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परमेश्वर से फिर से मिलना

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जियोंदिंग, यू.एस.ए.

मेरा जन्म एक कैथलिक परिवार में हुआ, और प्रारंभिक उम्र से ही मेरी माँ ने मुझे बाइबल पढ़ना सिखाया था। उस समय, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी गृहयुद्ध के बाद राष्ट्र का पुनर्निर्माण कर रही थी, और चूँकि सीसीपी सभी धर्मों का दमन कर रही थी, मैं 20 साल का हो चुका था जब मुझे अंततः कलीसिया जाने और उपदेश सुनने का मौका मिला। याजक हमसे अक्सर कहा करता था: “हम कैथलिकों को हमारे पापों को सही तरीक़े से स्वीकार करना और पश्चाताप करना चाहिए। हमें भलाई करनी चाहिए, बुराई नहीं, और हमेशा ख्रीस्तयाग में जाना चाहिए। अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर आने वाला है, वह सभी का न्याय करेगा और लोगों ने पृथ्वी पर जैसा कार्य और व्यवहार किया होगा, उसके अनुसार वह उन्हें स्वर्ग में या नरक में भेजेगा। सबसे बड़े पापियों को नरक में हमेशा के लिए दंडित किया जाएगा, जबकि छोटे पाप करने वाले लोग फिर भी स्वर्ग में जा सकते हैं यदि कि वे अपने पापों को परमेश्वर के सामने कबूल करते हैं और पश्चाताप करते हैं। जो परमेश्वर में विश्वास नहीं करता है वह कभी भी स्वर्ग तक नहीं पहुँच पाएगा, चाहे वह कितना भी अच्छा क्यों न हो।” जब भी मैं यह सुनता था, तो जन्म से कैथलिक समूह का एक सदस्य होने के सौभाग्य को पाने के लिए मैं खुद को हमेशा बधाई दिया करता था। मैं हमेशा स्वयं को और अधिक परिश्रमपूर्वक खोज करने, ख्रीस्तयाग में भाग लेने और पापों को कबूल कर परमेश्वर से पश्चाताप करने के लिए कहा करता था, जिससे मैं स्वर्ग में जा पाऊँगा और नरक में पीड़ित नहीं हूँगा। इस तरह, तब मैंने नियमित रूप से कलीसिया जाने और ख्रीस्तयाग में भाग लेने का दृढ़ संकल्प विकसित किया। उस समय, याजक ने हमें यह भी बताया था कि वर्ष 2000 में परमेश्वर वापस आएगा, और इस ख़बर ने हमें बहुत प्रोत्साहित कर दिया था। तो हम सभी ने, परमेश्वर की वापसी की प्रतीक्षा करते हुए, नेकी से खोज करना शुरू कर दिया था। लेकिन वर्ष 2000 आया और चला गया और हमें परमेश्वर की वापसी का कोई संकेत नहीं मिला। हमारी कलीसिया के बहुत से लोग अब अपनी आस्था खो चुके थे, और ख्रीस्तयाग में भाग लेने वाले लोग लगातार कम होते गए। मुझे भी कुछ निराशा महसूस हुई, लेकिन मुझे अब भी लगता था कि परमेश्वर में मेरा विश्वास नहीं डोलेगा, चाहे दूसरे लोग जो भी करें। यह मुख्य रूप से इसलिए था क्योंकि ऐसा कई बार हुआ था जब मैं ख़तरे में पड़ गया था और परमेश्वर ने मुझे बचाया था और वे ख़तरे गायब हो गए थे। परमेश्वर की सुरक्षा के बिना मैं बहुत पहले मर गया होता, इसलिए मैं इतना कृतघ्न होने वाला नहीं था कि परमेश्वर में विश्वास ही खो दूँ।

अगले वर्षों में मैंने अपने आस-पास के लोगों से सुना कि अमेरिका “धरती पर स्वर्ग” था, और इसलिए यहाँ आने की एक मजबूत इच्छा मुझमें पनपने लगी। दिसंबर 2014 में मेरा पूरा परिवार और मैं यू.एस. में आकर बस गए, लेकिन यहाँ जीवन की वास्तविकता बिलकुल वैसी नहीं थी जैसी कि मैंने अपने मन में चित्रित की थी। शुरुआत में, यू.एस. में सब कुछ अपरिचित लग रहा था और हम किसी को भी नहीं जानते थे। पर्यावरण और जलवायु उनसे बहुत अलग थे जिनसे हम चीन में अभ्यस्त थे, और मेरे शरीर ने जल्द ही शिकायत शुरू कर दी। मुझे अक्सर कमज़ोर और निरुत्साहित महसूस होता था, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों की जाँच से कुछ भी गलत नहीं मिला। मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, इसलिए मैंने परमेश्वर से और भी ज़्यादा नेकी से प्रार्थना करना शुरू कर दिया, और यह उम्मीद की कि परमेश्वर मेरी रक्षा करेगा। मैंने और प्रार्थना की और एक ऐसी कलीसिया की तलाश शुरू कर दी जहाँ मैं ख्रीस्तयाग कर सकता था