925 परमेश्वर शैतान को उन्हें नुकसान पहुंचाने नहीं देता जिन्हें वो बचाना चाहता है

1 अय्यूब की परीक्षाओं के अंत के बाद उसकी गवाही को प्राप्त करने के पश्चात्, परमेश्वर ने संकल्प लिया कि वह अय्यूब के समान लोगों के एक समूह—या एक से अधिक समूह—को प्राप्त करेगा, मगर उसने यह संकल्प लिया कि वह फिर कभी शैतान को अनुमति नहीं देगा कि वह उन साधनों का उपयोग करके किसी और व्यक्ति पर हमला या उसके साथ दुर्व्यवहार करे जिनके द्वारा इसने परमेश्वर के साथ शर्त लगाकर अय्यूब को प्रलोभित किया था, उस पर हमला किया था और उसके साथ दुर्व्यवहार किया था; परमेश्वर ने शैतान को अनुमति नहीं दी कि वह फिर कभी मनुष्य के साथ ऐसी चीज़ें करे, जो कि कमज़ोर, मूर्ख और अज्ञानी है—इतना काफी था कि शैतान ने अय्यूब को प्रलोभित किया था! शैतान जैसा चाहे वैसा लोगों के साथ दुर्व्यवहार करे इसकी उसे अनुमति नहीं देना परमेश्वर की करुणा है।

2 परमेश्वर ने शैतान को फिर कभी ऐसी चीज़ें करने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि जो लोग परमेश्वर का अनुसरण करते हैं उनके जीवन और उनकी हर चीज़ पर परमेश्वर के द्वारा शासन और उनका आयोजन किया जाता है, और शैतान को हक़ नहीं है कि वह अपनी इच्छानुसार परमेश्वर के चुने हुए लोगों को हेरफेर करे—तुम लोगों को इस बिन्दु के बारे में स्पष्ट हो जाना चाहिए! परमेश्वर मनुष्य की कमज़ोरी का ध्यान रखता है, और उसकी मूर्खता तथा अज्ञानता को समझता है। यद्यपि, मनुष्य को पूरी तरह से बचाया जा सके इसके लिए, परमेश्वर को उसे शैतान के हाथों में सौंपना पड़ा, फिर भी परमेश्वर यह देखना नहीं चाहता है कि शैतान के द्वारा हमेशा मनुष्य के साथ खिलौने की तरह खेला जाए और दुर्व्यवहार किया जाए, और वह मनुष्य को हमेशा दुःख दर्द सहते हुए नहीं देखना चाहता है। मनुष्य को परमेश्वर के द्वारा सृजित किया गया था, और यह पूरी तरह से न्यायोचित है कि परमेश्वर मनुष्य की हर चीज़ पर शासन करे और उसकी व्यवस्था करे; यह परमेश्वर की ज़िम्मेदारी है, और वह अधिकार है जिसके द्वारा परमेश्वर सभी चीज़ों पर शासन करता है!

3 परमेश्वर शैतान को इच्छानुसार मनुष्य के साथ दुर्व्यवहार और दुराचार नहीं करने देता है, मनुष्य को पथभ्रष्ट करने के लिए शैतान को विभिन्न उपायों को काम में नहीं लाने देता है, और इसके अतिरिक्त, वह मनुष्य के बारे में परमेश्वर की संप्रभुता में शैतान को हस्तक्षेप नहीं करने देता है, न ही वह शैतान को उन व्यवस्थाओं को कुचलने और नष्ट करने देता है जिनके द्वारा परमेश्वर सभी चीज़ों पर शासन करता है, मनुष्यजाति के प्रबंधन और उसके उद्धार के परमेश्वर के महान कार्य के बारे में तो कुछ कहना ही नहीं! जिन लोग को परमेश्वर बचाना चाहता है, और जो लोग जो परमेश्वर के लिए गवाही देने में समर्थ हैं, वे परमेश्वर की छः हज़ार वर्षीय प्रबंधन योजना का मर्म और साकार रूप हैं, और साथ ही उसके छः हज़ार वर्षों के कार्य में उसके प्रयासों की क़ीमत भी हैं। परमेश्वर इन लोगों को यूँही शैतान को कैसे दे सकता है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" से रूपांतरित

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