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परमेश्वर की आवाज़ सुनें और प्रभु यीशु की वापसी का स्वागत करें!

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अपने दिल से सुनने के बाद, मैंने प्रभु की वापसी का स्वागत किया है

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मैक्स, संयुक्त राज्य अमेरिका

1994 में, मेरा जन्म संयुक्त राज्य में हुआ था। मेरे माता-पिता दोनों चीनी थे। मेरी मां एक सफल कामकाजी महिला का विशिष्ट उदाहरण थी। वह अपने बारे में सोचने में सक्षम है और काफी निपुण है। मैं अपनी मां से बहुत प्यार करता हूं। जब मैं दूसरी कक्षा में था, तो मेरे माता-पिता मुझे अध्ययन करने के लिए चीन वापस ले गए ताकि मैं चीनी सीख सकूं। इसी दौरान मैंने प्रभु यीशु से परिचित होना शुरू किया था। मुझे याद है कि 2004 में एक दिन, जब मैं विद्यालय से घर पहुंचा, तो मेरे घर में कुछ मेहमान थे। मेरी मां ने उनसे मेरा परिचय कराया और मुझे बताया कि वह संयुक्त राज्य से आए एक पादरी हैं। मैं काफी खुश था क्योंकि तभी मुझे पता चला था कि मेरी मां कुछ समय से प्रभु यीशु में विश्वास कर रही थी। पहले, वह नहीं करती थी। हर चीनी नव वर्ष में, वे अगरबत्ती जलाया करती थी और बुद्ध की पूजा किया करती थी। हालांकि, जब से मेरी मां ने प्रभु यीशु में विश्वास करना शुरू किया था, तब से मुझे जलती अगरबत्ती की खुशबू नहीं आई थी। उस दिन, उस अमेरिकी पादरी ने मुझे प्रभु यीशु के बारे में एक कहानी सुनाई। कुछ समय बाद, मुझे बाथरूम में ले जाया गया और इससे पहले कि मैं कुछ प्रतिक्रिया दे पाता, 'अचानक ही' उस पादरी ने मेरा सिर बाथटब में डाल दिया और कुछ पल के बाद, मेरे सिर को बाहर निकाल लिया। मुझे बस मेरी मां और उस पादरी की बातें सुनाई दे रही थी, "परमेश्वर के अनुग्रह में तुम्हारा स्वागत है। हम सभी खोई हुई भेड़े हैं।" इस प्रकार से, इससे पहले कि मैं इसे जान पाता, मैंने एक नई जीवन यात्रा की शुरुआत की। चूंकि परमेश्वर मेरे साथ था, इसलिए मेरा दिल बहुत खुश था। उसके बाद, प्रत्येक रविवार, मैं पूजा करने, पादरी से बाइबल की कहानियाँ सुनने और ग्रंथों से कथन पढ़ने के लिए कलीसिया जाया करता था। मैं पूरी तरह से खुश था। मेरा दिल स्थिर था और मैं मानता था कि प्रभु यीशु में विश्वास करना वाकई अच्छी बात है।

2008 में, मेरे पिता मुझे संयुक्त राज्य ले गए ताकि मैं वहां पढ़ाई कर सकूं। इस दौरान, मैं कलीसिया जाया करता था और संगति में हिस्सा लिया करता था। 2012 में, मेरे हाई स्कूल से स्नातक करने के बाद, मेरे पिता ने मुझे प्लेन का टिकट दिया ताकि मैं अपनी मां से मिलने के लिए वापस चीन जा सकूं। मेरे निकलने से पहले, मेरे पिता मेरे साथ बैठे और दिल को छू लेने वाली बातें की। उन्होंने मुझे बताया कि चीन में, मेरी मां ने 'चमकती पूर्वी बिजली' में विश्वास करना शुरू कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि मैं अपनी मां से बात करके उन्हें 'चमकती पूर्वी बिजली' में अपने विश्वास को छोड़ने के लिये राजी कर लूँगा। बिल्कुल, एक ऐसे विद्यार्थी के रूप में जो विश्वविद्यालय में बस प्रवेश लेने ही वाला हो, मुझे इस कहानी के अपने पिता के पक्ष को नहीं सुनना