142 क्या तुम यह दावा करने की हिम्मत कर सकते हो कि परमेश्वर का नाम कभी नहीं बदल सकता?

1

कहते हैं, परमेश्वर का नाम नहीं बदलता।

फिर क्यों यहोवा का नाम यीशु हुआ?

ये भविष्यवाणी थी कि मसीह आएगा,

फिर क्यों यीशु नाम का एक व्यक्ति आया?

परमेश्वर का नाम क्यों बदल गया था?

क्या परमेश्वर आज, नया काम नहीं, कर सकता?


परमेश्वर सदा परमेश्वर रहेगा।

उसका नाम और काम बदल सकता है,

पर उसका स्वभाव और बुद्धि कभी नहीं बदलेगी।

परमेश्वर सदा परमेश्वर रहेगा।

उसका नाम और काम बदल सकता है,

पर उसका स्वभाव और बुद्धि कभी नहीं बदलेगी, कभी नहीं बदलेगी।


2

पिछला कार्य बदला जा सकता है

और यहोवा के बाद यीशु कार्य आगे बढ़ाता है।

क्या अन्य कार्य यीशु के कार्य के बाद नहीं हो सकता

और यीशु का नाम बदल नहीं सकता?

यदि यहोवा का नाम बदलकर यीशु हो सकता है,

तो क्या यीशु का नाम भी बदल नहीं सकता?

इसमें कुछ भी अजीब नहीं है; बस केवल लोग ही नासमझ हैं।


परमेश्वर सदा परमेश्वर रहेगा।

उसका नाम और काम बदल सकता है,

पर उसका स्वभाव और बुद्धि कभी नहीं बदलेगी।

परमेश्वर सदा परमेश्वर रहेगा।

उसका नाम और काम बदल सकता है,

पर उसका स्वभाव और बुद्धि कभी नहीं बदलेगी।


3

यदि तुम मानते हो, परमेश्वर को बस यीशु ही कहा जा सकता है,

तो तुम्हें बहुत कम ज्ञान है।

क्या तुम ये कहने का साहस रखते हो

कि परमेश्वर का नाम सदा यीशु रहेगा,

कि यीशु नाम ने व्यवस्था के युग का अंत किया

और वो ही अंतिम युग का भी समापन करेगा?

कौन कह सकता है, यीशु का अनुग्रह, युग का समापन कर सकता है?


परमेश्वर सदा परमेश्वर रहेगा।

उसका नाम और काम बदल सकता है,

पर उसका स्वभाव और बुद्धि कभी नहीं बदलेगी।

परमेश्वर सदा परमेश्वर रहेगा।

उसका नाम और काम बदल सकता है,

पर उसका स्वभाव और बुद्धि कभी नहीं बदलेगी, कभी नहीं बदलेगी,

कभी नहीं बदलेगी, कभी नहीं बदलेगी, कभी नहीं बदलेगी।


—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, वो मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है? से रूपांतरित

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