क्या प्रभु सच में बादल पर आता है?

26 दिसम्बर, 2021

हम देख रहे हैं कि एक-एक करके आपदा आ रही है, महामारियाँ दुनिया भर में फैल रही हैं। सभी विश्वासी तत्परता से इंतजार कर रहे हैं कि प्रभु बादल पर आए और उन्हें स्वर्ग के राज्य में ले जाने, और इस अंधेरी दुनिया और आपदाओं से बचाने के लिए अपने साथ आसमान में ले जाए। वे निरंतर आसमान की ओर देखते और प्रार्थना करते हैं, इंतजार करते हैं कि प्रभु को बादल पर आते देखें, इस डर से नजर हटाने की हिम्मत नहीं करते कि प्रभु आ जाएगा और वे आपदाओं में फेंक दिए जाएंगे। लेकिन उन्हें यह देखकर बड़ी निराशा हुई है कि आपदाएं आ चुकी हैं पर वे अब तक आसमान से उतरते प्रभु यीशु का स्वागत नहीं कर पाए हैं। बहुत-से लोग सोच रहे हैं कि प्रभु यीशु आएगा भी या नहीं। कुछ लोग असहज महसूस कर रहे हैं, उन्हें लगता है कि शायद प्रभु ने उन्हें आपदाओं में फेंक दिया है। लाचार महसूस करते हुए, कई पादरी अपनी कहानी बदल रहे हैं, वे कहते हैं कि प्रभु आपदाओं के बीच में या उसके बाद आएगा। कुछ तो ये तक कहने की हिम्मत करते हैं कि प्रभु साल 2028 या 2030 में आएगा। धर्मग्रंथों की इस व्याख्या से विश्वासी आपदाओं में पड़ सकते हैं, पर उन्हें यही भरोसा रहेगा कि सब कुछ ठीक है। उन्होंने चाहे कितने साल से आस्था रखी हो या कितनी ही कड़ी मेहनत की हो पर वे प्रभु का स्वागत नहीं कर पाए हैं। हम समझ सकते हैं यह कितना कठिन होगा। आस्था रखने वाले सभी जानते हैं कि बाइबल में क्या लिखा है, और आपदा में पड़ना, रोना और दांत पीसना शर्म का चिह्न है, जबकि आस्था में सफलता या विफलता, आपदाओं से पहले प्रभु का स्वागत करने से तय होती है। फिर धार्मिक जगत के लोगों का प्रभु का स्वागत न करने और आपदा में पड़ने का कारण क्या है? क्या ये हो सकता है प्रभु बेईमान है इसलिए ही अब तक प्रकट नहीं हुआ है? बिल्कुल नहीं। धार्मिक जगत प्रभु का स्वागत नहीं कर पाया, इसका मतलब ये नहीं कि वह लौटा ही नहीं है। असल में, वह पहले ही देह बनकर मनुष्य के पुत्र के रूप लौट आया है और कार्य कर रहा है। सभी संप्रदायों के अनेक लोगों ने परमेश्वर की वाणी सुनी है और प्रभु का स्वागत किया है। पर धर्म से जुड़े लोग अब तक उसके बादल पर आने के विचार से चिपके हुए हैं, उन्होंने अब तक प्रभु का स्वागत नहीं किया है। 1991 में, चमकती पूर्वी बिजली ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य की गवाही देनी शुरू की थी। उन्होंने पूरे 3 दशकों तक यह गवाही दी है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने लाखों वचन व्यक्त किए हैं और सभी संप्रदायों के सत्य से प्रेम करने वाले लोगों ने उसके वचन पढ़कर पहचान लिया है कि वे पूरे सत्य हैं, परमेश्वर की वाणी हैं, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने आकर प्रभु का स्वागत कर रहे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए सत्य बहुत समय से ऑनलाइन उपलब्ध हैं, महान प्रकाश की तरह पूरब से पश्चिम तक चमकते हुए, पूरे विश्व को रोशन कर रहे हैं, यह पूरी तरह प्रभु यीशु के वचनों को पूरा करता है : "क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है, जबकि धार्मिक जगत की मसीह विरोधी ताकतें चमकती पूर्वी बिजली की आलोचना, निंदा और विरोध कर रही हैं, वे परमेश्वर के प्रकटन और कार्य की जांच तक नहीं करतीं। उनका बस एक आधार है, जो प्रभु यीशु बादल पर नहीं आता वह झूठा है, और देहधारी होकर आने वाला प्रभु झूठा मसीह है। हम सभी देख सकते हैं कि धार्मिक जगत ने प्रभु का स्वागत नहीं किया बल्कि सिर्फ इसलिए आपदा में पड़ गया क्योंकि उसने प्रभु यीशु की भविष्यवाणियों के अनुसार उसका स्वागत नहीं किया, बल्कि अपनी धारणाओं के अनुसार चलते हुए मनमर्जी से यह तय कर लिया कि प्रभु बादल पर वापस आएगा। वे तरस रहे हैं कि प्रभु आकर उन्हें सीधे स्वर्गिक राज्य में ले जाए पर वे प्रभु के वचनों का अभ्यास नहीं करते। प्रभु का स्वागत करने जैसे महत्वपूर्ण मामले में इतनी गंभीर भूल करने का मतलब स्वर्गारोहित होने का मौका गंवाना है, वे सभी आपदाओं में जा पड़ेंगे, रोएंगे और दांत पीसेंगे। यह परमेश्वर के वचन साकार करता है : "मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नष्‍ट हो गई" (होशे 4:6)।

