सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर कैसे करें

02 अप्रैल, 2026

प्रभु यीशु ने एक बार कहा था : “उस समय यदि कोई तुम से कहे, ‘देखो, मसीह यहाँ है!’ या ‘वहाँ है!’ तो विश्‍वास न करना। क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्ता उत्पन्न हो जाएंगे, और बड़े संकेत और आश्चर्यजनक कार्य दिखाएंगे; ताकि अगर संभव हो तो वे चुने हुए लोगों को ही गुमराह कर दें(मत्ती 24:23-24)। धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर अक्सर धर्मशास्त्र के इस अंश का इस्तेमाल यह तय करने के आधार के रूप में करते हैं कि परमेश्वर के लिए देह धारण करना और अंत के दिनों में प्रकट होकर कार्य करना असंभव है, वे यह तय करते हैं कि प्रभु के आगमन की गवाही देने वाला कोई भी दावा झूठा है। इसके कारण बहुत-से विश्वासी प्रभु का स्वागत करने के मामले में आँख मूँदकर झूठे मसीहों के खिलाफ सावधान रहने लगते हैं; वे परमेश्वर के प्रकटन और कार्य की सक्रिय रूप से खोज और जाँच-पड़ताल करने की हिम्मत नहीं करते। नतीजतन उनके लिए प्रभु का स्वागत करना असंभव हो जाता है। इसलिए प्रभु का स्वागत करने की कुंजी सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर करने में सक्षम होना है। तो तुम सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर कैसे करोगे? सबसे पहले हमें यह जानना चाहिए कि यह कथन, “अंत के दिनों में लोगों को गुमराह करने के लिए झूठे मसीह प्रकट होंगे,” स्वयं प्रभु यीशु ने कहा था। यह कथन सत्य है—यह एक तथ्य है। हम सभी ने कुछ देशों में लोगों को गुमराह करने के लिए झूठे मसीहों के प्रकट होने की घटनाएँ देखी हैं जिनसे यह साबित होता है कि प्रभु यीशु के वचन पूरे हो गए हैं। हालाँकि कुछ लोग प्रभु की वापसी को नकारते हैं क्योंकि अंत के दिनों में झूठे मसीह प्रकट होते हैं। वे क्या गलती कर रहे हैं? क्या यह गले में अटकने के डर से खाना छोड़ देने वाली बात नहीं हुई? क्या वे प्रभु यीशु की वापसी की भविष्यवाणियों को नकार नहीं रहे हैं? अगर लोग प्रभु में विश्वास करते हैं लेकिन प्रभु यीशु की भविष्यवाणियों को नकारने की हिम्मत करते हैं, तो क्या वे प्रभु का प्रतिरोध नहीं कर रहे हैं? ऐसे लोग प्रभु का स्वागत कैसे कर सकते हैं? तो फिर प्रभु यीशु ने अंत के दिनों में लोगों को झूठे मसीहों से सावधान रहने की चेतावनी क्यों दी? यह परमेश्वर का प्रेम है। परमेश्वर ने ऐसा हमारी रक्षा करने और हमें झूठे मसीहों द्वारा गुमराह होने और उनका अनुसरण करने से बचाने के लिए किया। अगर हम गुमराह हो जाते, तो हम परमेश्वर का उद्धार पाने में असमर्थ होते। इसलिए प्रभु यीशु ने अनुग्रह के युग में ही ये वचन कह दिए थे ताकि हम झूठे मसीहों से सावधान रह सकें। हम इसमें परमेश्वर के श्रमसाध्य इरादे देख सकते हैं। हालाँकि बहुत से लोगों को प्रभु यीशु के वचनों की शुद्ध समझ नहीं है। झूठे मसीहों से सावधान रहते हुए वे अंत के दिनों में प्रभु यीशु की वापसी को नकारते हैं। झूठे मसीहों से सावधान रहने के लिए वे सत्य व्यक्त करने के लिए परमेश्वर के देहधारी होने के तथ्य को नकारते हैं। क्या यह गले में अटकने के डर से खाना छोड़ देने वाली बात नहीं हुई? क्या ऐसे लोग मूर्ख कुंवारियाँ नहीं हैं? क्या ऐसा करना पूरी तरह से हास्यास्पद नहीं है? हमें झूठे मसीहों