969 परमेश्वर का सार निःस्वार्थ है

1 परमेश्वर के सार एवं स्वभाव में कुछ ऐसा है जिसे बड़ी आसानी से अनदेखा किया जा सकता है, ऐसी चीज़ जो केवल परमेश्वर के द्वारा ही धारण की जाती है और किसी व्यक्ति के द्वारा नहीं, उन लोगों समेत जिनके विषय में अन्य लोग सोचते हैं कि वे महान लोग, एवं अच्छे लोग हैं, या उनकी कल्पना का परमेश्वर है। यह परमेश्वर की निःस्वार्थता है। निःस्वार्थता के बारे में बोलते समय, शायद तुम सोचते हो कि तुम भी बहुत निःस्वार्थ हो, क्योंकि जब तुम्हारे बच्चों की बात आती है, तो तुम उनके साथ कभी मोलभाव नहीं करते हो और तुम उनके प्रति उदार होते हो, या तुम सोचते हो कि तुम तब भी बहुत निःस्वार्थ हो जब तुम्हारे माता पिता की बात आती है। परन्तु ऐसा कोई नहीं है जो सभी चीज़ों के मध्य, सभी लोगों, घटनाओं, एवं वस्तुओं के मध्य, और परमेश्वर के कार्य के जरिए परमेश्वर की निःस्वार्थता को देख सके।क्योंकि मनुष्य बहुत स्वार्थी है!

2 मानवजाति एक भौतिक संसार में रहती है। शायद तुम परमेश्वर का अनुसरण करते हो, किन्तु तुम कभी देखते नहीं या तारीफ नहीं करते हो कि किस प्रकार परमेश्वर तुम्हारी आपूर्ति करता है, तुम्हें प्रेम करता है, और तुम्हारे लिए चिन्ता दिखाता है। तुम अपने खून के रिश्तेदारों को देखते हो जो तुम्हें प्रेम करते हैं या तुम्हें बहुत स्नेह करते हैं। तुम उन चीज़ों को देखते हो जो तुम्हारी देह के लिए लाभकारी हैं, तुम उन लोगों एवं चीज़ों के विषय में परवाह करते हो जिनसे तुम प्रेम करते हो। यह मनुष्य की तथाकथित निःस्वार्थता है। वह निःस्वार्थता जिसमें मनुष्य विश्वास करता है वह खोखली एवं अवास्तविक, मिलावटी, परमेश्वर से असंगत, एवं परमेश्वर से असम्बद्ध है। मनुष्य की निःस्वार्थता सिर्फ उसके लिए है, जबकि परमेश्वर की निःस्वार्थता उसके सार का एक सच्चा प्रकाशन है। यह बिलकुल परमेश्वर की निःस्वार्थता की वजह से है कि मनुष्य उससे आपूर्ति की एक सतत धारा प्राप्त करता है।

3 तुम लोग शायद इस विषय से, जिसके बारे में आज मैं बात कर रहा हूँ, अत्यंत गहराई से प्रभावित न हो और मात्र सहमति में सिर हिला रहे हो, परन्तु जब तुम अपने हृदय में परमेश्वर के हृदय की सराहना करने की कोशिश करते हो, तो तुम अनजाने में ही जान जाओगे: सभी लोगों, मुद्दों एवं चीज़ों के मध्य जिन्हें तुम इस संसार में महसूस कर सकते हो, केवल परमेश्वर की निःस्वार्थता ही वास्तविक एवं ठोस है, क्योंकि सिर्फ परमेश्वर का प्रेम ही तुम्हारे लिए बिना किसी शर्त के है और बेदाग है। परमेश्वर के अतिरिक्त, किसी भी व्यक्ति की तथाकथित निःस्वार्थता पूरी तरह से झूठी, ऊपरी एवं कपटपूर्ण है; इसका एक उद्देश्य, एवं इसके निश्चित इरादे हैं, यह एक समझौते को लिए हुए है, और परीक्षा लिए जाने पर स्थिर नहीं रह सकता है। तुम लोग यह भी कह सकते हो कि यह गन्दा, एवं घिनौना है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" से रूपांतरित

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