यह जानने के लिए कि प्रभु यीशु बादल पर आता है या देहधारी मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होकर कार्य करता है, हमें पहले गहरी सांस लेते हुए दूसरे आगमन के बारे में प्रभु यीशु की भविष्यवाणियों पर गंभीर चिंतन करना होगा, ऐसा करने पर हमें बहुत प्रबुद्धता मिल सकती है। आइए कुछ पद देखें। "क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)। "क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ" (लूका 17:24-25)। "इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा" (मत्ती 24:44)। "जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा" (मत्ती 24:37)। "आधी रात को धूम मची : 'देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो" (मत्ती 25:6)। "यदि तू जागृत न रहेगा तो मैं चोर के समान आ जाऊँगा, और तू कदापि न जान सकेगा कि मैं किस घड़ी तुझ पर आ पड़ूँगा" (प्रकाशितवाक्य 3:3)। "देख, मैं चोर के समान आता हूँ" (प्रकाशितवाक्य 16:15)। "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। अगर हम गंभीरता से इन पर सोचें, तो यह देखना आसान है कि प्रभु अपनी वापसी की भविष्यवाणियों में हमेशा "मनुष्य के पुत्र" का उल्लेख करता है, "मनुष्य के पुत्र का भी आना," "मनुष्य का पुत्र आ जाएगा," "मनुष्य का पुत्र अपने दिन में प्रगट होगा," "जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा।" "मनुष्य के पुत्र का भी आना" ऐसा प्रभु यीशु ने कई बार कहा है, जो कि अंत के दिनों में प्रभु के स्वागत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। तो "मनुष्य का पुत्र" किसके संदर्भ में है? निस्संदेह यह मनुष्य के पुत्र के देह का चोला ओढ़े परमेश्वर के आत्मा के संदर्भ में है। यह सिर्फ परमेश्वर के देहधारण के बारे में हो सकता है। प्रभु ने कई बार यह भी कहा कि वह "चोर के समान" आएगा। "चोर के समान" का क्या अर्थ है? इसका मतलब है प्रभु चुपचाप से, गुप्त रूप से आता है—जब लोगों को पता नहीं होता, परमेश्वर मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारी होकर गुप्त रूप से बोलने और कार्य करने आता है। हम निश्चित हो सकते हैं कि अंत के दिनों में प्रभु की वापसी मनुष्य के पुत्र के रूप में होती है, और यह आपदाओं से पहले होता है, अर्थात, तब जब दुनिया में सबसे अधिक अंधेरा होता है। "आधी रात को धूम मची : 'देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो'" (मत्ती 25:6)। चमकती पूर्वी बिजली 1991 से अब 2021 तक सर्वशक्तिमान परमेश्वर की गवाही दे रही है, इन 30 सालों में उन्होंने सीसीपी का पागलपन भरा दमन, गिरफ्तारी और हानि झेली है। सीसीपी ने राष्ट्रव्यापी प्रचार माध्यमों से, चमकती पूर्वी बिजली जिस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की गवाही देती है, उसे दुनिया भर में फैला दिया है, जिससे ये नाम घर-घर में पहचाना जाने लगा है। ये प्रभु यीशु की भविष्यवाणी पूरी करता है : "क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ" (लूका 17:24-25)। चमकती पूर्वी बिजली द्वारा वर्षों सर्वशक्तिमान परमेश्वर की गवाही दिए जाने के बाद, सभी संप्रदायों के सत्य से प्रेम करने वाले लोगों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़कर पहचान