मसीह की बातचीतों के अभिलेख

विषय-वस्तु

अध्याय 44.क्या आप मानवजाति के लिए परमेश्वर के प्रेम को समझते हैं?

देह धारण किए परमेश्वर का मानवजाति के लिए प्रेम कहाँ स्पष्ट है? चरण-दर-चरण कार्य का अनुभव करने के बाद, आप लोग देख सकते हैं कि जब परमेश्वर कार्य के हर चरण में बोलते हैं, वे कुछ तरीकों का उपयोग करते हैं, कुछ भविष्यवाणियां करते हैं, और कुछ सच्चाई और परमेश्वर के स्वभाव को व्यक्त करते हैं, और सभी लोगों की प्रतिक्रियाएं होती हैं। उनकी प्रतिक्रियाएं क्या हैं? वे परमेश्वर को नहीं मानते, वे विशेष रूप से सच्चाई की तलाश में पहल नहीं करते, या वे परमेश्वर के काम को स्वीकार करना नहीं चाहते हैं। वे सभी नकारात्मक और प्रतिरोधी हैं, और वे विवाद और अस्वीकार कर रहे हैं और अंगीकार नहीं कर रहे। हालांकि, शुरुआत से, परमेश्वर जिस तरह से अपना काम करते हैं उसे उन्होंने नहीं बदला है, मानवता के लिए उनका प्रेम नहीं बदलता है। लोगों के रवैये के बावजूद, चाहे वे खारिज कर रहे हों या अनिच्छा से स्वीकार कर रहे हों या चाहे वे थोड़े बदल भी जाएँ, परमेश्वर का प्रेम अपरिवर्तनीय है। उनका काम किसी भी कदम पर कभी भी बाधित नहीं हुआ है। यह एक ऐसा पहलू है जिसमें उनका प्रेम प्रकट होता है। इसके अतिरिक्त, कार्य के प्रत्येक चरण के पूरा होने के बाद, चाहे लोग खुद को कैसे भी प्रकट करते हों, लोगों के लिए परमेश्वर का प्रेम अपरिवर्तनीय है। वे हमेशा काम कर रहे हैं और हमेशा लोगों को बचाते हैं। अगले चरण में जब वे अपना काम करते हैं, निर्णय और रहस्योद्घाटन के उनके वचन अधिक गहरे, अधिक स्पष्ट होंगे, और लोगों की वर्तमान परिस्थितियों के प्रति अधिक निर्देशित होंगे। वे कुछ वचन बोलते हैं ताकि लोग उन्हें बेहतर समझने और जानने में सक्षम हो सकें, और विशेष रूप से ताकि वे उनकी इच्छा को समझ सकें और उनकी इच्छा को प्राप्त कर सकें। लोग देखेंगे कि परमेश्वर अभी भी मानवजाति से प्रेम करते हैं। भले ही लोगों की प्रतिक्रियाएं हमेशा नकारात्मक या परमेश्वर के विरोध में हों, कार्य के हर चरण में हमेशा लोगों की इन प्रकार की प्रतिक्रियाएं होती रहेंगी। हालांकि, परमेश्वर हमेशा बोलते हैं और कार्य करते हैं, और मानवजाति के लिए उन्होंने अपने प्रेम को कभी नहीं बदला है। इसलिए, मनुष्य के लिए परमेश्वर के किये गए सभी कार्य प्रेम ही हैं। कुछ लोग कहते हैं: “अगर यह सब प्रेम है, तो वे क्यों इंसानों को न्याय और दण्ड देते हैं? यह सब लोगों के प्रति इतना घृणापूर्ण क्यों दिखता है? वे लोगों का परिक्षण भी करते हैं और उन्हें मरने देते हैं!” पर यह सच है, परमेश्वर लोगों से केवल प्रेम करते हैं! लोगों के विद्रोह का परमेश्वर ताड़न और न्याय करते हैं उनको सच्चाई समझने की, पश्चाताप करने की और फिर से शुरू करने देने के लिए, लोगों को परमेश्वर के स्वभाव को समझने का अवसर देने के लिए, और उसके द्वारा लोगों को परमेश्वर का सम्मान करने और उनके प्रति समर्पित होने की अनुमति देने के लिए। कुछ लोग एक प्रतिरोधी स्थिति में हैं, लेकिन परमेश्वर लोगों को बचाने में थोड़ी-सी भी ढील नहीं करते हैं और वे लोगों को त्याग नहीं देते हैं; यह प्रेम की एक महान राशि को अपरिहार्य बनाता है, है ना? सेवाकर्मियों के समय के दौरान, बहुत से लोग इतनी ज्यादा नकारात्मकता और पीड़ा में होते हैं, कि वे प्रलाप करते हैं और जोर से शिकायत करते हैं, चकित होते हुए कि वे इतनी कठिनाइयों के साथ एक