था। मैंने फौरन इंटरनेट पर जाकर 'चमकती पूर्वी बिजली' से संबंधित जानकारी को खोजा। मैं उसके बारे में और भी यथार्थ रूप से समझना चाहता था। परिणामस्वरूप, मुझे 'चमकती पूर्वी बिजली' की निंदा और बदनामी करने वाली सीसीपी सरकार और धार्मिक दुनिया के पादरियों व एल्डर्स के कुछ विचार पता चले। मुझे मां की चिंता होने लगी थी। मैंने घर जाने और यह देखने का निर्णय लिया कि मेरी मां कैसी है। मैंने घर पहुँचकर देखा कि सबकुछ सामान्य है। मेरे प्रति उनकी चिंता और प्रेम में कोई परिवर्तन नहीं आया था। परमेश्वर के लिए उनकी निष्ठा और प्रेम कई गुना बढ़ गया था और वह पहले की तुलना में ज्यादा धर्मनिष्ठ हो गई थी। तब मेरी मां के लिए मेरी चिंता थोड़ी कम हो गई थी।

जिस समय मैं वापस चीन गया था, तो जैसा कि उम्मीद थी, मेरी मां ने 'चमकती पूर्वी बिजली' के बारे में मुझे बताया। उन्होंने कहा, "प्रभु यीशु वापस आ गया है और उसने परमेश्वर के लोगों के साथ शुरुआत करके न्याय का कार्य करना शुरू कर दिया है...।" मेरी मां की बातों से, मुझे समझ आ गया था कि इस बार जब प्रभु यीशु ने देह धरी है, तो वह अपना कार्य करने के लिए एक महिला के रूप में आया है। मुझे याद है कि उस समय, मैं भावशून्य दृष्टि से घूर रहा था क्योंकि जब मैं संयुक्त राज्य में था, तब मुझे प्रभु यीशु के बारे में जो कुछ भी बताया गया था, यह उससे पूरी तरह से अलग था। मेरे पादरी ने हमेशा ही इस धर्मोपदेश पर जोर दिया था कि यहोवा परमेश्वर ही पवित्र पिता है और प्रभु यीशु ही पवित्र पुत्र है। चूंकि वे पिता और पुत्र थे, इसलिए वे दोनों ही पुरुष थे। इसके अलावा, प्रभु यीशु की सभी तस्वीरें जो कलीसिया में टंगी थी और वे सभी सलीब जिन पर प्रभु यीशु लटके हुए दिखते थे, यह इंगित करते थे कि प्रभु यीशु पुरुष था। मगर, इस बार मेरी मां ने कहा, कि प्रभु यीशु एक स्त्री के रूप में वापस आया है। यह तो प्रभु यीशु के बारे में मेरी जानकारी से बिल्कुल परे था। मेरा दिल इसे स्वीकार नहीं कर पाया और मैंने अपनी मां से कहा, "प्रभु यीशु एक पुरुष है। जब प्रभु वापस आया है, तो ऐसा कैसे हो सकता है कि वह एक स्त्री के रूप में वापस आया हो?" मेरी मां ने उत्तर दिया, "परमेश्वर सार रूप में आत्मा है। परमेश्वर का कोई लिंग नहीं होता। चूंकि उसने उद्धार का कार्य करने के लिए देहधारण किया है, इसीलिए उसने एक अलग लिंग का चुनाव किया है...।" चूंकि मेरे पुरोहित ने जिस दृष्टिकोण को मेरे मन में बिठाया था, वह सबसे पहला और मजबूत प्रभाव था, इसलिए मेरी मां के यह सब कहने के बाद भी, मुझे इस पर विश्वास नहीं हुआ था।

कुछ दिनों के बाद, मेरी मां मुझे अपने साथ एक धर्मसभा में शामिल होने के लिए ले जाना चाहती थी। हालाँकि मैं नहीं जाना चाहता था, लेकिन चूंकि मैं अपनी मां का सम्मान करता था, इसलिए मैं उनके साथ चला गया। मुझे याद है कि उस समय उत्तर-पूर्वी चीन की एक आंटी ने कहा था, "अंत के दिन आ गए हैं। प्रभु यीश देहधारण करके वापस आ गया है और वह हमारे बीच रहता है। वह राज्य के युग का कार्य कर रहा है। वर्तमान में, अनुग्रह के युग के कलीसियाओं में पवित्र आत्मा का कार्य नहीं रह गया है और वे सभी पूरी तरह से वीरान हो गए हैं...।" हालांकि, चूंकि