क्या तुम सच में बाइबल से चिपके रहकर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हो?

29 मार्च, 2026

बहुत से विश्वासी 2 तीमुथियुस में पौलुस के शब्दों को पढ़ते हैं : “सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है” (2 तीमुथियुस 3:16) और वे यह निष्कर्ष निकालते हैं कि बाइबल के सभी शब्द परमेश्वर की प्रेरणा हैं और उसी से आते हैं। वे मानते हैं कि बाइबल में कोई भी शब्द, चाहे किसी ने भी कहा हो, परमेश्वर के वचन हैं। वे यहाँ तक सोचते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है और केवल बाइबल को थामे रहने से, वे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं। लेकिन क्या यह समझ सही है?

यह कथन, “सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है,” पौलुस द्वारा कहा गया था। जब उसने यह कहा, तब नया नियम अस्तित्व में नहीं था, क्योंकि मसीह के 300 साल से अधिक बाद तक इसके लेखन को एक किताब में संकलित नहीं किया गया था। तो, पौलुस स्पष्ट रूप से पुराने नियम का उल्लेख कर रहा था। अब सवाल यह है, क्या पौलुस का कथन वास्तव में सटीक था? हम पक्के तौर पर नहीं जानते, लेकिन हमने कभी प्रभु यीशु को ऐसा कहते नहीं देखा, न ही हमने पवित्र आत्मा को यह कहते देखा और निश्चित रूप से हमने किसी नबी को यह संदेश देते नहीं देखा। हम सभी जानते हैं कि नए नियम में कई अलग-अलग लोगों के शब्द हैं, जिनमें प्रेरितों, फरीसियों और यहूदा के शब्द शामिल हैं और इसमें शैतान के शब्द भी हैं। जाहिर है, उनके शब्द परमेश्वर द्वारा प्रेरित नहीं थे। चाहे पौलुस का यह कथन सही हो या नहीं, एक बात निश्चित है : यदि लोग जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं केवल बाइबल को थामे रहते हैं और इसे ऐसे मानते हैं जैसे कि यह परमेश्वर हो, तो वे बिल्कुल गलत हैं। प्रभु यीशु ने एक बार कहा था : “तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते(यूहन्ना 5:39-40)। प्रभु के वचन बहुत स्पष्ट हैं : बाइबल केवल परमेश्वर के पिछले कार्य का अभिलेख और उसकी गवाही है। स्वयं बाइबल में अनन्त जीवन नहीं है। केवल परमेश्वर के पास अनन्त जीवन का मार्ग है; केवल परमेश्वर ही सत्य, मार्ग और जीवन है। परमेश्वर सृष्टिकर्ता है और सभी चीजों के लिए जीवन का स्रोत है। वह स्वर्ग, पृथ्वी और सभी चीजों पर संप्रभुता रखता है और मानवता के लिए उसकी जीवन की आपूर्ति अनन्त और अक्षय है। लेकिन, बाइबल केवल एक ऐतिहासिक पुस्तक है जो परमेश्वर के पिछले कार्य को दर्ज करती है। इसे संभवतः परमेश्वर के बराबर कैसे माना जा सकता है? इस कारण से, स्वयं परमेश्वर के संबंध में बाइबल में पाए जाने वाले परमेश्वर के कुछ वचन समुद्र में केवल एक बूंद के बराबर हैं। यह दावा करना कि कोई व्यक्ति केवल बाइबल को थामे रहने से स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है, बस एक कोरी कल्पना है। परमेश्वर मानवजाति के अपने प्रबंधन में कार्य के तीन चरणों को पूरा करता है और वह अधिक से अधिक वचन बोल रहा है। यह विशेष रूप से अंत के दिनों में न्याय के कार्य के बारे में सच है, जिसके दौरान सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने प्रचुर मात्रा में सत्य व्यक्त किए हैं। “वचन देह में प्रकट होता है” में दर्ज वचन पहले से ही सात खंडों में समाहित हैं—बाइबल के वचनों से कई गुना अधिक। यह प्रभु यीशु के वचनों को पूरी तरह से पूरा करता है : “मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा(यूहन्ना 16:12-13)। “वो जो मुझे नकार देता है, और मेरे वचन नहीं स्वीकारता, उसका भी न्याय करने वाला कोई है : मैंने जो वचन बोले हैं वे ही अंत के दिन उसका न्याय करेंगे(यूहन्ना 12:48)। प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भी भविष्यवाणियाँ हैं : “जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है(प्रकाशितवाक्य 2:7)। ये भविष्यवाणियाँ बिल्कुल स्पष्ट हैं : जब प्रभु अंत के दिनों में लौटेगा, तो वह कलीसियाओं से फिर से बोलेगा, मानवजाति का न्याय करने के लिए सभी सत्य व्यक्त करेगा। यानी, वह लोगों का न्याय करने और उन्हें शुद्ध करने के लिए सत्य का उपयोग करेगा, उन्हें शैतान की भ्रष्टता से बचाएगा और उन्हें पाप के बंधन से मुक्त करेगा। यह कार्य का एक अभूतपूर्व चरण है और यह परमेश्वर के उद्धार के कार्य में अंतिम चरण है। इससे, हम देख सकते हैं कि परमेश्वर ने कभी भी बाइबल के अनुसार नहीं बोला है। परमेश्वर के पास मानवता से कहने के लिए बहुत कुछ है; बाइबल में परमेश्वर के वचन समुद्र में केवल एक बूंद हैं। अंत के दिनों में, परमेश्वर उच्चतर सत्य और अधिक संख्या में सत्य व्यक्त करता है। विशेष रूप से, जो वचन लोगों का न्याय करते हैं, उन्हें शुद्ध करते हैं और पूर्ण बनाते हैं, वे सभी अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा उसके न्याय के कार्य के दौरान व्यक्त किए जाते हैं। यदि ये वचन अनुग्रह के युग के दौरान व्यक्त किए गए होते, तो लोग उन्हें सहन नहीं कर पाते या उनके लिए तैयार नहीं होते। इसलिए, लोगों का यह सोचना कि वे केवल बाइबल को थामे रहने से बचाए जा सकते हैं और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं, पूरी तरह कोरी कल्पना है। लोग कल्पना करते हैं कि स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना वास्तव में उससे कहीं अधिक सरल है। वे गंदगी और भ्रष्टता से भरे हुए हैं, पाप में जी रहे हैं और मुक्त होने में असमर्थ हैं। उन्हें परमेश्वर के कार्य का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है, परमेश्वर के स्वभाव की तो बात ही छोड़िए। प्रभु में कई वर्षों तक विश्वास करने के बाद भी, वे अभी भी अक्सर पाप करते हैं और परमेश्वर का विरोध करते हैं। उनमें परमेश्वर का कोई भय या उसके प्रति समर्पण नहीं है, फिर भी वे केवल बाइबल और प्रभु यीशु के नाम को थामे रहकर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने की उम्मीद करते हैं। क्या यह मजाक नहीं है? आज, प्रभु यीशु बहुत पहले लौट आया है। वह प्रकट हो चुका है और अपना कार्य करने के लिए सत्य व्यक्त कर रहा है। सभी बुद्धिमान कुंवारियाँ जिन्होंने परमेश्वर की वाणी सुनी है, उसके सिंहासन के सामने उठा ली गई हैं। वे सभी स्वीकार करती हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सत्य हैं और पवित्र आत्मा के कथन हैं। वे स्वर्ग के राज्य के भोज में शामिल हुई हैं और उन्होंने परमेश्वर के लिए सुंदर और जोरदार गवाही दी है। वे हर दिन परमेश्वर के वचनों को खाती और पीती हैं, उसकी स्तुति करती हैं और अपार आनंद महसूस करती हैं। यह एक तथ्य है जिसे हर कोई देख सकता है। जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “अंत के दिनों का मसीह जीवन लाता है, और सत्य का स्थायी और शाश्वत मार्ग लाता है। यह सत्य वह मार्ग है, जिसके द्वारा मनुष्य