सेवाकर्मी कैसे हो सकते हैं। वे वास्तव में इच्छुक नहीं हैं! आप इच्छुक नहीं हैं और आप इसे नहीं समझते, लेकिन परमेश्वर आपको समझते हैं। क्या यह प्रेम नहीं है? उनके प्रेम में लोगों के बारे में सूझबूझ, लोगों को आर-पार देखना, और लोगों की संपूर्ण समझ शामिल है। उनका प्रेम भ्रमित नहीं है, यह ढोंग नहीं है, यह खाली नहीं है, बल्कि यह वास्तविक है। वे आपकी कमियों और आपके अज्ञान को देखते हैं और आप पर दया करते हैं, आपको प्रेम करते हैं, और हमेशा आपको भावनात्मक रूप से आंदोलित करते हैं। भले ही आप सेवाकार बनने के लिए इच्छुक या प्रस्तुत न हों, वे हमेशा आपके भ्रष्ट आचरण को प्रकट करने और आपको अपनी शर्मनाक स्थिति को समझने के लिए कई महीनों का परिशोधन दे रहे हैं। क्या तीन महीने की इस अवधि के दौरान प्रेम है? यदि वे प्रेम नहीं करते, तो वे आपको अनदेखा करते; सेवाकर्मियों के समय के दौरान आपके व्यवहार के तरीके को देखकर, उन्होंने आपको जल्दी ही ठुकरा दिया होता। क्या आप एक सेवाकार बनने के लिए तैयार नहीं हैं? आप परमेश्वर के साथ होकर दुःख नहीं उठाएंगे, लेकिन जब आप आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, तो आप आनंद से उछलते होते हैं। अगर परमेश्वर के पास बजाय प्यार के नफरत ही होती, तो भ्रष्ट प्रतिक्रियाओं के कारण लोग बहिष्कृत ही हो जाएँगे। शोधन के तीन महीने एक लम्बा समय नहीं। मैं क्यों कहता हूँ कि यह एक लंबा समय नहीं है? क्योंकि यह समय की केवल वह अवधि है जिसे लोग सहन करने में सक्षम हैं। यदि यह थोड़ा और लम्बा होता, तो वे इसे सहन नहीं कर पाएंगे। हालांकि वे हमेशा गाते हैं, मिलते हैं, और सहभागिता करते हैं, वे केवल उन्ही चीजों का आनंद लेते हैं और निश्चित रूप से खड़े नहीं रह सकते हैं; इसलिए, वे परमेश्वर के लोगों में जल्दी बदल दिए जाते हैं। यह भी प्रेम मांगता है; परमेश्वर अपने दिल और अपने प्रेम का उपयोग करते हैं लोगों को सुधारने और लोगों की पकड़ पाने के लिए। यह भी प्रेम की अभिव्यक्ति है। आप इस कालावधि में परमेश्वर का प्रेम देख सकते हैं; वे एक दिन या एक महीने का भी विलंब नहीं करते हैं। जैसे ही वह दिन आता है जब उन्हें बोलना चाहिए, वे तुरंत बोलते हैं। यदि वे कुछ महीनें और देर करें, तो कुछ लोग धीरे-धीरे पीछे हट जाएँगे। यह लोगों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार कार्य करना है। वे देर नहीं करते, समय बर्बाद नहीं करते, वे सभी की ओर विशेष ध्यान देते हैं। चूंकि वे लोगों को बचा रहे हैं, वे अंत तक सभी तरह से जिम्मेदार हैं। लेकिन कुछ लोग उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहते, वे फिसलते और गिरते हैं। कुछ लोगों के छोड़ कर जाने से पहले, पवित्र आत्मा द्वारा विशेष रूप से उन्हें प्रेरित करके उनसे रुकने के लिए आग्रह किया जाता है। कुछ लोगों को वास्तव में रुकने के लिए प्रेरित किया जाता है लेकिन वे नहीं ठहरते। परमेश्वर वास्तव में लोगों को बहुत प्रेम करते हैं, लेकिन लोग परमेश्वर द्वारा प्रेम किये जाने के योग्य नहीं हैं। अगर परमेश्वर उन लोगों को प्यार करने में सक्षम नहीं थे जो पीछे हट रहे हैं, तो यह बात नफरत की ओर बढ़ती, और वे पूरी तरह से इस तरह के व्यक्ति की उपेक्षा करते। जहाँ तक बात है चरण और कार्य के समय की सीमा की, चरण की लंबाई की, चरण में कहे गए वचनों की मात्रा की, आवाज़ के लहजे की, चरण में इस्तेमाल की जाने वाली विधियों की, और आपको ये समझने