से सावधान रहने के लिए कहकर प्रभु यीशु हमें याद दिला रहा था कि हमें सतर्क और तैयार रहने की जरूरत है। अगर हम सतर्क और तैयार नहीं हैं और गलती से झूठे मसीहों द्वारा गुमराह हो जाते हैं, तो क्या हमारा सब कुछ खत्म नहीं हो जाएगा? हम न केवल प्रभु का स्वागत करने में नाकाम रहेंगे बल्कि अंततः हमें नरक में जाना होगा और सजा पानी होगी। अब जब हम जानते हैं कि झूठे मसीह पहले ही प्रकट हो चुके हैं, तो हमें प्रभु की वापसी का स्वागत करने के लिए कैसे सतर्क और तैयार रहना चाहिए? हमें सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर कैसे करना चाहिए? सबसे पहले हमें यह भेद पहचानना सीखना चाहिए कि आखिर सत्य क्या है और कौन सत्य व्यक्त कर सकता है। एक बार जब हम इसे स्पष्ट रूप से देख लेंगे, तो हमारे लिए सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर करना आसान हो जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि झूठे मसीहों और झूठे नबियों के पास सत्य नहीं होता और न ही विभिन्न बुरी आत्माओं के पास सत्य होता है। क्या जिनके पास सत्य नहीं है वे सत्य व्यक्त कर सकते हैं? वे निश्चित रूप से नहीं कर सकते। झूठे मसीह और झूठे नबी, ये सभी बुरी आत्माओं के वश में रहने वाले लोग हैं; वे शैतान की ओर से आते हैं, इसलिए उनके पास सत्य नहीं है और वे सत्य व्यक्त नहीं कर सकते। तो फिर झूठे मसीह लोगों को गुमराह करने के लिए किस पर निर्भर करते हैं? पहला, वे झूठी भविष्यवाणियाँ बोलने पर निर्भर करते हैं; दूसरा, वे पाखंड और भ्रांतियाँ फैलाने पर निर्भर करते हैं; तीसरा, वे बुरी आत्माओं के कार्य पर निर्भर करते हैं, झूठी भाषाओं में बोलते हैं, संकेत दिखाते हैं और चमत्कार करते हैं। आजकल जब झूठे मसीह लोगों को गुमराह करते हैं, तो वे आमतौर पर कुछ झूठी भविष्यवाणियाँ बोलकर और कुछ पाखंड और भ्रांतियाँ फैलाकर ऐसा करते हैं। वे लोगों को गुमराह करने के लिए इसी पर निर्भर करते हैं। हमने अभी तक उन्हें लोगों को गुमराह करने के लिए बड़े संकेत दिखाते और चमत्कार करते नहीं देखा है। यह बहुत दुर्लभ है; शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि परमेश्वर इसकी अनुमति नहीं देता। अगर परमेश्वर सच में शैतान को लोगों को गुमराह करने के लिए बड़े संकेत दिखाने और चमत्कार करने की अनुमति देता, तो पूरी धार्मिक दुनिया के निन्यानवे प्रतिशत लोग जाकर झूठे मसीहों पर विश्वास करने लगते। ऐसा इसलिए है क्योंकि पूरी मानवजाति में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो सच में सत्य को समझते हैं। बिना सत्य वाले लोग बड़े खतरे में हैं और वे सभी झूठे मसीहों और झूठे नबियों द्वारा आसानी से गुमराह हो जाते हैं। इसलिए प्रभु यीशु ने यह भविष्यवाणी मुख्य रूप से लोगों को अंत के दिनों में प्रकट होने वाले झूठे मसीहों से सावधान रहने के लिए की थी और लोगों को झूठे मसीहों की विशेषताएँ बताने के लिए की थी; इस तरह लोग झूठे मसीहों को पहचान सकते हैं और गुमराह होने से बच सकते हैं। ये वचन बोलने में प्रभु यीशु का यही उद्देश्य था और यह प्रभु का श्रमसाध्य इरादा भी है। हालाँकि प्रभु यीशु ने कभी नहीं कहा कि वह वापस नहीं लौटेगा। अगर कोई यह विश्वास नहीं करता कि प्रभु लौट आया है क्योंकि प्रभु यीशु ने कहा था कि झूठे मसीह प्रकट होंगे, तो वह गलत