दिल पहले से ही बंद था, इसलिए मैं तब भी यह मानता था कि प्रभु यीशु एक पुरुष है और जब वह वापस आएगा, तो वह पुरुष के रूप में ही वापस आएगा। इसी वजह से यह आंटी जो बात कर रही थी, मैं मूलरूप से उस पर विश्वास नहीं करता था। जब तक मैंने चीन नहीं छोड़ दिया, तब तक मैं पूरी तरह से हक्का-बक्का ही बना रहा: प्रभु यीशु स्त्री के रूप में क्यों वापस लौटेगा? मैं चिंतित था कि मेरी मां गलत मार्ग पर चल रही है। मैं बस अपनी मां के लिए प्रार्थना कर सकता था, "प्रभु यीशु! कृपा करके मेरी मां का ध्यान रखो और सुनिश्चित करो कि वह गलत मार्ग पर न चलने लगे। अपने अनुग्रह में वापस आने में उसका मार्गदर्शन करो...।"

मेरे संयुक्त राज्य वापस आ जाने के बाद, मैंने अपनी कलीसिया में पूजा में शामिल होना जारी रखा। हालांकि, धीरे-धीरे, मैंने पाया कि मेरा पादरी जो बातें बताता था उनमें से ज़्यादातर पुरानी और पुनरोक्ति थी। अन्यथा, यह खास तौर पर कलीसिया को दान देने के बारे में ही था। एक विश्वासी के रूप में, हमें सच्ची रखवाली हासिल नहीं हो रही थी। धर्मसभा के दौरान कई लोग सोने लगते थे और इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या धीरे-धीरे कम हो गई थी। 2014 में, मैं जिस कलीसिया में जाता था उसमें एक दुखद घटना घटी। पादरी ने सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करके, एक दूसरे राज्य में घर खरीद लिया था और परिणामस्वरूप, हमारा कलीसिया दिवालिया हो गया था। जब मैंने ये सब चीजें देखी, तो मैं बहुत निराश हुआ। इस दौरान, मेरे सहपाठी मुझे पूजा में हिस्सा लेने के लिए अपने कलीसिया में ले गए। मैं पहले जिस कलीसिया में जाया करता था, यह उससे काफी बड़ा था। हर रविवार, जब पादरी अपना धर्मोपदेश दिया करता था, तो मैं सुनने के लिए आगे की पंक्ति की कुर्सी पर बैठता था। हालांकि, पहले की ही तरह, मैंने लोगों को झपकी लेते हुए देखा। कई बार, मुझे भी झपकी आने लगती थी। अक्सर, पादरी भाइयों व बहनों को जगाए रखने के प्रयास के तौर पर अपनी आवाज ऊंची कर दिया करता था। हालांकि, धर्मोपदेश सुनाने का उसका यह प्रयास असफल होता था। मैंने पिछली कलीसिया के बारे में सोचा , जहां के पादरी ने घर खरीदने हेतु कलीसिया के धन का दुरुपयोग किया था। उसके धर्मोपदेश भाइयों व बहनों की आध्यात्मिक जिंदगी की जरूरतों को पूरा करने में असक्षम थे। बल्कि, वे कलीसिया में मुख्य रूप से सोने के लिए आया करते थे! उस समय मैं जिस कलीसिया में जाया करता था, उसका भी यही हाल था। मैंने खुद से पूछा, "क्या ऐसा हो सकता है कि सभी कलीसिया उजाड़ हो गए हैं?" अचानक ही, मैंने पुन: 2012 के बारे में सोचा जब मैं चीन गया था और वे बातें जो मेरी मां और उत्तर-पूर्वी चीन की उस आंटी ने मुझसे कही थी। उन्होंने मुझे बताया था: परमेश्वर ने राज्य के युग का कार्य शुरू कर दिया है। अनुग्रह का युग समाप्त हो गया है। परमेश्वर अब अनुग्रह के युग से संबंधित कलीसियाओं में कार्य नहीं करता है। राज्य के युग में परमेश्वर के कार्य का अनुसरण करके ही कोई व्यक्ति पवित्र आत्मा के कार्य को हासिल करने में सक्षम हो सकता है। तब पहली बार मैंने खुद से पूछा, "क्या ऐसा हो सकता है कि प्रभु यीशु वाकई वापस आ गया है?"