देने के लिए संबंधित सत्य की, इन सभी में उनके महान विचार और ध्यान, और उनकी सटीक व्यवस्था और योजना शामिल हैं। वे हमेशा अपने ज्ञान का उपयोग मानवजाति के मार्गदर्शन के लिए, उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, उनकी सेवा करने के लिए और उन्हें धीरे-धीरे तैयार करने और उन्हें आज तक ले आने के लिए करते हैं। इस बात का अनुभव करने वाले हर व्यक्ति को कुछ समझ है; हालांकि मैं इसके बारे में चर्चा नहीं करता, बहुत से लोग सक्षम होते हैं; लोग एक क्रमिक चरण प्रक्रिया को अपनी यादों में ताज़ा रखते हैं। इसमें निहित प्रेम का वर्णन करने के लिए कोई शब्द नहीं हैं। परमेश्वर लोगों को इतनी गहराई से प्रेम करते हैं, लेकिन लोग इसे कभी अच्छी तरह से अनुभव नहीं करेंगे; यह प्रेम बहुत गहरा है और शब्दों में स्पष्ट रूप से इसकी व्याख्या करना असंभव है; समय के परिप्रेक्ष्य से इसे स्पष्ट रूप से समझाना असंभव है। समय के परिप्रेक्ष्य से हम यह देख सकते हैं कि मानवजाति के लिए उनका प्रेम कितना गहरा है; वे छोटे मामलों पर विशेष रूप से सावधानीपूर्वक विचार करते हैं और थोड़ा-सा भी अधिक वक्त लगने नहीं देते। वे सावधान हैं कि अगर समय बहुत लंबा हो जाता है तो लोग पीछे हो लेंगे और उन्हें छोड़ देंगे। उनका प्यार लोगों को कसकर बांधे रखता है और इसमें बिलकुल ढील नहीं होती है। इसके अलावा, दंड और न्याय के भी चरण हैं जिनमें उनकी समझ है। यदि एक और तरीका होता, तो लोगों को लगता कि परमेश्वर उन्हें धोखा दे रहे हैं और उनके साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। लोगों के कद पर्याप्त नहीं हैं और उनके लिए पीछे हट लेना बहुत आसान है। इसलिए, तीन महीनों के शोधन के बाद, परमेश्वर ने फिर से बात की और सेवाकारियों को अपने लोगों में बदल लिया और हर कोई खुश था। लोग भावनात्मक रूप से इतने द्रवित हो गए कि वे आंसुओं में फूट पड़े और उन्होंने जाना कि परमेश्वर का ज्ञान बहुत अच्छा है। “उस पूरे समय मैंने सोचा था कि मैं सचमुच एक सेवाकार हूँ, मैंने सोचा कि मेरे पास कोई गंतव्य नहीं है, और इसका मतलब यह है कि परमेश्वर हमें नहीं चाहते हैं और हम पूरी तरह से काम से गए हैं।” यदि उस समय मैं कहता कि मैं आप लोगों को मरने न दूंगा, तो कोई भी इस पर विश्वास नहीं करता; आप लोग सोचेंगे कि परमेश्वर ने पहले ही कहा था और यह निश्चित रूप से सही था। तीन महीनों के बाद, मैंने शब्दों के एक और अनुच्छेद के जरिये बात की और सेवाकर्मियों की परीक्षा समाप्त कर दी। भले ही लोगों के स्वरूप भ्रष्ट होते हैं, कभी-कभी लोग विशेष रूप से एक छोटे बच्चे की तरह निर्दोष होते हैं। ऐसा क्यों कहा गया है कि लोग हमेशा परमेश्वर की उपस्थिति में शिशु होते हैं? प्रत्येक चाल जो वे चलते हैं एक शिशु की तरह है; लोग दूसरों को देखते हैं जैसे कि वे सभी भ्रष्ट और अवनतिशील हों, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में, लोग हमेशा शिशु होते हैं, वे सभी विशेषकर भोले और निर्दोष होते हैं; इसलिए, परमेश्वर दुश्मनों की तरह लोगों से व्यवहार नहीं करते, बल्कि उद्धार और प्रेम के लिए उन्हें अपने लक्ष्य के रूप में मानते हैं। इसलिए, लोगों के लिए परमेश्वर का प्यार ऐसा नहीं है, जैसा कि लोग सोचते हैं, जो सिर्फ अच्छी बातें और शुभकामनाएं कहना है। इस समय, परमेश्वर के काम में कुछ वचन हैं जो वास्तव में लोगों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करते