लिया कि वे सत्य हैं, पवित्र आत्मा द्वारा कलीसियाओं को बोले गए वचन हैं। उन्होंने परमेश्वर की वाणी सुनकर सहर्ष सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार लिया। वे बुद्धिमान कुंवारियाँ हैं जिन्हें परमेश्वर के सिंहासन के सामने उठाया गया है और वे प्रभु के भोज में शामिल हो रहे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आलोचना और निंदा करने वाले अनेक लोगों ने बाद में उसके वचन पढ़े और अंत में परमेश्वर की वाणी सुनकर उसके सामने आए। सर्वशक्तिमान परमेश्वर का विरोध और निंदा करने के लिए वे पश्चात्ताप से भर जाते हैं। मेमने के विवाह भोज में शामिल हो रही ये बुद्धिमान कुंवारियाँ गवाही दे रही हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों में मनुष्य के पुत्र का प्रकटन और अवतरण है। पर जो धर्मग्रंथों के शब्दों से चिपके रहते हैं और बादल पर आने वाले प्रभु के अलावा किसी और को स्वीकार नहीं करते, वे मूर्ख कुंवारियाँ हैं, जो आपदाओं में पड़ रहे हैं। वे सिर्फ बड़ी आपदाओं के बाद प्रभु यीशु को बादल पर आते देखने की प्रतीक्षा ही कर सकते हैं। इन लोगों के प्रभु का स्वागत न करने का मुख्य कारण है कि वे खुद प्रभु यीशु द्वारा की गई भविष्यवाणियों के बजाय बाइबल में इंसानों द्वारा की गई भविष्यवाणियों पर विश्वास करते हैं। वे सिर्फ बादल पर आने वाले प्रभु को स्वीकारेंगे, पर मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होकर कार्य कर रहे देहधारी परमेश्वर को ठुकराते हैं। वे बहुत ही गुमराह और मूर्ख हैं! अपनी वापसी की बात करते हुए प्रभु ने कई बार "मनुष्य के पुत्र" का उल्लेख किया है, लेकिन इतने सारे "बुद्धिमान" और "ज्ञानी" पादरियों और बाइबल के ज्ञाताओं ने मनुष्य के पुत्र के विचार को बिगाड़ कर बहुत ही गंभीर भूल कर दी है। वे अपनी ही बुद्धिमानी के शिकार हो गए हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के इतने सत्य व्यक्त करने पर भी वे उसे मनुष्य के पुत्र के रूप देखने से मना करते हैं। क्या यह अंधा होना नहीं? अगर वह देहधारी परमेश्वर ना होता तो इतने सारे सत्य कैसे व्यक्त करता? वे अब तक इस विचार से चिपके हुए हैं कि वे बादल पर आते हुए प्रभु यीशु को ही स्वीकार सकते हैं, इसी कारण न केवल वे स्वर्गारोहित होने का मौका गंवा रहे हैं, बल्कि आपदाओं में भी पड़ रहे हैं। इसका उन्हें हमेशा पछतावा रहेगा।

हम देख सकते हैं कि प्रभु देहधारी मनुष्य के पुत्र के रूप में काम करने वापस आया है। यह तथ्य निर्विवाद है जिसे कोई नकार नहीं सकता। बहुत से लोग प्रकाशितवाक्य 1:7 में "देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है" के बारे में पूछते हैं, उन्हें लगता है इसका मतलब है कि प्रभु बादल पर आएगा। क्या बादलों के साथ आने की बात और मनुष्य के पुत्र के रूप आने की बात विरोधाभासी नहीं है? ऐसा लग सकता है, लेकिन वास्तव में यहां कोई विरोधाभास नहीं है। यह इंसानी समझ के लिए सिर्फ एक चुनौती है। बाइबल की सभी भविष्यवाणियां निश्चित रूप से पूरी होंगी, पर इसकी एक प्रक्रिया है, और इसके चरण हैं। मनुष्य के पुत्र के प्रकटन और प्रभु के बादल पर आने का भी एक क्रम है। प्रभु पहले देहधारी होकर गुप्त रूप से काम करने आता है, इसके बाद वह खुलकर बादल पर प्रकट होता है। यह दो चरणों में क्यों होता है? इस बीच क्या होता है? इसके भीतर रहस्य हैं। पहले देखते हैं प्रभु यीशु ने क्या भविष्यवाणी की थी। प्रभु यीशु ने कहा था, "मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)। "सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर : तेरा वचन सत्य है" (यूहन्ना 17:17)। "यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (यूहन्ना 12:47-48)। "पिता किसी का न्याय नहीं