क्या प्रभु सच में बादल पर लौटेगा?

29 मार्च, 2026

अब आपदाएँ अधिक से अधिक गंभीर होती जा रही हैं। बहुत-से विश्वासी उत्सुकता से प्रभु का स्वागत करने की आशा कर रहे हैं ताकि वे आपदाओं से बच सकें और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकें। लेकिन जब प्रभु की वापसी का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षा करने की बात आती है, तो लोगों के रवैये अलग-अलग होते हैं। कुछ लोग प्रभु की शिक्षाओं का पालन करते हैं। वे जागते रहते हैं और प्रार्थना करते हैं, सक्रिय रूप से खोज और जाँच-पड़ताल करते हैं और दूल्हे की आवाज सुनने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हालाँकि, अन्य लोग अपनी कलीसियाओं में ही बने रहते हैं, केवल प्रभु के बादल पर उतरने की प्रतीक्षा करते हैं। वे ऐसा प्रभु यीशु द्वारा कही गई बातों के आधार पर करते हैं : “उन दिनों के क्लेश के तुरन्त बाद सूर्य अन्धियारा हो जाएगा, और चन्द्रमा का प्रकाश जाता रहेगा, और तारे आकाश से गिर पड़ेंगे और आकाश की शक्‍तियाँ हिलाई जाएँगी। तब मनुष्य के पुत्र का चिह्न आकाश में दिखाई देगा, और तब पृथ्वी के सब कुलों के लोग छाती पीटेंगे; और मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और ऐश्‍वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे(मत्ती 24:29-30)। वे सोचते हैं, “यह भविष्यवाणी स्वयं प्रभु द्वारा बोली गई थी। हम प्रभु के बादल पर उतरने की राह देखकर, उसका स्वागत करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसमें क्या गलत है?”

बाइबल की भविष्यवाणियों के आधार पर प्रभु का स्वागत करने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि प्रभु के बादल पर उतरने की प्रतीक्षा करना वास्तव में परमेश्वर के इरादे के अनुरूप है या नहीं, क्योंकि प्रभु यीशु ने मुख्य रूप से भविष्यवाणी की थी कि वह मनुष्य के पुत्र के रूप में गुप्त रूप से लौटेगा। उदाहरण के लिए, प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की थी : “क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा(मत्ती 24:27)। “जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा(मत्ती 24:37)। “क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दुःख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ(लूका 17:24-25)। प्रभु यीशु ने यह भी भविष्यवाणी की थी : “इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा(मत्ती 24:44)। “आधी रात को धूम मची : ‘देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो’(मत्ती 25:6)। इन भविष्यवाणियों में “मनुष्य का पुत्र आ जाएगा” या “मनुष्य के पुत्र का आना” का उल्लेख है। “मनुष्य का पुत्र” शब्द उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो एक मनुष्य से पैदा हुआ है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर देह का चोला पहनेगा और एक साधारण, सामान्य व्यक्ति बन जाएगा, बोलने और कार्य करने के लिए गुप्त रूप से मानवजाति के बीच उतरेगा। यह सार्वजनिक रूप से बादल पर प्रकट होने से पूरी तरह अलग है। प्रभु के मनुष्य के पुत्र के रूप में लौटने के बारे में इतनी सारी भविष्यवाणियाँ हैं, तो धार्मिक दुनिया केवल उसके बादल पर उतरने की भविष्यवाणियों पर ध्यान केंद्रित करना क्यों चुनती है? वे मनुष्य के पुत्र के आने, मनुष्य के पुत्र के उतरने के बारे में भविष्यवाणियों पर कोई ध्यान क्यों नहीं देते? इस मामले में और भी गहरी बातें छिपी हैं।