हैं, यहां तक कि वे लोगों के दिलों को बींध कर उन्हें दर्द में डाल देते हैं। न्याय के कुछ वचन लोगों का वर्गीकरण करने और उन्हें डांटने के जैसे हैं, लेकिन असल में उन सभी का एक वास्तविक संदर्भ है और वे तथ्यों और सच्चाई से पूरी तरह से तालमेल रखते हैं। वे अतिरंजित नहीं हैं। परमेश्वर लोगों के भ्रष्ट सार के अनुसार बोलते हैं और जब लोगों को एक अवधि के लिए अनुभव हो, तो वे समझने लगेंगे। परमेश्वर के यह कहने का उद्देश्य लोगों को बदलना और बचाना है। केवल इस तरह से बोलने से वे सबसे मूल्यवान परिणाम प्राप्त करने में सक्षम हैं। आपको यह देखना चाहिए कि परमेश्वर के उदार इरादे पूरी तरह से लोगों को बचाने के लिए अभिकल्पित किए गए हैं और जो कुछ भी इसमें शामिल है, वह परमेश्वर का प्रेम है। चाहे आप इसे परमेश्वर के काम में ज्ञान के परिप्रेक्ष्य से देखें, परमेश्वर के कार्य में चरणों और ढ़ांचे के परिप्रेक्ष्य से, या काम की अवधि के परिप्रेक्ष्य से या उनकी सटीक व्यवस्थाओं और योजनाओं के नज़रिए से – इन सब में उनका प्रेम निहित है। उदाहरण के लिए, सभी लोग अपने पुत्रों और पुत्रियों से प्रेम करते हैं और अपने बच्चों को सही रास्ते पर चलाने के लिए वे सभी बहुत कोशिश करते हैं। जब उन्हें अपने बच्चों की कमजोरियों का पता चलता है, तो वे चिंता करते हैं कि यदि वे बहुत नरमी से बोलते हैं, तो उनके बच्चे नहीं सुनेंगे और बदल नहीं पाएंगे, और वे यह चिंता करते हैं कि यदि वे बहुत कड़े शब्दों में बोलते हैं, तो वे अपने बच्चों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाएंगे और उनके बच्चे इसे सहन करने में सक्षम नहीं होंगे। यह सब प्रेम के प्रभाव में किया जाता है और इसमें बहुत प्रयास लगता है। आप लोग जो अभी बेटे और बेटियां हैं, उन्होंने माता पिता के प्यार का अनुभव किया होगा। न केवल नम्रता और विचार प्रेम हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा, कठोर अनुशासन प्रेम है। परमेश्वर विशेष रूप से मानवजाति के लिए प्रेम के प्रभाव में और प्रेम की पूर्व-शर्त के तहत है। इसलिए, वे भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करते हैं। वे उनके साथ लापरवाही से व्यवहार नहीं करते हैं, बल्कि वे चरण के मुताबिक सटीक योजनाएं बनाते हैं। समय, स्थान, आवाज का लहजा, बोलने की विधि, और प्रयास की मात्रा के संबंध में ..., आप लोग कह सकते हैं कि यह सब उनके प्रेम को प्रकट करता है, और पर्याप्त रूप से यह स्पष्ट करता है कि मानवजाति के लिए उनका प्रेम असीम और अपार है। और कई लोग विद्रोही वचन बोलते हैं जब वे सेवाकर्मियों के परीक्षण के बीच होते हैं और वे शिकायत जारी करते हैं। लेकिन परमेश्वर का इन बातों के बारे में कोई झगड़ा नहीं है, और निश्चित रूप से वे इसके लिए लोगों को दंडित नहीं करते हैं। चूंकि वे लोगों से प्रेम करते हैं, वे सब कुछ क्षमा करते हैं। यदि वे प्रेम की बजाए नफरत करते होते, तो वे लोगों की जल्दी ही निंदा कर चुके होते। परमेश्वर चूंकि प्रेम रखते हैं, वे झगड़ा नहीं करते हैं, बल्कि वे सहन करते हैं, और वे लोगों की कठिनाइयों का अवलोकन करने में सक्षम है। यह सब कुछ करना पूरी तरह प्रेम के प्रभाव में है। केवल परमेश्वर लोगों को समझते हैं, आप तो खुद को भी समझ नहीं पाते। क्या यह सही नहीं है? इसके बारे में ध्यान से सोचें, कुछ लोग इस बारे में और उस बारे में शिकायत करते हैं; लोग बिना किसी वजह के मुसीबत