495 वास्तविक परिवर्तन के लिए सत्य का अभ्यास करो

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बहुत कुछ है तुम लोगों के प्रवेश और अभ्यास के लिए,

इसकी कई परतें हैं, ये पहले से अधिक विस्तृत है।

अगर सत्य का कोई ज्ञान नहीं तुम्हें,

तो ये सबूत है, इसमें प्रवेश किया नहीं तुमने।

ज़्यादातर समय, इंसान का सत्य का ज्ञान सतही होता;

वो बुनियादी सत्य का अभ्यास नहीं कर सकता,

क्योंकि इंसान विद्रोही है, आज के काम का उसका ज्ञान सतही है।

इसलिए इंसान को पूर्ण बनाना मुश्किल है।

तुम विद्रोही हो, अपने पुराने तरीकों में लिप्त हो,

न तुम सत्य का साथ दे पाते, न उनका अभ्यास कर पाते।

ऐसे लोगों को बचाया न जा सके। ऐसे लोग जीते नहीं गए हैं।

इंसान के जीवन में विकास का, उसके स्वभाव में बदलाव का तरीका है

वास्तविकता में प्रवेश करना और विस्तार से अनुभव करना।

2

अगर तुम्हारा प्रवेश विस्तृत नहीं, वो लक्ष्यहीन है,

अगर तुम्हारे प्रवेश में वास्तविकता नहीं,

तो ये सच है, तुम्हारा विकास धीमा होगा।

तो तुम्हारा अनुसरण सब बेमानी होगा।

अगर तुम्हें सत्य के सार का ज्ञान नहीं, तो तुममें बदलाव न होगा।

प्रवेश के दौरान विस्तृत अनुभव के साथ, असली ज्ञान और प्रवेश के साथ,

तुम्हारे स्वभाव में तेज़ी से बदलाव होगा, बदलाव होगा।

तुम सत्य की गहरी समझ पा सकते हो,

कहीं अधिक गहराई से प्रवेश कर सकते हो,

ये तभी होगा जब पवित्र आत्मा तुम्हें प्रबुद्ध करे,

तुम्हारे अनुभव में तुम्हें प्रबुद्ध करे।

इंसान के जीवन में विकास का, उसके स्वभाव में बदलाव का तरीका है

वास्तविकता में प्रवेश करना और विस्तार से अनुभव करना।

इंसान के जीवन में विकास का, उसके स्वभाव में बदलाव का तरीका है

वास्तविकता में प्रवेश करना और विस्तार से अनुभव करना।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर' से रूपांतरित

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