सबसे पहले हमें प्रभु की “मनुष्य का पुत्र आ जाएगा” और “दूल्हा आ रहा है” की भविष्यवाणियों और उसके बादल पर उतरने की भविष्यवाणी के बीच सबसे बड़े अंतर को समझना होगा। हमें स्पष्ट रूप से देखना चाहिए कि इन दो प्रकार की भविष्यवाणियों का समय और संदर्भ पूरी तरह से अलग हैं। मनुष्य के पुत्र के आने का संदर्भ क्या है? प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की थी : “जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा(मत्ती 24:37)। नूह के दिनों में, लोग खा रहे थे, पी रहे थे और शादी-ब्याह कर रहे थे। मनुष्य के पुत्र के आने का संदर्भ स्पष्ट रूप से महाविनाशों की अवधि के दौरान नहीं है, बल्कि उस अवधि के दौरान है जब विनाशों के आने से पहले जीवन सामान्य था। हालाँकि, बादल पर उतरना महाविनाशों के बाद होगा। इसलिए, प्रभु यीशु ने अक्सर कहा, “तुम्हें जागते रहना होगा और प्रभु का स्वागत करने के लिए अपना तेल तैयार करना होगा।” इसका मतलब है विनाशों से पहले देहधारी मनुष्य के पुत्र का स्वागत करना। उसने बुद्धिमान और मूर्ख कुंवारियों के लिए अलग-अलग परिणामों की भी भविष्यवाणी की। जो लोग विनाशों से पहले देहधारी मनुष्य के पुत्र का स्वागत करते हैं, वे बुद्धिमान कुंवारियाँ हैं। ये बुद्धिमान कुंवारियाँ स्वर्ग के राज्य के भोज में शामिल होती हैं और शुद्ध होने के लिए मसीह के आसन के सामने न्याय का अनुभव कर सकती हैं। उन्हें विजेता बनाया जाता है और वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं। लेकिन जो धार्मिक लोग प्रभु का स्वागत करने के लिए उसके बादल पर उतरने की प्रतीक्षा करने पर जोर देते हैं, वे मूर्ख कुंवारियाँ हैं। उन लोगों के लिए क्या परिणाम होंगे जो प्रभु को बादल पर उतरते हुए देखने की प्रतीक्षा करते हैं? यह वह परिणाम है जिसमें “पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे।” इसका स्पष्ट अर्थ है कि उन्होंने देहधारी मनुष्य के पुत्र का स्वागत करने का अवसर खो दिया और उनका न्याय किया जाता है, उन्हें दोषी ठहराया जाता है और दंडित किया जाता है। यह ठीक थोमा की तरह है, जिसने प्रभु यीशु को प्रभु और मसीह के रूप में केवल तभी स्वीकार किया जब उसने उसके आत्मिक शरीर को प्रकट होते देखा। इसके लिए, उसे प्रभु द्वारा दोषी ठहराया गया था। जैसा कि प्रभु यीशु ने कहा : “क्योंकि तूने मुझे देखा है, इसलिए तूने विश्‍वास किया है : धन्य वे हैं जिन्होंने बिना देखे मुझ पर विश्‍वास किया(यूहन्ना 20:29)। इससे, हम देख सकते हैं कि जो लोग विनाशों से पहले प्रभु का स्वागत करते हैं और जो विनाशों के बाद उसका स्वागत करते हैं, उनके परिणाम पूरी तरह से अलग हैं। प्रभु का इरादा है कि लोग विनाशों से पहले उसका स्वागत करें और बिल्कुल भी महाविनाशों के समाप्त होने के बाद नहीं।

