क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर में आस्था प्रभु यीशु से विश्वासघात है?
अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, को प्रकट हुए पूरे तीस साल हो चुके हैं। उसने 1991 में अपना काम करना और सत्य व्यक्त करना शुरू...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
प्रभु के सभी विश्वासी प्रभु यीशु के वादे पर भरोसा करते हैं : “मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो” (यूहन्ना 14:2-3)। बहुत से लोग, प्रभु के वचनों के आधार पर, प्रभु के आने और उन्हें स्वर्ग के राज्य में उठा लिए जाने की प्रतीक्षा करते हैं। वे मानते हैं कि प्रभु का वादा व्यर्थ नहीं जाएगा और जब वह आएगा, तो वह निश्चित रूप से लोगों को सीधे आकाश में उठा ले जाएगा। यदि लोग अभी भी पृथ्वी पर हैं और उन्हें उठा नहीं लिया गया है, तो वे सोचते हैं कि यह साबित करता है कि प्रभु नहीं लौटा है। क्या यह दृष्टिकोण सही है?
प्रभु यीशु पुनर्जीवित और आरोहित होकर हमारे लिए एक जगह तैयार करने जरूर गया था। पर क्या तुम जानते हो कि उसने यह जगह कैसे तैयार किया? क्या तुम जानते हो, इसे तैयार करते समय क्या कार्य किया जाना चाहिए? क्या तुम्हें यकीन है कि प्रभु ने यही तैयारी की है कि हम जीवित स्वर्ग में प्रवेश करें? या हमें मृत्यु के बाद आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रवेश करना था? धार्मिक संसार में, बहुत से लोग प्रभु के आने और उन्हें स्वर्ग के राज्य में उठा लिए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, पर क्या उन्होंने सोचा है कि स्वर्ग का राज्य आखिर है कहाँ? जो लोग प्रभु का स्वागत करते हैं वे आखिर कहाँ उठा लिए गए हैं? कुछ लोग कहते हैं, बेशक, उन्हें प्रभु से मिलने के लिए हवा में उठा लिया जाता है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? लोग आकाश में कैसे रह सकते हैं? क्या कोई व्यक्ति आकाश में आरोहित किए जाने के बाद जीवित रह सकता है? दूसरे कहते हैं, “उन्हें स्वर्ग में उठा लिया जाता है!” स्वर्ग और आध्यात्मिक जगत क्या हैं? वे वही जगहें हैं जहाँ लोग मरने के बाद जाते हैं। हमारे भौतिक शरीर सीधे आध्यात्मिक जगत में प्रवेश नहीं कर सकते; केवल मृत्यु के बाद ही हम आध्यात्मिक जगत में प्रवेश कर सकते हैं। प्रभु ने अपनी वापसी की भविष्यवाणी की ताकि हम जीवित रहते हुए उसका स्वागत कर सकें। मरना और आध्यात्मिक जगत में लौटना प्रभु का स्वागत करना नहीं कहा जा सकता। तो, क्या यह विश्वास करना कि स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने का मतलब आकाश में आरोहित होना है, मनुष्य की धारणा और कल्पना मात्र नहीं है? यह बस अवास्तविक है। यदि प्रभु की भविष्यवाणियों की हमारी समझ विकृत है, तो प्रभु की वापसी की प्रतीक्षा करना एक व्यर्थ प्रयास हो सकता है—बस व्यर्थ प्रतीक्षा करना।
तो क्या वह स्थान जो प्रभु ने हमारे लिए तैयार किया है, स्वर्ग में है या पृथ्वी पर? आइए देखें कि प्रभु की प्रार्थना क्या कहती है : “तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो” (मत्ती 6:10)। इसके अलावा, प्रकाशितवाक्य की पुस्तक भविष्यवाणी करती है : “फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते देखा। ... देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है। वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उनके साथ रहेगा और उनका परमेश्वर होगा” (प्रकाशितवाक्य 21:2-3)। “जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया, और वह युगानुयुग राज्य करेगा” (प्रकाशितवाक्य 11:15)। इन भविष्यवाणियों में “जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया,” “पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते” और “परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है” का उल्लेख है। इसका मतलब है मसीह के राज्य का पृथ्वी पर साकार होना। परमेश्वर पृथ्वी पर अपना राज्य स्थापित करेगा। प्रभु यीशु हमें पृथ्वी पर परमेश्वर का राज्य आने के लिए प्रार्थना करने को कहता है, ताकि उसकी इच्छा पृथ्वी पर पूरी हो सके। उसने कभी नहीं कहा कि परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में स्थापित होगा और उसने हमसे एक दिन हवा में उठाए जाने की आशा करने के लिए तो बिल्कुल नहीं कहा। हर कोई, इसके बारे में सोचें—क्या ऐसा नहीं है? अगर हम हमेशा परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लिए हवा में उठा लिए जाने की आशा करते रहे हैं, तो क्या यह प्रभु के वचनों और उसके इरादों के उलट नहीं है? पृथ्वी के राज्य परमेश्वर का राज्य बन जाएँगे। प्रभु अंत के दिनों में पृथ्वी पर अपना कार्य करने के लिए आता है, इसलिए स्वर्ग का राज्य पृथ्वी पर है। जहाँ प्रभु है, वहाँ स्वर्ग का राज्य है। स्वर्ग का राज्य अंततः पृथ्वी पर साकार होगा।
तो इसका क्या मतलब है कि प्रभु हमारे लिए जगह तैयार करने गया? मुख्य रूप से, उसने पृथ्वी पर परमेश्वर के चुने हुए लोगों के लिए वे परिवार तैयार किए जिनमें उनका जन्म होना था, उचित परिस्थितियाँ और उनके लिए प्रभु का स्वागत करने और भोज में शामिल होने का अवसर तैयार किया। तो वह स्थान जहाँ परमेश्वर के चुने हुए लोग पैदा होते हैं और जिन परिस्थितियों में वे परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं, वे सभी परमेश्वर द्वारा पूर्व-निर्धारित हैं। फिर “जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो” कहने से प्रभु का क्या मतलब था? अब, परमेश्वर मनुष्य का पुत्र बन गया है और धरती पर आया है। इसलिए, परमेश्वर के चुने लोग होने के नाते, हम भी अंत के दिनों में पैदा हुए हैं और परमेश्वर का कार्य और उद्धार स्वीकारने के लिए धरती पर आए हैं। हमारे लिए एक जगह तैयार करने से प्रभु का यही मतलब है! प्रभु अंत के दिनों में लौट आया है, लेकिन धार्मिक दुनिया में केवल कुछ ही लोगों ने परमेश्वर की वाणी सुनी है और उसकी ओर मुड़े हैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार किया है। इन लोगों को उठा लिया गया है।
परमेश्वर अब मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारी हुआ है, न्याय का कार्य करने के लिए सत्य व्यक्त कर रहा है। जब हम परमेश्वर की वाणी सुनते हैं, प्रभु का स्वागत करते हैं और परमेश्वर के सिंहासन के सामने उठा लिए जाते हैं, तो यह वास्तव में “उठा लिया जाना” है। जब कलीसिया को उठा लिया जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि सभी विश्वासियों को उठा लिया जाता है, बल्कि यह है कि बुद्धिमान कुंवारियाँ जो परमेश्वर की वाणी सुनती हैं और प्रभु का स्वागत करती हैं, उन्हें उठा लिया जाता है। तो लोगों के उठा लिए जाने के बाद परमेश्वर क्या कार्य करता है? यह वही है जो बाइबल भविष्यवाणी करती है : “क्योंकि वह समय आ चुका है कि परमेश्वर के घर से न्याय शुरू किया जाए” (1 पतरस 4:17)। यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर है जो न्याय का कार्य करने के लिए सत्य व्यक्त कर रहा है। यह प्रभु यीशु की भविष्यवाणी को पूरा करता है : “मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा” (यूहन्ना 16:12-13)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा किया जाने वाला अंत के दिनों का न्याय का कार्य पृथ्वी पर मसीह का राज्य स्थापित करने के लिए है। महाविनाश शुरू