और मैंने अंततः चीनी ईसाइयों की एक कलीसिया को ढूँढ लिया। लेकिन कलीसिया में कुछ बार जाने के बाद मैंने पाया कि समाज में जो रोज हो रहा था उससे वहाँ कुछ ख़ास अलग नहीं था: मंडली के सदस्य सतही रूप से मित्रवत थे लेकिन उनका आपसी व्यवहार ताक़त और धन द्वारा शासित था। कलीसिया में इस तरह की स्थिति का सामना कर, मैं बहुत निराश हो गया। मैंने मन ही मन सोचा: “हे परमेश्वर, तुम कब वापस आओगे? जब तुम लौटोगे, अच्छे लोगों को दुष्ट लोगों से अलग किया जाएगा और संसार को शुद्ध किया जाएगा।” हालांकि मैंने अभी भी ख्रीस्तयाग में जाना जारी रखा था, फिर भी मैं कलीसिया में परमेश्वर की उपस्थिति महसूस करने में सक्षम नहीं था, और इसने मुझे निराश तथा उदास कर दिया और इससे परमेश्वर में मेरा विश्वास प्रभावित हुआ। लेकिन फिर एक दिन जुलाई 2015 में, जब मैं राज्य से बाहर काम कर रहा था, मेरी पत्नी का फोन आया। उसने मुझे बहुत उत्साह से कहा: “परमेश्वर वापस आ गया है। वह वचनों को व्यक्त कर रहा है और अंत के दिनों के न्याय का कार्य कर रहा है! जल्दी लौट आओ ताकि हम परमेश्वर के नए कार्य को एक साथ स्वीकार कर सकें।” यह सुनकर, मैं कुछ संदेहपूर्ण हुए बिना न रह सका: परमेश्वर वापस आ गया है? वह कैसे संभव है? जब परमेश्वर दुनिया का न्याय करने के लिए लौटता है तो अच्छे लोग बुरे लोगों से अलग कर दिए जाएँगे। लेकिन अच्छे और बुरे अभी भी एक साथ मिश्रित हैं, तो मेरी पत्नी क्यों कह रही है कि परमेश्वर वापस आ चुका है? क्या मेरी पत्नी एक और संप्रदाय में शामिल हो गई है? हम अपने अधिकांश जीवन के लिए कैथलिक रहे हैं, अब हमारे लिए इससे हटने का कोई रास्ता नहीं है! मैंने जल्दी से अपना काम खत्म किया और मैं घर लौट आया।

जब मैं घर गया तो मैंने अपनी पत्नी से पूछा: “तुम कैसे जानती हो कि परमेश्वर वापस आ गया है? तुम हमारी कैथलिक मान्यताओं से विचलित तो नहीं हुई हो ना? तुम कह रही हो कि परमेश्वर न्याय के कार्य को करने के लिए लौट आया है, लेकिन अभी भी अच्छे और बुरे लोग मिश्रित हैं, तो यह कैसे हो सकता है कि परमेश्वर पहले ही लौट चुका हो? हम परमेश्वर की वापसी की प्रतीक्षा कर सकते हैं, लेकिन हम उसके प्रति विश्वासघात नहीं कर सकते!” मेरी पत्नी ने मेरी बात सुनी और फिर धैर्यपूर्वक जवाब दिया: “इतने उत्तेजित मत हो। मैंने खुद ही अभी परमेश्वर की वापसी के बारे में पता लगाया है। वर्तमान में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया परमेश्वर की वापसी की गवाही दे रही है और परमेश्वर के घर से शुरू हो चुके न्याय के कार्य को करने के लिए, सर्वशक्तिमान परमेश्वर सत्य को व्यक्त कर रहा है। जो हो रहा है उसके सुनिश्चित वर्णन के बारे में मैं स्पष्ट नहीं हूँ, लेकिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के द्वारा व्यक्त किये गए कई वचनों को मैं ऑनलाइन पढ़ती रही हूँ और मुझे यकीन है कि वे सब परमेश्वर की ही आवाज़ हैं। परमेश्वर ने एक बार कहा ‘मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं‘ (यूहन्ना 10:27)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में जाँच के लिए जाकर हम यह पता लगा सकते हैं कि क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटा हुआ परमेश्वर है, ठीक है ना?” मेरी पत्नी ने जो कहा वह तर्कसंगत लगा, और न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर की वापसी की बाइबल में भविष्यवाणी की गई है, इसलिए कलीसिया में उसके साथ जाकर एक नज़र डालने में कोई नुकसान नहीं था, और तब मैं निर्णय ले सकता था।