का कारण बनते हैं, आशीर्वादों में रहते तो हैं लेकिन आशीर्वादों को महसूस नहीं करते। कोई नहीं जानता है कि स्वर्ग से धरती पर उतरने वाले परमेश्वर को कितना दुःख भुगतना पड़ा। परमेश्वर एक मानव बन गये, वे बहुत महान हैं और वे इतने छोटे, दीन-हीन और इतने अपमानित होने में सक्षम थे। कितना दर्द उन्होंने सहा होगा! संसार से ही एक उदाहरण लें: एक अच्छा सम्राट अपनी जनता को अपने बच्चों की तरह ही प्यार करता है, और लोगों की कठिनाइयों और दुखों को समझने के लिए, वह व्यक्तिगत रूप से उन्हें देखने के लिए बाहर निकलता है। उसकी (सम्राट की) स्थिति के अनुसार, उसे इन कष्टों का सामना नहीं करना चाहिए, लेकिन लोगों के दर्द को कम करने के लिए, वह चुपके से सादे कपड़ों में उन्हें देखता है। वह लोगों के बीच जाता है और सामान्य व्यक्ति के रूप में लोगों के दर्द को देखता और समझता है। उसके दर्जे के अनुसार, एक साधारण व्यक्ति की स्थिति तक उतर आना एक अभिमानरहित बात है; उसे एक सामान्य व्यक्ति की तरह रहना होगा और लोगों को उसके दर्जे का नहीं पता, और निश्चित रूप से वे उससे एक सामान्य व्यक्ति की तरह व्यवहार करते हैं। लोगों के बीच कई खतरे हैं, और निश्चित रूप से वे सभी अलग-अलग तरीकों से उससे पेश आते हैं, और वह लोगों की कठिनाइयों और दुखों का अनुभव करना शुरू करता है; वह इन पीड़ाओं को सहता है जिससे कि लोग पीड़ित हैं; उसे विशेष रूप से चौकन्ना और हर जगह सावधान रहना होगा। वह यह किस के लिए कर रहा है? सिर्फ एक लक्ष्य है जो उसे चलाता है। परमेश्वर आज इसी तरह से काम करने में सक्षम हैं क्योंकि उनकी प्रबंधन योजना ने इस स्तर को हासिल किया है। वे मानवजाति को प्रेम करते हैं, इसलिए वे मानवजाति को बचाते हैं, वे ऐसा करने में सक्षम हैं क्योंकि वे प्रेम से प्रेरित हैं और प्रेम के आधार के अंतर्गत हैं। परमेश्वर ने देहधारण किया और भ्रष्ट मानवता के इस समूह को बचाने के लिए उन्होंने भारी अपमान का सामना किया। यह पर्याप्त रूप से साबित करता है कि उनका प्रेम इतना महान है। उन वचनों में जो कि परमेश्वर कहते हैं सलाह, शान्ति, प्रोत्साहन, सहिष्णुता और धैर्य है, और उससे भी अधिक, उनके शब्दों में न्याय, अनुशासनात्मक ताड़न, कोप, सार्वजनिक प्रकटीकरण, सुंदर वादे आदि हैं। तरीका चाहे जो भी हो, इन सब पर प्रेम हावी है। यही उनके काम का तत्व है, है ना? आप सभी लोगों को वर्तमान में कुछ समझ है, लेकिन यह गहरी नहीं है। कम से कम आप लोग कुछ समझ पाने में सक्षम हैं, और बाद में, जब आप लोग तीन से पांच साल का अनुभव पाते हैं, तो आप लोग यह समझ पाएंगे कि यह प्रेम इतना गहन और इतना महान है। मनुष्य के शब्दों में इसका वर्णन करना असंभव है। अगर लोगों में प्रेम नहीं है, तो वे परमेश्वर के प्रेम को कैसे लौटा पायेंगे? यहां तक ​​कि अगर आप परमेश्वर को अपनी ज़िंदगी भी पेश कर दें, तो भी आप उसका प्रतिफल देने में सक्षम नहीं होंगे। जब आप लोग तीन से पांच साल का और अनुभव कर लेते हैं, और आप लोग अपनी-अपनी वर्तमान अभिव्यक्तियों और स्वभाव पर चिंतन करते हैं, तो आप लोग बेहद पश्चातापी होंगे और घुटने नीचे टेकेंगे और अपने सिर जमीन पर झुकायेंगे। क्यों ज्यादातर लोग इतनी घनिष्ठता से अनुसरण कर रहे हैं? ज्यादातर लोगों को यह उत्साह क्यों है? उन्हें परमेश्वर के प्रेम की समझ है, और वे देखते हैं कि परमेश्वर का कार्य लोगों को बचा रहा है। इसके बारे में सोचिये, क्या परमेश्वर का कार्य अपने