जीवन प्राप्त करता है, और यही एकमात्र मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर द्वारा स्वीकृत किया जाएगा। यदि तुम अंत के दिनों के मसीह द्वारा प्रदान किया गया जीवन का मार्ग नहीं खोजते, तो तुम यीशु की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं करोगे, और स्वर्ग के राज्य के द्वार में प्रवेश करने के योग्य कभी नहीं हो पाओगे, क्योंकि तुम इतिहास की कठपुतली और कैदी दोनों ही हो। जो लोग विनियमों से, शब्दों से और इतिहास की बेड़ियों से नियंत्रित होते हैं, वे न तो कभी जीवन प्राप्त कर पाएँगे और न ही जीवन का अनंत मार्ग प्राप्त कर पाएँगे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उनके पास सिंहासन से प्रवाहित होने वाले जीवन के जल के बजाय बस मैला पानी ही है, जिससे वे हजारों सालों से चिपके हुए हैं। जिन्हें जीवन के जल की आपूर्ति नहीं की जाती, वे हमेशा मुर्दे, शैतान के खिलौने और नरक की संतानें बने रहेंगे। फिर वे कैसे परमेश्वर के दर्शन कर सकते हैं? तुम केवल अतीत को पकड़े रखने की खोज में रहते हो, स्थिर खड़े रहने और चीजों को वैसे ही रखने की कोशिश करते हो और यथास्थिति को बदलने और इतिहास को छोड़ने की खोज में नहीं रहते, इसलिए क्या तुम हमेशा परमेश्वर के विरोधी नहीं होगे? परमेश्वर के कार्य के कदम उमड़ती लहरों और घुमड़ते गर्जनों की तरह जबरदस्त और शक्तिशाली हैं—फिर भी तुम निष्क्रियता से बैठकर तबाही का इंतजार करते हो, उससे चिपके रहते हो जो पुराना है और चीजों के अपनी गोद में आ गिरने की प्रतीक्षा करते हो। इस तरह, तुम्हें मेमने के पदचिह्नों का अनुसरण करने वाला व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? यह कैसे दिखा सकता है कि तुम जिस परमेश्वर को थामे हो, वह वही परमेश्वर है जो हमेशा नया है और कभी पुराना नहीं होता? और तुम्हारी पीली पड़ चुकी किताबों के शब्द तुम्हें पार कराकर नए युग में कैसे ले जा सकते हैं? वे परमेश्वर के कार्य के कदमों को ढूँढ़ने में तुम्हारी अगुआई कैसे कर सकते हैं? और वे तुम्हें ऊपर स्वर्ग में कैसे ले जा सकते हैं? जिन्हें तुम अपने हाथों में थामे हो, वे केवल शब्द हैं, जो तुम्हें केवल अस्थायी सांत्वना दे सकते हैं, तुम्हें जीवन देने में सक्षम सत्य नहीं दे सकते। धर्मशास्त्र के शब्द जिन्हें तुम पढ़ते हो, वे केवल तुम्हारी जिह्वा को समृद्ध कर सकते हैं; वे बुद्धिमानी के शब्द नहीं हैं जो मानव जीवन को जानने में तुम्हारी मदद कर सकते हों, उनके तुम्हें पूर्णता की ओर ले जाने वाला मार्ग होने की बात तो दूर रही। क्या यह विसंगति तुम्हारे लिए चिंतन का कारण नहीं है? क्या यह तुम्हें इसके भीतर समाहित रहस्यों के बारे में अंतर्दृष्टि नहीं देती है? क्या तुम अपने बल पर परमेश्वर से मिलने के लिए अपने आप को स्वर्ग भिजवाने में समर्थ हो? परमेश्वर के आए बिना, क्या तुम परमेश्वर के साथ पारिवारिक आनंद मनाने के लिए अपने आप को स्वर्ग में ले जा सकते हो? क्या तुम अभी भी स्वप्न देख रहे हो? तो मेरा उपदेश यह है कि तुम स्वप्न देखना बंद कर दो और उसकी ओर देखो जो अभी कार्य कर रहा है—देखो कि अब अंत के दिनों में मनुष्य को बचाने का कार्य कौन कर रहा है। यदि तुम ऐसा नहीं करते, तो तुम कभी भी सत्य प्राप्त नहीं करोगे, और न ही कभी जीवन प्राप्त करोगे(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है)

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