इस उद्देश्य को लेकर, मेरी पत्नी ने और मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के एक सदस्य के घर जाने की व्यवस्था की जिसका नाम भाई झांग था। भाई वांग और बहन ली, और कुछ अन्य साथी कैथलिक भी आए। यह देखकर कि मेरे साथ काफी लोग थे, मेरे मन को तसल्ली हुई। कुछ शिष्टाचार के बाद, हम सब बैठे और मैंने भाइयों और बहनों से यह पूछा: “परमेश्वर की वापसी के बारे में मेरी समझ यह है: जब परमेश्वर न्याय के कार्य को करने के लिए लौटता है, तो अच्छे लोगों को दुष्ट लोगों से अलग किया जाएगा। तब अच्छे लोग परमेश्वर द्वारा स्वर्ग में स्वीकार किए जाएँगे और वे उससे मिलेंगे, जबकि दुष्टों को नरक में भेजा और दंडित किया जाएगा। तुम कहते हो कि परमेश्वर वापस आ गया है और वह न्याय का कार्य कर रहा है, तो क्यों हमने इन चीज़ों में से कुछ भी होते नहीं देखा है?” भाई वांग ने जवाब दिया: “भाई, मेरा दृष्टिकोण भी तुम्हारे जैसा ही था, अर्थात मैं भी यही मानता था कि परमेश्वर की वापसी का मतलब था कि अच्छे लोग दुष्ट लोगों से अलग किए जाएँगे, कि अच्छे लोग स्वर्ग में हमेशा के लिए रहेंगे और दुष्टों को दंडित किया जाएगा, और यदि हम ऐसा नहीं देखते हैं तो यह साबित होता है कि परमेश्वर लौटा नहीं था। लेकिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद मुझे एहसास हुआ कि ये तो केवल हमारी अवधारणाएँ और कल्पनाएँ हैं और यह परमेश्वर के कार्य करने का वास्तविक तरीक़ा नहीं है। अंत के दिनों में परमेश्वर न्याय का कार्य कैसे करता है वह कुछ ऐसा है जिसकी केवल परमेश्वर ही योजना और व्यवस्था करता है। परमेश्वर का ज्ञान आकाश से भी ऊँचा है, और परमेश्वर की नज़रों में इंसान धूल के कण जैसे छोटे होते हैं, तो हम कैसे परमेश्वर के कार्य का आकलन कर सकते हैं? बाइबल में यह कहा गया है: ‘किसने यहोवा के आत्मा को मार्ग बताया या उसका मन्त्री होकर उसको ज्ञान सिखाया है? …देखो, जातियाँ तो डोल में की एक बूंद या पलड़ों पर की धूल के तुल्य ठहरीं; देखो, वह द्वीपों को धूल के किनकों सरीखे उठाता है‘ (यशायाह 40:13,15)। हममें से हर कोई सोचने के लिए अपने दिमाग़ का उपयोग करता है, इसलिए हम परमेश्वर के कार्य के बारे में जैसा चाहें वैसा अनुमान लगा सकते हैं, लेकिन परमेश्वर हमारी कल्पनाओं के अनुसार कभी भी अपना कार्य नहीं करता है। अगर हम परमेश्वर के कार्य के मापदंड निर्धारित करने के लिए हमारी कल्पनाओं का उपयोग करते हैं तो क्या हम बेहद घमंड से व्यवहार नहीं कर रहे हैं? तो परमेश्वर न्याय के अपने कार्य को कैसे करता है? वह बुरे से भले को अलग कैसे करता है? आओ, हम इसे समझ पाने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के कुछ अंश पढ़ें। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा: ‘न्याय का कार्य परमेश्वर का स्वयं का कार्य है, इसलिए प्राकृतिक रूप से इसे परमेश्वर के द्वारा किया जाना चाहिए; उसकी जगह इसे मनुष्य द्वारा नहीं किया जा सकता है। क्योंकि सत्य के माध्यम से मानवजाति को जीतना न्याय है… अर्थात्, अंत के दिनों में, मसीह पृथ्वी के चारों ओर मनुष्यों को सिखाने के लिए और सभी सत्यों को उन्हें ज्ञात करवाने के लिए सत्य का उपयोग करेगा। यह परमेश्वर के न्याय का कार्य है‘ (“वचन देह में प्रकट होता है” से “मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है”)। ‘अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं। सभी चीजों को उनके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा, और उनकी प्रकृति के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। यही वह समय है जब परमेश्वर लोगों के परिणाम और उनकी मंज़िल को प्रकट करता है। यदि लोग ताड़ना और न्याय से नहीं गुज़रते हैं, तो उनकी अवज्ञा और अधार्मिकता को प्रकट करने का कोई तरीका नहीं होगा। केवल ताड़ना और न्याय के माध्यम से ही सभी चीजों का अंत प्रकट हो सकता है। मनुष्य केवल तभी अपने वास्तविक रंगों को दिखाता है जब उसे ताड़ना दी जाती है और उसका न्याय किया जाता है। बुरा बुरे के साथ रखा जाएगा, अच्छा अच्छे के साथ रखा जाएगा, और लोगों को उनके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा। ताड़ना और न्याय के माध्यम से, सभी चीजों का अंत प्रकट होगा, ताकि बुराई को