समय पर विशेष रूप से सटीक नहीं है? थोड़ी-सी भी देर के बिना एक कड़ी एक अन्य कड़ी का अनुसरण करती है। वे देर क्यों नहीं करते? यह मानवजाति के लिए ही है। वे एक भी आत्मा को त्याग करने या खोने के लिए तैयार नहीं हैं। लोग अपने भविष्य के बारे में परवाह नहीं करते, इसलिए इस धरती पर आपको सबसे अधिक प्रेम कौन करता है? आप अपने आप से प्यार नहीं करते, आप अपने जीवन को संजोना नहीं जानते, और आप नहीं जानते कि यह कितना अनमोल है। यह परमेश्वर ही हैं जो मानवजाति को सबसे अधिक प्रेम करते हैं। केवल परमेश्वर मानवजाति से सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं। लोगों ने शायद अभी यह न देखा हो, यह सोच कर कि वे खुद से प्रेम करते हैं। दरअसल, लोगों का खुद के लिए प्यार कैसा है? केवल परमेश्वर का प्रेम सच्चा प्रेम है; आप धीरे-धीरे अनुभव करेंगे कि सच्चा प्रेम क्या है। यदि परमेश्वर देहधारण नहीं करते, अपना कार्य न किए होते और लोगों के सामने आकर उनकी अगुआई नहीं की होती, अगर वे लोगों के साथ संपर्क में नहीं आते और हर समय लोगों के साथ न रहते, तो लोगों के लिए वास्तव में परमेश्वर के प्रेम को समझना आसान न होता।

लोग और परमेश्वर मूल रूप से भिन्न हैं और दो अलग-अलग क्षेत्रों में रहते हैं। लोग परमेश्वर की भाषा को समझने में सक्षम नहीं हैं और उससे भी अधिक, वे परमेश्वर के विचारों को जान पाने में असमर्थ हैं। केवल परमेश्वर लोगों को समझते हैं और लोगों के लिए परमेश्वर को समझना असंभव है। परमेश्वर को देहधारण करना पड़ा है और मनुष्य के समान (बाहरी रूप से देखने में समान) बनना पड़ा है। मानवजाति को बचाने और लोगों को परमेश्वर के काम समझने और जानने के योग्य बनाने में परमेश्वर जबरदस्त अपमान और दर्द को सहते हैं। क्यों परमेश्वर हमेशा लोगों को बचा रहे हैं और हार नहीं मानते? क्या यह लोगों के लिए उनके प्रेम की वजह से नहीं है? वे मानवजाति को शैतान के द्वारा भ्रष्ट होते देखते हैं और वे इसे सहन नहीं कर सकते कि उन्हें जाने दें, या छोड़ दें। इसलिए एक प्रबंधन योजना है। अगर वे मानवजाति को नष्ट कर देते हैं जब वे कुपित हो जाएँ जैसा कि लोग सोचते हैं वे होंगे, तो लोगों को जिस तरह से वे कष्टदायक रूप से बचाने की कोशिश अभी करते हैं, उसकी आवश्यकता ही न होगी। और क्योंकि वे देहधारण किए और उन्होंने दर्द का सामना किया, उनका प्रेम प्रकट हुआ है, उनका प्रेम लोगों को थोड़ा-थोड़ा करके पता चला है और सभी लोगों को ज्ञात हो गया है। अगर यह अभी इस तरह से काम करने के कारण न होता, और अगर लोग केवल यही जानते कि स्वर्ग में एक परमेश्वर हैं और वह मानवजाति से प्रेम करते हैं, तो वह केवल सिद्धांत है, और लोग परमेश्वर के सच्चे प्रेम को कभी देख नहीं पाएँगे। केवल परमेश्वर के देहधारण करने और कार्य करने के द्वारा ही लोगों को उनके बारे में एक सच्ची समझ है जो कि धुंधली या खाली नहीं है और न ही यह बकवाद है, बल्कि एक समझ है जो सच है। यह इस कारण से है कि परमेश्वर द्वारा लोगों को दिया जाने वाला प्रेम मूर्त रूप से फायदेमंद है, यह काम केवल अवतार द्वारा ही किया जा सकता है, और यह पवित्र आत्मा द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है। यीशु ने लोगों को कितना प्यार दिया? भ्रष्ट मानवजाति के लिए एक पाप के चढ़ावे के रूप में क्रूस पर चढ़कर उन्होंने सेवा की, वे मानवजाति के लिए उद्धार का काम पूरा करने के लिए आये थे, तब तक जब वे क्रूस