देहधारण क्या होता है?
हम सब जानते हैं कि दो हजार साल पहले, परमेश्वर ने इंसान को छुटकारा दिलाने के लिए प्रभु यीशु के रूप में देहधारण किया, और उपदेश दिया, “मन...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
प्रभु में विश्वासियों के लिए सबसे बड़ी आशा उसकी वापसी का स्वागत करना और स्वर्ग के राज्य में उठा लिया जाना है। अब जबकि महा विनाश शुरू हो चुके हैं, प्रभु का स्वागत करना अत्यंत तात्कालिकता का मामला है। धार्मिक दुनिया, बाइबल के शब्दों के आधार पर, “हे गलीली पुरुषो, तुम क्यों खड़े आकाश की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा” (प्रेरितों 1:11), मानती है कि चूंकि प्रभु यीशु अपने पुनरुत्थान के बाद एक बादल पर आत्मिक शरीर में स्वर्ग में चढ़ गया, तो वह भी एक आत्मिक शरीर में वापस आएगा, बादल पर उतरते हुए। वे सभी प्रभु यीशु के आत्मिक शरीर को स्वर्ग से एक बादल पर उतरते हुए देखने की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि उन्हें स्वर्ग के राज्य में ले जाया जा सके। लेकिन क्या वे वास्तव में इस तरह प्रभु का स्वागत करने में सफल होंगे? विश्वासी प्रभु में अपने विश्वास और उसके स्वागत को प्रभु यीशु के वचनों के बजाय स्वर्गदूतों के शब्दों पर आधारित क्यों करते हैं? आखिर, प्रभु कौन है और परमेश्वर कौन है? जब प्रभु की वापसी का स्वागत करने के अहम मामले की बात आती है, तो क्या हमें प्रभु के वचनों पर विश्वास करना चाहिए या स्वर्गदूतों के शब्दों पर? जो शब्द मैंने अभी उद्धृत किए वे स्पष्ट रूप से स्वर्गदूतों द्वारा बोले गए थे। उन्होंने केवल यह कहा कि प्रभु यीशु उसी तरह लौटेगा जैसे वह गया था, लेकिन उन्होंने और कुछ नहीं कहा। क्या हम इससे निश्चित हो सकते हैं कि प्रभु आत्मिक शरीर में लौटेगा? प्रभु यीशु ने कहा था : “उस दिन या उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न पुत्र; परन्तु केवल पिता” (मरकुस 13:32)। तो स्वर्गदूत कैसे जान सकते थे कि प्रभु कैसे लौटेगा? इसे देखते हुए, क्या स्वर्गदूतों की भविष्यवाणी सटीक हो सकती है? प्रभु यीशु ने कभी नहीं कहा कि वह लौटेगा और मनुष्य के सामने एक आत्मिक शरीर के रूप में प्रकट होगा। इसके बजाय, उसने बार-बार कहा कि वह “मनुष्य के पुत्र” और “दूल्हा” के रूप में आएगा। उदाहरण के लिए : “क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा” (मत्ती 24:27)। “क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दुःख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ” (लूका 17:24-25)। “आधी रात को धूम मची : ‘देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो’” (मत्ती 25:6)। प्रभु यीशु की भविष्यवाणियों के आधार पर, हम निश्चित हो सकते हैं कि जब प्रभु लौटेगा, तो वह मनुष्य के पुत्र के रूप में देह धारण करेगा, अपना कार्य करने के लिए प्रकट होगा और सत्य व्यक्त करेगा, लोगों के एक समूह को बचाने और उन्हें विजेता बनाने के लिए अंत के दिनों का न्याय का कार्य करेगा। वह दुनिया के सभी राष्ट्रों में राज्य का सुसमाचार फैलाएगा, ताकि पृथ्वी पर परमेश्वर का राज्य साकार हो सके। अपना कार्य करने के लिए देह में प्रकट होकर, परमेश्वर शैतान और सभी शत्रु शक्तियों को हराता है और पृथ्वी पर अपना राज्य स्थापित करता है। यह पूरी तरह से परमेश्वर की महान सामर्थ्य और बुद्धि को प्रकट करता है और इसी तरह परमेश्वर महिमा प्राप्त करता है।
