गंभीर नहीं इंसान जीवन के विषय में,

अनुसरण न करे सत्य में प्रवेश का,

अगर प्रयास न करे अपने स्वभाव को बदलने का,

ईश-कार्य के ज्ञान की खोज तो बिल्कुल न करे,

अगर अपनी ईश-आस्था में ये सब न करे,

तो इंसान को पूर्ण नहीं बनाया जा सकता।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान' से रूपांतरित

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