पलक झपकते ही, 2015 का अंत आ पहुंचा। मुझे खबर मिली कि मेरी मां मेरे बड़े भाई से मिलने के लिए सैन फ्रांसिस्को गई है। तो मैंने प्लेन का टिकट लिया और उनसे मिलने के लिए चला गया। एक बार फिर, मेरी मां ने 'चमकती पूर्वी बिजली' – यानी प्रभु यीशु के दूसरे आगमन के बारे में बताया। उन्होंने मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के कई सुसमाचार वीडियो दिखाए और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कई वचन भी पढ़ने को दिए। इस बार, मैंने वैसा प्रतिरोध नहीं किया जैसा मैंने पहले किया था, क्योंकि पिछले दो सालों में, मैं उन कलीसियाओं को उजाड़ होते हुए देखा था, जहां मैं जाया करता था। इससे कलीसियाओं के उजाड़ होने की उस बात की पुष्टि हो गई थी जो ये लोग मुझे बता रहे थे। यह निश्चित रूप से सत्य है! मैंने अपने दिल को शांत किया और अपनी मां की बातों को सुनना शुरू किया, ताकि मैं अपने दिल के अंदर के बंधनों को ढीला कर सकूं। उस समय, मेरी मां ने मेरे विचारों को बदलना शुरू किया। उन्होंने मुझे परमेश्वर के लिंग के पहलुओं से संबंधित विचारों पर परमेश्वर के वचन सुनाए। इसका मुझपर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। इसने मेरे उस भ्रम को भी दूर किया, जो मुझे वापस आए परमेश्वर के लिंग को लेकर काफी पहले से था। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है, "परमेश्वर के द्वारा किए गए कार्य के प्रत्येक चरण का एक वास्तविक महत्व है। जब यीशु का आगमन हुआ, वह पुरुष था, और इस बार वह स्त्री है। इससे, तुम देख सकते हो कि परमेश्वर ने अपने कार्य के लिए पुरुष और स्त्री दोनों का सृजन किया और वह लिंग के बारे में कोई भी भेदभाव नहीं करता है। जब उसका आत्मा आगमन करता है, तो वह इच्छानुसार किसी भी देह को धारण कर सकता है और वह देह उसका ही प्रतिनिधित्व करती है। चाहे यह पुरुष हो या स्त्री, दोनों ही परमेश्वर को प्रकट करते हैं क्योंकि यह उसका देहधारी शरीर है। यदि यीशु एक स्त्री के रूप में आ जाता और प्रकट हो जाता, दूसरे शब्दों में, यदि पवित्र आत्मा के द्वारा एक शिशु कन्या, न कि एक लड़का, गर्भधारण किया जाना होता, तब भी कार्य का वह चरण उसी तरह से पूरा किया गया होता। यदि ऐसा है, कि इसके बजाय कार्य का यह स्तर एक पुरुष के द्वारा पूरा किया जाना होता और तब भी वह कार्य उसी तरह से पूरा किया जाता। दोनों ही चरणों में किया गया कार्य महत्वपूर्ण है; कोई भी कार्य दोहराया नहीं जाता है या एक-दूसरे का विरोध नहीं करता है। …यदि इस चरण पर वह मनुष्य के द्वारा गवाही दिए जाने के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्य करने के लिए देह धारण नहीं करता, तो मनुष्य हमेशा के लिए यही अवधारणा बनाए रखता कि परमेश्वर सिर्फ पुरुष है, स्त्री नहीं" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं" से)। "परमेश्वर की बुद्धि, परमेश्वर की चमत्कारिकता, परमेश्वर की धार्मिकता, और परमेश्वर का प्रताप कभी नहीं बदलेंगे। उसका सार और उसका स्वरूप कभी नहीं बदलेगा। उसका कार्य, हालाँकि, हमेशा आगे प्रगति कर रहा है और हमेशा गहरा होता जा रहा है, क्योंकि वह हमेशा नया रहता है और कभी पुराना नहीं पड़ता