है। प्रभु यीशु ने कहा था : “मैं शीघ्र ही आनेवाला हूँ(प्रकाशितवाक्य 3:11)। इसलिए प्रभु यीशु की वापसी अनिवार्य है। लेकिन पादरी और एल्डर धर्मशास्त्र के इस अंश की व्याख्या कैसे करते हैं? वे विश्वासियों से कहते हैं, “चूँकि अंत के दिनों में लोगों को गुमराह करने के लिए झूठे मसीह प्रकट होंगे, इसलिए कोई भी संदेश जो यह कहता है कि प्रभु लौट आया है वह झूठा है। तुम्हें खोज और जाँच-पड़ताल करने की अनुमति नहीं है, इसे स्वीकार करना तो दूर की बात है।” यह प्रभु यीशु द्वारा बोले गए वचनों को पूरी तरह से नकारने का एक छिपा हुआ तरीका है : “मैं शीघ्र ही आनेवाला हूँ।” इस तरह से समझाकर पादरी प्रभु यीशु के वचनों का गलत अर्थ निकाल रहे हैं। अगर लोग पादरियों के दावों पर विश्वास करते हैं और सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करना बंद कर देते हैं, तो वे शैतान और राक्षस की चाल में फँस गए हैं। इसलिए जो भी पादरी इस अंश को इस तरह समझाता है वह बस लोगों को गुमराह कर रहा है। वे लोगों को गुमराह करने वाले झूठे मसीहों के उदाहरण का इस्तेमाल प्रभु यीशु की वापसी को नकारने के लिए, परमेश्वर के देहधारण को नकारने के लिए और इस बात को नकारने के लिए करते हैं कि परमेश्वर अंत के दिनों में मानवजाति को बचाने का कार्य करने के लिए सत्य व्यक्त करता है। उनका मकसद तुम्हें प्रभु की वापसी का स्वागत करने से रोकना है, ताकि चाहे तुम किसी को मसीह की गवाही देते हुए या यह बताते हुए सुनो कि मसीह कहाँ है, तुम विश्वास करने या जाँच-पड़ताल करने से इनकार कर दो और बस कलीसिया में रहकर उनके धर्मोपदेश सुनने और उनकी बातों पर विश्वास करने के लिए मजबूर हो जाओ और अंत में तुम उनके पीछे-पीछे नरक में जाओ। पादरियों का यही इरादा है। तो फिर इस अंश की व्याख्या करने का सही तरीका क्या है? इसकी व्याख्या इस तरह की जानी चाहिए : “हम प्रभु के वचनों में विश्वास करते हैं। यह एक तथ्य है कि लोगों को गुमराह करने वाले झूठे मसीह अंत के दिनों में निश्चित रूप से प्रकट होंगे, लेकिन यह भी सच है कि प्रभु यीशु निश्चित रूप से लौटेगा। यह प्रभु का वादा है। प्रभु भरोसेमंद है। प्रभु ने वादा किया था कि वह लौटेगा और इसलिए वह निश्चित रूप से आएगा। चाहे जो भी हो, हम प्रभु की वापसी को नकार नहीं सकते क्योंकि अंत के दिनों में झूठे मसीह प्रकट होते हैं, न ही हम सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने से पीछे हट सकते हैं या प्रभु का स्वागत करने से इनकार कर सकते हैं सिर्फ इसलिए कि हम झूठे मसीहों से सावधान हैं। ऐसा करने से हम प्रभु का स्वागत करने और बचाए जाने का अपना अवसर गँवा सकते हैं।” अगर इस तरह से समझाया जाए, तो यह लोगों को गुमराह करना नहीं है। लेकिन पादरी अक्सर भ्रांतियाँ फैलाते हैं और यह तय करते हैं कि कोई भी संदेश जो कहता है कि प्रभु आ गया है, वह झूठा है; वे कहते हैं कि कोई भी संदेश जो कहता है कि प्रभु मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारण करके आ गया है, वह झूठा है। क्या यह प्रभु यीशु के वचनों का गलत अर्थ निकालना नहीं है? यह सब प्रभु यीशु के वचनों का गलत अर्थ निकालना है जो यह साबित करता है कि पादरी लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वे लोगों को गुमराह करने का अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रभु यीशु के वचनों का गलत अर्थ निकाल रहे हैं और तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहे हैं। वे इस अंश को जिस तरह से समझाते हैं उसमें पादरियों का यही इरादा और चाल है। तो जब प्रभु का स्वागत करने की बात आती है तो हमें सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर कैसे करना चाहिए? तीन बातें हैं जो लोगों को समझने की जरूरत है। पहली, प्रभु यीशु के इन वचनों की व्याख्या कैसे करें, “अंत के दिनों में लोगों को गुमराह करने के लिए झूठे मसीह प्रकट होंगे”; दूसरी, सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर कैसे करें; और तीसरी, पादरियों द्वारा इस अंश को समझाने के तरीकों के पीछे का इरादा और मकसद क्या है। एक बार जब ये तीन बातें तुम्हें स्पष्ट हो जाएँगी, तो तुम सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर करने में सक्षम होगे। केवल मसीह ही सत्य व्यक्त कर सकता है। झूठे मसीहों के पास सत्य नहीं होता; वे केवल झूठी भविष्यवाणियाँ बता सकते हैं या लोगों को गुमराह करने के लिए कुछ संकेत दिखा सकते हैं और चमत्कार कर सकते हैं। जिनमें आध्यात्मिक समझ नहीं है और जो दानव हैं वे केवल संकेतों और चमत्कारों पर विश्वास करते हैं, सत्य पर नहीं; इसलिए वे गुमराह होकर झूठे मसीहों का अनुसरण करने लगते हैं। लेकिन जो लोग सत्य पर विश्वास करते हैं और उससे प्रेम करते हैं वे केवल मसीह का अनुसरण करते हैं और सत्य को स्वीकार करते हैं, अंततः वे जीवन पाते हैं और परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाते हैं।

तो अंत के दिनों का मसीह मुख्य रूप से कौन-सा कार्य करने आया है? प्रभु यीशु ने कहा था : “जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा(यूहन्ना 16:13)। परमेश्वर अंत के दिनों में ठीक यही कार्य करने के लिए देह धारण करता है; वह लोगों को सभी सत्यों में प्रवेश करने का मार्ग बताएगा। तो फिर वह विशेष रूप से कौन-सा कार्य करता है? यह अंत के दिनों में न्याय का कार्य है। बाइबल कहती है : “क्योंकि वह समय आ चुका है कि परमेश्वर के घर से न्याय शुरू किया जाए(1 पतरस 4:17)। “फिर मैं ने एक बड़ा श्‍वेत सिंहासन और उसको, जो उस पर बैठा हुआ है, देखा; उसके सामने से पृथ्वी और आकाश भाग गए, और उनके लिये जगह न मिली। फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गईं; और फिर एक और पुस्तक खोली गई, अर्थात् जीवन की पुस्तक; और जैसा उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, वैसे ही उनके कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया(प्रकाशितवाक्य 20:11-12)। प्रकाशितवाक्य में भविष्यवाणी किए गए विशाल श्वेत सिंहासन के न्याय का क्या अर्थ है? यह सत्य व्यक्त करने के लिए परमेश्वर के देहधारी होने को दर्शाता है। तो फिर देहधारी होने का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है मनुष्य का पुत्र बनना। प्रभु यीशु की तरह यह मनुष्य का पुत्र देहधारी परमेश्वर है। उसका सार दिव्य है और वह परमेश्वर का प्रकटन है, जो विशाल श्वेत सिंहासन पर बैठकर सभी राष्ट्रों और सभी लोगों का न्याय कर रहा है। इसलिए जब तुम परमेश्वर को सत्य व्यक्त करते और न्याय का कार्य करते हुए देखते हो, तो इसका मतलब है कि वह आ गया है। अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर सत्य व्यक्त कर रहा है और अंत के दिनों में न्याय का कार्य कर रहा है, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही अंत के दिनों का मसीह है। क्या झूठे मसीह सत्य व्यक्त कर सकते हैं? वे सत्य व्यक्त नहीं कर सकते। जो सत्य व्यक्त कर सकता है वह परमेश्वर है, जो प्रकट हुआ है और कार्य कर रहा है; केवल वही जो सत्य व्यक्त कर सकता है न्याय का कार्य कर सकता है। सत्य एक ऐसे दर्पण की तरह है जो दानवों को बेनकाब करता है—सत्य ही लोगों को सबसे ज्यादा बेनकाब करता है। जब परमेश्वर सत्य व्यक्त करता है, तो सभी लोग निश्चित रूप से सत्य के सामने शर्मिंदा होते हैं और उनके असली रंग प्रकट हो जाते हैं। चाहे उनका रुतबा कितना भी ऊँचा क्यों न हो या उनके पास कितना भी ज्ञान क्यों न हो, जब वे सत्य देखते हैं, तो अच्छा व्यवहार करने लगते हैं और कुछ भी बेधड़क बोलने की हिम्मत नहीं करते। उनके चंद शब्द और सिद्धांत सत्य के सामने पूरी तरह से बेकार हैं। इसलिए शैतान भी सत्य के सामने अच्छा व्यवहार करता है और कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं करता। अतीत में धार्मिक दुनिया ने निराधार अफवाहें फैलाईं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को बदनाम किया। लेकिन जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन ऑनलाइन प्रकाशित हुए हैं धार्मिक दुनिया शांत हो गई है और बेहतर व्यवहार करने लगी है। अब बहुत कम लोग कलीसिया की आलोचना और निंदा करने की हिम्मत करते हैं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की आलोचनाएँ कम से कम होती जा रही हैं। हालाँकि कुछ दानव आलोचना करने की हिम्मत करते हैं, लेकिन उनकी भ्रांतियों का खंडन होने में ज्यादा समय नहीं लगता और परमेश्वर की आलोचना और निंदा करने वाले ज्यादातर लोग गिर चुके हैं। जब बहुत से लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन देखते हैं, तो वे महसूस करते हैं कि इन वचनों में अधिकार और सामर्थ्य है और ये सभी सत्य हैं। वे महसूस करते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के पास सत्य और पवित्रात्मा का कार्य है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रभु यीशु होने की बहुत संभावना है, जो प्रकट हुआ है और कार्य कर रहा है। कुछ लोग एक या दो साल तक जाँच-पड़ताल करते हैं और फिर परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लेते हैं; कुछ तीन से पाँच साल तक जाँच-पड़ताल करते हैं और फिर इसे स्वीकार करते हैं; और कुछ सात या आठ साल या यहाँ तक कि एक दशक तक जाँच-पड़ताल करने के बाद इसे स्वीकार करते हैं। विभिन्न पश्चिमी देशों में जाने-माने लोग हैं जिन्होंने इसे स्वीकार किया है, जिनमें पादरी, लेखक और प्रोफेसर जैसे विभिन्न उल्लेखनीय लोग शामिल हैं। उन्होंने इसे कैसे स्वीकार किया? उन्होंने देखा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सभी वचन सत्य हैं, वे निश्चित हो गए कि ये वचन परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए हैं और वे निश्चित हो गए कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य परमेश्वर का कार्य है। भले ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने एक साधारण मनुष्य के पुत्र के रूप