करता, परन्तु न्याय करने का सब काम पुत्र को सौंप दिया है। ... वरन् उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है" (यूहन्ना 5:22, 27)। और "क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" (1 पतरस 4:17)। प्रभु यीशु की भविष्यवाणी पूरी तरह साकार हो गई हैं। जब इंसान को आशा नहीं थी तब मनुष्य का पुत्र गुप्त रूप से आया और अंत के दिनों में न्याय-कार्य करते हुए उसने अनेक सत्य व्यक्त किए हैं। वह सत्य का आत्मा है जो परमेश्वर के चुने हुए लोगों को सभी सत्यों में ले जा रहा है और आपदाओं से पहले विजेताओं का एक समूह पूरा कर लिया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार दुनिया के हर देश में फैल गया है। यह दिखाता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने शैतान को हराकर सारी महिमा पा ली है। अब बड़ी आपदाएं आने लगी हैं, परमेश्वर ने विजेताओं का एक समूह बना लिया है और उसका महान कार्य पूरा हो रहा है। आपदाओं के बाद, परमेश्वर खुले तौर पर सभी लोगों और राष्ट्रों के सामने बादल पर प्रकट होगा। उस समय, मनुष्य के पुत्र के प्रकट होने और प्रभु के बादल पर आने की भविष्यवाणियां पूरी हो जाएंगी। जबसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट होकर परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय-कार्य करने लगा, तब से उसे स्वीकार करने वाले रोजाना परमेश्वर के वचन खा-पी रहे हैं, और उसके न्याय और शुद्धि को स्वीकार करके वे धीरे-धीरे पाप और शैतान की ताकतों से मुक्त हो रहे हैं। परमेश्वर ने उन्हें आपदाओं से पहले विजेता बना दिया है, और वे पहले फल हैं। यह प्रकाशितवाक्य की भविष्यवाणियों को पूरा करता है : "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। "ये तो परमेश्‍वर के निमित्त पहले फल होने के लिये मनुष्यों में से मोल लिए गए हैं" (प्रकाशितवाक्य 14:4)। अंत के दिनों में न्याय-कार्य करने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर को गुप्त रूप से आए तीन दशक हो गए हैं। उसने बहुत-से सत्य व्यक्त किए हैं, बाइबल और परमेश्वर के 6000 वर्षीय प्रबंधन योजना के सभी रहस्य उजागर किए हैं। इंसान के भ्रष्ट सार का न्याय कर उसे उजागर करने के लिए उसने बहुत कुछ कहा है, ये सभी वचन सत्य का मार्ग हैं जिससे हम पाप और शैतान की ताकतों को छोड़कर पूरी तरह बचाए जाने में समर्थ होते हैं। परमेश्वर के चुने हुए लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा न्याय और ताड़ना पाते हैं, वो उनकी परीक्षा लेता, काट छांट, निपटान और शोधन करता है, फिर वे स्पष्ट रूप से अपनी भ्रष्टता देख पाते हैं, शर्मिंदा महसूस करते हैं, पश्चात्ताप से भरकर परमेश्वर के सामने झुक जाते हैं, और खुद से नफरत और घृणा करते हैं। वे देखते हैं कि परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव कोई अपमान नहीं सहेगा और उनमें उसके लिए गहरी श्रद्धा जगती है, धीरे-धीरे परमेश्वर का भय मानते और बुराई से दूर रहते हुए सच में पश्चात्ताप करके बदल जाते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने विजेताओं का एक समूह पूरा कर लिया है, पहले फल पा लिए हैं। इन विजेताओं की गवाहियों पर वीडियो और फिल्में बनाई गई हैं जो ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जो भी उन्हें देखता है वह पूरी तरह आश्वस्त हो जाता है। ये और स्पष्ट नहीं हो सकता कि यही अंत के दिनों में परमेश्वर का प्रकटन और कार्य है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने बहुत-से सत्य व्यक्त किए हैं और बहुत महान काम किया है, उसने सिर्फ सारी दुनिया को ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्मांड को हिला दिया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने पूरी दुनिया बदल दी है, पिछले युग का अंत करके नया युग शुरु किया है। राज्य के युग की शुरुआत हो गई है। इससे सिद्ध होता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर मनुष्य के पुत्र का प्रकटन है, लौटकर आया प्रभु यीशु है। हमारा उद्धारकर्ता प्रकट होकर कार्य कर रहा है! परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय-कार्य लगभग पूरा हो गया है और उसके साथ ही बड़ी आपदाएं टूट पड़ी हैं। हम कह सकते हैं कि आपदाएं आने लगी हैं और वे बढ़ती ही जाएंगी। परमेश्वर का विरोध करने वाली सभी दुष्ट ताकतें और कुकर्मी दंडित किए जाएंगे और आपदाओं में नष्ट हो जाएंगे जबकि अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय और ताड़ना से शुद्ध होने वाले आपदाओं के दौरान परमेश्वर द्वारा सुरक्षित रखे जाएंगे। जब आपदाएं खत्म होंगी, तब शैतान का यह दुष्ट संसार तबाह कर दिया जाएगा, फिर परमेश्वर बादलों पर सभी के सामने खुले तौर पर प्रकट होगा। इससे प्रकाशितवाक्य 1:7 की भविष्यवाणी पूरी होगी : "देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है, और हर एक आँख उसे देखेगी, वरन् जिन्होंने उसे बेधा था वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे।" ऐसा क्यों है कि सभी कुल छाती पीटेंगे? क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर बहुत-से सत्य व्यक्त किए हैं और बहुत महान कार्य किया है, पर उन्होंने ना सिर्फ उसे जांचने से इंकार कर दिया, बल्कि धार्मिक जगत की मसीह विरोधी ताकतों के साथ उसकी निंदा, आलोचना और तिरस्कार किया। उन्होंने परमेश्वर के स्वभाव का अपमान किया है और आपदाओं में पड़ गए हैं। अंत में वे सिर्फ अपनी छाती पीटेंगे, रोएंगे और अपने दांत पीसेंगे, जो कि प्रकाशितवाक्य की इस दुखद भविष्यवाणी, "पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे।" को पूरा करेगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय और ताड़ना को स्वीकार कर शुद्ध और पूर्ण किए जा चुके लोग परमेश्वर को खुले तौर पर आते हुए देखेंगे और हद से ज़्यादा खुश होकर नाच उठेंगे, परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता, बुद्धि और धार्मिकता की स्तुति करेंगे। जैसा सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : "मेरी दया उन पर होती है जो मुझसे प्रेम करते हैं और स्वयं को नकारते हैं। दुष्टों को मिला दण्ड निश्चित रूप से मेरे धार्मिक स्वभाव का प्रमाण है, और उससे भी बढ़कर, मेरे क्रोध का प्रमाण है। जब आपदा आएगी, तो उन सभी पर अकाल और महामारी आ पड़ेगी जो मेरा विरोध करते हैं और वे विलाप करेंगे। जो लोग सभी तरह के दुष्टतापूर्ण कर्म कर चुके हैं, किन्तु कई वर्षों तक मेरा अनुसरण किया है, वे अपने पापों का फल भुगतने से नहीं बचेंगे; वे भी लाखों वर्षों में शायद ही देखी गयी आपदा में डुबा दिये जाएँगे, और वे लगातार आंतक और भय की स्थिति में जीते रहेंगे। और केवल मेरे ऐसे अनुयायी जिन्होंने मेरे प्रति निष्ठा दर्शायी है, मेरी शक्ति का आनंद लेंगे और गुणगान करेंगे। वे अवर्णनीय तृप्ति का अनुभव करेंगे और ऐसे आनंद में रहेंगे जो मैंने मानवजाति को पहले कभी प्रदान नहीं किया है। क्योंकि मैं मनुष्यों के अच्छे कर्मों को सँजोकर रखता हूँ और उनके बुरे कर्मों से घृणा करता हूँ। जबसे मैंने सबसे पहले मानवजाति की अगुवाई करनी आरंभ की, तबसे मैं उत्सुकतापूर्वक मनुष्यों के ऐसे समूह को पाने की आशा करता रहा हूँ जो मेरे साथ एक मन वाले हों। इस बीच मैं उन लोगों को कभी नहीं भूलता हूँ जो मेरे साथ एक मन वाले नहीं हैं; अपने हृदय में मैं हमेशा उनसे घृणा करता हूँ, उन्हें प्रतिफल देने के अवसर की प्रतीक्षा करता हूँ, जिसे देखना मुझे आनंद देगा। अंततः आज मेरा दिन आ गया है, और मुझे अब और प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है!" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो')।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में अपने न्याय कार्य के लिए सत्य व्यक्त करता है ताकि इंसान को शुद्ध करके पूरी तरह बचाए। इंसान के पास बचाए जाने और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने का ये इकलौता अवसर है, ऐसा मौका जिंदगी में बस एक बार मिलता है। बड़ी आपदाओं की शुरुआत हो रही है। जो लोग जागकर बिना देरी किए सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य की जांच करेंगे, उन्हें देर नहीं होगी क्योंकि वह कहता है, "जब मैं बहुत-से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीते जाने के उपरांत, भिन्न-भिन्न अंशों में, मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 26')। से उद्धृत हम देख सकते हैं कि कुछ लोग परमेश्वर की वाणी सुनकर, उसके कर्म देखकर, उसके सामने आएंगे और आपदाओं के बीच उसका उद्धार पाएंगे। यही आपदाओं में स्वर्गारोहित होना है और यह उनका आखिरी मौका है, साथ ही परमेश्वर द्वारा इंसान पर की गई बड़ी कृपा है। बुद्धिमान लोगों को पता है कि क्या चुनना है। जो लोग मनमाने ढंग से बादलों पर प्रभु के आने का इंतजार करते हैं उनका अंत क्या होगा ये स्वत: स्पष्ट है। आइए अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का एक अंतिम अंश देखें। "बहुत से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु मैं ऐसे हर तथाकथित संत को, जो यीशु का अनुसरण करते हैं, बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे, तो यह धार्मिकता के सूर्य का सार्वजनिक प्रकटन होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा, मगर तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे, यही वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे। वह परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति का समय होगा, और वह समय होगा, जब परमेश्वर सज्जन को पुरस्कार और दुष्ट को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय मनुष्य के देखने से पहले ही समाप्त हो चुका होगा, जब सिर्फ़ सत्य की अभिव्यक्ति होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और संकेतों की खोज नहीं करते और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ़ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि 'ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है' अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ़ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेत प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को स्वीकार नहीं करते, जो कड़े न्याय की घोषणा करता है और जीवन और सच्चा मार्ग प्रकट करता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे, तो वह उनके साथ निपटे। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अभिमानी हैं। ऐसे अधम लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं? यीशु की वापसी उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है, जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, पर उनके लिए जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं, यह दंडाज्ञा का संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के ख़िलाफ़ निंदा नहीं करनी चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए, जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का पालन करता हो और सत्य की खोज के लिए लालायित हो; सिर्फ़ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा')।

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