है। …यदि वह केवल एक पुरुष के रूप में देहधारण करता, तो लोग उसे पुरुष के रूप में,पुरुषों के परमेश्वर के रूप में परिभाषित करते,और कभी भी उस पर महिलाओं के परमेश्वर के रूप में विश्वास नहीं करते। तब, पुरुष विश्वास करते कि परमेश्वर पुरुषों के समान लिंग का है, कि परमेश्वर पुरुषों का प्रमुख है—और महिलाओं का क्या होता? यह अनुचित है; क्या यह पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं है? यदि ऐसा मामला होता, तो वे सभी लोग जिन्हें परमेश्व रने बचाया, उसके समान पुरुष होते, और महिलाओं के लिए कोई उद्धार नहीं होता। जब परमेश्वर ने मानवजाति का सृजन किया, तो उसने आदम को बनाया और उसने हव्वा को बनाया। उसने न केवल आदम को बनाया, बल्कि अपनी छवि में पुरुष और महिला दोनों को बनाया। परमेश्वर न केवल पुरुषों का परमेश्वर है—वह महिलाओं का भी परमेश्वर है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)" से)। परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद, जो मामला मेरे दिल को कष्ट दे रहा था, वह तुरंत ही गायब हो गया। मेरे दिल में, मैंने महसूस किया कि ये वचन सही हैं। आरंभ में, परमेश्वर ने आदम और हव्वा की रचना की। मूलत:, पुरुष और स्त्री समान थे। अगर यह बात है, तो परमेश्वर स्त्री के रूप में वापस क्यों नहीं आ सकता है? परमेश्वर का सार आत्मा है। बिल्कुल, जब वह अपना कार्य करने के लिए हमारे बीच आता है, तो वह कोई भी लिंग धारण कर सकता है। परमेश्वर चाहे पुरुष के रूप में देहधारण करे या स्त्री के रूप में, यह उसका चुनाव है। परमेश्वर के पास यह चुनाव करने का अधिकार है कि उसे किस लिंग में देहधारण करनी है, क्योंकि परमेश्वर सभी चीजों का शासक है और रचनाकार है। क्या परमेश्वर का कार्य लोगों द्वारा प्रतिबंधित है? परमेश्वर की तुलना में मनुष्य क्या है? क्या मनुष्य केवल धूल नहीं है? मनुष्य परमेश्वर की बुद्धि को कैसे समझ सकता है? इससे पहले, मैं मानता था कि परमेश्वर केवल पुरुष हो सकता है। मैंने सच में परमेश्वर को पारिभाषित किया था और यह बताता है कि मुझे परमेश्वर का कोई ज्ञान नहीं था। मैं बहुत ज्यादा अहंकारी और मूर्ख था।

परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद, इस बार कार्य करने के लिए देहधारी परेश्वर के एक स्त्री के रूप में आने को लेकर मेरी शंकाएं पूरी तरह से समाप्त हो गई थी। मैं यह भी स्वीकार करने में सक्षम था कि परमेश्वर अपना नया कार्य करने के लिए वापस आ गया है। हालांकि, मैं तब भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को लेकर सौ प्रतिशत निश्चित नहीं था क्योंकि मैंने इंटरनेट पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का विरोध और निंदा करने को लेकर किए गए प्रचारों को पढ़ा था। परिणामस्वरूप, मेरे दिल में तब भी थोड़ी-सी शंका थी। मैंने सोचा कि संभवत: मुझे पूरी तरह से इसका परीक्षण करना चाहिए और देखना चाहिए कि क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया इस तरह की है। परिणामस्वरूप, एक निष्पक्ष दृष्टि के साथ, 2016 की फरवरी से आरंभ करके, मैंने आधिकारिक तौर पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाइयों व बहनों के साथ ऑनलाइन धर्मसभाएं की। मैंने परमेश्वर से भी प्रार्थना की कि वह मेरा मार्गदर्शन करे और नकारात्मक प्रचार के संदर्भ में मेरा मार्गदर्शन करके यह बताए कि क्या सत्य है और क्या असत्य।