में देह धारण किया है, फिर भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त सभी वचन सत्य हैं और लोगों को पूरी तरह से आश्वस्त करते हैं; इसलिए जो लोग सत्य से प्रेम करते हैं वे उसे स्वीकार करते हैं। जो लोग सत्य से प्रेम नहीं करते वे बिल्कुल फरीसियों की तरह हैं जब प्रभु यीशु प्रकट हुआ था और उसने कार्य किया था। वे भी मानते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में अधिकार और सामर्थ्य है, लेकिन चूँकि वे सत्य से प्रेम नहीं करते, इसलिए वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार नहीं करते। कुछ ऐसे व्यक्ति भी हैं जो धार्मिक दुनिया से बाधित हैं। धार्मिक दुनिया द्वारा निष्कासित किए जाने के डर से वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने या उसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। क्या यह मूर्खता और अज्ञानता नहीं है? प्रभु पर विश्वास करने और सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने में, तुम्हें अपने दिमाग से काम लेना चाहिए। तुम हमेशा पादरियों की नहीं सुन सकते, अपने पूर्वजों पर विश्वास करना तो दूर की बात है; क्योंकि वे परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं करते, उनके पास सत्य होना तो दूर की बात है। एक बुद्धिमान कुंवारी होने के लिए तुम्हें सतर्क रहने, प्रार्थना करने और यह जानने की जरूरत है कि सत्य कैसे खोजें। अगर तुम प्रार्थना करना नहीं जानते और परमेश्वर पर निर्भर रहना नहीं जानते, तो शैतान और पादरियों द्वारा तुम्हारे गुमराह होने, नियंत्रित होने और पकड़े जाने का खतरा है।

तो सच्चे मार्ग की खोज और जाँच-पड़ताल करने के लिए तुम्हारे पास क्या होना जरूरी है? सबसे पहले तुम्हें यह भेद पहचानने में सक्षम होना चाहिए कि सत्य क्या है, किसके पास सत्य है और कौन सत्य व्यक्त कर सकता है। एक बार जब तुम इन बातों को स्पष्ट रूप से देख लोगे, तो तुम सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर करने में सक्षम होगे। अगर वह मसीह है, तो वह निश्चित रूप से सत्य व्यक्त कर सकता है; अगर वह मसीह नहीं है, तो वह सत्य व्यक्त नहीं कर सकता। झूठे मसीह लोगों को गुमराह करने के लिए किस पर निर्भर करते हैं? झूठी भविष्यवाणियाँ करने और पाखंड और भ्रांतियाँ फैलाने पर। झूठे मसीहों के पास बिल्कुल भी सत्य नहीं होता। अगर तुम इसे स्पष्ट रूप से देख सकते हो, तो तुम्हारे झूठे मसीहों द्वारा गुमराह किए जाने की संभावना नहीं होगी। इसके अलावा, अगर तुम स्पष्ट रूप से देख सकते हो कि पादरियों और एल्डरों के पास सत्य नहीं है और वे झूठे चरवाहे हैं, तो तुम पादरियों और एल्डरों द्वारा भी गुमराह नहीं होगे। अगर प्रभु पर विश्वास करने वाले लोग पादरियों और एल्डरों द्वारा नियंत्रित होते हैं, तो वे निश्चित रूप से परमेश्वर द्वारा चुने गए लोग नहीं हैं, बल्कि शैतान के लोग हैं। वे सभी जो पादरियों और एल्डरों की पूजा करते हैं वे मूर्ख कुंवारियाँ हैं और प्रभु का स्वागत नहीं कर सकते। यह याद रखना! सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने का एक मतलब है यह तय कर पाना कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में अधिकार और सामर्थ्य है और वे सभी सत्य हैं, केवल परमेश्वर ही सत्य व्यक्त कर सकता है और परमेश्वर के