पर चढ़ाये गए। यह प्रेम असीम है और परमेश्वर के द्वारा किया गया कार्य अत्यधिक महत्वपूर्ण है। ऐसे लोग हैं जिनकी परमेश्वर के देहधारण करने के बारे में अभिधारणाएँ हैं। वे अभिधारणाएँ क्या हैं? परमेश्वर के देहधारण किए बिना, लोगों का परमेश्वर में विश्वास एक खाली ढांचे की तरह होता और वे अंत में नष्ट हो जायेंगे। मानवजाति के लिए परमेश्वर का प्रेम मुख्य रूप से देहधारी स्वरूप में किये गए कार्य से प्रकट होता है, व्यक्तिगत रूप से लोगों को सहेजते हुए, लोगों के साथ आमने-सामने बोलते हुए, और लोगों के बीच रहते हुए बिना किसी लेशमात्र दूरी के, किसी दिखावे के बिना, बल्कि सच्चे बनकर। वे देहधारण करने के हद तक जाकर लोगों को बचाते हैं और कई वर्षों तक दुनिया में लोगों के साथ पीड़ा से गुजरते हैं, केवल सम्पूर्ण मानवजाति के लिए उनके प्रेम और उनकी दया के कारण। मानवजति के लिए परमेश्वर के प्रेम की कोई शर्त या मांगें नहीं है। मानवजाति से उन्हें क्या मिलता है? लोग परमेश्वर के प्रति निरुत्साही हैं। कौन परमेश्वर को परमेश्वर मानकर उनके साथ पेश आने में सक्षम है? लोग परमेश्वर को कुछ चैन नहीं देते, आज तक परमेश्वर को लोगों से सच्चा प्रेम नहीं मिला है। परमेश्वर केवल निस्वार्थ होकर देते हैं और नि:स्वार्थ मुहैया करते हैं, लेकिन लोग अभी भी संतुष्ट नहीं हैं और लगातार अनुग्रह मांगते हैं। लोगों से निपटना बहुत मुश्किल है और वे बहुत कष्टप्रद हैं! हालांकि, देर-सबेर वह दिन आ ही जाएगा जब परमेश्वर का कार्य परिणाम प्राप्त करेगा और अधिकांश लोग अपने दिलों से सच्चे धन्यवाद भेजेंगे। जिन लोगों ने कई सालों से अनुभव किया है वे इस पहलू के एक अर्थ को अपने पास रखने में काबिल हैं। हालांकि लोग सुन्न हैं, वे आखिरकार यंत्र-मानव तो नहीं; वे निर्जीव वस्तु तो नहीं हैं। जिन लोगों को परमेश्वर के कार्य का अनुभव नहीं है, वे इन बातों को देख नहीं सकते हैं; वे केवल यह मानते व कहते हैं कि ये सत्य सही हैं, लेकिन उनके पास बहुत गहरी समझ नहीं है।

परमेश्वर देहधारण किए और उन्होंने कई सालों तक कार्य किया है और उन्होंने अनगिनत चीजों को कहा है। परमेश्वर प्रारंभ करते हैं लोगों को सेवाकर्मियों का परीक्षण देकर, और बाद में वे भविष्यवाणियां बोलते हैं और न्याय तथा ताड़न के कार्य शुरू करते हैं, फिर वे लोगों को परिष्कृत करने के लिए मौत का उपयोग करते हैं। इसके बाद, वे लोगों को परमेश्वर पर विश्वास करने, बोलने और लोगों को सच्चाई प्रदान करने और मनुष्य की विभिन्न अभिधारणाओं के खिलाफ लड़ाई करने के सही रास्ते पर ले जाते हैं। बाद में, वह मनुष्य को थोड़ी-सी आशा देते हैं, जिन्हें यह देखने का मौका मिलता है कि उनके सामने उम्मीद है; अर्थात, परमेश्वर और लोग एक सुन्दर गंतव्य में एक साथ प्रवेश करते हैं। यद्यपि यह सारा काम परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ता है, यह सब किया जाता है मानवजाति की आवश्यकताओं के अनुसार। यह उनके द्वारा बस यूं ही नहीं कर दिया जाता है; वे अपने सभी कामों को पूरा करने के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करते हैं। क्योंकि उनमें प्रेम है, वे ज्ञान का प्रयोग कर सकते हैं और इन भ्रष्ट लोगों के साथ गंभीरता से व्यवहार कर सकते हैं। वे लोगों के साथ खिलवाड़ बिलकुल नहीं करते। परमेश्वर के वचनों में आवाज़ के लहजे को और शब्दावली को देखो; कभी-कभी यह बात लोगों की परीक्षा लेती है, कभी-कभी