कुछ समय तक जांच-पड़ताल करने के बाद, मैंने पाया कि हर बार जब हम धर्मसभा किया करते थे, तो भाई व बहनें परमेश्वर के वचन पढ़ा करते थे, सत्य का संचार करते थे और परमेश्वर के इरादोंके बारे में सहभागिता किया करते थे। इसके अलावा, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन लोगों से सामान्य मानवता को जीने और ईमानदार व्यक्ति बनने की अपेक्षा करते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के सारांश में यह भी शामिल है कि परमेश्वर के स्वभाव को कैसे जानें, परमेश्वर का उद्धार हासिल करने के लिए सत्य का अनुसरण कैसे करें आदि। जब हमारे आध्यात्मिक जीवन की जरूरतों की बात आती है तो ये सभी आवश्यकताएं हैं और मनुष्य के तौर पर सच्चाई से जीने के लिए यह हमारे लिए फायदेमंद है। भाई-बहन जो कुछ कह रहे थे, उससे मुझे यह बात समझ में आ गई कि उनकी परवाह और चिंता सच्ची है और वे आध्यात्मिक जीवन में एक-दूसरे की मदद करते हैं। व्यक्ति जो भी कहता है और जो दृष्टिकोण वह व्यक्त करता है, उससे उसके बर्ताव का पता चलता है सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाइयों व बहनों के साथ बातचीत करके, मैं यह महसूस कर सकता था कि वे लोग वैसे बिल्कुल भी नहीं हैं जैसा इंटरनेट में मौजूद सामग्री उन्हें बताती थी। बल्कि, वे बहुत दयालु और ईमानदार हैं। उनके पास एक ऐसा दिल है जो उनकी कही गई सभी बातों और किए गए सभी कामों में परमेश्वर का सम्मान करता है। इसके अलावा, मैंने महसूस किया कि वहाँ पवित्र आत्मा का कार्य है। ये भाई-बहन पूरी लगन से सत्य का अनुसरण करते हैं। धर्मसभाओं में परमेश्वर के वचनों के उनके संचार और उनके व्यक्तिगत अनुभवों और ज्ञान में, निश्चित रूप से पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता और रोशनी थी। हर धर्मसभा में मैं थोड़ा सत्य को समझने और कुछ न कुछ हासिल करने में सक्षम होता था। ऐसा अनुभव मुझे उन कलीसियों में नहीं मिला था जिनमें मैं पहले गया था। महज वाकपटुता पर सत्य विजयी होता है और अफवाहें तथ्यों के चेहरे के समक्ष अपमानित होती हैं।

बाद में, एक धर्मसभा में, मैंने बहन को उन अफवाहों के बारे में बताया जो सीसीपी सरकार और धार्मिक दुनिया के पादरियों व एल्डर्स द्वारा गढ़ी गई थी। मैं समझ नहीं पाया: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में पवित्र आत्मा का कार्य है और यह एक ऐसी कलीसिया है जिसका निर्माण परमेश्वर द्वारा किया गया है क्योंकि वह अंत के दिनों में अपना कार्य करने के लिए प्रकट हुआ है। तो फिर वह सीसीपी सरकार और धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डर्स के ऐसे उन्मादी विरोध और निंदा का सामना क्यों करता है? उस बहन ने इस पहलू के सत्य के बारे में मेरे साथ चर्चा की, "हमें इंटरनेट की अफवाहों के पार देखना होगा। यह कोई अजीब बात नहीं है कि सीसीपी सरकार और धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर्स अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य