होने से पहले, परमेश्वर विजेताओं का एक समूह बनाएगा। विजेताओं का यह समूह परमेश्वर के राज्य में स्तंभ होंगे; वे ही मसीह के राज्य में परमेश्वर के साथ राजाओं के रूप में शासन करेंगे। विनाशों के दौरान परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए गए लोग उसके राज्य के लोग होंगे। वे सभी जो लगातार अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने से इनकार करते हैं, उन्हें परमेश्वर द्वारा बेनकाब किया जाएगा और हटा दिया जाएगा और उनका मसीह के राज्य में कोई हिस्सा नहीं होगा। आज, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने चीन में पहले ही विजेताओं का एक समूह बना लिया है। ये विजेता पूरी दुनिया में परमेश्वर के लिए गवाही दे रहे हैं, परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार का प्रसार कर रहे हैं और उसे फैला रहे हैं। अब वह महत्वपूर्ण समय है जब परमेश्वर विनाशों के बीच सभी राष्ट्रों में अपने लोगों को पूर्ण बना रहा है। वे सभी जो अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं, मेमने के पदचिह्नों पर चले हैं और परमेश्वर के सामने उठा लिए गए हैं। परमेश्वर के चुने हुए लोग उसके वचनों को खाते और पीते हैं, उन्होंने उसके न्याय और ताड़ना का अनुभव किया है और उनके भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध और परिवर्तित हो गए हैं। उन सभी ने सच्ची गवाहियाँ दी हैं। परमेश्वर ने पहले ही विजेताओं के एक समूह को प्राप्त कर लिया है। जब परमेश्वर का कार्य समाप्त हो जाएगा और अंतिम साढ़े तीन वर्षों के महाविनाश आ जाएँगे, तो शैतान का यह राज्य धड़ाम से पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। परमेश्वर का प्रतिरोध करने वाली सभी बुरी शक्तियाँ भी नष्ट हो जाएँगी और मसीह का राज्य तब पृथ्वी पर पूरी तरह से साकार हो जाएगा। उस समय, जो लोग बचाए गए हैं वे परमेश्वर के साथ राज्य में प्रवेश करेंगे और एक साथ विश्राम का आनंद लेंगे। यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पूरा करेगा : “मेरे वचन ज्यों-ज्यों पूर्ण होते हैं, पृथ्वी पर धीरे-धीरे राज्य बनता जाता है और मनुष्य धीरे-धीरे सामान्यता की ओर लौटता है, और इस प्रकार पृथ्वी पर वह राज्य स्थापित हो जाता है जो मेरे हृदय में है। राज्य में, परमेश्वर के सभी लोग सामान्य मनुष्य का जीवन पुनः प्राप्त कर लेते हैं। पाले वाली शीत ऋतु विदा हुई, उसका स्थान वासंती नगरों के संसार ने ले लिया है, जहाँ पूरे साल बहार रहती है। लोग अब कभी मनुष्य के संसार की वीरानी का अनुभव नहीं करते हैं और न ही वे मनुष्य के संसार की ठण्डी सिहरन सहते हैं। लोग एक दूसरे से लड़ते नहीं हैं, देश एक दूसरे के विरुद्ध युद्ध में नहीं उतरते हैं, नरसंहार अब और नहीं हैं और न वह लहू जो नरसंहार से बहता है; सारे भूभाग आनंद से भरे हैं, और हर जगह मनुष्यों की आपसी गर्माहट से भरी है। मैं पूरे संसार में चलता हूँ, मैं ऊपर अपने सिंहासन से आनंदित होता हूँ, और मैं तारों के बीच रहता हूँ। और स्वर्गदूत मेरे लिए नए-नए गीत और नए-नए नृत्य प्रस्तुत करते हैं। उनकी अपनी भंगुरता अब कभी उनकी आँखों से आँसू बहने का कारण नहीं बनती है। अब मुझे अपने सामने स्वर्गदूतों के रोने की आवाज़ नहीं सुनाई देती, और अब कोई भी मुझे अपनी परेशानियाँ नहीं बताता है। आज, तुम सब लोग मेरे सामने रहते हो; कल तुम सब लोग मेरे राज्य में रहोगे। क्या यह सबसे बड़ा आशीष नहीं है जो मैं मनुष्य को देता हूँ?” (वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 20)।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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