अब विनाशों से पहले प्रभु का स्वागत करने के महत्व के बारे में बात करते हैं। प्रभु यीशु ने कहा था : “मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा(यूहन्ना 16:12-13)। प्रकाशितवाक्य की पुस्तक भी भविष्यवाणी करती है : “देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ(प्रकाशितवाक्य 3:20)। “जो जय पाए मैं उसे अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाऊँगा, जैसे मैं भी जय पाकर अपने पिता के साथ उसके सिंहासन पर बैठ गया(प्रकाशितवाक्य 3:21)। इन भविष्यवाणियों से, हम देख सकते हैं कि विनाशों से पहले, प्रभु कार्य का एक चरण पूरा करेगा : न्याय का कार्य जो परमेश्वर के घर से शुरू होगा। इसका मतलब है कि विनाशों से पहले, प्रभु सत्य व्यक्त करेगा और न्याय का कार्य करेगा ताकि लोगों के एक समूह को शुद्ध किया जा सके और बचाया जा सके और उन्हें विजेता बनाया जा सके। प्रकाशितवाक्य में जिन विजेताओं के बारे में भविष्यवाणी की गई है, निस्संदेह वे हैं जिन्हें विनाशों से पहले या उनके दौरान पूर्ण बनाया जाता है। हम सभी ने अतीत में सुना है कि जब महाविनाश शुरू होंगे, तो उद्धार का द्वार बंद हो जाएगा। यानी, परमेश्वर का उद्धार का कार्य पूरी तरह से पूरा हो जाएगा। अगर हम प्रभु के बादल पर उतरने की प्रतीक्षा करते हैं, जो विनाशों के अंत में होगा, तो क्या परमेश्वर अभी भी उद्धार का कार्य कर सकता है? यह असंभव होगा। जैसे कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन कहते हैं : “बहुत से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु मैं यीशु का अनुसरण करने वाले हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे तो यह धार्मिकता के सूर्य के सार्वजनिक प्रकटन का समय होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा। हालाँकि तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे तो यह वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे, वह समय होगा जब परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति की घोषणा हुई है और जब परमेश्वर अच्छे को पुरस्कार और बुरे को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय उस समय से पहले ही समाप्त हो चुका होगा जब मनुष्य संकेत देखता है, जब सिर्फ सत्य की अभिव्यक्ति होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और संकेत नहीं खोजते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लाए जा चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि ‘ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है’ अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेत प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को मान्यता नहीं देते जो कड़ा न्याय अभिव्यक्त करता है और जीवन और सच्चा मार्ग प्रदान करता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे तो वह उनके साथ निपटे(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन असाधारण रूप से स्पष्ट हैं। हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि वे सभी जो विनाशों के बाद केवल प्रभु के बादल पर उतरने पर उसका स्वागत करने पर जोर देते हैं, हाय का सामना करेंगे, क्योंकि वे न्याय को स्वीकार करने, शुद्ध होने और बचाए जाने का अवसर खो चुके होंगे। वे व्यक्त किए गए सत्यों और सत्य के आत्मा द्वारा किए गए न्याय के कार्य को स्वीकार करने का अवसर खो चुके होंगे। उन्हें कभी भी परमेश्वर का मुख देखने का मौका नहीं मिलेगा।

आपदाएँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं। मनुष्य को बचाने का परमेश्वर का कार्य जल्द ही समाप्त हो जाएगा और तब हम महाविनाशों के अंतिम साढ़े तीन वर्षों में प्रवेश करेंगे। वे महाविनाश होंगे जो मानवजाति को पूरी तरह से नष्ट कर देंगे। अब तक प्रभु का स्वागत न करना अत्यंत खतरनाक है; तुम किसी भी क्षण अपनी जान गँवा सकते हो। सच्चे मार्ग की खोज और जाँच-पड़ताल न करना और “मनुष्य के पुत्र” द्वारा व्यक्त किए गए सभी सत्यों को स्वीकार न करना बेहद मूर्खतापूर्ण है। ये लोग निश्चित रूप से मूर्ख कुंवारियाँ हैं और प्रभु द्वारा केवल त्यागे और हटाए जा सकते हैं। हम कह सकते हैं कि अब प्रभु का स्वागत करना अत्यंत तात्कालिकता का मामला है। क्या तुम मानवजाति को नष्ट करने वाले महाविनाशों से पहले प्रभु का स्वागत कर सकते हो और शुद्ध होने के लिए अंत के दिनों के परमेश्वर के न्याय को स्वीकार कर सकते हो, यह सीधे महाविनाशों में तुम्हारे परिणाम को निर्धारित करेगा : जीवन या मृत्यु!

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