हालाँकि, लोगों को परमेश्वर के कार्य की बिल्कुल भी समझ नहीं है। केवल अपनी धारणाओं और कल्पनाओं पर भरोसा करते हुए, वे प्रभु यीशु की वापसी के तरीके को सीमित कर देते हैं, यह सोचते हुए कि वह एक आत्मिक शरीर में आएगा। वे उसे तभी स्वीकार करेंगे जब वे उसके आत्मिक शरीर को बादल पर उतरते हुए देखेंगे। यह एक घातक गलती है। जब लोग उसके आत्मिक शरीर को आते हुए देखेंगे, तो उन्हें लगेगा कि उन्होंने प्रभु का स्वागत किया है, लेकिन वास्तव में उन्हें हाय का सामना करना पड़ेगा। यह ठीक वैसा ही है जैसे जब थोमा ने प्रभु के आत्मिक शरीर को अपने सामने प्रकट होते देखा; केवल तभी उसने विश्वास किया और कहा, “हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!” प्रभु यीशु ने उसे स्वीकृति नहीं दी, बल्कि यह कहा : “क्योंकि तूने मुझे देखा है, इसलिए तूने विश्वास किया है : धन्य वे हैं जिन्होंने बिना देखे मुझ पर विश्वास किया” (यूहन्ना 20:29)। अंत के दिनों में, प्रभु मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारी हुआ है, वह न्याय का कार्य करने के लिए सत्य व्यक्त कर रहा है। यदि आप इस पर विश्वास नहीं करते या इसे स्वीकार नहीं करते, बल्कि विश्वास करने के लिए प्रभु के आत्मिक शरीर को बादल पर उतरते हुए देखने की प्रतीक्षा करने पर जोर देते हैं, तो आप अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा बचाए जाने का अपना अवसर खो देंगे। जब प्रभु का आत्मिक शरीर उतरेगा, तो वह समय होगा जब परमेश्वर का न्याय का कार्य समाप्त हो चुका होगा और जब वह अच्छे को पुरस्कृत करेगा और बुरे को दंडित करेगा। वह प्रकाशितवाक्य की पुस्तक की इस भविष्यवाणी को पूरा करेगा : “देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है, और हर एक आँख उसे देखेगी, वरन् जिन्होंने उसे बेधा था वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे” (प्रकाशितवाक्य 1:7)। तब तक, बहुत देर हो चुकी होगी। वह समय होगा जब लोग विलाप करेंगे और अपने दाँत पीसेंगे और निराशा में अपनी छाती पीटेंगे। आइए एक अंश पढ़ें : “बहुत से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु मैं यीशु का अनुसरण करने वाले हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे तो यह धार्मिकता के सूर्य के सार्वजनिक प्रकटन का समय होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा। हालाँकि तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे तो यह वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे, वह समय होगा जब परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति की घोषणा हुई है और जब परमेश्वर अच्छे को पुरस्कार और बुरे को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय उस समय से पहले ही समाप्त हो चुका होगा जब मनुष्य संकेत देखता है, जब सिर्फ सत्य की अभिव्यक्ति होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और संकेत नहीं खोजते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लाए जा चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि ‘ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है’ अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेत प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को मान्यता नहीं देते जो कड़ा न्याय अभिव्यक्त करता है और जीवन और सच्चा मार्ग प्रदान करता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे तो वह उनके साथ निपटे” (वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा)। इस अंश से, हम देख सकते हैं कि हाय उन सभी का इंतजार कर रही है जो देह में प्रभु के प्रकटन और कार्य को स्वीकार करने के बजाय केवल प्रभु के बादल पर उतरने की प्रतीक्षा करते हैं।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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अब आपदाएँ अधिक से अधिक गंभीर होती जा रही हैं। बहुत-से विश्वासी उत्सुकता से प्रभु का स्वागत करने की आशा कर रहे हैं ताकि वे आपदाओं से बच सकें...