दंडित किया जाएग और अच्छे को पुरस्कृत किया जाएगा, और सभी लोग परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन नागरिक बन जाएँगे। सभी कार्य धर्मी ताड़ना और न्याय के माध्यम से अवश्य प्राप्त किया जाना चाहिए। क्योंकि मनुष्य की भ्रष्टता अपने चरम पर पहुँच गई है और उसकी अवज्ञा अत्यंत गंभीर रही है, केवल परमेश्वर का धर्मी स्वभाव ही, जो मुख्यत: ताड़ना और न्याय का है और जो अंत के दिनों दिनों में प्रकट होता है, मनुष्य को रूपान्तरित और पूरा कर सकता है। केवल यह स्वभाव ही बुराई को उजागर कर सकता है और इस तरह सभी अधर्मियों को गंभीर रूप से दण्डित कर सकता है‘ (“वचन देह में प्रकट होता है” से “परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)”)। ‘विजय का कार्य करने का मेरा उद्देश्य केवल विजय के वास्ते विजय प्राप्त करना नहीं है, बल्कि मैं धार्मिकता और अधार्मिकता को प्रकट करने, मनुष्य के दण्ड के लिए प्रमाण प्राप्त करने, और दुष्ट को दोषी ठहराने के लिए विजयी होता हूँ, और उससे भी बढ़कर, उन लोगों को सिद्ध बनाने के वास्ते विजयी होता हूँ जो स्वेच्छा से आज्ञापालन करते हैं। अंत में, सभी को प्रकार के अनुसार पृथक किया जाएगा, और वे सभी जिन्हें सिद्ध बनाया जाता है उन्होंने अपनी सोच और विचारों को आज्ञाकारिता से भरा हुआ है। यही वह कार्य है जो अंत में पूर्ण किया जाना है। किन्तु जो विद्रोही तरीकों से भरे हुए हैं उन्हें दण्डित किया जाएगा, आग में जलने के लिए भेज दिया जाएगा और वे अनन्त शाप की वस्तु बन जाएँगे‘ (“वचन देह में प्रकट होता है” से “जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे”)। हमारी सोच यह है कि परमेश्वर का न्याय का कार्य सीधे गेहूँ को टेआस से, भेड़ों को बकरियों से, अच्छे सेवकों को दुष्ट नौकरों से अलग करने का है, दूसरे शब्दों में, अच्छे लोगों को दुष्टों से अलग करने और प्रत्येक को अपनी श्रेणी में रखने का है। लेकिन अगर हम इसके बारे में सोचें, तो इस समय दुनिया भर में दो अरब से अधिक ईसाई हैं—और वे सभी कहते हैं कि उन्हें परमेश्वर में सच्चा विश्वास है और परमेश्वर से प्यार है—तो हम कैसे भले को बुरे से, और धार्मिक को अधार्मिक से अलग करें? अगर परमेश्वर निर्धारित करता है कि तुम भले हो और मैं बुरा हूँ, तो मैं निश्चित रूप से मैं इसे नहीं मानूँगा क्योंकि मुझे लगता है कि मैं भी एक अच्छा इंसान हूँ। अगर परमेश्वर निर्धारित करता है कि मैं अच्छा हूँ और कोई और बुरा है, तो वह व्यक्ति भी निश्चित रूप से इसे मानना नहीं चाहेगा। तो आखिर हम कैसे जान सकते हैं कि कौन भला है और कौन बुरा? हम नहीं जान सकते, क्योंकि हम इंसानों के पास इसे मापने के लिए सिद्धांत या मानक नहीं हैं। अगर परमेश्वर इस तरह से हमारा आकलन करता तो हम निश्चित रूप से इसे नहीं मानते और इसके बारे में ऐसी अवधारणाएँ बनाते कि परमेश्वर अन्यायी और अनुचित था। तो प्रत्येक को अपनी श्रेणी में रखने का कार्य कैसे आगे बढ़ सकता है? परमेश्वर जो अंत के दिनों के दौरान लौटता है वह अंत के दिनों का मसीह—सर्वशक्तिमान परमेश्वर—है जो न्याय के कार्य को करने के लिए सच्चाइयों का उपयोग करता है। सभी ईसाइयों के लिए, यह प्रकट करना कि कौन गेहूँ हैं और कौन टेआस, कौन भेड़ें हैं और कौन बकरियाँ, कौन अच्छे सेवक हैं, और कौन दुष्ट, कौन बुद्धिमान कुंवारियाँ हैं और कौन मूर्ख, ये सब सच्चाइयों के उपयोग द्वारा किया जाता है। परमेश्वर के वचन सभी को प्रकट कर देते हैं, और बुद्धिमान कुंवारियाँ वो लोग हैं जो वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करते हैं और सच्चाई से प्यार करते हैं। जब वे सुनते हैं कि कोई परमेश्वर के आने की गवाही दे रहा है तो वे इसका स्वागत करने के लिए बाहर जाते हैं और सक्रिय रूप से परमेश्वर के वचनों और परमेश्वर के कार्य की जाँच करते हैं। वे परमेश्वर की आवाज़ को पहचान लेते हैं और अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं, और अंत में वे परमेश्वर के न्याय के माध्यम से शुद्धिकरण और उद्धार प्राप्त करते हैं। बड़ी आपदाओं के दौरान उनके पास परमेश्वर की सुरक्षा होती है और वे बचे रहने में सक्षम होते हैं, और अंत में उन्हें परमेश्वर के राज्य में ले जाया जाता है। इसके विपरीत, चूँकि मूर्ख कुंवारियों जैसे लोग सच्चाई से प्यार नहीं करते हैं, क्योंकि वे अपनी अवधारणाओं और कल्पनाओं को थामे रहने या अफवाहों पर विश्वास करने पर ज़ोर देते हैं, चूँकि वे अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य की खोज या जाँच नहीं करते हैं—और उनमें से कुछ धार्मिक अगुआओं का अनुपालन करते हुए परमेश्वर का विरोध और निंदा भी करते हैं और अंत के दिनों के परमेश्वर के उद्धार से इनकार भी करते हैं—वे परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य से बुराई करने वालों के रूप में उजागर किए जाएँगे और वे हटा दिए जाएँगे। बड़ी आपदाओं के दौरान दंड को भुगतना उनका नसीब होगा। इससे, हम देख सकते हैं कि अंत के दिनों के दौरान प्रत्येक को अपनी श्रेणी में रखने का परमेश्वर का कार्य हमारी अवधारणाओं और कल्पनाओं के अनुसार नहीं किया जाता है। इसके बजाए, परमेश्वर लोगों को प्रकट करने के कार्य के लिए न्याय की विधि का उपयोग करता है, और अंत में परिणाम यह होता है कि हर किसी को पूरी तरह से उजागर किया जाता है, और वे सत्य को स्वीकार करते हैं या सत्य का विरोध करते हैं, उसके अनुसार उन्हें अपनी-अपनी श्रेणी में रखा जाता है। क्या यह वास्तव में परमेश्वर का ज्ञान, परमेश्वर की निष्पक्षता, और परमेश्वर की धार्मिकता नहीं है?”

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन और भाई वांग की सहभागिता को सुनने के बाद, मैंने याद किया कि हमारी कलीसिया के याजक ने कहा था कि, “जब परमेश्वर आता है, तो भले लोगों को बुरे लोगों से अलग किया जाएगा” और मैंने महसूस किया कि यह धारणा बहुत अस्पष्ट, बहुत अव्यवहारिक है, और परमेश्वर के कार्य की वास्तविकता से मेल नहीं खाती है। हम सभी पाप में रहते हैं, हम इस चक्र से बचे बिना लगातार पाप और पश्चाताप करते हैं, तो वास्तव में भले लोग कौन हैं? जब परमेश्वर वापस आता है, यदि हम अपने पापों से शुद्ध नहीं हुए हैं, तो क्या हमें स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी? इस बारे में सोचना मेरे दिल में प्रकाश डालने जैसा था, और मैंने परमेश्वर की अगुआई के लिए उसका धन्यवाद किया। मेरा जाना व्यर्थ नहीं गया था, क्योंकि अब मैं समझ गया था कि परमेश्वर भले-बुरे का अंतर इस बात से करता है कि लोग सच्चाई के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। दूसरे शब्दों में, लोगों का भला या बुरा होना इस बात पर निर्भर करता है कि वे परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना को स्वीकार करते हैं या नहीं, और इससे परमेश्वर की धार्मिकता पूरी तरह से प्रकट होती है। परमेश्वर गेहूँ को टेआस से, भेड़ों को बकरियों से, बुद्धिमान कुंवारियों को मूर्ख कुंवारियों से, सच्चे विश्वासियों को नकली विश्वासियों से, और सच्चाई के प्रेमियों को सच्चाई से नफ़रत करने वालों से अलग करने के लिए वचनों और कार्य का उपयोग करते हैं। परमेश्वर अविश्वसनीय रूप से बुद्धिमान है! बहरहाल, मैंने याजक को यह भी कहते हुए याद किया कि जब परमेश्वर लोगों का न्याय करने के लिए लौटता है तो इससे पहले कि वह यह न्याय करे कि कोई व्यक्ति स्वर्ग में जाएगा या नरक में, वह इसे एक-एक करके करता है, और प्रत्येक व्यक्ति के पापों को भी एक-एक करके सूचीबद्ध किया और आँका जाता है। लेकिन अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर कह रहा है कि परमेश्वर का अंत के दिनों का न्याय का कार्य उनके वचनों के माध्यम से किया जा रहा है, तो आखिर कैसे इन वचनों का इस्तेमाल लोगों का न्याय करने के लिए किया जा रहा है?