पर हमला करेंगे और उसका आकलन करेंगे एवं सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की निंदा करेंगे, क्योंकि प्राचीन काल से ही, सत्य के मार्ग पर अत्याचार किया गया है! शैतान हमेशा से ही परमेश्वर का शत्रु रहा है। वह हमें छलने और परेशान करने के लिए इस प्रकार की अफवाहों को गढ़ता और फैलाता है ताकि हम परमेश्वर को छोड़ दें और धोखा दे दें। इसका लक्ष्य हमें नियंत्रित करना और हम पर कब्जा करना है। यह आरंभ की तरह ही है जब शैतान ने हव्वा को परमेश्वर के वचनों को न मानने और परमेश्वर को धोखा देने के लिए अफवाहों का प्रयोग किया था। जब प्रभु यीशु अपना कार्य करने के लिए आया था, तो प्रमुख याजकों, शास्त्रियों और फ़रीसियों ने भी आम यहूदी लोगों को छलने के लिए हर प्रकार की अफवाहों का प्रयोग किया था। उन्होंने प्रभु यीशु को बढ़ई का बेटा बताकर उसका अपमान किया था। उन्होंने यह कहकर ईश-निंदा की थी कि प्रभु यीशु दानवों को बाहर निकालने के लिए दानवों के शासक पर भरोसा करता है। यहां तक कि प्रभु यीशु को सलीब पर लटकाने के लिए उन लोगों ने रोमन सरकार के साथ सांठ-गांठ भी कर ली थी। प्रभु यीशु के पुनरुत्थान के बाद, उन लोगों ने सैनिकों को झूठ बोलने और यह कहने के लिए रिश्वत दी प्रभु यीशु का पुनरुत्थान हुआ ही नहीं था ताकि आम यहूदी प्रभु के पास वापस न चले जाएँ। अंत के दिनों में, मनुष्य को पूर्ण रूप से निर्मल करने और उसे बचाने के लिए न्याय के कार्य का चरण पूरा करने के लिए परमेश्वर ने एक बार फिर देहधारण किया है। परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार चीन की मुख्यभूमि में पहले से ही सबको पता है। वर्तमान में, दुनिया के कोने-कोने में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य के प्रचार की प्रक्रिया चल रही है। परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन में, ज्यादा से ज्यादा लोग शैतान से पैदा होने वाली बुरी ताकतों में भेद कर पा रहे हैं। वे धार्मिक दुनिया की अगुवाओं के शैतानी और दानवीय सार और चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी की नास्तिक राजनीतिक व्यवस्था को भी साफ तौर पर देखते हैं। उन्होंने पूरी तरह से इन्हें अस्वीकार कर दिया है और परमेश्वर की शरण में आना, सत्य का अनुसरण करना और जीवन के उचित मार्ग पर चलना शुरू कर दिया है। अब जबकि परमेश्वर मनुष्य को बचाने और मनुष्य को शैतान के बुरे प्रभाव से बाहर निकलने में उसकी मदद करने का कार्य करने हेतु आया है, तो क्या शैतान कुछ नहीं करेगा? शैतान हार मानने को तैयार नहीं है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों पर कब्ज़ा बनाए रखने के लिये वह परमेश्वर से अंत तक लड़ेगा। धार्मिक दुनिया और शैतानी सीसीपी शासन एक साथ मिल गए हैं और इंटरनेट एवं मीडिया के माध्यम से, ये बेरोकटोक सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के बारे में अफवाह फैलाते हैं और उसके नाम पर कलंक लगाते हैं ताकि उन लोगों को छला जा सके जिनके पास सत्य नहीं है या जो अंतर नहीं कर सकते हैं। वे हमेशा के लिए मानव जाति पर नियंत्रण हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका दुष्ट लक्ष्य मानव