273 जब तक सत्य न पा लूँ, मैं नहीं रुकूँगा

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मैं इस बात की पुष्टि करता हूँ कि मसीह सत्य, मार्ग और जीवन है। मैं तब तक नहीं रुकूँगा, जब तक मैं परमेश्वर को न जान लूँ!

अगर मैं उन दुखों को न सह पाऊँ जो मुझे सहने चाहिए, तो मैं कभी इंसान नहीं कहला पाऊँगा। अगर मैं परमेश्वर के प्रेम का प्रतिदान नहीं सका, तो उसे देखने में मुझे बहुत शर्म आएगी।

देह में प्रकट हो रहा वचन, स्वयं परमेश्वर है। वह अंत दिनों का व्यवहारिक देहधारी परमेश्वर है।

समय शुरू होने से पहले, उसने अंत के दिनों में मेरे जन्म को पूर्वनियत कर दिया था। मुझे जीतकर और बचाकर, परमेश्वर ने अपना जीवन मुझको दिया है।

परमेश्वर ने इंसान के पापी स्वभाव का न्याय किया है। उसने इंसान के घिनौने और दुष्ट चेहरे को उजागर किया है।

मैं बेआबरू होने के कारण कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं हूँ, मैं बहुत शर्मिंदा हूँ। मुझे पता है कि मैं मुट्ठी भर ख़ाक के सिवाय कुछ नहीं हूँ।

मेरे पास घमंड करने के लिए अब कुछ नहीं बचा है। मैं साष्टाँग दंडवत करता हूँ, मेरा दिल जीत लिया गया है।

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परमेश्वर के न्याय से मैं खुद को जान पाया हूँ और मैंने अपनी गहन भ्रष्टता और उसकी सेवा करने की अपनी अयोग्यता को देखा है।

परमेश्वर की धार्मिकता और पवित्रता मेरी अवज्ञा को उजागर करती है, मुझे अपनी नीचता और दुष्टता से और भी अधिक घृणा हो गई।

परमेश्वर का जीवन ही सत्य है। मेरा हृदय सत्य का प्यासा है, मैं प्रगति करने का प्रयत्न करूंगा।

परमेश्वर को जानना मुझे जीवन का अनुसरण करने की प्रेरणा देता है। उसके वचनों के अनुसार जीना वास्तव में एक महान आशीष है।

मैं परमेश्वर को प्रेम करने के लिए अपना जीवन अर्पित करने को तैयार हूँ; मुझे इससे संतोष होता है कि मैं उसकी गवाही दे सकता हूँ।

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