इसलिए मैंने इस सवाल को समूह के सामने उठाया और उत्तर में भाई झांग ने मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के दो अंश पढ़कर सुनाये: “कुछ लोग विश्वास करते हैं कि शायद परमेश्वर किसी समय पृथ्वी पर आए और लोगों को दिखाई दे, जिसके बाद वह समस्त मानवजाति का न्याय करेगा, किसी को छोड़े बिना उन्हें एक एक करके जांचेगा। ऐसे लोग जो इस रीति से सोचते हैं वे देहधारण के इस चरण के कार्य को नहीं जानते हैं। परमेश्वर एक एक करके मनुष्य का न्याय नहीं करता है, और एक एक करके मनुष्य की जांच नहीं करता है; ऐसा करना न्याय का कार्य नहीं होगा। क्या समस्त मानवजाति की भ्रष्टता एक समान नहीं है? क्या मनुष्य का मूल-तत्व सब एक जैसा नहीं है? जिसका न्याय किया जाता है वह मनुष्य का भ्रष्ट मूल-तत्व है, मनुष्य का मूल-तत्व जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है, और मनुष्य के समस्त पाप हैं। परमेश्वर मनुष्य की छोटी-मोटी एवं मामूली त्रुटियों का न्याय नहीं करता है। …परन्तु समूची मानवजाति की अधार्मिकता का न्याय करता है – परमेश्वर के प्रति मनुष्य का विरोध, उदाहरण के लिए, या उसके विरुद्ध मनुष्य का अनादर, या परमेश्वर के कार्य में गड़बड़ी डालना, एवं इत्यादि। जिसका न्याय किया जाता है वह परमेश्वर के विरुद्ध मनुष्य का मूल-तत्व है, और यह कार्य अंतिम दिनों के विजय का कार्य है” (“वचन देह में प्रकट होता है” से “भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है”)। “अंत के दिनों में, मसीह मनुष्य को सिखाने के लिए विभिन्न प्रकार की सच्चाइयों का उपयोग करता है, मनुष्य के सार को उजागर करता है, और उसके वचनों और कर्मों का विश्लेषण करता है। इन वचनों में विभिन्न सच्चाइयों का समावेश है, जैसे कि मनुष्य का कर्तव्य, मनुष्य को किस प्रकार परमेश्वर का आज्ञापालन करना चाहिए, हर व्यक्ति जो परमेश्वर के कार्य को मनुष्य को किस प्रकार परमेश्वर के प्रति निष्ठावान होना चाहिए, मनुष्य को किस प्रकार सामान्य मानवता से, और साथ ही परमेश्वर की बुद्धि और उसके स्वभाव इत्यादि को जीना चाहिए। ये सभी वचन मनुष्य के सार और उसके भ्रष्ट स्वभाव पर निर्देशित हैं। खासतौर पर, वे वचन जो यह उजागर करते हैं कि मनुष्य किस प्रकार से परमेश्वर का तिरस्कार करता है इस संबंध में बोले गए हैं कि किस प्रकार से मनुष्य शैतान का मूर्त रूप और परमेश्वर के विरूद्ध दुश्मन की शक्ति है। अपने न्याय का कार्य करने में, परमेश्वर केवल कुछ वचनों से ही मनुष्य की प्रकृति को स्पष्ट नहीं करता है; वह लम्बे समय तक इसे उजागर करता है, इससे निपटता है, और इसकी काट-छाँट करता है। उजागर करने की इन विधियों, निपटने, और काट-छाँट को साधारण वचनों से नहीं, बल्कि सत्य से प्रतिस्थापित किया जा सकता है, जिसे मनुष्य बिल्कुल भी धारण नहीं करता है। केवल इस तरीके की विधियाँ ही न्याय समझी जाती हैं” (“वचन देह में प्रकट होता है” से “मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है”)।

फिर भाई झांग ने मेरे साथ यह सहभागिता की: “हमारे पास यह अवधारणा है कि अंत के दिनों के न्याय के कार्य के दौरान परमेश्वर प्रत्येक व्यक्ति को अपने सफ़ेद सिंहासन के सामने बुलाएगा और फिर उसका न्याय करेगा। प्रत्येक व्यक्ति को उसके सामने जमीन पर घुटने टेकने होंगे और फिर अपने पूरे जीवनकाल में किए गए पापों में से प्रत्येक को कबूल करना होगा। तब पापों की गंभीरता के आधार पर परमेश्वर यह तय करेगा कि कोई व्यक्ति स्वर्ग में जाएगा या नरक में। हम सोचते हैं कि परमेश्वर लोगों का उनके पापों के अनुसार न्याय करता है, जैसे कि शारीरिक या मौखिक रूप से दुर्व्यवहार करना, माता-पिता