उनकी शब्दावली लोगों को असहज बनाती है, कभी-कभी वे लोगों को वैसे शब्द मुहैया कराते हैं जो उन्हें मुक्ति देते हैं और उन्हें निश्चिन्त बना देते हैं। वे वास्तव में लोगों का बहुत अधिक ख्याल और ध्यान रखते हैं। यद्यपि लोग परमेश्वर की रचना हैं, और सभी ने शैतान द्वारा भ्रष्टाचार का अनुभव किया है, और यद्यपि लोग बेकार हैं, आवारा हैं, और उनकी प्रकृतियां ही ऐसी हैं, वे (परमेश्वर) लोगों के साथ उनकी वास्तविकता के अनुसार व्यवहार नहीं करते और जो प्रतिशोध उन्हें मिलने चाहिए उस तौर से उनसे पेश नहीं आते। हालांकि उनके वचन कठोर हैं, वे हमेशा लोगों के साथ धैर्य, सहनशीलता और दया के साथ व्यवहार करते हैं। धीरे धीरे और सावधानी से इस पर विचार करें! अगर परमेश्वर लोगों के साथ सहिष्णुता, दया और अनुग्रह का व्यवहार नहीं करते, तो क्या वे इन सब बातों को लोगों को बचाने की खातिर कह पाते? उन्होंने सीधे लोगों की निंदा क्यों नहीं की? लोग इतने मूर्ख और अज्ञानी होते हैं, लोगों की वास्तविकता में प्रेम नहीं है, और उन्हें नहीं पता कि प्रेम क्या है, और उन्हें नहीं पता कि परमेश्वर इस तरह से कार्य क्यों करते हैं। जब लोग परमेश्वर के प्यार नहीं देखते हैं, तो वे लोग महसूस करते हैं: परमेश्वर कार्य बहुत अच्छी तरह से करते हैं, यह मानवजाति के लिए लाभदायक है और यह लोगों को बदलने में सक्षम है। हालांकि, एक व्यक्ति को भी ऐसा नहीं लगता कि परमेश्वर ने अपना काम बहुत ही अच्छी तरह से किया है, और यह कि मानवजाति के लिए उनका प्रेम बहुत गहरा है, और वे वास्तव में लोगों को असहनीय ढंग से गंदे नहीं मानते हैं। लोगों ने परमेश्वर को परमेश्वर के रूप में नहीं माना है, लेकिन परमेश्वर ने लोगों को लोगों के रूप में माना है। क्या ऐसा नहीं है? परमेश्वर कहते हैं कि आप जानवर हैं, लेकिन उन्होंने आपसे महज जानवरों की तरह व्यवहार नहीं किया है। यदि वे आपसे जानवरों की तरह व्यवहार करते, तो वे आपको सत्य क्यों प्रदान करते? वे आप को किस के लिए बचायेंगे? कुछ लोगों को यह बेहद अन्यायपूर्ण लगता है और कहते हैं: “परमेश्वर ने कहा कि मैं एक आवारा हूं, मुझे इतनी शर्म आ रही है कि मैं अब जी नहीं सकता।” असल में, लोग परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझते हैं। आप में से कोई कह सकता है कि आप जीवन भर ज्ञान और परमेश्वर के कार्यों के अच्छे इरादों का अनुभव कर सकते हैं, लेकिन आप उन्हें बहुत गहराई से अनुभव नहीं करेंगे। भले ही आपके अनुभव गहरे हों या नहीं, जब तक आप अंत में समझते हैं और थोड़ा जानते हैं, तो यह पर्याप्त है। परमेश्वर लोगों को सच्चाई को समझने और उनकी प्रकृतियों को बदलने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहते हैं, ताकि क्रमशः वे अपनी भक्ति और निवेदन में और साथ ही अपने दिलों में परमेश्वर के लिए प्रेम में गहराई से प्रवेश कर सकें। जब लोग खुद को थोड़ा खपाते हैं और छोटी सी कठिनाई भुगतते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनका योगदान परमेश्वर की उपस्थिति में बहुत महान है, और उनके पास वरिष्ठता है। जब वे थोड़ा योगदान करते हैं, तो वे अपनी वरिष्ठता को दिखाते हैं, और यदि वे अपने योगदान का उल्लेख न करें, तो वे दृढ़ या आबाद महसूस नहीं करते हैं। क्या लोगों में प्रेम है? क्या है लोगों का प्रेम? क्या परमेश्वर लोगों के सच्चे प्रेम को प्राप्त करते हैं? क्या परमेश्वर लोगों के प्रेम के योग्य नहीं हैं?