961 परमेश्वर द्वारा मनुष्य के दंड का दिन करीब है

1

बहुत से लोग अपने पापों के कारण बेचैन और परेशान रहते।

बहुत से लोग शर्मिंदा होते क्योंकि कभी अच्छा कर्म किया नहीं।

हैं कई ऐसे जिन्हें नहीं मलाल, बद से बदतर होते जा रहे हैं,

ईश्वर के स्वभाव को आज़माने अपनी दुष्टता उजागर कर रहे।

उसके घर में जो दुष्ट हैं, उन्हें छोड़ेगा नहीं ईश्वर।

क्योंकि इंसान की सज़ा का दिन करीब है।

इन दुष्टों को न निकाले जल्दबाज़ी में ईश्वर,

क्योंकि उसकी अपनी योजना है, क्योंकि उसकी अपनी योजना है।

2

किसी एक इंसान के कर्मों पर नज़र नहीं रखता ईश्वर।

वही करता जो करना चाहिए उसे, जो वो चाहता है।

उसका काम सही वक्त पर बढ़े आगे न एक पल जल्दी, न एक पल की देरी;

वो सहजता, कुशलता से आगे बढ़े जैसी योजना है।

उसके घर में जो दुष्ट हैं, उन्हें छोड़ेगा नहीं ईश्वर।

क्योंकि इंसान की सज़ा का दिन करीब है।

इन दुष्टों को न निकाले जल्दबाज़ी में ईश्वर,

क्योंकि उसकी अपनी योजना है, क्योंकि उसकी अपनी योजना है।

3

ईश-कार्य के हर कदम के साथ, कुछ को हटा दिया जाता,

क्योंकि नफ़रत करे वो चापलूसों से, झूठे आज्ञाकारियों से।

यकीनन त्याग देगा ईश्वर घिनौने लोगों को,

वो चाहता उन्हें दूर रखना जिनसे वो नफ़रत करे।

उसके घर में जो दुष्ट हैं, उन्हें छोड़ेगा नहीं ईश्वर।

क्योंकि इंसान की सज़ा का दिन करीब है।

इन दुष्टों को न निकाले जल्दबाज़ी में ईश्वर,

क्योंकि उसकी अपनी योजना है, क्योंकि उसकी अपनी योजना है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो' से रूपांतरित

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