जाति को भ्रष्ट और नष्ट करना है। जैसा कि बाइबल में कहा गया है: ‘हम जानते हैं कि हम परमेश्‍वर से हैं, और सारा संसार उस दुष्‍ट के वश में पड़ा है’ (1यूहन्ना 5:19)। प्रभु यीशु ने कहा था, ‘और दण्ड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उनके काम बुरे थे। क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए’ (यूहन्ना 3:19-20)। शैतान की दुष्ट योजनाओं के परे कैसे समझें और उसके छलावे में आने से कैसे बचें, इसके लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर हमें प्रोत्साहित करता है और कहता है, "जब तुम इन अनुभवों से गुज़र जाओगे, तो तुम कई चीजों में अंतर करने में सक्षम हो जाओगे—तुम भले और बुरे के बीच, धार्मिकता और दुष्टता के बीच, देह और रक्त क्या है और सत्य क्या है इसके बीच अंतर करने में सक्षम हो जाओगे। तुम्हें इन सभी चीजों के बीच अन्तर करने में सक्षम होना चाहिए, और ऐसा करने में, चाहे कैसी भी परिस्थितियाँ हों, तुम कभी भी नहीं हारोगे। केवल यही तुम्हारी वास्तविक कद-काठी है। परमेश्वर के कार्यों को जानना कोई आसान बात नहीं है: तुम्हारी खोज में तुम्हारा स्तर-मान और उद्देश्य होना चाहिए, तुम्हें ज्ञात होना चाहिए कि सच्चे मार्ग को कैसे खोजें, और कैसे मापें कि क्या यह सच्चा मार्ग है या नहीं, और क्या यह परमेश्वर का कार्य है या नहीं" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" से)। जब हम प्रभु यीशु के कार्य के बारे में सोचते हैं और सत्य के आधार पर, अंत के दिनों में परमेश्वर के उद्धार के कार्य और मनुष्य को परमेश्वर के पास वापस जाने से रोकने के लिए शैतान द्वारा फैलाई गई अफवाहों व झूठों की तुलना करते हैं, तो शैतान के कपटी प्रयोजनों को देखना मुश्किल नहीं होता है। फिर इस कारण को समझना भी मुश्किल नहीं होता है कि सीसीपी सरकार और यह धार्मिक दुनिया क्यों सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का विरोध, अपमान, दमन और उस पर अत्याचार करती है।"

इस बहन की सहभागिता को सुनने के बाद, शैतान की योजनाओं के बारे में मेरा थोड़ा विवेक जागा। मुझे परमेश्वर का विरोध करने के शैतान के सार के बारे में भी थोड़ा ज्ञान मिला। इसके अलावा, मैं समझ गया कि इन अफवाहों में अंतर करने और सत्य को झूठ से अलग करने के लिए व्यक्ति को बस परमेश्वर के कार्य का प्रायोगिक परीक्षण करना और उसे समझना होगा। अगर तुम बस आंखें बंद करके एक तरह की कहानी पर विश्वास करोगे और सत्य की खोज नहीं करोगे, न ही तथ्यों की जांच करोगे, तो तुम चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी और धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डर्स की अफवाहों से छल लिए जाओगे। अगर यही बात है, तो तुम अंत के दिनों में परमेश्वर का उद्धार पाने से चूक जाओगे। इस बार, मेरा दिल सर्वशक्तिमान परमेश्वर का आभारी था कि उसने इन सत्यों को समझने के लिए मेरा मार्गदर्शन किया और इस तथ्य को पूरी तरह से समझने में मेरी मदद की कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की पुन: वापसी है, ताकि मैं परमेश्वर के पदचिन्हों पर चल सकूं और परमेश्वर की वापसी का स्वागत कर सकूं। परमेश्वर का धन्यवाद! आमीन!