अलावा कोई सत्य व्यक्त नहीं कर सकता। दूसरी बात है यह तय करना कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन बिल्कुल सत्य हैं और केवल परमेश्वर द्वारा ही व्यक्त किए जा सकते हैं; कोई भी दानव, शैतान या बुरी आत्मा सत्य व्यक्त नहीं कर सकती; और कोई भी गुमराह करने वाली बात और कोई भी नकारात्मक प्रचार झूठ और दानवी शब्द हैं, जिन पर विश्वास करना बेकार है। सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करते समय केवल इन दो बातों के बारे में निश्चित होना ही काफी है। अगर यह साधारण व्यक्ति सत्य व्यक्त कर सकता है और ऐसे वचन व्यक्त कर सकता है जिनमें अधिकार और सामर्थ्य है, तो वह मनुष्य के पुत्र का प्रकटन है जिसकी भविष्यवाणी प्रभु यीशु ने की थी। यह देहधारी परमेश्वर का प्रकटन है; यह भी कहा जा सकता है कि यह वचन देह में प्रकट होना है। जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “देहधारी हुए परमेश्वर को मसीह कहा जाता है, और इसलिए उस मसीह को जो लोगों को सत्य दे सकता है, परमेश्वर कहना थोड़ी-भी अतिशयोक्ति नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसमें परमेश्वर का सार होता है, और उसमें परमेश्वर का स्वभाव और परमेश्वर के कार्य की बुद्धि होती है, जो मनुष्य के लिए अप्राप्य हैं। जो अपने आप को मसीह कहते हैं, परंतु परमेश्वर का कार्य नहीं कर सकते, वे धोखेबाज हैं। मसीह पृथ्वी पर परमेश्वर की अभिव्यक्ति मात्र नहीं है, बल्कि वह विशेष देह भी है, जिसे धारण करके धरती पर परमेश्वर मनुष्यों के बीच रहकर अपना कार्य करता है और अपना कार्य पूरा करता है। कोई मनुष्य इस देह की जगह नहीं ले सकता, बल्कि यह वह देह है जो पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य का पर्याप्त रूप से बीड़ा उठा सकती है, जो परमेश्वर का स्वभाव व्यक्त कर सकती है, जो पर्याप्त रूप से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व कर सकती है, और जो मनुष्य को जीवन प्रदान कर सकती है। मसीह का भेस धारण करने वाले लोगों का देर-सबेर पतन हो जाएगा, क्योंकि हालाँकि वे मसीह होने का दावा करते हैं, किंतु उनमें मसीह के सार का लेशमात्र भी नहीं है। और इसलिए मैं कहता हूँ कि मसीह की प्रामाणिकता मनुष्य द्वारा निर्धारित नहीं की जा सकती, बल्कि इसका उत्तर और निर्णय स्वयं परमेश्वर द्वारा ही दिया-लिया जाता है(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है)

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

Gospel Message in Hindi: जब प्रभु यीशु ने सलीब पर "पूरा हुआ" कहा तो इसका क्या मतलब था?

ईसाई यह मानते हैं कि जब प्रभु यीशु ने सलीब पर “पूरा हुआ” कहा था तो इसका मतलब था मानवजाति के लिए उसका काम पूरा हो गया। इसलिए हर किसी को...

क्या यह सच है कि परमेश्वर के सभी कार्य और वचन बाइबल में हैं?

उद्धारकर्ता सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में प्रकट होकर कार्य कर रहा है, उसने करोड़ों वचन व्यक्त किए हैं। वह मनुष्य को पूरी तरह से...

एक सच्चा परमेश्वर कौन है?

आजकल, ज्यादातर लोगों को विश्वास है कि परमेश्वर है और वे उसमें आस्था रखते हैं। वे उस परमेश्वर में विश्वास रखते हैं, जो उनके दिल में होता...

उत्तर यहाँ दें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें