975 नए युग की आज्ञाएं बहुत ही महत्वपूर्ण हैं

1 नए युग की आज्ञाओं का अर्थ बहुत गहरा है। उनसे संकेत मिलता है कि परमेश्वर वास्तव में पृथ्वी पर प्रकट होगा, जहाँ से वह देह में अपनी सम्पूर्ण महिमा को प्रकट करते हुए समूचे विश्व को जीत लेगा। वे यह भी संकेत करती हैं कि व्यवहारिक परमेश्वर अपने चुने हुए सभी लोगों को पूर्ण बनाने के लिए, पृथ्वी पर और भी अधिक व्यवहारिक कार्य करने जा रहा है। इसके अलावा, परमेश्वर पृथ्वी पर वचनों से सब कुछ निष्पादित करेगा और उस आज्ञप्ति को प्रकट करेगा कि "देहधारी परमेश्वर सबसे ऊँचा उठकर आवर्धित होगा, और सभी लोग एवं सभी देश परमेश्वर—जो महान है—उसकी आराधना करने के लिए घुटनों के बल बैठेंगे।" हालाँकि नए युग की आज्ञाएँ मनुष्य द्वारा पालन करने के लिए हैं, भले ही ऐसा करना मनुष्य का कर्तव्य और उसका दायित्व है, लेकिन वे जिस अर्थ का प्रतिनिधित्व करती हैं, वो इतना अगाध है कि उसे एक या दो शब्दों में पूरी तरह से अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता। यहोवा और यीशु के द्वारा घोषित की गईं पुराने नियमों की व्यवस्थाओं और नए नियमों के अध्यादेशों का स्थान नए युग की आज्ञाओं ने ले लिया। यह एक गहरी शिक्षा है, यह उतना सरल विषय नहीं है जितना लोग सोचते हैं।

2 नए युग की आज्ञाओं में व्यवहारिक अर्थ का एक पहलू है : वे अनुग्रह के युग और राज्य के युग के बीच एक अंतराफलक की भूमिका निभाते हैं। नए युग की आज्ञाएँ पुराने युग की प्रथाओं और अध्यादेशों को समाप्त करती हैं, साथ ही यीशु के युग की और उससे पहले की सभी प्रथाओं को भी समाप्त करती हैं। वे मनुष्य को अधिक व्यवहारिक परमेश्वर की उपस्थिति में लाती हैं, मनुष्य को परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से पूर्णता प्राप्त करना शुरू करने देती हैं; वे पूर्ण बनाए जाने के मार्ग का आरम्भ हैं। इसलिए, नए युग की आज्ञाओं के प्रति तुम लोगों का रवैया सही होना चाहिए, और उनका अनुसरण लापरवाही से नहीं करना चाहिए, न ही उनका तिरस्कार करना चाहिए। नए युग की आज्ञाएँ एक बिंदु विशेष पर जोर देती हैं : वो यह कि मनुष्य आज के व्यवहारिक स्वयं परमेश्वर की आराधना करेगा, जिसमें आत्मा के सार के प्रति और अधिक व्यवहारिक रूप से समर्पित होना शामिल है। आज्ञाएँ उस सिद्धान्त पर भी जोर देती हैं जिसके द्वारा धार्मिकता के सूर्य के रूप में प्रकट होने के बाद परमेश्वर, मनुष्य का न्याय करेगा कि वे दोषी हैं या धार्मिक।

नए युग की आज्ञाएँ इस बात की प्रतीक हैं कि परमेश्वर और मनुष्य नए स्वर्ग और नई पृथ्वी के क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं, और जैसे यहोवा ने इस्रालियों के बीच कार्य किया था और यीशु ने यहूदियों के बीच कार्य किया था, वैसे ही परमेश्वर पृथ्वी पर और अधिक व्यवहारिक कार्य तथा और अधिक बड़े काम करेगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आज्ञाओं का पालन करना और सत्य का अभ्यास करना' से रूपांतरित

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