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परमेश्वर के लिए तुम्हारा विश्वास हो सबसे ऊँचा

I

गर चाहते हो तुम करना यक़ीन,

गर पाना चाहते हो तुम परमेश्वर को और उसकी संतुष्टि,

गर तुम दर्द न सहो और मेहनत न करो,

तुम इन चीज़ों को प्राप्त नहीं कर सकोगे।

तुम सब ने सुने हैं बहुत प्रचार।

भले ही तुमने सुना है,

इसका ये अर्थ नहीं है कि वचन तुम्हारे हैं।

तुम्हें उनको आत्मसात और परिवर्तित करना चाहिए

ऐसी चीज़ में जो तुम से संबन्धित हो।

तुम केवल परमेश्वर में विश्वास से प्राप्त करोगे,

गर तुम इसे मानो जीवन के महानतम चीज़ की तरह,

जो तुम खाते या पीते हो, जो तुम पहनते हो,

या धरती पर किसी भी चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण।

II

इन वचनों को जीवन में लागू करो और अपने अस्तित्व में लाओ,

इन्हें अनुमति दो तुम्हें जीने में राह दिखाने को,

तुम्हारे जीवन में अर्थ और वास्तविक मूल्य लाने को,

तब सार्थक होगा तुम्हारा इन वचनों को सुनना।

गर वचन परमेश्वर के नहीं लाते हैं तुम्हारे जीवन में सुधार और महत्व,

तो तुम्हारा सुनने का कोई मतलब नहीं है।

ओ, तुम केवल परमेश्वर में विश्वास से प्राप्त करोगे,

गर तुम इसे मानो जीवन के महानतम चीज़ की तरह,

जो तुम खाते या पीते हो, जो तुम पहनते हो,

या धरती पर किसी भी चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण।

III

गर तुम मानते हो जब समय है तुम्हारे पास,

असमर्थ हो अपना पूरा ध्यान विश्वास में देने में,

यदि तुम केवल सफल होने को ऐसा काम करते हो,

तो तुम्हें प्राप्त नहीं होगा कुछ भी, ओ, कुछ भी नहीं।

ओ, तुम केवल परमेश्वर में विश्वास से प्राप्त करोगे,

गर तुम इसे मानो जीवन के महानतम चीज़ की तरह,

जो तुम खाते या पीते हो, जो तुम पहनते हो,

या धरती पर किसी भी चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण, हाँ।

तुम केवल परमेश्वर में विश्वास से प्राप्त करोगे,

गर तुम इसे मानो जीवन के महानतम चीज़ की तरह,

जो तुम खाते या पीते हो, जो तुम पहनते हो,

या धरती पर किसी भी चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण,

या धरती पर किसी भी चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण,

या धरती पर किसी भी चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण,

सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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