के साथ संतानोचित न होना, चोरी और लूट-फ़साद करना, इत्यादि। लेकिन वास्तव में परमेश्वर का अंत के दिनों का न्याय का कार्य हमारे इन बाहरी व्यवहारों या चारित्रिक त्रुटियों से संबंधित नहीं है, बल्कि इसके बजाय, वह मानव जाति की परमेश्वर-विरोधी शैतानी प्रकृति और हर भ्रष्ट स्वभाव का न्याय करने की ओर लक्षित है। इनमें हमारा अहंकार और आत्म-गर्व, हमारी कुटिलता और धूर्तता, हमारी स्वार्थपरता और नीचता, हमारा लालच और हमारी बुराई इत्यादि शामिल हैं। हमारे पास ऐसे कई दृष्टिकोण, पुरानी धार्मिक धारणाएँ और सामंती सोच भी हैं जो परमेश्वर के साथ सुसंगत नहीं हैं। ये सभी चीज़ें परमेश्वर के प्रति हमारे प्रतिरोध की स्रोत हैं। वे ऐसी समस्याएँ हैं जो भ्रष्ट मानव जाति के लिए आम हैं, और इसी तरह वे चीजें हैं जिन्हें शुद्ध करना और बदलना परमेश्वर के न्याय के कार्य का लक्ष्य है। इसलिए, जिन वचनों को परमेश्वर व्यक्त करता है, वे मानव जाति की प्रकृति और सार को प्रकट करते हैं और पृथ्वी पर हर भ्रष्ट व्यक्ति, बिना किसी अपवाद के, इसका एक हिस्सा है। या अन्य शब्दों में, परमेश्वर के वचन पूरी मानव जाति की ओर निर्देशित हैं और इसलिए व्यक्तिगत रूप से लोगों का न्याय करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़कर और परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना को स्वीकार करके हम कई सच्चाइयों को समझ सकते हैं और हमारी प्रकृति, हमारे सार और शैतान द्वारा भ्रष्ट हुई हमारी वास्तविक स्थिति को हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। ऐसा करने से हम परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव को भी पहचान सकते हैं और ऐसे दिलों को विकसित कर सकते हैं जो परमेश्वर का सम्मान करते हों और खुद को तुच्छ मानते हों, ताकि हम अपनी देह-वासना को धोखा देने और सच्चाई का अभ्यास करने के इच्छुक हो सकें। इस तरह, हमारे भ्रष्ट शैतानी स्वभाव को धीरे-धीरे शुद्ध किया जाएगा और जीवन पर हमारे दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य भी बदल जाएँगे। जब हम परमेश्वर के वचनों से जीना शुरू करते हैं, जब हम परमेश्वर का विरोध और प्रतिरोध करना बंद कर देते हैं और इसके बजाय वास्तव में परमेश्वर की आज्ञा मानते हैं और उसका सम्मान करते हैं, बुराई को छोड़ देते हैं, तो हम परमेश्वर के उद्धार को प्राप्त करेंगे और हम वो लोग बनेंगे जो परमेश्वर के इरादों के अनुकूल हों। अंत के दिनों के दौरान न्याय के कार्य को करने के लिए सच्चाई व्यक्त करने में यही वास्तविक स्थिति और परमेश्वर का वास्तविक उद्देश्य है।”

भाई झांग की फैलोशिप को सुनने के बाद, मुझे यह महसूस हुआ कि परमेश्वर का न्याय का कार्य अत्यंत व्यावहारिक है और वास्तविकता पर आधारित है! उसने जो कुछ भी कहा, उसे मैं स्वीकार करने में सक्षम था, और यह मेरे दिल में मेरे साथ समस्वर होकर गहराई से गूंज गया। हाँ, लोग घमंडी हैं, वे प्रसिद्धि, सौभाग्य और प्रतिष्ठा चाहते हैं, और वे अपने-अपने भ्रष्ट स्वभाव में रहते हैं। परमेश्वर हमारे अंदर की सभी गंदगी और भ्रष्टता से हमें छुटकारा दिलाने के लिए उसके न्याय के वचनों का उपयोग करता है। परमेश्वर का विरोध करने वाली हमारी प्रकृति इस प्रकार हल हो जाती है और हमारे भ्रष्ट स्वभाव को बदल दिया जाता है, और हम वास्तव में भले लोग बन जाते हैं। इसे इस तरह से समझकर, मैं यह देख सकता था कि पुजारी की यह बात कि जब परमेश्वर मानव जाति का न्याय करने के लिए लौटता है, तब लोगों का व्यक्तिगत रूप से और पापों का एक-एक करके न्याय किया जाएगा, केवल मानवीय अवधारणा और कल्पना है और परमेश्वर वास्तव में जिस तरीक़े से कार्य करता है, उससे इसका कोई लेना-देना नहीं है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में वास्तव में सच्चाई होती है; वे वास्तव में परमेश्वर की आवाज़ हैं! मैंने उस दिन जो सुना, उससे मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य की पूरी तरह से जाँच करने का निर्णय लिया।

मेरी जाँच के दौरान, मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया द्वारा उत्पादित कई सुसमाचार फिल्में देखीं, जिनमें नूह का समय आ चुका है, प्रभुत्व का रहस्य और पकड़ ली आखिरी गाड़ी के साथ ही परमेश्वर के शब्द के कुछ स्तुतिगीत वीडियो जैसे कि कितना अहम है प्यार परमेश्वर का इंसान के लिये शामिल थे। मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के बहुत सारे वचनों को भी पढ़ा और भाइयों और बहनों को सच्चाई के सभी पहलुओं के बारे में सहभागिता करते हुए सुना। इससे मुझे यह सत्यापित करने में मदद मिली कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर वास्तव में लौटा हुआ प्रभु यीशु है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक सच्चा परमेश्वर है और वह वो लौटा हुआ परमेश्वर है जिसका हम इंतजार करते रहे हैं! मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार करके बहुत खुश था।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने के बाद से मैं अक्सर भाइयों और बहनों के साथ मिलते रहा हूँ, या उनके साथ उपदेशों को सुनता रहा हूँ, और मैं अब हर दिन खुश रहता हूँ और यह महसूस करता हूँ कि मैं आध्यात्मिक पोषण प्राप्त कर रहा हूँ। पवित्र आत्मा के कार्य से मिलने वाले विश्राम का मैं आनंद ले रहा हूँ, और मैं अधिक से अधिक सच्चाइयों को समझना शुरू कर रहा हूँ। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया में, सभी भाई-बहन एक-दूसरे के साथ परिचित और ईमानदार हैं, और कोई भी किसी और को धोखा देने की, या अपनी सतर्कता को बनाए रखने की, कोशिश नहीं करता है। हर कोई सरल, खुले दिल का और निष्कपट है, और जब वे अपने भ्रष्ट स्वभाव को प्रकट करते भी हैं, तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के वचनों के माध्यम से खुद को जानने में सक्षम होता है और अपने भ्रष्ट स्वभाव को हल करने के लिए सच्चाइयों की तलाश करता है। मेरे लिए, वे सच्चे ईसाई भाई और बहनें हैं। जो विशेष रूप से मुझे प्रभावित करते हैं वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया द्वारा उत्पादित स्तुतिगीत वीडियो, संगीत वीडियो, नृत्य और गीत वीडियो, सुसमाचार फिल्में इत्यादि हैं, जो सभी सत्य को सर्वोच्च सम्मान देते हैं और अंत के दिनों के परमेश्वर की, और परमेश्वर के कार्य की, गवाही देते हैं। इन सभी प्रस्तुतियों का उद्देश्य लोगों को परमेश्वर के प्रति समर्पण करने और परमेश्वर की आराधना करने में मदद करना है, और कलीसिया वास्तव में एक ऐसे स्थान की तरह महसूस होती है जहाँ परमेश्वर अपना कार्य करता हो! मैंने जो देखा, सुना और अनुभव किया है वह मेरे दिल के लिए इसका सबूत है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक सच्ची कलीसिया है जहाँ स्वयं परमेश्वर व्यक्तिगत रूप अपने झुंड का पोषण करता है, और उसकी चरवाही करता है। इस तथ्य का, कि मैं परमेश्वर के घर में प्रवेश करने और परमेश्वर के साथ उसके आमने-सामने एक जीवन जीने में सक्षम रहा हूँ, मतलब यह होता है कि मैं परमेश्वर द्वारा असाधारण रूप से ऊँचा उठाया गया हूँ। मैं वास्तव में बहुत भाग्यशाली हूँ! तुम्हारा धन्यवाद, हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर!

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